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उत्तर प्रदेश की सिविल सेवा में प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 2012 से अब तक की गयी नियुक्तियों की सीबीआई जांच करायी जाएगी.यह ऐलान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य विधानसभा में किया. योगी ने 2017—18 के बजट पर चर्चा के अंत में कहा कि अपराधियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कड़ा कानून बनाया जाएगा. यदि मौजूदा सत्र में इस आशय का विधेयक पारित नहीं हो पाया तो विधेयक पारित कराने के लिए विधानसभा का अगला सत्र जल्द बुलाया जाएगा.

पूर्व की समाजवादी पार्टी सरकार पर हमलावर तेवर अपनाते हुए योगी ने कहा, 'आपने (सपा) यूपी पीसीएस का क्या कर दिया ... इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ रहे हैं. हम यूपी पीसीएस में 2012 से अब तक हुई सभी नियुक्तियों की सीबीआई जांच कराएंगे .'योगी ने कहा कि पिछले पांच साल में एक भी भर्ती ऐसी नहीं है, जो विवादित ना रही हो. हमारी सरकार पारदर्शिता की ओर कदम बढ़ा रही है. ऐसे में साल 2012 से यूपीपीएससी की ओर से की गई सारी भर्तियों की जांच की जाएगी.

सीबीआई जांच के आदेश के बाद लगभग 15 हजार भर्तियों पर ग्रहण लग गया है. uppsc की ओर से अफसरों, डॉक्टरों, इंजीनियरों आदि की भर्ती की गई थी.

गौरतलब है कि खिलेश सरकार के दौरान यूपीपीएससी की भर्तियों में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं. यहां तक कि यूपीपीएससी पर एक जाति विशेष के लोगों को भर्तियों में तरजीह के भी आरोप लगे. अनिल यादव की बढ़ेगी मुश्किलें!माना जा रहा है कि योगी सरकार के इस फैसले से यूपीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन अनिल यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. अनिल यादव पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है.

इससे पहले योगी सरकार ने करप्शन की शिकायत के बाद यूपीपीएसी की ओर से की जा रही 22 भर्तियों के इंटरव्यू पर रोक लगा दी थी.

 उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायधीशों की संविधान पीठ ने 19.07.2017 को दलीलें सुननी शुरू कीं जिनके आधार पर यह तय किया जाएगा कि निजता का अधिकार संविधान के तहत मौलिक अधिकार है या नहीं. नौ न्यायधीशों की पीठ में न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े, संविधान पीठ में न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल, न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. यह पीठ निजता के अधिकार के सीमित मुद्दे पर विचार कर रही है, और आधार योजना को चुनौती देने वाले अन्य मुद्दों को लघु पीठ के पास ही भेजा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को वाजिब प्रतिबंध लगाने से नहीं रोक नहीं सकते. क्या कोर्ट निजता की व्याख्या कर सकता है? आप यही केटेलाग नहीं बना सकते कि किन तत्वों से मिलकर प्राइवेसी बनती है.

कोर्ट ने कहा कि निजता का आकार इतना बड़ा है कि ये हर मुद्दे में शामिल है. अगर हम निजता को सूचीबद्ध करने का प्रयास करेंगे तो इसके विनाशकारी परिणाम होंगे. निजता सही में स्वतंत्रता का एक सब सेक्शन है.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि अगर मैं अपनी पत्नी के साथ बेडरूम में हूं तो ये प्राइवेसी का हिस्सा है. ऐसे में पुलिस मेरे बैडरूम में नहीं घुस सकती लेकिन अगर मैं बच्चों को स्कूल भेजता हूं तो ये प्राइवेसी के तहत नहीं है क्योंकि ये राइट टू एजूकेशन के तहत आता था. उन्होंने कहा कि आप बैंक में अपनी जानकारी देते हैं, मेडिकल इंशोयरेंस और लोन के लिए अपना डाटा देते हैं. ये सब कानून द्वारा संचालित है यहां बात अधिकार की नहीं है. आज डिजिटल जमाने में डेटा प्रोटेक्शन बड़ा मुद्दा है. सरकार को डेटा प्रोटेक्शन के लिए कानून लाने का अधिकार है.

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष बहस शुरू की और कहा कि जीने का अधिकार और स्वतंत्रता का अधिकार पहले से मौजूद नैसर्गिक अधिकार हैं.

पूर्व AG सोली सोराबजी ने कहा कि संविधान में राइट टू प्राइवेसी नहीं लिखा है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये है ही नहीं. दरअसल प्राइवेसी हर मानव व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है.

संविधान आर्टिकल 19 के तहत प्रेसकी आजादी का अधिकार नहीं देता बल्कि लेकिन इसे अभिव्यक्ति की आजादी को तहत देखा जाता है जिस पर कोर्ट ने भी यही माना है.

श्याम दीवान ने कहा राज्यसभा में आधार बिल पेश करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा था कि प्राइवेसी शायद एक मौलिक अधिकार है. दीवान ने कहा कि जेटली ने 16-3-2016 को कहा था कि अब अब ये कहने में कि प्राइवेसी मौलिक अधिकार नहीं है या है, काफी देरी हो चुकी है. प्राइवेसी शायद एक मौलिक अधिकार है.  

मामले पर सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी.

नगालैंड की राजनीति में तमाम उथल-पुथल के बीच नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग ने 19.07.2017 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली। वे 21 जुलाई को अपना बहुमत पेश करेंगे। बता दें कि जेलियांग ने 60 सदस्यों वाली विधानसभा में 41 सदस्यों का समर्थन के साथ नई सरकार के गठन का दावा किया था।

राजभवन अधिकारी ने बताया कि बुधवार को सदन में बहुमत साबित न कर पाने के बाद नागालैंड के राज्‍यपाल पीबी आचार्य ने पांच माह पुरानी सरकार लीजित्‍सू को बर्खास्‍त कर दिया। राज्‍यपाल ने नगा पीपुल्‍स फ्रंट के विधायक टी आर जेलियांग को नई सरकार के गठन के लिए आमंत्रित किया।

नगालैंड के राज्‍यपाल ने जेलियांग से सदन में 22 जुलाई से पहले बहुमत सिद्ध करने को कहा है। जेलियांग आज दोपहर 3 बजे राज्‍य मुख्‍यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। उल्‍लेखनीय है कि राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री शुरहोजेली लीजित्सू बुधवार को विधानसभा में विश्वासमत के लिए हाजिर नहीं हुए। इससे स्पष्ट हो गया कि लीजित्सू ने शक्ति परीक्षण में अपनी हार स्वीकार ली।

यह दूसरा मौका है जब 65 वर्षीरू जेलियांग राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बनेंगे। उन्‍होंने महिलाओं के लिए 33 फीसद सीट आरक्षण के साथ स्‍थानीय चुनाव आयोजित किया था जिसपर सांप्रदायिक लोगों के समूहों द्वारा हिंसक विरोध हुआ और उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री के पद से इस्‍तीफा दे दिया था। इसके बाद 80 वर्षीय लीजित्‍सु ने मुख्‍यमंत्री पद को संभाला।

विधानसभा स्‍पीकर इमतिवापांग आयर के लीजित्सू के बहुमत साबित करने में असफलता संबंधित पत्र प्राप्‍त करने के बाद आचार्य ने संविधान के अनुच्छेद 164 के खंड (I) के तहत लीजित्‍सु को बर्खास्‍त कर दिया। आचार्य ने लीजित्सू सरकार की बर्खास्‍तगी वाले आदेश में कहा, ‘स्‍पीकर से प्राप्‍त रिपोर्ट के अनुसार, लीजित्सू आज सदन में उपस्‍थित नहीं हुए जहां उन्‍हें बहुमत साबित करना था।‘ गवर्नर ने आगे बताया, ‘सत्र में स्‍पीकर समेत 48 विधायक उपस्‍थित थे। जिससे यह स्‍पष्‍ट हो गया कि लीजित्सू विश्‍वास मत हासिल करने में असफल हुए हैं।‘ राज्‍यपाल की ओर से लीजित्‍सु को 11 व 13 जुलाई को विश्‍वासमत पेश करने का आदेश दिया गया था।

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की ताज़ा रिपोर्ट में जहां एक ओर दुनिया भर देशों की सरकारों में जनता के विश्वास में व्यापक रूप से उतार चढ़ाव देखा गया वहीं अपने देश की सरकार में लोगों के विश्वास के मामले में भारत सबसे ऊपर है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 73 फ़ीसदी जनता को अपने देश की सरकार में भरोसा है. वहीं 62 फ़ीसदी के साथ कनाडा इस सूची में दूसरे पायदान पर है. तुर्की जहां 2016 में तख़्तापलट की कोशिशों को नाकाम किया गया 58 फ़ीसदी के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर रूस के साथ है. जबकि अगले दो पायदान पर क्रमशः 55 और 48 फ़ीसदी के साथ जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका हैं.

दूसरी तरफ इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे मज़बूत अर्थव्यवस्था अमरीका की केवल 30 फ़ीसदी जनता को वहां की सरकार में विश्वास है. जबकि पिछले साल ब्रेक्सिट के पक्ष में वोट देने वाली ब्रिटेन की 41 फ़ीसदी जनता को ही वहां की सरकार पर विश्वास है.

इस साल मार्च में भ्रष्टाचार में लिप्त दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क गुन-हे को उनके पद से हटा दिया गया और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन की इस रिपोर्ट के मुताबिक वहां की केवल एक चौथाई जनता में अपनी सरकार के प्रति विश्वास देखा गया. गुन-हे दक्षिण कोरिया की ऐसी पहली चुनी गई राष्ट्रपति हैं, जिन्हें हटाया गया है.

पिछले कुछ वर्षों में ग्रीस को प्रवासी संकट, बैंक बंदी, कई चुनाव, उधार चुकता नहीं करने के कई मामले और पूंजी पर नियंत्रण का सामना करना पड़ा है और लोगों में सरकार के प्रति विश्वास की इस सूची के निचले पायदान पर रहना थोड़ा चौंकाने वाला है. रिपोर्ट के अनुसार 2016 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रीस की केवल 13 फ़ीसदी जनता को अपनी राष्ट्रीय सरकार में विश्वास है. यह अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी कम है.

रिपोर्ट के अनुसार 2016 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रीस की केवल 13 फ़ीसदी जनता को अपनी राष्ट्रीय सरकार में विश्वास है. यह अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी कम है. ये रिपोर्ट जिन मापदंडों पर तैयार की गई है, उसमें सार्वजनिक क्षेत्रों में रोजगार, शासन के तौर तरीकों, बजट आवंटन, पारदर्शिता के अलावा स्वास्थ्य सेवा और शैक्षणिक स्तर एवं न्याय के पैमानों को पर लोगों की राय ली गई है.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के अनुसार साल 2025 तक भारत 7.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर के साथ चीन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ देगा. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फ़ॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (सीआईडी) ने 2025 तक सबसे तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की सूची में भारत को सबसे ऊपर रखा है. इस दौरान चीन की सालाना वृद्धि दर 4.41 प्रतिशत तक रहने की संभावना जताई गई है.

सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों में वैश्विक वृद्धि के मामले में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है जिसकी वजह से वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी चीन से खिसककर भारत की तरफ़ बढ़ गई है.

रिसर्च बताती है कि भारत ने अपने निर्यात को नए क्षेत्रों तक पहुंचा कर नया आयाम दिया है. इसमें रसायन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्र शामिल हैं. वहीं, दूसरी तरफ़ तेल निर्यात पर आधारित अर्थव्यवस्थाओं को ख़ासा नुकसान झेलना पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार जिन अर्थव्यवस्थाओं के सबसे तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है उसमें भारत के साथ तुर्की, युगांडा, इंडोनेशिया और बुल्गारिया शामिल हैं.

आने वाले 10 सालों में पाकिस्तान की सालाना वृद्धि दर भी ख़ासी तेज़ रहने की उम्मीद है. रिसर्च का अनुमान है कि साल 2025 तक पाकिस्तान 6 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर के हिसाब से चीन को पछाड़ देगा. हालांकि चीन और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं में बहुत ज्यादा अंतर है. फ़िलहाल चीन की अर्थव्यवस्था 12 ट्रिलियन डॉलर है जबकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय 300 बिलियन डॉलर की ही है.

सेंटर फ़ॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट ने अपनी रिसर्च के लिए सभी देशों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा है. पहली श्रेणी में वे देश हैं जो थोड़े सुधार से अपने उत्पादों में विविधता ला सकते हैं जैसे बांग्लादेश, इक्वेडोर और गुएना. दूसरी श्रेणी में वे देश हैं जिनके पास पर्याप्त क्षमताएं हैं ताकि वे आसानी से वृद्धि और विविधता हासिल कर सकते हैं. इसमें भारत, इंडोनेशिया और तुर्की शामिल हैं. तीसरी श्रेणी उन देशों की है जो विकसित देश हैं जैसे जापान, जर्मनी और अमरीका- जो क़रीब-क़रीब हर मौजूद चीज़ का उत्पादन करते हैं. इस श्रेणी के देशों की अर्थव्यवस्था धीमी रफ़्तार से बढ़ेगी.

संभावित रूप से तेज़ आर्थिक वृद्धि कर रहे देशों की विश्व बैंक की फ़ेहरिस्त में भारत चौथे नंबर पर है. विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार साल 2017 में भारत की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. इसका सबसे बड़ा कारण देश के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश को माना जा रहा है.

साथ ही माना जा रहा है कि इस साल बारिश का मौसम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और खपत को बढ़ावा देगा.

भारत के बाद टॉप-10 देशों की इस लिस्ट में तंज़ानिया, जिबूती, लाओस, कंबोडिया, फ़िलिपींस और बर्मा क्रमश: आते हैं.

दिलचस्प बात यह है कि साल 2017 में संभावित तेज़ आर्थिक वृद्धि करने वाले देशों की विश्व बैंक की इस लिस्ट में चीन का नाम पहले 10 में नहीं है.

विश्व बैंक का अनुमान है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन की साल 2017 में जीडीपी दर 6.5 प्रतिशत रहेगी और इस लक्ष्य को हासिल करने में चीन को सबसे ज़्यादा मदद निर्यात की वसूली से होगी.

साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट का सामना पूरी दुनिया ने एक साथ किया था, लेकिन इससे उभरने की रफ़्तार तमाम देशों की अलग-अलग रही है. कुछ देश ऐसे हैं जिनकी आर्थिक वृद्धि दर हैरान करने वाली है. इनमें से कुछ देश एशिया के हैं और कुछ अफ़्रीका के भी हैं. विश्व बैंक के अनुमान के हिसाब से साल 2017 में इन देशों की जीडीपी 6.9 प्रतिशत से लेकर 8.3 प्रतिशत के बीच रहेगी. जबकि विश्व आर्थिक फ़ोरम के एक वैश्विक आर्थिक अध्ययन में जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक़, विश्व स्तर पर औसतन 2.7% की जीडीपी दर का ही अनुमान है. और तो और लातिन अमरीकी और कैरेबियाई देशों में औसत वृद्धि केवल 0.8% होगी.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का औद्योगिक नीति संवर्धन विभाग देश का पहला प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र (टीआईएससी) स्थापित करने के लिए गुरुवार को नई दिल्ली में पंजाब राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के साथ संस्थागत समझौते पर हस्ताक्षर किया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, देश का पहला प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र पंजाब के पेटेंट सूचना केंद्र में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के टीआईएससी कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा।

टीआईएससी का उद्देश्य गतिशील, जीवंत और संतुलित बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली को सक्रिय करना है, ताकि सृजनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहन मिले और सामाजिक-आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास हो सके।

टीआईसीएस द्वारा ये सेवाएं दी जाती हैं :

1. ऑनलाइन पेटेंट तथा गैर पेटेंट (वैज्ञानिक और तकनीकी) संसाधनों तथा आईपी संबंधित प्रकाशनों तक पहुंच।

2. प्रौद्योगिकीय सूचना की खोज और वापसी में सहायता।-डाटाबेस खोज प्रशिक्षण।

3. मांग आधारित खोजों (नवीन अत्याधुनिक) प्रौद्योगिकी निगरानी तथा प्रतिस्पर्धा।

4. औद्योगिक संपदा कानूनों, प्रबंधन तथा रणनीति, तकनीकी वाणिज्यिकरण तथा विपरण के बारे में बुनियादी सूचना।

नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक सख्त फैसला सुनाया है. एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने उत्तराखंड के हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के उन्नाव तक गंगा नदी के तट से 100 मीटर के क्षेत्र को ‘नो डेवलपमेंट जोन’ घोषित कर दिया है. इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में निर्माण या खनन कार्य नहीं हो सकता. इसके साथ ही एनजीटी ने हरिद्वार से उन्नाव के बीच गंगा में कचरा डालने वालों पर 50,000 रुपये जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है. एनजीटी ने यह भी कहा है कि गंगा को स्वच्छ बनाने की योजना में ही बुनियादी खामी थी, जिसकी वजह से इस हिस्से पर खर्च लगभग 7,304 करोड़ रुपये बेकार चले गए.

रिपोर्ट के मुताबिक एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को छह हफ्ते के भीतर कानपुर के जाजमऊ से चमड़ा शोधन कारखानों (टेनरीज) को हटाकर उन्नाव या सुविधानुसार अन्य जगहों पर ले जाने का निर्देश दिया है. इसके साथ उसने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को गंगा के किनारे घाटों पर धार्मिक गतिविधियों के लिए दिशा-निर्देश बनाने और दो साल के भीतर सभी परियोजनाओं को पूरा करने का निर्देश दिया है. अपने 543 पेज के फैसले में दिए गए इन सभी निर्देशों की निगरानी करने और समय-समय पर रिपोर्ट देने के लिए एनजीटी ने एक पर्यवेक्षक समिति भी बनाई है. जल संसाधन मंत्रालय के सचिव इसके अध्यक्ष होंगे.

एनजीटी ने जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता एमसी मेहता की 1985 में दायर की गई एक जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया है. इस जनहित याचिका को 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी को सौंप दिया था. लगभग 18 महीने की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 31 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

पाकिस्तान ने चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब जीत लिया है। सफराज़ अहमद की कप्तानी में पाकिस्तान कि युवा टीम ने भारत को 180 रन के विशाल अंतर से हराकर पहली बार चैम्पियंस ट्रॉफी को अपने नाम करने में सफलता पाई। पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने फख़र ज़मान के शानदार शतक की मदद से 4 विकेट पर 338 रन का विशाल स्कोर बनाया।

जवाब में पूरी भारतीय टीम 158 रन पर पवेलियन लौट गई।क्रिकेट जगत के दो बड़े प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट हमेशा करीबी होता है। ऐसे में अगर ये दोनो टीमो किसी प्रतियोगिता के फाइनल में आमने सामने हो तो विश्व भर की निगाहे उस मैच पर लगी होती है। रविवार को जब चैम्पियंस ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में भारत और पाकिस्तान आमने सामने थे तो सभी को एक रोमांचक मुकाबले की उम्मीद थी।

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का निर्णय लिया। पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज फख़र ज़मान मैच के चौथे ओवर में जसप्रीत बुमराह की गेंद पर विकेट के पीछे लपके गए। लेकिन रीप्ले में पता चला कि बुमराह ने ओवरस्टेप किया था और ये गेंद नो बॉल करार दी गई। उस वक्त फख़र का स्कोर 3 रन था। इसके बाद उन्होंने अज़हर अली के साथ मिलकर पाकिस्तान को अच्छी शुरुआत दी और 18 ओवर में 100 रन जोड़ डाले।

इसी बीच अज़हर अली अपना अर्धशतक पूरा करने में सफल रहे। अज़हर अली 59 रन बनाकर रनआउट हो गए। दूसरे छोर पर ज़मान ने तेजी से खेलते हुए अपने वनडे करियर का पहला शतक पूरा किया। वो 114 रन बनाकर हार्दिक पांड्या की गेंद पर कैच आउट हुए।

शोएब मलिक 12 रन बनाकर भुवनेश्वर कुमार की गेंद पर आउट हुए। दूसरे छोर पर बाबर आज़म ने तेजी से 46 रन की पारी खेली। अंतिम ओवरों में मोहम्मद हफीज़ और इमाद वसीम ने तेजी से रन बनाए जिसकी मदद से पाकिस्तान ने 50 ओवर में 4 विकेट पर 338 रन बनाए। हफीज़ 57 और इमाद 25 रन बनाकर नाबाद रहे।

जवाब में 339 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम शुरू से ही दबाव में दिखाई दी। शानदार फॉर्म में चल रहे रोहित शर्मा बगैर कोई रन बनाए पहले ही ओवर में आमिर की गेंद पर आउट हो गए। कप्तान विराट कोहली भी कुछ खास नहीं कर पाए और 5 रन बनाकर आमिर का दूसरा शिकार बने। प्रतियोगिता में सबसे अधिक रन बनाने वाले शिखर धवन 21 रन बनाकर आमिर का तीसरा शिकर बने।

युवराज और धोनी भी कुछ खास नही कर पाए। युवराज 22 और धोनी 4 रन बनाकर आउट हो गए। इस तरह 54 रन पर भारत की आधी टीम पवेलियन लौट गई। जाधव 9 रन बनाकर आउट हुए।

इसके बाद आए हार्दिक पांड्या ने जडेजा के साथ मिलकर पारी को संभाला और तेजी से रन बनाए। पांड्या ने शादाब खान के एक ओवर में लगातार तीन छक्के लगाकार अपना अर्धशतक पूरा किया। हालांकि वो दुर्भाग्यशाली रहे और 43 गेंद पर 76 रन बनाकर रन आउट हो गए।

दूसरे छोर पर जडेजा 15 रन बनाकर जुनैद खान की गेंद पर कैच आउट हो गए। अंतिम विकेट के रूप में बुमराह को हसन अली ने 158 के स्कोर पर आउट करके पाकिस्तान को 180 रन से विजय दिला दी। ये पहला मौका है जब पाकिस्तान ने चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब जीता है।

बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज़ का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। श्रीकांत इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी हैं। उन्होंने फ़ाइनल में जापान के काजुमासा साकाई को 21-11, 21-19 से मात देकर खिताबी जीत हासिल की। श्रीकांत ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी दक्षिण कोरिया के सोन वान हो को हराया था। 22वीं वरीयता प्राप्त श्रीकांत ने सोन को रोमांचक मुकाबले में 21-15, 14-21, 24-22 से मात दी थी।

मैच के बाद श्रीकांत ने कहा- अपने अभी तक के प्रदर्शन से बेहद खुश हूं। यह मैच काफी मुश्किल रहा। फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को हराना हमेशा मुश्किल होता है। अब आगे भी यही फॉर्म जारी रखने का प्रयास करूंगा।

दूसरी ओर साकाई ने भारत के ही एचएस प्रणॉय को मात देकर फाइनल में प्रवेश किया था। साकाई ने प्रणॉय को कांटे के मुक़ाबले में 21-17, 26-28, 18-21 से हराया था।

प्रणॉय ने दो उलटफेर के बाद सेमीफाइलन में जगह बनाई थी। दूसरे दौर में जहां उन्होंने छह बार के चैंपियन ली चोंग वेई को हराया था, वहीं क्वॉर्टर फाइनल में उन्होंने मौजूदा ओलंपिक, विश्व और एशियाई चैंपियन चीन के चेन लोंग को परास्त किया था।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से अलग कर लिया। व्‍हाइट हाउस के रोज गार्डन से प्रसारित अपने कॉन्‍फ्रेंस में उन्‍होंने इसकी घोषणा की। सन 2015 में पेरिस समझौते में 195 देशों ने सहमति जताई थी। इसके तहत जीवाश्म ईंधन के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों के उत्सर्जन को घटाना लक्ष्य है। समझौते के तहत अमेरिका ने 2025 तक 2005 के स्तर से अपने उत्सर्जन को 26 से 28 प्रतिशत कम करने का वादा किया था।

पेरिस जलवायु समझौते से अलग होने के बाद अमेरिका सीरिया और निकारागुआ के साथ आ गया जिन्होंने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान के दौरान इस समझौते को अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश बताया था। 

अमेरिका द्वारा पेरिस समझौते से बाहर निकलने के फैसले पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्ष वर्धन ने कहा है कि भारत सरकार देश की भावी पीढ़ी को एक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है और वह इसे लेकर अपने प्रयासों को जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन को लेकर क्या फैसला लेता है, यह उसकी अपनी नीतियों पर निर्भर करता है। 

अहमदाबाद बना भारत का पहला वैश्विक धरोहर वाला शहर। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी ने दिया अहमदाबाद को ये सम्मान। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी ने अहमदाबाद शहर को भारत के पहले वैश्विक धरोहर वाले शहर के रूप में मान्यता दी है। यूनेस्को में भारत की राजदूत व स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कम्बोज ने ट्विटर के ज़रिए ये जानकारी दी। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी इसे खुद के लिए गर्व का पल बताया है।

करीब 20 देशों ने अहमदाबाद को नक्काशीदार लकड़ी की हवेली की वास्तुकला के अलावा सैकड़ों वर्षों से इस्लामिक, हिंदू और जैन समुदायों के एक धर्मनिरपेक्ष सह-अस्तित्व वाला शहर मानते हुए सर्वसम्मति से चुना।

देशों ने यह भी माना कि ये शहर महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत के अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम के लिए भी खास महत्व रखता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर इसे हर्ष का विषय कहा है।

हावर्ड विश्वविद्यालय के अनुसार भारत में आर्थिक विकास सबसे तेज है। अध्यन के मुताबिक भारत तेजी से उभरती हुई अर्थ व्यवस्था की सूची में है। हावर्ड विश्वविद्यालय के एक नये अध्ययन के अनुसार भारत, चीन को पछाड़ते हुए वैश्विक आर्थिक वृद्धि के मामले में एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभरा है और आने वाले दशक में यह स्थिति बनी रहने की भी संभावना है।

हावर्ड विश्व विद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय विकास वृद्धि पूर्वानुमान केन्द्र के अनुसार भारत 7.7 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि के साथ 2025 तक विश्व की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में शीर्ष पर होगा।

इस अध्ययन के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि का केन्द्र चीन से हटकर भारत की ओर उन्मुख हो चुका है और आने वाले दशक में यही स्थिति बरकरार रहने की भी संभावना है। 

साइबर सुरक्षा वैश्विक सूचकांक (GCI) में भारत को 165 देशों में से 23 वां स्थान प्रदान किया गया. दूसरा ग्लोबल साइबर सिक्युरिटी इंडेक्स (जीसीआई) संयुक्त राष्ट्र के दूरसंचार एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) द्वारा जारी किया गया.

भारत, 0.683 के अंक के साथ इंडेक्स पर 23 वें स्थान पर है और परिपक्व श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है. सिंगापुर,  0.925 अंक के साथ सूचकांक में शीर्ष पर स्थित है.

साइबर सुरक्षा के शीर्ष 5 में स्थित देश है -1. सिंगापुर, 2. यूनाइटेड स्टेट्स, 3. मलेशिया, 4. ओमान, 5. एस्टोनिया

 सरकार ने भारत को एवियन इंफ्लूएन्जा, जिसे सामान्य तौर पर बर्ड फ्लू बोला जाता है, से खुद को मुक्त घोषित किया है. बर्ड फ्लू पक्षियों की एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो अक्तूबर 2016 और फरवरी 2017 के दौरान नौ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में विभिन्न स्थानों पर पाया गया था.

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किये गये एक बयान के अनुसार दिल्ली, दमन, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, गुजरात, ओड़िशा में निगरानी का काम पूरा हो चुका है. राज्यों में निगरानी किये जाने से बर्ड फ्लू की उपस्थिति का कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं होता.

इसमें कहा गया है, ‘उक्त तथ्यों के मद्देनजर भारत खुद को छह जून 2017 से एवियन इंफ्लूएन्जा (एच5एन8 और एच5एन1)  से मुक्त घोषित करता है और इसकी सूचना विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ओआईई को देता है.’

भारत ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनिशप में अपना दबदबा बनाकर 5 स्वर्ण पदक जीते और इस तरह से पदक तालिका में शीर्ष रहकर इतिहास रचा तथा चीन को दूसरे स्थान पर खिसका दिया. भारत ने आज 5 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक जीते और इस तरह से कुल 29 पदकों (12 स्वर्ण, 5 रजत और 12 कांस्य) के साथ वह शीर्ष पर रहा.

भारत का इससे पहले एशियाई चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 22 पदक (10 स्वर्ण, 5 रजत और 7 कांस्य) था. चीन 8 स्वर्ण, 7 रजत और 5 कांस्य पदक लेकर दूसरे स्थान पर रहा.

जापान 1973 से 1981 तक पहली 5 चैंपियनशिप में शीर्ष पर रहा था. इसके बाद चीन का दबदबा शुरू हुआ जो 2 साल पहले वुहान तक रहा. भारत ने इस बार चीन का एकाधिकार समाप्त कर दिया. उसने हालांकि अगले महीने लंदन में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप को ध्यान में रखकर यहां दूसरी श्रेणी के एथलीटों को भेजा था.

भारत को हालांकि आखिरी दिन एक झटका भी लगा जब अर्चना अधव से श्रीलंका की निमाली वालिवर्षा कोंडा के विरोध के बाद महिलाओं की 800 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक छीन लिया गया और श्रीलंकाई एथलीट को चैंपियन घोषित कर दिया गया.

पुणे की 22 वर्षीय अर्चना ने 2 मिनट 2 सेकेंड में दौड़ पूरी करके 800 मीटर का स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन निमाली ने बाद में विरोध दर्ज कराया कि भारतीय एथलीट ने फिनिश लाइन पर उन्हें पीछे से धक्का दिया था. इसके बाद अर्चना को अयोग्य घोषित कर दिया गया और 2 मिनट 05:23 सेकंड में दौड़ पूरी करने वाली निमाली को स्वर्ण पदक दे दिया गया.

इसके बावजूद कलिंग स्टेडियम में भारतीय एथलीटों का दबदबा रहा. हेप्टाथलान में स्वप्ना बर्मन ने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया. बर्मन 7वीं और अंतिम स्पर्धा (800 मीटर) में चौथे स्थान पर आने के बावजूद स्वर्ण पदक जीता. उनके पास खिताब जीतने के लिए पर्याप्त अंक थे. बंगाल की इस 20 वर्षीय एथलीट ने 7 स्पर्धाओं में कुल 5942 अंक बनाए. वह 800 मीटर की दौड़ पूरी करने के तुरंत बाद गिर गई और उन्हें तुरंत चिकित्सा मुहैया कराई गई.

जापान की मेग हेम्पिल 5883 अंक लेकर दूसरे और हेम्ब्रम 5798 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रही. लक्ष्मणन गोविंदा ने पुरुषों की 10000 मीटर दौड़ 29 मिनट 55.87 सेकंड में पूरी करके स्वर्ण पदक जीता. एक अन्य भारतीय गोपी थोंकनाल दूसरे स्थान पर रहे. विश्व जूनियर रिकॉर्ड धारक नीरज चोपड़ा ने पुरुषों के भाला फेंक में अपने अंतिम प्रयास में 85.23 की दूरी तक भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता.

देविंदर सिंह इस स्पर्धा में तीसरे स्थान पर रहे. भारत ने इसके बाद महिलाओं और पुरुषों की 4 गुणा 400 मीटर दौड़ भी जीती. इस बीच जानसन ने पुरुषों की 800 मीटर दौड़ 1 मिनट 50.07 सेकंड में पूरी करके कांस्य पदक जीता.

जी-20 का 12वां शिखर सम्मेलन जर्मनी के हैम्बर्ग में हो रहा है। 07.07.2017 को पीएम नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात भी हुई। दोनों ने बड़ी गर्मजोशी से एक दूसरे से हाथ भी मिलाया। दोनों की मुलाकात की फोटोज भी सामने आई हैं। 06.07.2017 को चीनी सरकार की ओर से कहा गया था कि अभी दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात के लिहाज से समय सही नहीं है। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे मोदी और जिनपिंग जर्मनी में नहीं मिलेंगे। सिक्किम में डोकलाम पठार को लेकर दोनों देशों में इन दिनों तनातनी चल रही है। बताया जा रहा है कि 1962 के युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच संबंध कभी इतना तनावपूर्ण नहीं रहा।

Logo G20 Gipfel 2017 in Hamburg

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्‍तान को घेरा है। पाकिस्तान का नाम लिए बिना प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दक्षिण एशिया में एक देश आतंकवाद को फैला रहा है। उन्‍होंने कहा, “हिंसा और आतंकवाद की बढ़ती ताकत ने चुनौती खड़ी कर दी है। कुछ देश हैं जो इसे राष्‍ट्रीय नीति के रूप में इस्‍तेमाल कर रहे हैं।

वास्‍तव में, दक्षिण एशिया में एक ही देश है जो हमारे क्षेत्र के देशों में आतंक फैला रहा है। आतंकी, आतंकी होता है। आतंकवाद के समर्थन करने वालों को अलग किया जाए और उन पर प्रतिबंध लगाए जाए। मैं अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से अपील करता हूं कि एक होकर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की जाए। आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति है, क्‍योंकि इससे कम हमें कुछ भी पर्याप्‍त नहीं है।

”12वें जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान आतंकवाद से मुकाबला और आर्थिक सुधार जैसे मुद्दों के छाए रहने की संभावना है साथ ही मुक्त और खुला व्यापार, जलवायु परिवर्तन, आव्रजन, सतत विकास और वैश्विक स्थायित्व जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना है। शनिवार को शिखर सम्मेलन का समापन सत्र होगा। इसके बाद जी-20 नेताओं की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।

जी -20, जो कि विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रीयों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। जिसका प्रतिनिधित्व यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय केंद्रीय बैंक द्वारा किया है। उद्देश्य - वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रणालीबद्ध महत्वपूर्ण औद्योगिक और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने के लिए में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा।

वर्तमान अध्यक्ष - टोनी एबॉट (ऑस्ट्रेलिया) (2014)

पीएम मोदी ने असम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की आधारशिला रखते हुए देश के लिए एक नई नीति की घोषणा की। मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 3 साल पूरे होने पर पीएम ने संपदा योजना (स्कीम फॉर एग्रो मरीन प्रोसेसिंग ऐंड डिवेलपमेंट ऑफ एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर्स) को देश को समर्पित किया। सरकार ने समुद्री एवं विभिन्न कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग को गति देने के लिए लगभग 6000 करोड़ रुपए की एक नई फूड प्रोसेसिंग योजना संपदा (SAMPADA) को अपनी मंजूरी दे दी है जिसे 2016 से 2020 की अवधि में पूरी तरह लागू किया जाना है। 

इस योजना के तहत मिनिस्‍ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्‍ट्रीज के अंतर्गत एग्रो मैराइन प्रोसेसिंग एंड डवलेपमेंट ऑफ एग्रो क्‍लस्‍टर्स की योजनाओं को साल 2019-20 तक पूरा किया जाना है। मेगा एग्रो प्रोसेसिंग योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इनमें लगभग 31400 करोड़ रुपए का निवेश होने की पूरी संभावना है। सरकार को यह उम्‍मीद है कि इससे करीब 334 लाख टन खाद्य पदार्थों को खराब होने से पूरी तरह बचाया जा सकेगा और इसके एवज में लगभग 1.04 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्‍त बचत हर साल की जा सकेगी। इन योजनाओं से करीब 20 लाख किसानों को बहुत ही फायदा होगा और 5,305,00 लोगों को प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से रोजगार भी मिल सकेगा। फूड प्रोसेसिंग इंडस्‍ट्रीज मिनिस्‍टर हरसिमरन कौर ने इससे पहले कहा था कि कोल्‍ड चेन और प्रोसेसिंग सिस्‍टम के अभाव में हर साल लगभग 92 हजार करोड़ रुपए के खाद्य पदार्थ बेकार हो जाते हैं।

इस नई योजना के लिए लगभग 6,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। यह 31,400 करोड़ रुपए के निवेश को आकर्षित करने और 1,04,125 करोड़ रुपए मूल्य के 334 लाख टन कृषि उत्पादों के प्रबंधन की सुविधा भी देगी।

आतंकवाद और चरमपंथ के बढ़ते खतरे को लेकर साझी चिंता व्यक्त करते हुए भारत और इजरायल ने आपने सामरिक हितों की सुरक्षा के लिए सहयोग पर सहमति जताई और आतंकी संगठनों तथा उनके प्रायोजकों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने पीएम नेतन्याहू को भारत आने का न्योता भी दिया जिसे स्वीकार कर लिया है।

अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के बाद कहा कि भारत आतंकवादी संगठनों द्वारा हिंसा और नफरत से सीधे तौर पर पीड़ित है और यही हाल इजरायल का भी है। मोदी ने कहा कि अपनी बातचीत में वे और नेतन्याहू आतंकवाद से लड़ने और अपने सामरिक हितों की सुरक्षा के लिये साथ मिलकर और काम करने पर सहमति जताई।

बाद में एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने माना कि आतंकवाद वैश्विक शांति और स्थायित्व के लिये बड़ा खतरा है तथा उसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से लड़ने के लिये अपनी मजबूत प्रतिबद्धता पर जोर दिया। इसमें कहा गया, उन्होंने जोर दिया कि किसी भी आधार पर आतंकी कत्य को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। बयान में कहा गया कि नेताओं ने जोर दिया कि आतंकवादियों, आतंकी संगठनों, उनके नेटवर्कों और उन सभी के खिलाफ जो उन्हें बढ़ावा, समर्थन, आथर्कि मदद और पनाह देते हैं पर कड़ी कार्रवार्ई होनी चाहिए।

इसमें कहा गया कि दोनों नेताओं ने कंप्रेहेन्सिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (सीसीआईटी) को जल्द अपनाने के लिये सहयोग पर भी प्रतिबद्धता जताई।  इजरायल के दौरे पर आए पहले भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,  हमारा लक्ष्य ऐसे रिश्ते बनाने का है जिसमें हमारी साझा प्राथमिकताएं परिलक्षित हों और हमारे लोगों के बीच स्थायी संबंध बनें।  

दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष, कृषि और जल संरक्षण समेत सात समझौतों पर दस्तखत किये। 

1. 40 मिलियन डॉलर के भारत-इजरायल इंडस्ट्रियल आर एंड डी एंड टेक्नॉलॉजिकल इनवेशन फंड के लिए एमओयू साइन हुआ। 

2. भारत में जल संरक्षण के लिए इजरायल के साथ एमओयू साइन हुआ।

3. भारत के राज्यों में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए इजरायल के साथ एमओयू साइन हुआ। 

4. भारत-इजरायल डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन- कृषि के लिए 3 साल के कार्यक्रम (2018-2020) की घोषणा हुई।  

5. ISRO और इजरायल के बीच परमाणु घड़ी के लिए सहयोग की योजना के लिए एमओयू साइन हुआ।

6. जीईओ-एलईओ ऑप्टिकल लिंक के लिए एमओयू साइन हुआ।

7. छोटे सैटलाइट्स को बिजली के लिए एमओयू पर साइन हुआ।

अगर चीन ने गीदड़भभकी के जरिये अपनी विस्तारवादी नीति को जायज ठहरने की कोशिश करेगा तो यह चीन को महंगा भी पड़ सकता है. २१वी सदी के भारत या अन्य किसी देश को कम करके आंकना चीनी खिलौनों की तरह उसका सपना बिखर जायेगा. 

सिक्किम सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना के बीच महीने भर से जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इससे पहले चीन के सरकारी मीडिया और थिंक टैंक ने कहा था कि इस विवाद से अगर उचित तरीके से नहीं निपटा गया तो इससे 'युद्ध' छिड़ सकता है। राजनयिक ने कहा कि चीन सरकार इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि वह स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान चाहती है और इसके लिए इलाके से भारतीय सैनिकों की वापसी 'पूर्व शर्त' है।

भारत चीन के बीच सीमा पर लगातार तनाव बरकरार है। इस बीच चीन की नौसेना के कई पोतों और पनडुब्बियों का हिन्दमहासागर में दखल देखा गया है। चीन की नापाक की हरकतों पर भारतीय नौसेना बारीकी से नजर बनाए हुए है और इसके लिए जीसैट-7 का इस्तेमाल कर रही है, जिसे भारत ने 29 सितंबर 2013 को लॉन्च किया था। 

हिंदमहासागर में चीन के बढ़ते हुए दखल को देखते हुए नौसेना समुद्री सीमाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत को चीनी नौसेना की हर कदम की जानकारी जीसैट-7 सेटेलाइट के जरिए मिल रही है। इस उपग्रह का नाम रुक्मिणी है।

आपको बता दें कि हाल ही में हिंदमहासागर क्षेत्र में 14 चीनी नौसेना पोतों को भारतीय समुद्री क्षेत्र में घूमते देखा गया था। इनमें आधुनिक लुआंग-3 और कुनमिंग क्लास स्टील्थ डेस्ट्रॉयर्स भी शामिल थे।

क्या है रुक्मिणी

यह भारत का पहला सैन्य सेटेलाइट है। 2,625 किलोग्राम वजन का यह सैटेलाइट हिंद महासागर क्षेत्र में नजर रखने में नौसेना की मदद कर रहा है। यह एक मल्‍टी-बैंड कम्‍युनिकेशन-कम सर्विलान्‍स सेटेलाइट है, जिसका 36,000 किमी की ऊंचाई से संचालन हो रहा है। इसके जरिए हिंद महासागर के विस्तृत जलक्षेत्र में 2000 किमी तक के दायरे में निगरानी करना भारतीय नौसेना के लिए काफी आसान हो गया है। रुक्मिणी सेटेलाइट जंगी बेड़ों, सबमरीन, समुद्री एयरक्राफ्ट की गतिविधियों का रियल टाइम अपडेट मुहैया कराता है। इस सेटेलाइट की जद में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ही हैं। 

2013 में भारत के पास 4 टन वर्ग के सैटलाइट को लॉन्च करने के लिए आधुनिक जीएसएलवी रॉकेट नहीं थे। इसकी वजह से भारत को 185 करोड़ रुपये कीमत वाले जीसैट-7 सैटलाइट को फ्रेंच गुएना से लॉन्च से किया गया था।

अब भारतीय वायुसेना के लिए भी इसी तरह का एक अन्य सैटलाइट जीसैट-7A विकसित किया जा रहा है। एक सूत्र ने बताया, 'इस सैटलाइट का लॉन्च साल के आखिर में होना है।' इसकी मदद से एयरफोर्स जमीन पर स्थित कई रेडार स्टेशनों, एयरबेसों और एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग ऐंड कंट्रोल (अवॉक्स) एयरक्राफ्ट्स से सीधे जुड़ सकेगी।

ये है विवाद की वजह

डोक ला इस क्षेत्र का भारतीय नाम है, जिसे भूटान डोकलाम के रूप में मान्यता देता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग इलाके का हिस्सा बताता है। भारत में चीन के राजदूत झाओहुई ने कहा, 'स्थिति गंभीर है, जिसने मुझे गंभीर चिंता में डाल दिया है। यह पहला मौका है जब भारतीय सैनिकों ने पारस्परिक सहमति वाली सीमा रेखा पारकर चीन की सीमा में प्रवेश किया है। इससे चीन और भारत के सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच गहरा गतिरोध पैदा हो गया है। अब 19 दिन बीत चुके हैं लेकिन स्थिति अब भी सहज नहीं हो सकी है।' उन्होंने कहा कि भारत को चीन-भूटान सीमा वार्ता में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है और ना ही वह भूटान की तरफ से क्षेत्र को लेकर दावा करने के लिए अधिकृत है।

कहां है डोकलाम

संधि स्थल को भारत डोक ला कहता है। भूटान इसे डोकलाम कहता है। चीन इसी हिस्से में डोंगलोंग पर अपना दावा करता है। चीन और भूटान के बीच क्षेत्र पर दावे को लेकर वार्ता होती रही है। भूटान का चीन के साथ कोई कूटनीतिक रिश्ता नहीं है। भारत ही उसे सैन्य और कूटनीतिक समर्थन देता है। चीन का कहना है कि भारत के पास न तो चीन-भूटान सीमा विवाद में हस्तक्षेप का और न ही भूटान की तरफ से क्षेत्र पर दावे का अधिकार है।

अचल कुमार ज्योति देश के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त होंगे। ज्योति 6 जुलाई 2017 को वर्तमान सीईसी नसीम जैदी से चार्ज संभालेंगे। उनका कार्यकाल 6 महीने तक रहेगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है।

अचल कुमार ज्योति के नेतृत्व में ही देश के अगले राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव होगा। 64 साल के अचल कुमार ज्योति गुजरात कैडर के IAS ऑफिसर रहे हैं और गुजरात में 2013 में मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ काम करने का इनका पुराना प्रशासनिक अनुभव रहा है।

2013 में जब अचल कुमार ज्योति गुजरात के चीफ सेक्रेटरी थे उस दौरान नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे। प्रशासनिक हलकों में कहा जाता है कि पीएम के साथ काम करने की इनकी अच्छी ट्यूनिंग है।

मोदी के स्वर्णिम गुजरात अभियान के दौरान IAS अचल कुमार ज्योति काफी सक्रिय रहे थे, इस दौरान वह गांवों में कई बार देर रात तक काम करते थे,  तब सीएम मोदी ने इसके लिए अचल कुमार ज्योति की तारीफ भी की थी।बता दें कि जालंधर के मिट्ठा बाजार में पले-पढ़े अचल कुमार ज्योति 1975 में 22 साल की उम्र में ही IAS बन गये थे। उन्हें 1999 में कांडला पोर्ट ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया, 2004 में वे सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर बने।

ज्योति गुजरात में आय, उद्योग, जलापूर्ति सचिव भी रहे।बता दें कि अचल कुमार ज्योति ने 8 मई 2015 को चुनाव आयुक्त के तौर पर तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल अगले साल 17 जनवरी तक है।

कानून के मुताबिक कोई भी शख्स मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त के पद पर 6 साल या फिर 65 साल तक की आयु पूरा करने तक (जो भी पहले हो) रह सकता है। वर्तमान सीईसी नसीम जैदी के रिटायर होने के बाद केन्द्र सरकार को एक और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करनी पड़ेगी। इस वक्त चुनाव आयोग में नसीम जैदी, अचल कुमार ज्योति के अलावा तीसरे चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत हैं।

सुशासन लाने और देश की समस्याओं को मिटाने में अब बड़ी संख्या में देश के छात्रों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 'स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन- 2017' शुरू किया है। इसके जरिए देश भर के सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों के 30 लाख से ज्यादा छात्र राष्ट्रीय महत्व की समस्याओं का मिल कर समाधान तलाशेंगे।

राष्ट्र निर्माण के लिए डिजिटल समाधान तलाशने का दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम है।बुधवार को शुरू किए गए इस कार्यक्रम के लिए विभिन्न सरकारी मंत्रालयों से मिले 250 समस्याओं (प्रोब्लम स्टेटमेंट) को जारी किया गया है। छात्र आपसी चर्चा और मंथन के जरिए इनका समाधान जुटाने का प्रयास करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान कुल चार सौ ऐसी समस्याओं को शामिल किया जाएगा। साथ ही समाधान के लिए मिले सुझावों को भी ऑनलाइन प्रकाशित किया जाएगा।

इस अनूठे कार्यक्रम में भाग ले रहे सभी मंत्रालयों की ओर से विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे। साथ ही नैसकॉम के स्टार्ट अप कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मौका भी मिलेगा।केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस मौके पर कहा, 'इस हैकाथॉन में देश के नामी-गिरामी आइआइटी और एनआइटी ही नहीं सुदूर इलाकों में स्थित तकनीकी संस्थानों को भी शामिल किया जा रहा है।

भारत की तकनीकी प्रतिभा ने दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है और कई जटिल समस्याओं के बिल्कुल अनूठे समाधान मुहैया करवाए हैं। यह पहला मौका है जब हम भारत के विकास की रफ्तार तेज करने के लिए इतने बड़े पैमाने पर इतनी जबर्दस्त मानव संसाधन क्षमताओं का लाभ उठा रहे हैं।'

उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यक्रम दुनिया के लिए भी एक मिसाल बनेगा कि डिजिटल समाधान के लिए कैसे युवा शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।एचआरडी मंत्रालय, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और नैस्कॉम के अलावा भी कई सरकारी और गैर सरकारी संगठन इसमें शामिल हैं। इससे केंद्र सरकार के 'स्टार्ट अप इंडिया' और 'स्टैंड अप इंडिया' कार्यक्रमों को भी बढ़ावा मिलेगा।

अगर आप स्कूल में बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं लेकिन किसी और पेशे से जुड़े हैं, तो भी आप बच्चों को पढ़ा सकेंगे। मोदी सरकार आपको पढ़ाने के अपने सपने को पूरा करने का मौका देने जा रही है। ऐसे लोगों के लिए जो शिक्षक नहीं है लेकिन बच्चों को पढ़ाने की हसरत रखते हैं, मोदी सरकार 16 जून से विद्यांजलि योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक होने की बाध्यता खत्म होगी। इस योजना का मकसद आम जन को सरकारी स्कूलों से जोड़कर उनका विकास करना है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से विद्यांजलि योजना की शुरुआत 16 जून से हो गयी। पहले चरण में देश के 210 राज्यों के सरकारी स्कूलों में योजना लागू होगी। बीते आठ फरवरी को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की राज्यों के अफसरों के साथ बैठक में इस योजना के संचालन पर सहमति बनी।

खास बात है कि हुनरमंद महिलाओं के साथ कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति या एनआरआई स्कूलों में पढ़ा सकता है। रिटायर्ड शिक्षक, सरकारी कर्मी और सेना के जवान भी पे स्केल पर पढ़ा सकते हैं।

विद्यांजलि योजना के तहत कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्ति किसी भी सरकारी स्कूल से जुड़ सकता है। इसके लिए mygov.in वेबसाइट पर स्कूल के नाम के साथ आवेदन करना होगा।

भारत के संघीय ढांचे को देखते हुएजीएसटी के दो घटक होंगे-केन्द्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और राज्य जीएसटी (एसजीएसटी). केन्द्र और राज्यदोनों ही मूल्य शृंखला के भीतर एक साथ जीएसटी लगाएंगे. वस्तु एवं सेवाओं की प्रत्येक आपूर्ति पर कर लगाया जाएगा. केन्द्र सरकार केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर (सीजीएसटी) लगाएगी और वसूल करेगीतथा राज्य सरकारें अपने राज्य के भीतर सभी लेनदेनों पर वस्तु एवं सेवाकर लगाएंगी और वसूल करेंगी.

सीजीएसटी के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था होगीजिससे उत्पादन पर प्रत्येक चरण में सीजीएसटी देयता से मुक्ति मिलेगी. इसी प्रकार इनपुट पर अदा किए गए सीजीएसटी के लिए क्रेडिट की अनुमति होगीजो उत्पादन पर एसजीएसटी के भुगतान के लिए समय दिया जाएगा. क्रेडिट दोहरे इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी.

एक साथ लगने वाला केंद्रीय कर

केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी उन छूट प्राप्त वस्तुओं और सेवाओं को छोडक़रजो जीएसटी के दायरे से बाहर हैंतथा ऐसे लेनदेन जो निर्धारित न्यूनतम सीमाओं से कम हैंको छोडक़र अन्य सभी वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर लगेंगे. इसके अतिरिक्त दोनों जीएसटी समान कीमत या मूल्य पर लगाए जाएंगे. यह व्यवस्था राज्य वैट से भिन्न होगीजो केंद्रीय आबकारी सहित वस्तुओं के मूल्य पर लगाया जाता था. किसी राज्य में दोहरे जीएसटी मॉडल की कार्य प्रणाली को आकृति-1 में आरेख के माध्यम से दर्शाया गया है.

वस्तुओं और सेवाओं के बीच क्रेडिट का दोहरा इस्तेमाल

वस्तुओं और सेवाओं के बीच सीजीएसटी के दोहरे क्रेडिट के इस्तेमाल की अनुमति होगी. इसी प्रकार एसजीएसटी के मामले में क्रेडिट के दोहरे इस्तेमाल की सुविधा दी जाएगी. परंतुआईजीएसटी मॉडल (जिसे अगले प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया गया है) के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं की अंतर-राज्य आपूर्ति के मामले में सीजीएसटी और एसजीएसटी के दोहरे उपयोग की अनुमति नहीं होगी.

अंतर-राज्य लेनदेन

अंतर-राज्य सौदों के मामले मेंकेंद्र संविधान के अनुच्छेद 269-ए(1) के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं की समस्त अंतर-राज्य आपूर्तियों पर एकीकृत वस्तु एवं सेवाकर (आईजीएसटी) लगाएगा और वसूल करेगा. आईजीएसटी मोटेतौर पर सीजीएसटी+एसजीएसटी के समान होगा. आईजीएसटी व्यवस्था एक राज्य से दूसरे राज्य में इनपुट टैक्स क्रेडिट का अबाधित प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए की गई है. अंतर-राज्य विक्रेता अपनी वस्तुओं की बिक्री पर आईजीएसटी का भुगतान केंद्र सरकार को करेगालेकिन वह ऐसा करते समय अपनी खरीद पर आईजीएसटीसीजीएसटी और एसजीएसटी के क्रेडिट (क्रमानुसार) समायोजित करेगा. निर्यातक राज्य आईजीएसटी के भुगतान में प्रयुक्त एसजीएसटी का क्रेडिट केंद्र सरकार को अंतरित करेगा. आयातक व्यापारी अपने राज्य में उत्पादन पर अपनी देयता (दोनों सीजीएसटी और एसजीएसटी) डिस्चार्ज करते समय आईजीएसटी के क्रेडिट का दावा करेगा. केंद्र आयातक राज्य को एसजीएसटी के भुगतान में प्रयुक्त आईजीएसटी का क्रेडिट अंतरित करेगा. चूंकि जीएसटी एक लक्ष्य आधारित कर हैअत: अंतिम उत्पाद पर सभी एसजीएसटी सामान्यत: उपभोग करने वाले राज्य पर उपचयित होंगे. अंतर-राज्य सौदों के लिए आईजीएसटी मॉडल की आरेखीय प्रस्तुति आकृति-2 में की गई है.

आईटी का उपयोग

देश में जीएसटी के कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मिल कर गुड्स एंड सर्विसिज टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) पंजीकृत की हैजो लाभ न कमाने वाली गैर-सरकारी कंपनी है. यह केंद्र और राज्य सरकारोंकरदाताओं और अन्य सम्बद्ध पक्षों को साझा बुनियादी ढांचा और सेवाएं प्रदान करेगी.

जीएसटीएन के मुख्य उद्देश्यों में करदाताओं को एक मानक और समान इंटरफेस प्रदान करना तथा केंद्र एवं राज्य/संघ शासित प्रदेशों की सरकारों को साझा ढांचा एवं सेवाएं प्रदान करना है.

जीएसटीएन एक अत्याधुनिक एवं व्यापक आईटी ढांचा विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. इसमें एक साझा जीएसटी पोर्टल भी शामिल होगाजो सभी करदाताओं को पंजीकरणरिटर्न दाखिल करने और भुगतान जैसी अग्रणी सेवाएं प्रदान करेगा. यह पोर्टल कुछ राज्यों के लिए बैकएंड आईटी मॉड्यूल भी प्रदान करेगाजिसमें रिटर्नों की प्रोसेसिंगपंजीकरणलेखा परीक्षामूल्यांकनअपील आदि कार्य शामिल होंगे. सभी राज्यलेखांकन प्राधिकारीभारतीय रिजर्व बैंक और बैंक भी जीएसटी के संचालन के लिए अपने अपने आईटी ढांचे तैयार कर रहे हैं.

जीएसटी के अंतर्गत हस्तलिखित रिटर्न दाखिल नहीं होंगी. सभी करों का भुगतान भी ऑनलाइन किया जाएगा. सभी बेमेल रिटर्न ऑटो जेनेरेटिड होंगी और मैनुअल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. अधिकतर रिटर्न स्व-मूल्यांकित होंगी.

आयात पर कर

वर्तमान में आयात पर लगने वाले उत्पाद शुल्क अथवा सीवीडी पर अतिरिक्त ड्यूटी और विशेष अतिरिक्त ड्यूटी (एसएडी) को जीएसटी के अंतर्गत समाहित किया जाएगा. संविधान के अनुच्छेद 269-ए के खंड (1) के स्पष्टीकरण के अनुसार भारतीय भू-भाग पर किए जाने वाले समस्त आयात पर आईजीएसटी लगाया जाएगा. वर्तमान व्यवस्था से भिन्नवे राज्य जहांआयातित वस्तुएं उपभोग की जाती हैंअब अपना हिस्सा आयातित वस्तुओं पर अदा किए गए आईजीएसटी से प्राप्त करेंगे.

संविधान (122वां संशोधन) विधेयक, 2014 की प्रमुख बातें

इस विधेयक की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:-

1. वस्तु एवं सेवाकर के संचालन के बारे में संसद और राज्य विधान मंडलों को समान अधिकार प्रदान करना;
2. केंद्रीय आबकारी शुल्कअतिरिक्त आबकारी शुल्कसेवाकरअतिरिक्त सीमा शुल्कजिन्हें आमतौर पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी कहा जाता है और विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क जैसे विभिन्न केंद्रीय प्रत्यक्ष करों और लेवियों को समाहित करना;
3. राज्य मूल्य संवर्धित कर/बिक्री करमनोरंजन कर (स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले कर से भिन्न)केंद्रीय बिक्री कर (केंद्र द्वारा लगाया जाने वाला और राज्यों द्वारा वसूल किया जाने वाला)चुंगी और प्रवेश करखरीद करविलासिता कर और लॉटरीबाजी और जुए पर लगाए जाने वाले कर जीएसटी में समाहित किए गए हैं.
4. संविधान के अंतर्गत विशेष महत्व की घोषित वस्तुओं’ की धारणा समाप्त कर दी गई है. वस्तुओं एवं सेवाओं के अंतर-राज्य सौदों पर समेकित वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) लगाना;
5. मानव खपत के लिए अल्कोहल युक्त शराब को छोडक़र जीएसटी सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाएगा. पेट्रोलियम और पेट्रोलियम 
उत्पादों पर जीएसटी बाद में अधिसूचित तारीख से लगेगाजो वस्तु एवं सेवाकर परिषद द्वारा अधिसूचित की जाएगी.
6. वस्तु एवं सेवाकर लागू करने के कारण राज्यों को होने वाले राजस्व की प्रतिपूर्ति के लिए राज्यों को पांच वर्ष तक मुआवजा दिया जाएगा;
7. वस्तु एवं सेवाकर परिषद की स्थापनाजो वस्तु और सेवा कर संबंधी मुद्दों की पड़ताल करेगी और दरोंकरोंउप-करों और अधिभारों के समायोजन के बारे में केंद्र और राज्यों को अपनी अनुशंसाएं प्रदान करेगी. परिषद जीएसटी से छूट प्राप्त वस्तुओं की सूची और न्यूनतम सीमाएंमॉडल जीएसटी कानून आदि भी तय करेगी. परिषद केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में काम करेगी और सभी राज्य सरकारें इसकी सदस्य होंगी. 

पंजीकरण प्रक्रिया: जीएसटी के अंतर्गत प्रस्तावित पंजीकरण प्रक्रिया की प्रमुख विशेषताएं नीचे दी गई हैं:

1मौजूदा व्यापारी: वैट/केंद्रीय आबकारी/सेवा कर अदा करने वाले मौजूदा व्यापारियों को जीएसटी के अतर्गत पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी.
द्बद्ब)  नए व्यापारी: जीएसटी के अंतर्गत पंजीकरण के लिए ऑनलाइन एकल आवेदन दाखिल करना होगा.
2) पंजीकरण संख्या पैन आधारित होगी और केंद्र एवं राज्य दोनों के लिए उद्देश्य पूरा करेगी.
3) दोनों कर प्राधिकारियों के लिए एकीकृत आवेदन.
5) प्रत्येक व्यापारी को जीएसटीआईएन के लिए विशिष्ट आईडी प्रदान की जाएगी.
6) तीन दिन के भीतर समकक्ष अनुमोदन.
7) केवल जोखिम आधारित मामलों में पंजीकरण परवर्ती जांच.

रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया: जीएसटी के अंतर्गत प्रस्तावित रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार होंगी:

क.एक समान रिटर्न केंद्र और राज्य सरकार दोनों का मकसद पूरा करेगी.
ख.जीएसटी व्यापार प्रक्रिया में रिटर्न दाखिल करने के लिए 8 फार्मों का प्रावधान है. अधिकतर औसत करदाताओं को अपनी रिटर्न दाखिल करने के लिए केवल 4 फार्म भरने पड़ेंगे. ये रिटर्न आपूर्तियोंखरीदोंमासिक रिटर्न और वार्षिक रिटर्न के लिए होंगे.
ग.छोटे करदाता: कम्पोजीशन स्कीम अपनाने वाले छोटे करदाताओं को तिमाही आधार पर रिटर्न दाखिल करनी होगी.
घ.रिटर्न दाखिल करने का काम पूरी तरह ऑनलाइन होगा. सभी कर भी ऑनलाइन अदा किए जाएंगे.

भुगतान

जीएसटी के अंतर्गत प्रस्तावित भुगतान प्रक्रियाओं की प्रमुख विशेषताएं निम्नांकित हैं:
1)इलेक्ट्रोनिक भुगतान प्रक्रिया: किसी स्तर पर कोई कागज सृजित करने की आवश्यकता नहीं होगी.
2)चालान निकालने के लिए एकल बिंदु इंटरफेस -जीएसटीएन
3)भुगतान में आसानी: भुगतान ऑनलाइन बैंकिंगक्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्डएनईएफटी/आरटीजीएस और बैंक में चैक/नकद किया जा सकेगा.
4)ऑटो पापुलेशन विशेषताओं वाला एक समान चालान फार्म
5)एकल चालान और एकल भुगतान विलेख का उपयोग.
6)अधिकृत बैंकों का एक समान सेट.
7)एक समान लेखांकन कोड.

सीनियर वकील और संविधान के एक्सपर्ट के के वेणुगोपाल को भारत का अगला अटार्नी जनरल नियुक्त किया गया है। वह मुकुल रोहतगी की जगह लेंगे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनकी नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है। सरकार की तरफ से एक या दो दिन में आधिकारिक घोषणा की जाएगी। के के वेणुगोपाल की उम्र 86 साल है।

के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रेक्टिस 1960 के वक्त शुरू की थी। पीएम नरेंद्र मोदी के यूएस दौरे से लौटने पर के के वेणुगोपाल की नियुक्ति पर फैसला होना था। तीन देशों की यात्रा से वापस आए पीएम मोदी ने के के वेणुगोपाल के नाम पर सहमति जताई थी। के के वेणुगोपाल ने मोरारजी देसाई की सरकार के वक्त अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल का पदभार संभाला था।

पिछले पचास सालों में उन्होंने कई केस लड़े हैं। 2 जी स्पेट्रम मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त किया गया था। के के वेणुगोपाल बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के लिए बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में थे। अभी हाल में उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से ट्रायल चलाने का आदेश दे दिया है।

वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शुक्रवार आधी रात 12 बजे (1 जुलाई) से लागू हो गया. एक देश-एक टैक्स के दावे के साथ सरकार द्वारा संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित खास समारोह में जीएसटी का मेगा लॉन्‍च हुआ. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्‍यरात्रि में घंटा बजाए जाने के साथ जीएसटी देशभर में लागू हो गया.

प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण कर सुधार की तुलना आजादी से करते हुए कहा कि यह देश के आर्थिक एकीकरण में महत्वपूर्ण उपलब्धि है. वहीं, संसद के केंद्रीय कक्ष में हुई विशेष बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे ऐतिहासिक क्षण करार दिया और कहा कि यह कराधान के क्षेत्र में एक नया युग है जोकि केंद्र एवं राज्यों के बीच बनी व्यापक सहमति का परिणाम है.

इस अवसर पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उप राष्‍ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व पीएम एच डी देवेगौडा समेत सभी कैबिनेट मंत्री एवं दिग्‍गज संसद के सेंट्रल हॉल में मौजूद रहे.

संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आजादी सहित यह चौथा ऐसा मौका है, जब मध्यरात्रि के समय कोई कार्यक्रम हुआ. 14 अगस्त 1947 की मध्‍यरात्रि के अलावा, 1972 में स्वतंत्रता की रजत जयंती और 1997 में स्वर्ण जयंती के अवसर पर ऐसे कार्यक्रम हुए थे.

इस अवसर पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 'ये एक ऐतिहासिक मौका है. कुछ देर में हम एक नई टैक्‍स व्‍यवस्‍था को अपनाएंगे. यह मौका व्‍यक्तिगत रूप से मेरे लिए बेहद खास है. जीएसटी को लेकर पूरा विश्‍वास था. जीएसटी के लिए काउंसिल को बधाई देता हूंं. जीएसटी से निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी. जीएसटी से टैक्‍स व्‍यवस्‍था पारदर्शी होगी. शुरुआत में कुछ परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन जीएसटी से बहुत बड़ा बदलाव आएगा'.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 'राष्‍ट्र के निर्माण में कुछ ऐसे पल आते हैं, जिस पर हम किसी नए मोड़ पर जाते हैं, नए मुकाम की ओर पहुंचने का प्रयास करते हैं. आज इस मध्‍यरात्रि के समय हम सब मिलकर देश का आगे का मार्ग सुनिश्चित करने जा रहे हैं. कुछ देर बाद देश एक नई व्‍यवस्‍था की ओर चल पड़ेगा. सवा सौ करोड़ देशवासी इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी हैं. जीएसटी की यह प्रकिया सिर्फ अर्थव्‍यवस्‍था के दायरे तक ही सीमित नहीं है. यह किसी एक दल की सिद्धी नहीं है, बल्कि ये हम सभी की सांझी विरासत है. आज वर्षों के बाद एक नई अर्थव्‍यवस्‍था के लिए जीएसटी के रूप में संसद जैसे पवित्र स्‍थान से बढ़कर ओर कोई जगह नहीं हो सकती थी.'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि 'जीएसटी लंबी विचार प्रकिया का परिणाम है. संसद में सभी पूववर्ती सांसदों ने लगातार इस पर लंबी बहस की है. इसी का परिणाम है कि आज जीएसटी को हम साकार रूप में देख पाए हैं. संविधान ने पूरे देश के नागरिकों को समान अवसर-अधिकार देने के लिए सुनिश्चित व्‍यवस्‍था खड़ी कर दी थी. मैं जीएसटी काउंसिल को बधाई देता हूं और इस प्रकिया को जिन-जिन लोगों ने आगे बढ़ाया, मैं उन सभी को बधाई देता हूं. जीएसटी काउंसिल की 18वीं बैठकें हुईं और गीता के भी 18 अध्‍याय हैं'.

पीएम ने कहा कि 'जीएसटी के जरिये आर्थिक एकीकरण का काम हुआ है. जीएसटी से 500 तरह के टैक्‍सों की मुक्ति मिल गई है. जीएसटी के कारण आज अनेक तरह के टैक्‍सों की कन्‍फ्यूजन से मुक्ति मिल रही है. जीएसटी ज्‍यादा सरल और ज्‍यादा पारदर्शी है. गरीबों के हित के लिए यह सबसे सार्थक व्‍यवस्‍था है. आम लोगों पर नई व्‍यवस्‍था का बोझ नहीं पड़ेगा. छोटे कारोबारियों को भी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी'.

पीएम मोदी ने कहा कि 'जो लोग आशंकाएं करते हैं, वो कृपया ऐसा न करें. जीएसटी से निर्यात बढ़ेगा. भारत के साथ कारोबार करना भी आसान होगा. जीएसटी से सभी राज्‍यों को आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे. जीएसटी का फायदा आने वाली पीढि़यों को मिलेगा. न्‍यू इंडिया का सपना लेकर हम चल पड़े हैं, जीएसटी इसमें महत्‍वूपर्ण भूमिका अदा करेगा. जीएसटी न्‍यू इंडिया और डिजिटल भारत की एक नई टैक्‍स व्‍यवस्‍था है. जीएसटी सिर्फ एक टैक्‍स रिफॉर्म नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रिफॉर्म का भी जरिया है'. 

प्रधानमंत्री ने कहा कि, हकीकत में यह 'गुड एंड सिंपल टैक्‍स' है. गुड इसलिए क्‍योंकि टैक्‍स पर टैक्‍स से मुक्ति मिलेगी और सिंपल इसलिए कि अब सिर्फ एक टैक्‍स होगा.

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने समारोह में उद्घाटन भाषण में शामिल सभी दिग्‍गजों का स्‍वागत करते हुए कहा कि 'हम जीएसटी लॉन्च करके इतिहास रचने जा रहे हैं. भारत नई विकास यात्रा की शुरुआत करेगा. जीएसटी न्यू इंडिया की शुरुआत करेगा, जिसका लक्ष्य एक राष्ट्र-एक कर होगा'. जेटली ने आगे कहा, 'जीएसटी में केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे. हम संविधान में संशोधन करके जीएसटी लाए हैं. हम संसद के सभी सदस्यों, राज्यों, राज्यों के वित्त मंत्रियों और इसके लिए कार्य करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद देते हैैं. राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी जीएसटी की इस यात्रा के सबसे बड़े गवाह हैं. 2006 के बजट में यूपीए सरकार ने घोषणा की थी कि इसे 2010 तक लागू किया जाएगा. जीएसटी काउंसिल 18 बार बैठ चुकी है. जीएसटी से राज्‍यों के अधिकारों का हनन नहीं होगा. हर बार आम राय से फैसले लिए गए'.

वित्‍त मंत्री ने कहा कि, सारे टैक्‍स खत्‍म, अब सिर्फ एक टैक्‍स होगा. अब सिर्फ एक रिटर्न जाएगा. टैक्‍स के ऊपर टैक्‍स न लगना जीएसटी की विशेषता है.  इस अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह के बगल में पार्टी के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार एक साथ बैठे दिखे. हालांकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, लेफ्ट, टीएमसी, आरजेडी, आम आदमी पार्टी इसमें शामिल नहीं हुए. समाजवादी पार्टी समारोह में शामिल हुई.

जीएसटी के खास बिंदु...

1. वस्तुओं और सेवाओं पर पूरे देश में एक समान टैक्स

2. केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और समग्र जीएसटी-कुल तीन स्तर

3. 5%, 12%, 18%, 28% की चार बड़ी श्रेणियां

4. अल्कोहल जीएसटी के दायरे से बाहर-तेल से जुड़े उत्पाद भी जीएसटी के दायरे से बाहर

5. उत्पादन से बिक्री तक हर चरण पर टैक्स-लेकिन हर चरण में घटता जाएगा पिछला टैक्स

6. ग्राहकों पर कुल टैक्स के बोझ में कमी

7. कारोबारियों को हर महीने भरना होगा रिटर्न

8. 20 लाख तक के सालाना कारोबार पर जीएसटी नहीं

जीएसटी के लाभ

जीएसटी के लाभ निम्नांकित रूप में वर्णित किए जा सकते हैं:-

व्यापार और उद्योग के लिए
*आसान अनुपालन: भारत में जीएसटी व्यवस्था का आधार एक सुदृढ़ और व्यापक आईटी प्रणाली होगी. अत: सभी करदाता सेवाएंजैसे पंजीकरणरिटर्नभुगतान आदि ऑनलाइन प्रदान की जायेंगीजिससे अनुपालन में सुगमता और पारदर्शिता आयेगी.

*कर की दरों और संरचनाओं में एकरूपता : जीएसटी यह सुनिश्चित करेगा कि परोक्ष कर की दरें और संरचनाएं देशभर में एक समान रहेंजिससे व्यापार करने की अवश्यंभाविता और सुगमता में वृद्धि होगी. दूसरे शब्दों में जीएसटी देश में व्यापार प्रक्रिया को कर की दृष्टि से तटस्थ बनाएगाचाहे आप किसी भी स्थान पर व्यापार करने का विकल्प चुनें.

*प्रपाती प्रभाव की समाप्ति : समूची मूल्य शृंखला में कर-क्रेडिट की सीवनरहित प्रणालीयह सुनिश्चित करेगी कि करों का प्रपाती प्रभाव न्यूनतम हो. इससे व्यापार संचालन की प्रच्छन्न लागत में कमी आयेगी.

*प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार: व्यापार करने की लागत में कमी आने से अंतत: व्यापार और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार होगा.  

*विनिर्माताओं और निर्यातकों को लाभ: प्रमुख केन्द्रीय और राज्य करों के जीएसटी में समाहित होनेइन्पुट वस्तुओं एवं सेवाओं का पूर्ण और व्यापक सेट-ऑफ और केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) की चरणबद्ध रूप में समाप्ति जैसे प्रावधानों से स्थानीय रूप में विनिर्मित वस्तुओं और सेवाओं की लागत में कमी आयेगी.

इससे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धा क्षमता में वृद्धि होगी और भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. समूचे देश में कर की दरों और प्रक्रियाओं में एकरूपता से भी अनुपालन लागत में भी काफी कमी आयेगी.

केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए

*संचालन की दृष्टि से सामान्य और सरल: केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगाए जाने वाले अनेक परोक्ष करों का स्थान जीएसटी लेगा. एक छोर से दूसरे छोर तक सुदृढ़ आईटी प्रणाली द्वारा समर्थित जीएसटी का संचालन केन्द्र और राज्यों के अब तक के सभी अन्य परोक्ष करों की तुलना में अधिक सामान्य और सरल किस्म का होगा.

*रिसाव पर कारगर नियंत्रण: एक मजबूत आईटी ढांचे के कारण जीएसटी का कर-अनुपालन बेहतर होगा. मूल्य संवद्र्धन शृंखला में एक चरण से दूसरे चरण तक इन्पुट टैक्स क्रेडिट अबाधित होने की बदौलत जीएसटी के डिजाइन में ऐसी अन्तर-निहित व्यवस्था की गई हैजो व्यापारियों को कर अनुपालन के लिए प्रेरित करेगी. 

*उच्चतर राजस्व सक्षमता: जीएसटी से यह अपेक्षा की जा रही है कि सरकार के कर-राजस्व संग्रह की लागत में कमी आयेगी और नतीजतन राजस्व सक्षमता में वृद्धि होगी.   

उपभोक्ताओं के लिए

*वस्तुओं और सेवाओं के अनुपात में एकल और पारदर्शी कर: केन्द्र और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले बहुसंख्य करों और मूल्य शृंखला के परवर्ती चरणों में कोई इन्पुट कर क्रेडिट की व्यवस्था न होने या अधूरी व्यवस्था होने के कारण आज देश में अधिकतर वस्तुओं और सेवाओं की लागत में प्रच्छन्न कर समाहित रहते हैं. जीएसटी के अंतर्गत विनिर्माता से उपभोक्ता तक केवल एक ही कर होगाजिससे अंतिम उपभोक्ता तक अदा किए गए करों में पारदर्शिता रहेगी.

*समग्र कर बोझ में राहत: सक्षमता में वृद्धि और रिसाव की रोकथाम होने से ज्यादातर वस्तुओं पर कर का बोझ हलका होगाजिससे उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचेगा.

जीएसटी में समाहित किए जा रहे कर

केन्द्र के स्तर पर निम्नांकित कर समाहित किए जा रहे हैं:

क.केन्द्रीय उत्पाद शुल्क,

ख.अतिरिक्त उत्पाद शुल्क

ग.सेवा कर

घ.अतिरिक्त सीमा शुल्क जिसे प्रतिकारी शुल्क (काउंटरवेलिंग ड्यूटी) भी कहा जाता हैऔर

ङ.विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क.

राज्य स्तर परनिम्नांकित कर समाहित किए जा रहे हैं:

क.राज्य स्तरीय मूल्य सवंद्र्धित कर/बिक्री कर.

ख.मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले करों के अतिरिक्त)केन्द्रीय बिक्री कर (केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला),

ग.चुंगी और प्रवेश कर,

घ.खरीद कर,

ङ.विलासिता करऔर

च.लाटरीबाजी और जुए पर कर.

घटनाक्रम का ब्यौरा

देश में जीएसटी के कार्यान्वयन के पीछे 13 वर्ष की लम्बी यात्रा रही है. पहली बार इसका उल्लेख परोक्ष करों के बारे में केल्कर कार्य दल की रिपोर्ट में किया गया था. भारत में जीएसटी शुरू करने के प्रस्ताव के बारे में प्रमुख घटनाओं का संक्षिप्त कालक्रमानुसार विवरण इस प्रकार है: 

क.2003 में परोक्ष कर के बारे में केल्कर कार्य दल ने वैट सिद्धांत के आधार पर एक व्यापक वस्तु एवं सेवा कर का सुझाव दिया.

ख.पहली बार वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए बजट भाषण में यह प्रस्ताव किया गया कि 1 अप्रैल, 2010 से राष्ट्रीय स्तर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया जाये.

ग.चूंकि इस प्रस्ताव में न केवल केन्द्र द्वारा लगाए जाने वाले परोक्ष करों मेंबल्कि राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों में भी सुधार/पुनर्निधारण की आवश्यकता थीअत: जीएसटी का डिजाइन एवं रोडमैप तैयार करने का काम राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को सौंपा गया.

घ.इस अधिकार प्राप्त समिति ने भारत सरकार और राज्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर नवम्बर 2009 में भारत में वस्तु एवं सेवा कर के बारे में प्रथम विमर्श पत्र जारी किया.
ङ.जीएसटी संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सितम्बर, 2009 में केन्द्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों का एक संयुक्त कार्यदल बनाया गया. 

च.जीएसटी प्रारंभ करने के लिए संविधान में संशोधन करने हेतु मार्च, 2011 में लोकसभा में संविधान (115 संशोधन) विधेयक पेश किया गया. निर्धारित प्रक्रिया के अनुसारविधेयक को संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को सौंप दिया गया ताकि वह उसकी जांच करके अपनी रिपोर्ट दे सके.

छ.इस बीचकेन्द्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के बीच 8 नवम्बर, 2012 को हुई एक बैठक में किए गए निर्णय के अनुपालन में एक समिति का गठन किया गयाजिसमें भारत सरकारराज्य सरकारों और अधिकार प्राप्त समिति के अधिकारियों को शामिल किया गया. 

ज.इस समिति ने संविधान (115वां संशोधन) विधेयक सहित जीएसटी के डिजाइन के बारे में व्यापक विचार-विमर्श किया और जनवरी, 2013 में अपनी रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट के आधार परअधिकार प्राप्त समिति ने भुवनेश्वर में जनवरी, 2013 में अपनी बैठक में संविधान संशोधन विधेयक में कतिपय परिवर्तनों की अनुशंसा की.

झ.अधिकार प्राप्त समिति ने भुवनेश्वर में अपनी बैठक में यह निर्णय भी किया कि जीएसटी के विभिन्न पहलुओं के बारे में विचार करने और रिपोर्ट करने के लिए निम्नांकित अनुसार तीन समितियों का गठन किया जाये:

(क)आपूर्ति स्थान नियम और राजस्व तटस्थ दरें संबंधी समिति;

(ख)दोहरे नियंत्रणसीमारेखा और छूट संबंधी समिति;

(ग)    आयात संबंधी आईजीएसटी और जीएसटी संबंधी समिति

()स्थायी संसदीय समिति ने अगस्त, 2013 में अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी. अधिकार प्राप्त समिति की अनुशंसाओं और संसदीय समिति की अनुशंसाओं की जांच-पड़ताल मंत्रालय में गईऔर उन पर विधायी विभाग से परामर्श किया गया. अधिकार प्राप्त समिति और स्थायी संसदीय समिति की अधिकतर अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया गया और संविधान संशोधन विधेयक के प्रारूप में उपयुक्त बदलाव किए गए.

ट.ऊपर वर्णित परिवर्तनों को समाहित करते हुए सितम्बर 2013 में संविधान संशोधन विधेयक का अंतिम प्रारूप अधिकार प्राप्त समिति को उसके विचारार्थ भेज गया.

ठ.अधिकार प्राप्त समिति ने एक बार फिर नवम्बर 2013 में शिलांग में अपनी बैठक में विधेयक के बारे में कुछ अनुशंसाएं कीं. संशोधित प्रारूप मार्च, 2014 में अधिकार प्राप्त समिति के विचारार्थ भेजा गया.

ड.115वां संविधान (संशोधन) विधेयक, 2011 जो मार्च 2011 में लोकसभा में पेश किया गया थावह 15वीं लोकसभा भंग होने के साथ ही कालातीत हो गया.

ढ.जून 2014 मेंसंविधान संशोधन विधेयक का प्रारूप नई सरकार के अनुमोदन के बाद अधिकार प्राप्त समिति को भेजा गया.

ण.विधेयक की रूपरेखा पर अधिकार प्राप्त समिति में व्यापक सहमति के आधार परकैबिनेट ने देश में वस्तु एवं सेवा कर का शुभारंभ करने के लिए 17.12.2014 को संविधान में संशोधन के लिए संसद में विधेयक पेश करने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया. यह विधेयक 19.12.2014 को लोकसभा में पेश किया गया और इसे 06.05.2015 को लोक सभा ने पारित कर दिया. इसके बाद इसे राज्य सभा की प्रवर समिति को सौंप दिया गयाजिसने 22.07.2015 को अपनी रिपोर्ट पेश की.

जर्मनी के पूर्व चांसलर हेल्मुट कोल का निधन हो गया. हेल्मुट कोल जर्मन और यूरोपीय एकीकरण के चांसलर थे. 16 साल तक जर्मनी के चांसलर, 25 से ज्यादा साल तक क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक पार्टी के प्रमुख - यह डटे रहने की अभूतपूर्व शक्ति, अपनी बात मनवाने की ताकत, सत्ता में बने रहने की फौलादी इच्छा के अलावा चुनावों में जीत हासिल करने का लोकतांत्रिक सौभाग्य भी दिखाता है.

हेल्मुट कोल चार बार देश के चांसलर चुने गए, राजनीतिक जीवन की एक प्रभावशाली उपलब्धि. और पार्टी के तकरीबन स्थायी प्रमुख के रूप में स्वयं अपनी कतारों में हो रहे विकास को भांपने की क्षमता और आलोचना की आवाजों के प्रति संदेह विख्यात है. लेकिन 1989 में जब वे ब्रेमेन में हुई पार्टी कांग्रेस में अपना पद बचाने का संघर्ष कर रहे थे, तो बर्लिन की दीवार के गिरने ने उनकी जान बचा ली. और कोल ने साम्यवादी सरकारों के पतन से पैदा हुए मौके का अपने और अपने देश के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने इतिहास रचा. उन्होंने ऐतिहासिक मौके का उपयोग किया. कोल इन महीनों में राजनेता बन गए.

निःसंदेह हेल्मुट कोल जर्मन एकीकरण के चांसलर हैं. वे वह राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने देश के अंदर और बाहर हिचकिचाहट, डर और शंका को नजरअंदाज कर दिया और नवंबर 1989 से लक्ष्यबद्ध तरीके से जर्मनी के एकीकरण का प्रयास किया और 3 अक्तूबर 1990 में इसे पूरा कर लिया. उन्होंने मौका आने पर राजनीतिक और ऐतिहासिक सूझबूझ दिखाई. इसके साथ वे कुछ लोगों के लिए 20वीं सदी के बिस्मार्क बन गए.

हेल्मुट कोल सिर्फ एक जर्मन देशभक्त ही नहीं थे जिन्होंने पूर्वी यूरोप में हो रहे उथल पुथल का लाभ उठाया था. रिकॉर्ड समय तक देश के चांसलर रहे हेल्मुट कोल प्रतिबद्ध यूरोपीय भी थे. एक राजनीतिज्ञ जो 16 साल तक अनगिनत यूरोपीय शिखर सम्मेलनों में यूरोपीय एकता को बढ़ावा देने के लिए हमेशा तैयार रहता था. चाहे वह यूरोपीय समुदाय रहा हो, बढ़ता यूरोपीय संघ या मध्य यूरोप के देशों के लिए सदस्यता की संभावना जो 2004 में संभव हुआ.

हेल्मुट कोल यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो के जनक भी थे. यह यूरोपीय राजनेता के उनके दर्जे को पुख्ता करता है. क्योंकि बड़ी ऐतिहासिक विरासत में उन्होंने यह बात समझी थी कि एक साझा मुद्रा और ताकतवर डॉयचे मार्क का त्याग ही फ्रांस, ब्रिटेन और दूसरे देशों में लोगों की नाराजगी दूर कर सकेगा. एक सही फैसला जिसने पुराने महादेश की एकता को पक्का कर दिया.

हेल्मुट कोल एक राजनेता थे. वे एक ऐसे राजनीतिज्ञ थे जो एक साथ जर्मन एकीकरण और यूरोपीय एकता के पक्ष में थे. बड़ी राजनीतिक प्रतिबद्धता वाला एक इंसान जो सही पहचाने गए. और इस बात ने उन्हें जर्मनी में होने वाली आलोचनाओं से परे खासकर विदेश में सम्मानित राजनेता का दर्जा दिलवाया.

साल 1986 के जुलाई महीने की 27 तारीख थी. दिन-रविवार. कलिम्पोंग के मेला ग्राउंड में हज़ारों लोगों की भीड़ जमा थी. ये लोग गोरखालैंड राज्य के समर्थन और साल 1950 की भारत-नेपाल संधि के विरोध में वहां पहुंचे थे. तब इसमें शामिल होने आ रहे कुछ लोगों ने कलिम्पोंग थाने के पास डीआईजी स्तर के एक अधिकारी पर खुकरी से हमला कर दिया.इससे आक्रोशित पुलिस ने अंधाधुंध फ़ायरिंग की. इसमें महिलाओं और बच्चों समेत 13 लोग मारे गए.

तब गोरखालैंड आंदोलन का नेतृत्व सुभाष घिसिंग के हाथ में था. वे गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के नेता थे. घिसिंग ने अपने आंदोलनों के जरिए गोरखालैंड के लिए पृथक राज्य के दर्जे की मांग की और पहाड़ के लोग उनके पीछे दीवानों की तरह घूमते रहे.

मशहूर स्तंभकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख सलाहकार स्वराज थापा बताते हैं कि साल 1986-88 के दौरान चले गोरखालैंड आंदोलन के दौरान करीब 1500 लोग मारे गए थे. इसके बावजूद सरकार ने पश्चिम बंगाल का बंटवारा नहीं किया. नतीजतन गोरखालैंड की मांग जिंदा रही. तब दार्जिलिंग हिल्स में 40-40 दिन तक बंदी रही और यहां के निवासियों ने अपनी परवाह किए बगैर आंदोलन का समर्थन किया.

अब साल 2017 का जून महीना है. गोरखालैंड की मांग फिर से जोरों पर है और पहाड़ के लोग इसे अंतिम लड़ाई करार दे रहे हैं. इस बार नेतृत्व लेकिन बदल चुका है. आंदोलन का नेतृत्व अब विमल गुरुंग के हाथों में है. वे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के नेता हैं. गोरखालैंड को लेकर सुभाष घिसिंग और अब विमल गुरुंग के आंदोलन मे क्या फ़र्क़ है. वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उपेंद्र मणि प्रधान कहते हैं, "किसी दो आंदोलन और नेताओं में तुलना उचित नहीं. लेकिन मुझे लगता है कि सुभाष घिसिंग राजनीतिक रूप से ज्यादा परिपक्व थे. लेकिन उनका आंदोलन हिंसक था. जबकि विमल गुरुंग शांति से आंदोलन करना चाहते हैं."

दार्जिलिंग हिल्स पर रहने वाले लोगों में सबसे बड़ी आबादी गोरखा समुदाय की है. 10 लाख से भी अधिक. इतिहास की किताबें कहती हैं कि दार्जिलिंग की खोज कैप्टन लायड और जे डब्लू ग्रांट ने की थी. तब यहां लेप्चा समुदाय के कुछ लोग रहा करते थे. लेकिन उनकी संख्या 200 से भी कम थी.साल 1866 के दौरान अंग्रेजों ने यहां चाय की खेती शुरू कराई और इसके बागानों में काम करने के लिए बड़ी संख्या में नेपाल से गोरखा मज़दूरों को यहां बुलवाया. बाद में वे यहीं बस गए और पहाड़ पर उनकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा हो गयी.

पत्रकार उपेंद्र मणि प्रधान इसे आधा सच बताते हैं. उन्होंने बताया, ''दार्जिलिंग का इतिहास किसने लिखा. वे कोई चटर्जी, बनर्जी, राय या घोष थे. लिहाजा, इतिहासकारों ने अपनी सुविधा और इच्छा के मुताबिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर रखा. दार्जिलिंग के गोरखा उतने ही पुराने हैं जितना पुराना यहां का वजूद है.

''रिंचु टुप्पा, भूटिया जाति की हैं. लेकिन वे खुद को गोरखा कहती हैं. उन्होंने कहा कि पहाड़ पर रहने वाले लेप्चा, भूटिया, गुरुंग, शेरपा या फिर बिहारी, झारखंडी, बंगाली, मारवाड़ी सब गोरखा हैं. गोरखा कोई जाति नहीं, हमारी राजनीतिक पहचान है. स्वराज थापा कहते हैं कि गोरखालैंड की मांग तो 100 साल से भी अधिक पुरानी है. पहले सुभाष घिसिंग और साल 2007 के बाद विमल गुरुंग ने इसे जोरदार तरीके से उठाया. सरकार को चाहिए कि वे यहां के लोगों की अस्मिता की रक्षा के लिए हमें पश्चिम बंगाल से अलग करे. हमें गोरखालैंड दे.

क्यों चाहिए गोरखालैंड

दार्जिलिंग के चौरस्ता निवासी रौशन सिंह बारहवीं पास हैं. बंगाल पुलिस के लिए उन्होंने दो बार कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके. अब वे एक होटल मे वेटर का काम करते हैं. उन्होंने बताया कि हमें हमारा हिस्सा नहीं मिलता. आज़ादी के इतने दिनों बाद भी हम चौकीदार और वेटर जैसी नौकरियां कर रहे हैं. गोरखालैंड मिल जाएगा तो हमारे बच्चों का भविष्य संवर सकता है. सवा अरब की जनसंख्या वाले देश में गोरखा लोगों की संख्या सिर्फ एक करोड़ है. ज़ाहिर है हमें न तो राजनीतिक हिस्सेदारी मिली और न ही प्रशासन में हम आ पाए. दार्जिलिंग के गोरखा दूसरे जगहों पर जाकर अफसर बन जाते हैं लेकिन यहां हमारा कोई वजूद नहीं.

''बंगाल के लोग हमे दूसरे दर्जे का नागरिक समझते हैं. गोरखा लोगों को ये मंज़ूर नहीं. लिहाजा, हमें अब बंगाल के साथ नहीं रहना. हमें हमारा गोरखालैंड चाहिए. किसी भी क़ीमत पर.''

क़ाबुल और दिल्ली के बीच हवाई रास्ते से माल ढुलाई के सीधे कॉरिडोर की शुरुआत का अफ़गान अधिकारियों ने स्वागत किया है.हालांकि इस कॉरिडोर में पाकिस्तान की वायु सीमा भी आती है. लेकिन इसे पाकिस्तान द्वारा पैदा की जा रही अड़चनों को बाईपास कर दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

इस योजना के तहत एक विमान 19.06.2017 को दिल्ली पहुंचा, जिसमें 50 लाख डॉलर क़ीमत की 60 टन औषधीय जड़ी बूटियां थीं. अफ़ग़ानिस्तान चारों ओर से मैदानी हिस्से से घिरा देश है जिसकी पाकिस्तान पर बहुत अधिक निर्भरता है और भारत के साथ व्यापारिक संबंध के लिए पाकिस्तान से होकर जाना पड़ता है. अफ़ग़ान अधिकारियों के अनुसार, जब भी पाकिस्तान अपनी सीमा बंद करता है, व्यापार प्रभावित होता है.

पाकिस्तान की बाधा : इसी साल मार्च में पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के साथ सटी सीमा को बंद कर दिया था. इस कॉरिडोर की शुरुआत के लिए आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया.

अफ़ग़ानिस्तान-भारत की दोस्ती

2001 में जब तालिबान की सरकार का पतन हुआ तब भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण में सहयोग की नए सिरे से शुरुआत की. 2002 में भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण में दो अरब डॉलर के सहयोग की घोषणा की थी.

मोदी ने अफ़ग़ानिस्तान की संसद का उद्घाटन किया था. इसमें भी भारत का सहयोग.

अफ़ग़ानिस्तान के उत्तरी सूबे हेरात में भारत के ज़रिये बनाया गया बांध. प्रधानमंत्री मोदी यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन कर रहे हैं. भारत युद्ध से लंबे समय तक ग्रस्ति रहे देश के पुनर्निर्माण में मदद कर रहा है. यह बांध 30 करोड़ डॉलर (क़रीब 2040 करोड़ रुपये) की लागत से बनाया गया है. इसे बनाने में दोनों देशो के क़रीब 1500 इंजीनियरों ने हिस्सा लिया. साल की शुरुआत में अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने सलमा बांध का नाम अफ़ग़ान इंडिया फ्रेंडशिप डैम कर दिया था.

अफगानिस्तान-पाकिस्तान का झगड़ा क्या है?

जब-जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान का दिमाग घूमता है तो एक दूसरे पर लड़ाकू पड़ोसियों की तरह तू-तू मैं-मैं शुरू हो जाती है. कुछ लोग कहते हैं कि सारी खराबी पाक अफगान सरहद की लकीर ने पैदा की है जो अंग्रेजों ने ज़बरदस्ती अफगान हुक्मरानों से खिंचवाई और जब तक इस सरहदी लकीर के बारे में कोई आखिरी फैसला नहीं हो जाता दोनों तरफ दिमाग यूं ही घूमता रहेगा. आप किसी भी अफगान से बात कर लें. वह कम्युनिस्ट हो या पूंजीपति, तालिबानी हो या कबायली लड़ाका, शहरी हो या देहाती, आस्तिक हो या नास्तिक.

नब्बे बातों पर एक दूसरे से असहमत होंगे मगर इस पर सब सहमत होंगे कि डूरंड रेखा एक नाजायज लकीर है और हम इसे नहीं मानते. ब्रिटिश भारतसबको यकीन है कि 1893 में अफगान अमीर अब्दुर रहमान खान और ब्रितानी सरकार के सचिव सर मॉर्टीमर डूरंड ने सरहद हदबंदी के जिस समझौते पर दस्तखत किए, उसकी मियाद सौ बरस थी (मानो वह समझौता 1993 में खत्म हो गया). कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि ये समझौता ब्रिटिश भारत से हुआ था, इसलिए 14 अगस्त 1947 को ही ये खत्म हो गया.

शायद इसीलिए 1949 में अफगान लोया जिरगा ने डूरंड रेखा को एक बोगस और फर्जी सरहद करार देने के संकल्प पारित किया और नारा लगाया कि दोनों ओर के पख्तून एक हैं. क्या वाकई ये सरहदी लकीर सौ बरस के लिए ही खींची गई थी? क्या ब्रिटेन के भारत से विदा होते ही यह समझौता खत्म हो गया? दरअसल 1893 में जो डूरंड रेखा खींची गई थी, वह 100 बरस के लिए नहीं थी बल्कि अमीर अब्दुर रहमान खान और सर मॉर्टीमर डूरंड ने जिस समझौते पर दस्तखत किए थे, इसकी मियाद दस्तखत करने वाले बादशाह की जिंदगी तक मानी गई थी.

इस समझौते में ये बात भी शामिल थी कि अफगानिस्तान अपनी जरूरत का असलहा भारत के रास्ते खरीद सकता है और ब्रिटिश भारत अफगान बादशाह को सालाना अठारह लाख रुपये का ग्रांट भी देगा.

इस समझौते के मसौदे में अमीर हबीबुल्लाह की तरफ से वादा किया गया कि उनके पिता ने ब्रिटिश सरकार के साथ जो समझौता किया था वह भी उस पर पूरी तरह से अमल करते रहेंगे और कभी इसका विरोध नहीं करेंगे. तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध के बाद आठ अगस्त 1919 को रावलपिंडी में अफगान गृह मंत्री अली अहमद खान ने ब्रिटिश सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

इसके नतीजे के तौर पर ब्रिटेन ने हालांकि राहदारी (पैसेज) और सालाना ग्रांट की सुविधा वापस ले ली मगर अफगानिस्तान की स्वतंत्रता और स्वायत्तता को पहली बार स्वीकार कर लिया. समझौते के पांचवीं क्लॉज में लिखा है, 'अफगान सरकार भारत और अफगानिस्तान की वही सीमा पहचानता है जो मरहूम अमीर हबीबुल्लाह खान ने स्वीकार की थी. 'यूं पहली बार 1919 के समझौते के तहत डूरंड रेखा समझौते की मियाद बादशाह की जिंदगी तक बने रहने की पाबंदी से मुक्त होकर आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा बन गई.

भारत जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक प्रेस कांफ्रेंस में रामनाथ कोविंद को एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की है. कोविंद बिहार के गवर्नर हैं. कोविंद राष्ट्रपति की रेस में ऐसे वक्त में आए हैं, जब उनके नाम की चर्चा कम से कम राजनीतिक हल्कों और लोगों में दूर तक कहीं नहीं थी.

रामनाथ कोविंद मौजूदा समय में बिहार के राज्यपाल हैं, लेकिन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की होड़ में उनका नाम बहुत ज़्यादा चर्चा में नहीं था. गवर्नर ऑफ बिहार की वेबसाइट के मुताबिक कोविंद दिल्ली हाई कोर्ट में 1977 से 1979 तक केंद्र सरकार के वकील रहे थे. 1980 से 1993 तक केंद्र सरकार के स्टैंडिग काउंसिल में थे.

दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इन्होंने 16 साल तक प्रैक्टिस की. 1971 में दिल्ली बार काउंसिल के लिए नामांकित हुए थे. 1994 में कोविंद उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए. वह 12 साल तक राज्यसभा सांसद रहे.

कोविंद गवर्नर्स ऑफ इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के भी सदस्य रहे हैं. 2002 में कोविंद ने संयुक्त राष्ट्र के महासभा को संबोधित किया. कोविंद ने कई देशों की यात्रा भी की है.

रामनाथ कोविंद का जन्म एक अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में हुआ था. कोविंद ने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एलएलबी की पढ़ाई की है.गवर्नर ऑफ बिहार की वेबसाइट के मुताबिक कोविंद दिल्ली हाई कोर्ट में 1977 से 1979 तक केंद्र सरकार के वकील रहे थे. 1980 से 1993 तक केंद्र सरकार के स्टैंडिग काउंसिल में थे. कोविंद की शादी 30 मई 1974 को सविता कोविंद से हुई थी. इनके एक बेटे प्रशांत हैं और बेटी का नाम स्वाति है.

केंद्र सरकार ने 13.06.2017 को स्पष्ट किया कि गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स 1 जुलाई से ही लागू होगा और इसकी तैयारियों जोर-शोर से चल रही हैं। 

छोटे व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये देश की अर्थव्यव्स्था और औद्योगिक विकास को गति देकर नौकरियां पैदा करते हैं। हालांकि, देश में बहुत से व्यवसाय नियमित रूप से रिटर्न फाइल नहीं करते और न ही टैक्स अदा करते हैं। इसकी कुछ वजहें हो सकती हैं। मसलन, जानकारी का अभाव, परिस्थितिजन्य परेशानियां या कारोबारियों की यह धारणा कि आकार, संचालन और कमाई के लिहाज से उनका बिजनस बहुत छोटा है, इसलिए डेडलाइन मिस भी हो जाए तो चलता है। यही वजह है कि उन्हें टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस भेजकर टैक्स पेमेंट, इंट्रेस्ट, लेट फी और पेनल्टीज की मांग करता रहता है। 

एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के रूप में जीएसटी लागू होते ही मौजूदा अप्रत्यक्ष कर खत्म हो जाएंगे और इसके लागू होते ही किसी व्यवसाय की सफलता और विश्वसनीयता इस बात पर बहुत हद तक निर्भर हो जाएगी कि कारोबारी जीएसटी के नियमों का किस हद तक पालन कर रहे हैं।

जीएसटी सेल्फ-मॉनिटरिंग मेकनिजम पर काम करेगा। इस मॉडल के तहत वस्तु एवं सेवा मुहैया करवाने वाले और प्राप्त करने वालों के बीच इनवॉइस की बड़ी भूमिका होगी। दोनों इनवॉइस मैच करने और सप्लायर की ओर से टैक्स पे करने के बाद ही कन्ज्यूमर को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल पाएगा।

ऐसे में कोई भी ग्राहक वैसे वेंडरों के साथ ही बिजनस करना चाहेगा जो जीएसटी के नियम-कानून का सही-सही पालन करता हो। इस तरह जीएसटी लागू होने के बाद ग्राहक और दुकानदार या सेवा प्रदाता के बीच का भावनात्मक रिश्ता बदल जाएगा और कानून पालन की अनिवार्यता इस रिश्ते की जगह ले लेगी।

इस तरह जीएसटी लागू होने पर टैक्स कानून का पालन नहीं करने से फाइन, इंट्रेस्ट और पेनल्टीज के रूप में खर्चे बढ़ जाएंगे बल्कि आपके व्यवसाय पर भी असर होगा और कंप्लायंस रेटिंग भी घट जाएगी। चलिए, जीएसटी के तहत फाइल होने वाले विभिन्न प्रकार के रिटर्न्स के साथ-साथ इन्हें फाइल करते वक्त ध्यान रखने वाली बातों पर गौर करें.

महीने की 10 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-1 फॉर्म

जीएसटीआर-1 में आपको हर महीने बेचे गए सामान या दी गई सेवाओं का विस्तृत जिक्र करना होगा। रजिस्टर्ड डीलरों को सप्लाइज के हरेक इनवॉइस और ग्राहकों के लिए सामानों और सेवाओं की कुल कर योग्य कीमत की जानकारी देनी होगी। अगर दूसरे राज्य के ग्राहक को की गई आपूर्ति की कर योग्य कीमत 2.5 लाख रुपये से अधिक है तो हर हरेक इनवॉइस का विवरण देना होगा।

11 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-2

एजीएसटीआर-1 में सप्लायर की घोषणा के आधार पर महीने की 11वीं तारीख को प्राप्तकर्ता के लिए जीएसटीआर-2ए फॉर्म तैयार हो जाएगा। 11 से 15 तारीख के बीच इसमें संशोधन किया जा सकता है। रिटर्न फाइल करने के नजरिए से यह अवधि काफी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि अगर इस दौरान आपने जीएसटीआर-2ए में संशोधन नहीं किया तो आपकी इनपुट टैक्स क्रेडिट एलिजिबलिटी पर असर पड़ सकता है। खास बात यह है कि नियमों का पालन करने और समय की बचत करने में टेक्नॉलजी आपकी बहुत मददगार साबित होगी।

15 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-2

फॉर्म जीएसटीआर-2ए में दी गई जानकारी के अतिरिक्त कोई दावा करने के लिए 15 तारीख तक जीएसटीआर-2 फॉर्म जमा कर देना होगा।

जीएसटीआर-2 में दी गई जानकारी के आधार पर आपके ई-क्रेडिट लेजर में आईटीसी क्रेडिट हो जाएगा और इनवॉइस मैच होने पर यह पक्का हो जाएगा।

16 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-1ए

फॉर्म जीएसटीआर-2 में आप जो सुधार करेंगे, उन्हें आपके सप्लायर को फॉर्म जीएसटीआर-1ए के जरिए मुहैया कराया जाएगा। तब सप्लायर आपके संशोधनों को स्वीकार या खारिज करेगा। 

20 तारीख को जीएसटीआर-3 फॉर्म

जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2 के आधार पर 20 तारीख को ऑटो-पॉप्युलेटेड रिटर्न जीएसटीआर-3 उपलब्ध हो जाएगा जिसे आप पेमेंट के साथ जमा कर सकते हैं।

फॉर्म जीएसटी एमआईएस-1 में इनपुट टैक्स क्रेडिट की आखिरी स्वीकृतिफॉर्म जीएसटीआर-3 में मंथली रिटर्न फाइल करने की सही तारीख के बाद आंतरिक आपूर्ति और बाह्य आपूर्ति में मिलान किया जाएगा। तब जीएसटी एमआईएस-1 में इनपुट टैक्स क्रेडिट को आखिरी स्वीकृति मिलेगी। बिलों के मिलान के वक्त इनका सहारा लिया जाएगा.

सप्लायर का जीएसटीआईएन

रिसीपिअंट का जीएसटीआईएन

इनवॉइस या डेबिट नोट नंबर

इनवॉइस या डेबिट नोट डेट

टैक्सेबल वैल्यू टैक्स अमाउंट

इसी मिलान के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे पर विचार किया जाएगा। 

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, जीएसटी के नियमों का पालन एक दिन का काम नहीं है। जीएसटी के तहत रिटर्न साइकल मौजूदा रिवाजों को खत्म कर देगा। अभी ज्यादातर छोटे कारोबारी अपनी खरीद और बिक्री का आकलन कर एक दिन में रिटर्न तैयार कर लेते हैं। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि जीएसटी रिटर्न साइकल पूरे महीने चलने वाला है। दूसरी बात यह कि कारोबारियों को ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन आंकड़े सुरक्षित करने होंगे। तीसरी महत्वपूर्ण बात यह कि इस पूरी प्रक्रिया में टेक्नॉलजी की महत्वूर्ण भूमिका होगी। 

क्या आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं? सरकार उसके डीटेल जानना चाहती है। अगले महीने से सरकार अपने एक्सपेंडिचर सर्वे में पहली बार लोगों के ई-कॉमर्स खर्च के बारे में पूछेगी। नैशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (NSSO) अगला कन्ज्यूमर एक्सपेंडिचर सर्वे जुलाई में शुरू कर रहा है और यह जून 2018 तक चलेगा

देश भर में यह सर्वे हर साल होता है। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कमोडिटी और सर्विसेज पर खर्च के पारिवारिक स्तर के आंकड़े जुटाए जाते हैं। इस सर्वे से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी डेटा मैनेजरों का मानना है कि ई-कॉमर्स पर खर्च इस लेवल पर पहुंच गया है कि उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। वे इसे नैशनल इकनॉमिक डेटाबेस में शामिल करना चाहते हैं। 

रेडसीयर कंसल्टिंग की स्टडी के मुताबिक, 2016 में देश का ई-कॉमर्स सेक्टर 14.5 अरब डॉलर का था, जबकि देश में सालाना रिटेल स्पेंडिंग करीब 750 अरब डॉलर की है। ई-कॉमर्स सेक्टर अभी बहुत छोटा है, लेकिन इसमें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। अमेरिका बेस्ड मार्केट रिसर्च कंपनी फॉरेस्टर का मानना है कि 2021 तक कुल रिटेल सेल्स में एशिया पसिफिक का योगदान 25 पर्सेंट होगा। अभी ऑनलाइन रिटेल मार्केट में एशियाई देशों में चीन सबे बड़ा है, लेकिन भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

नैशनल एक्सपेंडिचर सर्वे में 5,000 शहरी ब्लॉक्स और 7,000 गांवों के करीब 1.2 लाख घरों को शामिल किया जाएगा। इससे स्टेट लेवल डेटा भी मिलेगा। सरकारी डेटा मैनेजर यह भी जानना चाहते हैं कि क्या ऑनलाइन प्राइसेज से महंगाई दर पर असर पड़ सकता है। अभी देश में ऑनलाइन कॉमर्स इतना बड़ा नहीं है कि देश भर में कीमतों पर उसका अधिक असर हो। अधिकारियों ने बताया कि अभी जो सर्वे होगा, उससे पता चलेगा कि ऑनलाइन रिटेल प्राइसिंग का भविष्य में महंगाई इंडेक्स पर क्या असर हो सकता है।

पुणे की परसिस्टेंट सिस्टम्स ने भर्तियों की पुरानी प्रथा को तोड़ते हुए अपनी टीम में कुछ फ्रीलांसरों और कंसल्टंट्स को शामिल कर लिया जिन्होंने कम वक्त के एक प्रॉजेक्ट पर काम किया। जॉब की दुनिया में यह थोड़ा नया आइडिया है जो ग्लोबल टेक्नॉलजी सर्विस इंडस्ट्री में धीरे-धीरे जोर पकड़ता जा रहा है। इसे 'गिग इकॉनमी' या वर्कफोर्स का ऊबराइजेशन (ऐप बेस्ड कैब मुहैया करानेवाली कंपनी ऊबर की तरह इस्तेमाल किया जाना) कहा जा रहा है, जहां लोग डिमांड-सप्लाइ मॉडल पर काम करते हैं। इसमें डिमांड और इंट्रेस्ट एरियाज के लिहाज से विभिन्न प्रॉजेक्ट्स के लिए एक से दूसरी कंपनी का भ्रमण करते रहते हैं। 

परसिस्टेंट सिस्टम्स के चीफ पीपल ऑफिसर समीर बेंद्रे ने कहा, 'हालांकि यह (ऊबराइजेशन) सर्विसेज कंपनियों में बड़े पैमाने पर अब तक नहीं दिखा है, लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है।' उन्होंने कहा, 'कुछ पॉकेट्स में हम इसका प्रयोग कर रहे हैं... हमें लगता है कि कुछ क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल के अच्छे अवसर हैं। मसलन, अगर महिलाएं मातृत्व अवकाश के बाद कम पर लौट रही हों तो।'

इन्फोसिस और विप्रो समेत दूसरी भारतीय आईटी कंपनियां 'ऊबराइज्ड वर्कफोर्स' के आइडिया पर विचार कर रही हैं। इस ट्रेंड के जोर पकड़ने के पीछे मार्केट में उठापटक और इंडियन आईटी सर्विसेज के सबसे बड़े मार्केट अमेरिका में बदली राजनीतिक स्थिति से कहीं बड़ी वजह युवाओं की प्राथमिकताओं का बदलना है। 

इन्फोसिस में एचआर हेड रिचर्ड लोबो ने कहा, 'वर्कफोर्स में मिलेनियल्स के बढ़ते दबदबे से वो सारी धारणाएं टूट रही हैं जो किसी एंप्लॉयी को कंपनी से जुड़ा और प्रेरित रखती थीं।' उन्होंने कहा, 'हम ज्यादा-से-ज्यादा मिलेजुले वर्कफोर्स के साथ डील कर रहे हैं जहां फुल टाइम और पार्ट टाइम एंप्लॉयी एक ही जगह पर काम करते हैं, लेकिन दोनों की जरूरतें बिल्कुल भिन्न हैं।'

लोबो कहते हैं कि फुल टाइम जॉब नहीं करने की चाहत रखनेवालों की तादाद बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा, 'जिस तरह लोगों को ऑन डिमांड कारों से आवाजाही की आदत हो गई है, उसी तरह एंप्लॉयर्स भी उन खास कामों के लिए लोगों की ऑन डिमांड हायरिंग कर लेंगे जिन्हें रेग्युलर स्टाफ नहीं निपटा सकते।' 

पिछले साल जब विप्रो ने अमेरिकी आईटी कंसल्टिंग फर्म ऐपिरियो का अधिग्रहण किया था, तब सीईओ आबिदअली नीमचवाला ने कहा था, 'हमें लगता है कि आईटी इंडस्ट्री में कामकाज का भविष्य कुछ हद तक ऊबराइज्ड होने जा रहा है।' 

केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय जीडीपी के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2017-18 करने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण और श्रमबल के आंकड़ो की गणना पूरी हो जाने के बाद 2018 के अंत तक यह काम कर लिया जाएगा।

केंद्रीय सांख्यिकी मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, 'मेरे मंत्रालय ने राष्ट्रीय लेखे-जोखे के आंकड़ों के लिए आधार वर्ष बदलकर 2017-18 करने की योजना बनाई है। इस काम के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।' गौड़ा मोदी सरकार के 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर अपने मंत्रालय की उपलब्धियों के बारे में बता रहे थे।

आधार वर्ष बदलने के मुद्दे पर मुख्य सांख्यिकीविद टी.सी.ए. अनंत ने कहा, ' रोजगार सर्वेक्षण और पारिवारिक उपभोग खर्च के आंकडे़ प्राप्त हो जाने के बाद आधार वर्ष को बदलने का काम किया जा सकता है। आधार वर्ष बदलने के मामले में ये आंकडे़ बहुत जरूरी इनपुट हैं।' 

अनंत ने चालू तिमाही अप्रैल-जून के दौरान अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि मॉनसून की बेहतर स्थिति और नीतिगत उपायों के चलते अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। अनंत के मुताबिक नए श्रमबल सर्वेक्षण और घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आंकडे़ 2018 में उपलब्ध हो जाएंगे।

भारत ने बाल श्रम पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) के दो समझौतों की पुष्टि कर दी। ये समझौते बाल श्रम के सबसे खराब तरीके को खत्म करने प्रति विश्व की प्रतिबद्धता और बच्चों को न्यूनतम बुनियादी शिक्षा दिलाने के लिए किए गए हैं। 

केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने समझौतों की पुष्टि के दस्तावेज मंगलवार को आइएलओ को सौंपे। आइएलओ ने भारत द्वारा बाल श्रम के खिलाफ उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों का स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने दोनों समझौतों की पुष्टि की थी। 

समझौता संख्या 138 रोजगार के लिए न्यूनतम आयु से संबंधित है और समझौता संख्या 182 बाल श्रम के खराब तरीकों को खत्म करने की तत्काल कार्रवाई से संबंधित हैं। नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने समझौते की पुष्टि करने पर भारत की सराहना की।

बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या का समाधान करने की दिशा में रिजर्व बैंक ने कारवाई तेज कर दी है. केंद्रीय बैंक ने 5,000 करोड़ रुपये से अधिक बकाए कर्ज वाले 12 बैंक खातों की पहचान कर ली है. इन खातों में बैंकों के कुल फंसे कर्ज का 25 प्रतिशत बकाया है. केंद्रीय बैंक इन खातों से बकाये की वसूली के लिए बैंकों को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कारवाई करने के लिए कह सकता है.

उल्लेखनीय है कि समूचा बैंकिंग क्षेत्र इस समय फंसे कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है. करीब 8 लाख करोड़ रुपये की राशि कर्ज में फंसी है, जिसमें से 6 लाख करोड़ रुपये की राशि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की है.

रिजर्व बैंक ने कहा है कि ये 12 बैंक खाते दिवाला कानून के तहत तुंरत कारवाई के लिए उपयुक्त हैं. हालांकि केंद्रीय बैंक ने इन खाताधारकों के नाम नहीं बताए हैं. रिजर्व बैंक ने एक आंतिरक सलाहकार समिति बनाई है. इस समिति में ज्यादातर स्वतंत्र बोर्ड सदस्य शामिल हैं. यह समिति रिजर्व बैंक को उन मामलों के बारे में सलाह देती है, जिनमें दिवाला कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

केंद्रीय बैंक के अनुसार आंतरिक परामर्श समिति (आईएसी) खातों को आईबीसी के तहत समाधान के लिए संदभर्ति किए जाने के लिए उद्देश्यपरक और गैर-भेदभावकारी मानदंडों पर पहुंची है.

आरबीआई ने बयान में कहा, 'आईएसी ने 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये तथा 31 मार्च, 2017 तक बैंकों द्वारा 60 प्रतिशत या उससे अधिक राशि को एनपीए घोषित खातों के मामले में आईबीसी के अंतर्गत कदम उठाने की सिफारिश की है.' बयान में कहा गया है कि आईएसी के मानदंडों के तहत सकल एनपीए में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले 12 खाते आईबीसी के तहत तत्काल कदम उठाये जाने के योग्य हैं.

शीर्ष बैंक आईएसी की सिफारिशों के आधार पर बैंकों को आईबीसी के तहत शोधन कार्रवाई के लिए बैंकों को निर्देश जारी करेगा. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ऐसे मामलों को प्राथमिकता देगा. दूसरे गैर-निष्पादित खातों के मामले में आईएसी ने यह सिफारिश की है कि ऐसे मामलों में बैंकों को छह माह के भीतर समाधान योजना तैयार करनी होगी. ऐसे मामले जहां छह माह के भीतर समाधान योजना पर सहमति नहीं बनती है, वहां बैंकों को दिवाला कानून के तहत शोधन अक्षमता कार्रवाई शुरू करनी होगी.

नेपाली कांग्रेस अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने 07.06.2017 को नेपाल के 40वें प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ले ली है. नेपाली कांग्रेस के 70 वर्षीय वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा नेपाल के अगले प्रधानमंत्री होंगे. वे चौथी बार प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे. इससे पहले शेर बहादुर देउबा 19995, 2001 और 2004 में प्रधानमंत्री बने थे. नेपाली संसद ने मंगलवार देउबा को नए प्रधानमंत्री के रूप में चुन लिया है.

सत्ता बंटवारा समझौते के तहत नौ महीने बाद प्रचंड ने इस्तीफा देते हुए देउबा का नाम प्रस्तावित किया था. नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी-नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष देउबा को मंगलवार को देश का 40वां प्रधानमंत्री चुना गया. कुल 601 सदस्यों वाली संसद में डाले गये 558 मतों मेंं से देउबा को 388 मत मिले. वह राष्ट्रपति पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार थे.

24 मई को अपना इस्तीफा देने  तथा प्रधानमंत्री का पद छोड़ने के बाद कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद के लिए देउबा का नाम प्रस्तावित किया था जिसके लिए नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामचंद्र पौडल और चार अन्य राजनीतिक पार्टियों ने उनका समर्थन किया था. खबरों के मुताबिक, देउबा इस सप्ताह अधिकतम वोटों के साथ प्रधानमंत्री बने हैं.

शेर बहादुर देउबा नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और भारत के साथ उनके संबंध मधुर रहे हैं. देउबा मधेसी समुदाय की समस्याओं को भी बातचीत के जरिए सुलझाने के पक्षधर रहे हैं. वे आठ बार नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. उनकी अगुवाई में नेपाली कांग्रेस मधेसी समस्या को बातचीत से सुलझाने के लिए पहल करता रहा है. 

देउबा ने मधेस आधारित पार्टियों की मांगों को पूरा करने के लिए सितंबर 2015 में लागू किये गये नेपाली संविधान में संशोधन करने में अहम भूमिका निभायी थी. उन्होंने स्थानीय स्तर के चुनावों के दूसरे चरण में भागीदारी के लिए मधेसी पार्टियों को रजामंद करने में भी प्रमुख भूमिका निभायी.

सुदूरवर्ती दादेलधुरा जिले से संसद के लिए निर्वाचित देउबा ने मधेसी लोगों की मांगों को पूरा करने के लिए नये संविधान में संशोधन का वादा किया है. वर्ष 1996 में प्रधानमंत्री के तौर पर देउबा के पूर्व के कार्यकाल में नेपाल और भारत ने नदी जल के साझा इस्तेमाल के लिए ऐतिहासिक महाकाली संधि पर हस्ताक्षर किया था.

नेपाल के तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र शाह ने 2002 में तख्तापलट से सत्ता हथिया ली थी और देउबा को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था, लेकिन लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद 2004 में नरेश को उन्हें फिर से पद पर नियुक्त करना पड़ा. वर्ष 2005 में नरेश ने उन्हें एक बार फिर सत्ता से हटा दिया और भ्रष्टाचार के आरोप पर उन्हें जेल की सजा भी हुई. गिरिजा प्रसाद कोइराला और देउबा के बीच विवाद के बाद 2002 में नेपाली कांग्रेस में विभाजन हो गया और देउबा के नेतृत्व में नेपाली कांग्रेस-डेमोक्रेटिक का गठन हुआ. वर्ष 2007 में कोइराला और देउबा के बीच समझौता होने के बाद नयी पार्टी का मूल पार्टी में विलय हो गया. 

वर्ष 2017-18 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों को 6.25 फीसद पर बरकरार रखा गया है। ब्याज दरों में बदलाव न किए जाने को लेकर एमपीसी के पांच सदस्यों ने सहमति जताई है। एमपीसी की अगली बैठक 1 और 2 अगस्त को होगी। हम अपनी इस खबर में आपको इस बैठक से जुड़ी 10 अहम बातें बताने जा रहे हैं।

मुख्य दरों में नहीं किया गया कोई बदलाव: एमपीसी की इस बैठक में रेपो रेट को 6.25 फीसद और रिवर्स रेपो को 6 फीसद पर बरकरार रखा गया है। यानी आरबीआई के इस फैसले से सस्ते कर्ज की उम्मीदों को झटका लगा है।

CRR और SLR: इस बैठक में सीआरआर (केश रिजर्व रेश्यो) को 4 फीसद पर स्थिर रखा गया है। वहीं एसएलआर में 0.50 फीसद की कटौती कर इसे 20 फीसद पर ला दिया गया है।

पॉलिसी मिनट्स: आरबीआई की इस मौद्रित नीति समिति के मिनट्स 21 जून को जारी किए जाएंगे, जिसमें साफ होगा कि ब्याज दरों को लेकर सदस्यों का कैसा रूख था।

एमपीसी की अगली बैठक: 6 और 7 जून को हुई मौद्रित नीति समिति (एमपीसी) की दो दिवसीय बैठक के बाद अब एमपीसी की अगली बैठक 1 और 2 अगस्त को होनी है।

महंगाई: आरबीआई ने कहा कि उसका महंगाई पर खासा ध्यान है। आरबीआई ने खुदरा महंगाई का लक्ष्य 4 फीसद पर रखा है। उसने कहा कि जीएसटी से महंगाई पर कोई खासा असर नहीं होगा।

जीवीए: आरबीआई ने जीवीए अनुमान को 7.4 फीसद से घटाकर 7.3 फीसद कर दिया है। सकल मूल्य वर्धित या ग्रॉस वैल्यू ऐडेड(GVA) अर्थशास्त्र की भाषा में किसी भी क्षेत्र, उद्योग, अर्थव्यवस्था या व्यावसायिक क्षेत्र में उत्पादित माल व सेवाओं के मूल्य की माप होती है।

एनपीए का मुद्दा: आरबीआई ने कहा कि हम एनपीए के मुद्दे पर सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आपको बता दें कि एनपीए के मुद्दे को लेकर सरकार और आरबीआई तेजी से काम कर रहे हैं। वहीं केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि उसका लक्ष्य छोटी बचत योजनाओं की दर स्थिर रखने का है।

क्रेडिट पॉलिसी के बाद चढ़े शेयर बाजार: करीब 2.45 बजे आरबीआई की क्रेडिट पॉलिसी के बाद शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल रही है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 77 अंक चढ़कर 31267 के स्तर पर और निफ्टी 21 अंक की तेजी के साथ 9658 के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 0.57 फीसद और स्मॉलकैप में 0.34 फीसद की तेजी देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा तेजी बैंकिंग सेक्टर में देखने को मिल रही है। दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 35 हरे निशान में और 16 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं।

जीडीपी पर गवर्नर: आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फंडामेंटल फैक्टर्स की वजह से जीडीपी में स्लोडाउन आया है। हाल में आए जीडीपी आंकड़े यह दर्शाते हैं कि नोटबंदी से पहली ही आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ रही थी।

जीडीपी के अनुमानों पर ही अर्थव्यवस्था पर प्रदर्शन आंका जाता है।क्या बोले उर्जित पटेल: क्रेडिट पॉलिसी के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा, “अप्रैल में महंगाई के आंकड़ों ने चौंकाया है। किसान कर्ज मांगी से वित्तीय घाटा बढ़ सकता है। आने वाले महंगाई आंकड़ों पर हमारी नजर है। महंगाई और सुस्त ग्रोथ से दरें घटाना मुमकिन नहीं है।”

चीन की बढ़ती ताकत और उसकी विस्‍तारवादी नीति को लेकर अब बड़े देशों को चिंता होने लगी है। इसका बड़ा उदाहरण अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की वह रिपोर्ट है जिसमें चीन के पाकिस्‍तान और और अफ्रीका के जिबुति में मिलिट्री बेस स्‍थापित करने की बात कही है। जिबुति की भौगोलिक स्थिति सामरिक दृष्टि से काफी अहम है। यह अफ्रीकन देश हिंद महासागर के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर बसा हुआ है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है चीन विदेशों में बंदरगाहों के जरिए अपनी विस्‍तारवादी नीति को अंजाम देने में लगा है। फिर चाहे वह पाकिस्‍तान का ग्‍वादर हो या कोई और। पूर्व राजनयिक विवेक काटजू भी मानते हैं कि चीन इस तरह से इस पूरे इलाके में अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगा हुआ है।

जिबुति इसलिए भी खास है कि क्‍योंकि यहां पर अमेरिका का भी नेवल बेस है। यह लाल सागर और दक्षिण से स्‍वेज नहर में जाने का रास्‍ता भी है। अमेरिका का जहां रक्षा बजट 180 बिलियन डॉलर है वहीं चीन का रक्षा बजट करीब 954 बिलियन युआन (करीब 140.4 बिलियन डॉलर) है। वर्ष 2017 चीन ने पाकिस्‍तान को आठ पनडुब्बियों को बेचने की डील भी की है। वर्ष 2011-15 के दौरान चीन के हथियारों की बिक्री 9 बिलियन से बढ़कर 20 बिलियन तक पहुंच गई है।

यहां पर यह भी ध्‍यान रखना जरूरी होगा कि चीन के कर्ज में डूबे श्री लंका के लिए हबनतोता बंदरगाह को उसे सौंपना बहुत बड़ी मजबूरी बन गया है। हालांकि सरकार की तरफ से इसके करीब 80 फीसद शेयर चीन की कंपनी को बेचने की बात कही जा रही है। कुल मिलाकर यह चीन के ही कब्‍जे में है। इसपर चीन ने करीब आठ बिलियन डॉलर का खर्च किया है। श्री लंका की हालत इतनी खराब है कि वह चीन का कर्ज चुका पाने में नाकाम दिखाई दे रहा है। इसके अलावा पाकिस्‍तान का ग्‍वादर पोर्ट जिसकी सुरक्षा का जिम्‍मा भी चीन के पास है, में भी स्थिति काफी कुछ ऐसी ही है। ऐसे में चीन लगातार भारत को घेरने और भारत की चिंता का सबब बनता जा रहा है। भारत के प्रभाव को रोकने के लिए चीन की यह नई रणनीति का एक अहम हिस्‍सा है।

अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश की गई 97 पन्नों की रिपोर्ट में पिछले साल चीन की सेना द्वारा की गई गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। अमेरिका के मुताबिक, चीन ने अपने सुरक्षा खर्च में जमकर खर्च किया है। पेंटगन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने इस क्षेत्र में 115 खरब से भी ज्यादा का बजट खर्च किया है जबकि वह अपना रक्षा बजट आधिकारिक तौर पर 90 खरब बताता रहा है। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि चीन के नेता आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार को नजरअंदाज करते हुए रक्षा खर्च में बढ़ोतरी के पक्षधर हैं। गौरतलब है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पाकिस्‍तान चीन द्वारा बेचे जाने वाले हथियारों का एक बड़ा ग्राहक है। चीन ने 2011 से 2015 के बीच कुल 12 खरब रुपये के हथियारों का निर्यात किया, जिसमें से करीब 6 खरब रुपये के हथियार अकेले पाकिस्तान ने खरीदे हैं।

रक्षा विशेषज्ञ अनिल कौल मानते हैं कि चीन और पाकिस्‍तान की विदेशनीति काफी भारत को देखते हुए बनाई जाती है। अफ्रीका में चीन के मिलिट्री बेस का होना इस बात का सुबूत है कि चीन हर तरफ से भारत पर नजर बनाए रखना चाहता है। वह लगातार भारत को घेरने की साजिश रच रहा है। इस साजिश के तहत उसने पहले श्रीलंका में बंदरगाह पर कब्‍जा जमाया है। इसके बाद पाकिस्‍तान में सीपैके के जरिए ग्‍वादर पोर्ट पर कब्‍जा किया है और अब अफ्रीका तक जा पहुंचा है। वह इसको विस्‍तारवादी नीति के अलावा भारत के घेराव की नीति भी मानते हैं। उनका यह भी कहना है कि भारत की कभी भी इस तरह की कोई पॉलिसी नहीं रही है। पेंटागन की रिपोर्ट पर बात करते हुए उन्‍होंने माना कि चीन के बढ़ते कदमों की आहट से अमेरिका भी काफी परेशान है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका चीन को अपने वर्चस्‍व के लिए अब खतरा मानने लगा है। लिहाजा उसको इसे लेकर चिंता होनी स्‍वाभाविक है। 

इलेक्शन कमीशन राष्ट्रपति चुनाव के लिए बुधवार को तारीखों का एलान कर रहा है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर नसीम जैदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, ‘‘मौजूदा प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी का टेन्योर 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। उससे पहले जरूरत पड़ने पर 17 जुलाई को वोटिंग होगी और 20 जुलाई को काउंटिंग होगी। राष्ट्रपति चुनाव के लिए सीक्रेट बैलेट वोटिंग होती है।’’ बता दें कि 5 राज्यों के असेंबली इलेक्शन के बाद प्रेसिडेंट इलेक्शन के लिए एनडीए की पोजिशन मजबूत है। एनडीए को अपनी पसंद का प्रेसिडेंट बनाने के लिए महज 20 हजार वोटों की जरूरत है। इसके लिए उसे उन गैर-एनडीए और गैर-यूपीए दलों की जरूरत है, जिन्होंने ये तय नहीं किया है कि वे किस तरफ जाएंगे। इनका वोट पर्सेंटेज करीब 13% है। यही वोट तय करेंगे कि अगला प्रेसिडेंट किसकी पसंद का होगा।

राष्ट्रपति चुनाव का शेड्यूल :

चुनाव आयोग का नोटिफिकेशन: 14 जून 

नॉमिनेशन दाखिल करने की आखिरी तारीख: 28 जून

नॉमिनेशन की स्क्रूटनी: 29 जून

नॉमिनेशन वापस लेने की आखिरी तारीख: 1 जुलाई

वोटिंग (जरूरत पड़ने पर): 17 जुलाई, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे

काउंटिंग (जरूरत पड़ने पर): 20 जुलाई, सुबह 11 बजे से

चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने कहा कि राजनीतिक दल अपने संसद सदस्यों और विधानसभा सदस्यों को राष्ट्रपति चुनाव के बारे में कोई भी व्हिप नहीं जारी कर सकते हैं। वोटों की गिनती दिल्ली में होगी। चुनाव आयोग ही प्रेसिडेंशियल इलेक्शन के विजेता का एलान करेगा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा और विधानसभा की 13 सीटें खाली हैं। 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का फैसला राष्ट्रपति चुनाव के बाद लिया जाएगा।

वोट की वैल्यू

MP:एक सांसद के वोट की वैल्यू तब पता चलेगी जब आप विधायकों के कुल वोटों को सांसदों की कुल संख्या से भाग दें। इस फॉर्मूला के तहत अभी एक MP के वोट की वैल्यू 708 है।

MLA:राज्य की आबादी / (वहां के कुल विधायकों की संख्या * 1000)।

किसी भी दल को अपनी पसंद का प्रेसिडेंट बनाने के लिए 50% यानी 5,49, 442 वोटों की जरूरत है।

NDA के पास कितने वोट?

लोकसभा, राज्यसभा, स्टेट असेंबली को मिलाकर टोटल 5,27,371 वोट होते हैं। एनडीए का टोटल वोट पर्सेंटेज 48.10 फीसदी है।

UPA के पास कितने वोट?

साझा कैंडिडेट उतारने की स्थिति में सभी अपोजिशन पार्टियां एक हो जाती हैं तो टोटल वोट 5,68,148 होंगे यानी करीब 51.90%। ये पसंद का प्रेसिडेंट बनाने के लिए काफी हैं।

ये वोट तय करेंगे, किसकी पसंद का होगा अगला प्रेसिडेंट

NDA की नजर AIADMK (5.36%), BJD (2.98%), TRS (1.99%), YSRCP (1.53) जैसी पार्टियों पर रहेगी। इन पार्टियों का सपोर्ट किसे जाएगा, अभी तय नहीं है। इनका टोटल वोट 13% के आसपास है। ऐसे में अगर कोई एक बड़ी पार्टी या दो पार्टियों का सपोर्ट मिल जाता है तो NDA अपनी पसंद का प्रेसिडेंट बना लेगी।

फाबिओला जानोती, इटली

2014 में ब्रिटेन के अख़बार द गर्डियन ने इटली की भौतिक विज्ञानी फाबिओला जानोती को 'ब्रह्मांड के रहस्यों की कुंजी वाली महिला' करार दिया था. फाबिओला ने 2016 में स्विटज़रलैंड स्थित दुनिया के अहम विज्ञान केंद्र यूरोपियन ऑर्गेनाइजेशन फोर न्यूक्लियर रिसर्च में पार्टिकल फिजिक्स की अगुवाई की. 1994 से फाबिओला इस सेंटर में एक अहम भौतिक विज्ञानी खोजकर्ता थीं. 2009 से 2013 तक लार्ज हैड्रन कोलाइडर में एटलस के लिए प्रवक्ता रहीं. इन्होंने इस बात को दुनिया के सामने रखा कि प्रकृति में व्यापक पैमाने पर पार्टिकल क्यों हैं.

क्रिस्टिना फिगेरस, कोस्टा रिका

क्रिस्टिना से जब बीबीसी मुंडो ने पूछा कि उन्हें विज्ञान से प्रेम कैसे हुआ तो उन्होंने कहा कि प्रकृति उनका पहला घर रहा है. क्रिस्टिना ने कहा कि प्रकृति उनका अब भी पहला घर है. क्रिस्टिना एन्थ्रोपॉलोजिस्ट हैं और वह कोस्टा रिका के तीन बार राष्ट्रपति रहे जोसे फिगेरस फेरर की बेटी हैं. क्रिस्टिना 2012 और 2016 के बीच संयुक्त राष्ट्र संघ में फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज की कार्यकारी सचिव रहीं. क्रिस्टिना ने 2010 में कानकुन, 2011 में डर्बन, 2013 में वार्सा और 2014 में लिमा के जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस की अगुवाई की थी. पेरिस में 2015 के ऐतिहासिक जलवायु समझौते में क्रिस्टिना की अहम भूमिका रही थी.

किरण मजूमदार-शॉ, भारत

अपने योगदान के कारण किरण मजूमदार-शॉ विज्ञान की दुनिया में पहचान के लिए मोहताज नहीं हैं. 2010 में अमरीका की महत्वपूर्ण पत्रिका टाइम ने वर्षिक रैंकिंग 'टाइम 100' में हमारी दुनिया की 100 प्रभावशाली लोगों में जगह दी थी. बायोटेक्नोलॉजी में अपने योगदान के कारण उन्हें हीरो की कैटिगरी में जगह दी गई थी. 2014 में फ्यूचर मैगज़ीन में किरण को एशिया-पसीफिक में सबसे प्रभावशाली महिला करार दिया था. किरण का जन्म भारत में हुआ था. वह बायोकॉन की संस्थापक और अध्यक्ष हैं. यह कंपनी बायोटेक्नॉलजी के क्षेत्र में शोध करती है.

गोयन शॉटवेल, अमरीका

अमरीकी मैगज़ीन फोर्ब्स ने दुनिया की 100 शक्तिशाली महिलाओं में गोयन को 76वें पायदान पर रखा था. इस लिस्ट में कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में वह एकमात्र महिला थीं. गोयन की विशेषज्ञता अप्लाइड मैथ्स में भी है. वह स्पेसएक्स की अध्यक्ष हैं. यह कंपनी स्पेस तकनीक पर काम करती है. इस कंपनी का जोर ख़ासकर स्पेस ट्रांसपोर्ट में खर्च को कम करना है.

मारग्राटा चान, चीन

चीनी फिजिशन मारग्राटा चान ने रोगाणुरोधक को लेकर काम किया है. चान ने गानरीअ जैसी बीमारियों को लेकर सतर्क किया था. वह विश्व स्वास्थ संगठन की महानिदेशक भी रही हैं. चान सांस संबंधी बीमारियों और बर्ड फ्लू की विशेषज्ञ हैं. चान ने महिलाओं और बच्चों की सेहत को लेकर काफी काम किया है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने 05.06.2017 को GSLV मार्क-III-D1 रॉकेट का श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण किया. इस रॉकेट की लंबाई 140 फ़ीट है और वज़न 200 हाथियों जितना. यानी 640 टन.इसीलिए इसे 'दानवाकार रॉकेट' की संज्ञा दी गई है और इस दिन को ऐतिहासिक माना गया. इस सैटेलाइट को तैयार करने में इसरो के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को 15 साल लगे जिसमे भारत में ही विकसित किया गया क्रायोजेनिक इंजन लगाया गया है.

इस इंजन के लिए 'लिक्विड ऑक्सीजन' और 'हाइड्रोजन' को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.एक चौथाई से अधिक आबादी के ग़रीबी रेखा के नीचे होने के बावजूद अंतरिक्ष परियोजनाओं पर इतना भारी-भरकम खर्च करने के लिए अक्सर भारत की आलोचना की जाती रही है. तो फिर भारत अंतरिक्ष को लेकर इतना उत्साहित क्यों है?

1-सस्ता है : भारत की दलील है कि विदेशी परियोजनाओं के मुक़ाबले अंतरिक्ष परियोजनाओं पर उसका ख़र्च बहुत कम है. लॉन्च करने की लागत करीब 50 लाख डॉलर है. उपग्रह की अनुमानित उम्र 10 साल मानी जाती है और संचालन का खर्च भी दिन पर दिन घटता जाता है. इस तरह माना जा रहा है कि भारत का अंतरिक्ष प्रक्षेपण उद्योग दुनिया में सबसे सस्ता है.

विज्ञान अनुसंधान पर भारत लगातार बजट बढ़ाता जा रहा है, ख़ासकर अंतरिक्ष अनुसंधान पर. कई बार तो भारत सरकार की इस बात के लिए आलोचना भी हुई है कि वो विज्ञान पर ज़रूरत से ज़्यादा खर्च कर रही है.

2-अंतरिक्ष उद्योग : अभी तक अंतरिक्ष उद्योग की 75 फ़ीसदी हिस्सेदारी अमरीका, फ्रांस और रूस के पास है. ये उद्योग काफ़ी मुनाफ़े वाला है और भारत जैसे विकासशील देश के पास इसमें तरक्की की काफी गुंजाइश है.

अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की बात करें तो भारत इसमें कुछ किलोग्राम से लेकर कई टन के सैटेलाइट लॉन्च होते हैं. सैटेलाइट इंडस्ट्री एसोसिएशन के मुताबिक अरबों डॉलर की इस इंडस्ट्री में भारत का हिस्सा बहुत कम है और तकरीबन आधा प्रतिशत से अधिक है. जबकि चीन का मार्केट शेयर करीब तीन प्रतिशत है. भारत पहले अपने उपग्रह प्रक्षेपण के लिए रूस या फ्रांस जैसे दूसरे देशों पर निर्भर था, लेकिन ये बात अब बीते जमाने की बात हो गई है.

3-बदल रहा है बाज़ार : मौसम और संचार के लिए छोड़े जाने वाले ज़्यादातर सैटेलाइट लगभग चार टन वज़नी होते हैं और इनके प्रक्षेपण के लिए बड़े रॉकेट की ज़रूरत होती है.जीएसएलवी मार्क 3 के तौर पर भारत न केवल अभीतक के सबसे विशाल रॉकेट के प्रक्षेपण में कामयाब रहा है बल्कि इसके साथ गया सेटेलाइन जीसैट 19 को संचार के लिहाज से एक गेमचेंजर माना जा रहा है, जो आने वाले दिनों में संचार और इंटरनेट की दुनिया में क्रांति ला सकता है.

अकेला जीसैट-19 पुराने 6-7 संचार उपग्रहों की बराबरी कर सकता है. फिलहाल भारत के 41 उपग्रहों में से 13 संचार उपग्रह हैं. वैश्विक उपग्रह बाजार, जिसमें उपग्रहों के निर्माण, लॉन्चिंग, और उनके बीच संवाद बनाए रखना शामिल है, 120 बिलियन अमरीकी डॉलर का है. हाल के सालों में कनेक्टिविटी की बढ़ती मांग के चलते ये बाजार तेजी से विकसित हुआ है.

4-अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा : विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अपनी कम कीमतों के साथ सेटेलाइट लॉन्च उद्योग में अपनी विशेष जगह बना सकता है.आलोचक सवाल उठाते हैं कि जब सामाजिक विकास के मामले में भारत इतना पीछे है तो भारत सरकार वैज्ञानिक विकास पर धन खर्च क्यों कर रही है.

भारत में आज भी करोड़ों लोगों को साफ पेयजल, अबाध बिजली आपूर्ति, शौचालय और रेल-रोड सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन बीती सरकारों ने तर्क दिया है कि विज्ञान और तकनीक पर खर्च से समावेशित सामाजिक विकास होता है. हालिया रॉकेट लॉन्च इसी दिशा में एक कदम है. भारत को उम्मीद है कि विकासशील देश अपने उपग्रह लॉन्च करने के लिए पश्चिमी देशों की जगह भारत का रुख करेंगे. आलोचना के बावजूद भारत सरकार ने इस मद में बजट को बढ़ा दिया है और शुक्र ग्रह के लिए एक मिशन लॉन्च करने की योजना बनाई है.

आयरलैंड में भारतवंशी लियो वराडकर को रूलिंग एलायंस की सबसे बड़ी पार्टी फ़ाइन गेल का नेता चुना गया है। वो देश के पहले समलैंगिक पीएम होंगे। 38 साल के वराडकर ने अपने प्रतिद्वंद्वी और हाउसिंग मिनिस्टर साइमन कोवेनी को 60 फीसदी वोटों से हराया और अब वो आयरलैंड के अब तक के सबसे युवा पीएम भी होंगे।

वराडकर ने जीत के बाद कहा," मेरा चुनावी नतीजा ही सबकुछ बयां कर रहा है। मुझे पता है कि मेरे पिता पांच हजार किलोमीटर दूर चलकर आयरलैंड में एक नया घर बनाने का सपना देखते थे। मुझे लगता है कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि एक दिन उनका बेटा इस देश का प्रधानमंत्री होगा। आज देश में हर माता पिता को अपने बच्चे के ऊपर गर्व होना चाहिए।

"18 जनवरी 1979 को डबलिन में पैदा हुए वराडकर के पिता अशोक मुंबई से आए एक डॉक्टर थे, जिन्होंने आयरिश मूल की नर्स मरियम से शादी की थी। उन दोनों की मुलाकात इंग्लैंड के बर्कशर में साथ काम करने के दौरान हुई थी और बाद में वो दोनों 70 के दशक में आयरलैंड में बस गए थे।

वराडकर ने अपना इलेक्शन कैंपेन सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रखा था। प्रधानमंत्री बनने के बाद अब उनके सामने आयरलैंड की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और ब्रेग्जिट के बाद के हालात से निपटने जैसी चुनौतियां होंगी।

सऊदी अरब, बहरीन, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई), यमन और मिस्र ने कतर से डिप्लोमैटिक रिलेशन खत्म कर दिए। इन देशों ने कतर पर आतंकवाद को समर्थन को देने का आरोप लगाया। इस बीच, एतिहाद और एमिरेट्स एयरलाइंस ने कतर की अपनी सभी उड़ानों को रद्द कर दिया। कतर ने भी सऊदी जाने वाली उड़ानें सस्पेंड कर दीं।

सऊदी अरब के एक ऑफिशियल के मुताबिक, "हम अपने पड़ोसी मुल्क कतर से रिलेशन खत्म कर रहे हैं। वह आतंकियों को पनाह दे रहा है। साथ ही वहां मुस्लिम ब्रदरहुड, ISIS और अल कायदा जैसे आतंकी संगठन एक्टिव हैं। देश की नेशनल सिक्युरिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।"

सऊदी ने कतर से सारे डिप्लोमैटिक और कॉन्स्युलर रिलेशन फैसला किया है। ये भी कहा है कि कतर के साथ जमीन, समुद्र और फ्लाइट्स के जरिए कोई संपर्क नहीं रखा जाएगा। सऊदी ने ये भी कहा, "पिछले कुछ सालों में कतर ने नियम-कायदों का जमकर वॉयलेशन किया है।"

चारों देशों ने कतर से अपने डिप्लोमैटिक रिलेशन खत्म कर लिए। चारों का मानना है कि कतर आतंकवाद को समर्थन देता है। इस फैसले से 36 साल पुराने गल्फ यूनियन में दरार पड़ गई। बता दें कि सऊदी, यूएई, बहरीन, ओमान और कतर ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल का गठन किया था। काउंसिल, मिडल ईस्ट में काफी रसूख रखता था।

कतर की कितनी अहमियत?

कतर लिक्विफाइड नेचरल गैस (LNG) बेचने वाला सबसे बड़ा देश है। वह दुनिया की एक तिहाई एलएनजी की डिमांड पूरी करता है। भारत हर साल उससे 85 लाख टन गैस खरीदता है। भारत, कतर से एलएनजी खरीदने वाला जापान के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। कतर का अल-उदैद एयरबेस यूएस मिलिट्री की सेंट्रल कमांड के 10 हजार सैनिक रहते हैं। कतर में 2022 में फुटबॉल वर्ल्ड कप होना है। साथ ही वह ISIS से लड़ रहीं अमेरिकी अगुआई वाली कोएलिशन फौजों का मेंबर भी है।

कतर पर क्या होगा असर?

पांचों देशों के फैसले के बाद कतर के डिप्लोमैट्स को 48 घंटे में ये देश छोड़ने होंगे। वहीं, कतर के नागरिकों को 2 हफ्ते का वक्त दिया गया है। साथ ही, कतर मिस्र, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई के एयरस्पेस और पोर्ट्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। एमिरेट्स और एतिहाद एयरलाइंस ने कतर की अपनी सभी उड़ानों को सस्पेंड कर दिया है।

खाड़ी देशों ने क्यों उठाया ये कदम?

काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशन के गेल जेमाख के मुताबिक, चारों देशों के फैसला लेने की तीन वजहें हैं।

1. सऊदी की अगुआई में गल्फ देशों का मानना है कि कतर, मुस्लिम ब्रदरहुड (एक सुन्नी कट्टरपंथी संगठन) के मेंबर और मिस्र के पूर्व प्रेसिडेंट मोहम्मद मुरसी को सपोर्ट करता था। मार्च 2014 में सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने कतर से अपने एम्बेसडर्स बुला लिए थे।

2. हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी का दौरा किया था। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन मानता है कि कतर, ईरान को सपोर्ट करता है। अमेरिका, ईरान का विरोधी है।

3. कतर पर आरोप था कि मई में हैकर्स ने उसकी न्यूज एजेंसी पर कब्जा कर लिया था। इसमें उसके अमीर की तरफ से ईरान और इजरायल पर कमेंट्स किए गए थे। इन देशों ने इस पर नाराजगी जताते हुए दोहा बेस्ड अल जजीरा नेटवर्क समेत कतर मीडिया को ब्लॉक करने की बात कही थी।

कतर ने क्या कहा?

कतर ने चारों देशों के फैसले को अपनी सॉवेरीनटी (प्रभुसत्ता) का वॉयलेशन बताया। अपने सिटिजंस से कहा कि फैसले से उनपर कोई असर नहीं पड़ेगा।बता दें कि 2013 में दोहा में अफगान तालिबान ने भी अपना एक ऑफिस खोला था।

भारत पर कितना असर

कितने भारतीय रहते हैं कतर में? करीब 6 लाख 50 हजार।

क्या भारत से कतर जाने पर असर पड़ेगा?

भारत से कतर जाने पर संभवत: कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि फ्लाइट्स फारस की खाड़ी होकर दोहा जाती हैं। अगर सऊदी समेत कुछ देश कतर जाने वाली फ्लाइट्स पर बैन लगाते भी हैं, तो ये फारस की खाड़ी पर लागू नहीं होगा।

कतर में रहने वाले भारतीय सऊदी, मिस्र, बहरीन जा पाएंगे?

कतर में रहने वाले भारतीयों को सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, यमन और यूएई जाने में परेशानी हो सकती है। चारों देशों ने किसी तरह से कतर को एयरस्पेस और पोर्ट्स देने से मना कर दिया है। भारतीयों को अगर इन देशों में जाना है तो कई देशों से घूमकर जाना होगा।

क्या भारत के तेल-गैस के बिजनेस पर असर पड़ेगा?

पेट्रोनेट कंपनी में फाइनेंस हेड आरके गर्ग के मुताबिक, "4 अरब देशों के कतर से रिश्ते खत्म करने का भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।" बता दें कि पेट्रोनेट एलएनजी, भारत की सबसे बड़ी गैस इम्पोर्टर कंपनी है। ये हर साल 85 लाख टन एलएनजी खरीदती है और कतर से ही बिजनेस करती है।

इसरो के सबसे ताकतवर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल GSLV मार्क 3 डी-1 ने 05.06.2017 को पहली उड़ान भरी। इसका वजन 200 हाथियों के बराबर है। इसे आंध्र प्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा गया। रॉकेट ने एक हाथी के बराबर वजनी देश के सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-19 को 16 मिनट में स्पेस ऑर्बिट में पहुंचाया। इससे आने वाले कुछ सालों में भारत में हाई स्पीड इंटरनेट की शुरुआत होगी। इसरो ने कहा कि आने वाले वक्त में नए जीएसएलवी रॉकेट से इंसानों को स्पेस की सैर कराई जा सकती है। इस ऐतिहासिक मिशन की कामयाबी पर नरेंद्र मोदी और प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने इसरो को बधाई दी।

1) क्या है ये मिशन?

इसरो के सबसे ताकतवर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल GSLV मार्क 3 डी-1 ने पहली उड़ान भरी। यह अपने साथ देश के सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-19 (वजन 3136 kg ) को स्पेस में लेकर गया।

2) क्या है GSAT-19?

GSAT-19 देश में तैयार सबसे वजनी सैटेलाइट है। इसमें मॉडर्न प्लेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह हीट पाइप, फाइबर ऑप्टिक जायरो, माइक्रो-मेकैनिकल सिस्टम्स एक्सीलेरोमीटर, केयू-बैंड टीटीसी ट्रांसपोंडर और लीथियम आयन बैटरी से लैस है। इस पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं

3) कम्युनिकेशन सैटेलाइट से क्या फायदा?

कुछ साल में देश में इंटरनेट स्पीड बढ़ेगी। सबसे तेज लाइव स्ट्रीमिंग मिलेगी। जहां फाइबर ऑप्टिकल नेटवर्क नहीं है, वहां फायदा होगा।- GSAT-19 और GSAT-11 कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग से डिजिटल इंडिया को मजबूती मिलेगी।

4) क्या है GSLV?

GSLV इसरो का सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है। इसका पूरा नाम जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है। इस रॉकेट को इसरो ने डेवलप किया है। इसके जरिए 2001 से अब तक 11 बार सैटेलाइट स्पेस में भेजे जा चुके हैं। आखिरी उड़ान 5 मई, 2017 को भरी थी, तब यह जीसैट-9 को अपने साथ लेकर रवाना हुआ था।

5) GSLV मार्क 3 की खासियत क्या है?

GSLV मार्क 3 की लॉन्चिंग को स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव लाने वाले मिशन के तौर पर देखा जा रहा है। अब भारत दूसरे देशों पर डिपेंड हुए बिना बड़े और भारी सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग देश में ही कर सकेगा। यह स्पेस में 4 टन तक के वजन वाले सैटेलाइट्स को ले जा सकता है। इसकी क्षमता मौजूदा जीएसएलवी मार्क 2 की दो टन की क्षमता से दोगुनी है। - धरती की कम ऊंचाई वाली ऑर्बिट तक 8 टन वजन ले जाने की ताकत रखता है, जो भारत के क्रू को लेकर जाने के लिए लिहाज से काफी है। इसरो पहले ही स्पेस में 2 से 3 मेंबर भेजने का प्लान बना चुका है। इसके लिए करीब 4 अरब डॉलर के फंड मिलने का इंतजार है।

6) इसे क्यों कहा जा रहा है फैट ब्वॉय सैटेलाइट?

GSLV मार्क 3 का वजन 630 टन है, जो 200 हाथियों (एक हाथी-करीब 3 टन) के बराबर है। ऊंचाई करीब 42 मीटर है। इसका वजन 5 पूरी तरह से भरे बोइंग जम्बो विमान या 200 हाथियों के बराबर है। इसीलिए इसे फैट ब्वॉय सैटेलाइट कहा जा रहा है। इसको बनाने में 160 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

7) रॉकेट लॉन्चिंग में इसरो का क्या रिकॉर्ड?

इसरो के लिए यह मिशन आसान काम नहीं होगा। पहले रॉकेट लॉन्च में भारत का रिकॉर्ड कुछ खास अच्छा नहीं रहा है। 1993 में इसरो का PSLV पहले लॉन्च में फेल हो गया था। तब से अब तक इसके 39 लॉन्च कामयाब रहे हैं। - GSLV Mk-1 भी 2001 में अपने पहले लॉन्च में असफल हो गया था। तब से लेकर अब तक उससे 11 लॉन्च हुए हैं, जिसमें से आधे कामयाब रहे हैं।

8) इससे भारत को क्या फायदा मिलेगा?

GSLV मार्क 3 की पहली उड़ान कामयाबी होने से स्पेस में इंसान को भेजने का भारत का सपना जल्द पूरा हो सकता है। इसरो का यह जम्बो रॉकेट इंसानों को स्पेस में लेकर जाने की कैपिसिटी रखता है। इसरो के चेयमैन एएस. किरण कुमार ने कहा था कि अगर 10 साल या कम से कम 6 कामयाब लॉन्चिंग में सब कुछ ठीक रहा तो इस रॉकेट को 'धरती से भारतीयों को स्पेस में पहुंचाने वाले’ सबसे अच्छे ऑप्शन के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

9) भारत से पहला अंतरिक्ष यात्री कौन था?

स्पेस में जाने वाले भारत के पहले शख्स का नाम राकेश शर्मा है, जिन्होंने 2 अप्रैल 1984 को सोवियत यूनियन के मिशन के दौरान उड़ान भरी थी। शर्मा इंडियन एयरफोर्स के पायलट थे।

10) कितने देशों के पास यह कैपिसिटी?

GSLV मार्क 3 की कामयाबी के साथ भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम वाला दुनिया का चौथा देश बनने के और करीब पहुंच जाएगा।

11) स्पेस इंडस्ट्री में भारत कैसे आगे निकला?

रिकॉर्ड सैटैलाइट छोड़े। इसरो जो सैटेलाइट तैयार करता है, उसकी लागत कम होती है। इस वजह से वह ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री में आगे निकल रहा है। किसी हॉलीवुड मूवी की लागत से कम खर्च में भारत ने मंगल पर अपना मिशन भेज दिया था। इसरो कई करोड़ डॉलर के स्पेस लॉन्चिंग मार्केट में पकड़ मजबूत कर चुका है।

GSAT-11 को भी इसी साल छोड़ा जाएगा

इसरो के चेयरमैन किरण कुमार ने बताया कि GSAT-19 के बाद GSAT-11 को भी छोड़ा जाएगा। ये दो सैटेलाइट गेम चेंजर माने जा रहे हैं। कम्युनिकेशन में ये क्रांतिकारी बदलाव होगा। इनकी लॉन्चिंग डिजिटल इंडिया की दिशा में बेहद अहम कदम होगा। ये हाई स्पीड इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने के साथ ही कम्युनिकेशन को असरदार बनाने में अहम रोल निभाएंगे। - स्पेस एप्लिकेशन सेंटर, अहमदाबाद के डायरेक्टर तपन मिश्रा ने बताया कि अगर यह लॉन्चिंग सफल रही तो अकेला GSAT-19 सैटेलाइट स्पेस में पहले से मौजूद पुराने किस्म के 6-7 कम्युनिकेश सैटेलाइट के ग्रुप के बराबर होगा। आज स्पेस में मौजूद 41 भारतीय सैटेलाइट्स में से 13 कम्युनिकेशन सैटेलाइट हैं। - मिश्रा के मुताबिक, इसे साल के आखिर में GSAT-11 छोड़ा जाएगा। इन दोनों सैटेलाइट के काम शुरू करते ही हाई क्वालिटी इंटरनेट, फोन और वीडियो सर्विस मिलनी शुरू हो जाएगी। स्पेस में पहले से मौजूद GSAT सैटेलाइट्स का प्रभावी डाटा रेट एक गीगाबाइट प्रति सेकंड है, जबकि GSAT-19 प्रति सेकंड 4 गीगाबाइट डाटा और GSAT-11 तेरह गीगाबाइट प्रति सेकंड की दर से डाटा ट्रांसफर करने के काबिल है।

मैनचेस्टर और लंदन के हमलों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने आतंकवाद के खिलाफ चार सूत्री कार्यक्रम का ऐलान किया और कहा कि इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा के पंथों पर जीत हासिल करनी होगी.

उन्होंने कहा कि इस्लामी कट्टरपंथ की दुर्भावनापूर्ण विचारधारा घृणा का प्रचार करती है, झगड़े के बीज बोती है और विभाजनवाद को बढ़ावा देती है. उसका कहना है कि शांति और लोकतंत्र इस्लाम के अनुकूल नहीं हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, "यह विचारधारा के तौर पर इस्लाम और सच्चाई की विकृति है."प्रधानमंत्री मे ने अपने चार सूत्री कार्यक्रम के सिलसिले में कहा कि दूसरे इंटरनेट को कट्टरपंथियों को पनाह नहीं देना चाहिए. तीसरे असली दुनिया में आतंकवादियों से सुरक्षित जगहें ले ली जानी चाहिए. चौथे ब्रिटेन की आतंकवाद विरोधी रणनीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री ने शिकायत की, "हमारे देश में कट्टरपंथ के लिए बहुत ज्यादा सहिष्णुता है.

हमें उसे सार्वजनिक सेवा और समाज से निकालने के लिए और प्रयास करना चाहिए.

" सार्वजनिक सेवा से प्रधानमंत्री मे का इशारा संभवतः स्कूलों की ओर था.

सउदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं.इन देशों ने क़तर पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है. इन सभी देशों का कहना है कि क़तर मुस्लिम ब्रदरहुड समेत कई चरमपंथी संगठनों की मदद कर रहा है.सउदी अरब में सरकार संचालित समाचार एजेंसी एसपीए के मुताबिक रियाद ने क़तर के साथ अपनी ज़मीनी, हवाई और समुद्री सीमा को बंद कर दिया है.

सउदी अरब के अधिकारियों ने कहा है कि चरमपंथ और कट्टरपंथ के ख़तरों से ख़ुद को बचाने के लिए सीमाओं को बंद किया गया है.मिस्र के विदेश मंत्रालय ने भी क़तर के जहाज़ों और पोतों के लिए हवाई क्षेत्र और बंदरगाहों को बंद की जानकारी दी है.

संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर के राजनयिकों को वापस जाने के लिए 48 घंटों का समय दिया है. संयुक्त अरब अमीरात की समाचार एजेंसी डबल्यूएएम के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात ने क़तर पर चरमपंथी, कट्टरपंथी और सांप्रदायिक संगठनों की मदद करने और फंडिग देने का आरोप लगाया है.

बहरीन की सरकार संचालित समाचार एजेंसी ने बताया है कि क़तर पर बहरीन के अंदरूनी मामलों में दखल देने का आरोप लगाया गया है.

दुनिया में कई ऐसे इलाके हैं जहां नये देश बनाने की मांग उठ रही है. आइए नजर डालते हैं दुनिया के सबसे नये नवेले देशों पर :

दक्षिणी सूडान

दक्षिणी सूडान दुनिया का सबसे नया देश है, जिसने 9 जुलाई 2011 को सूडान से आजादी का एलान किया. लेकिन आजादी के बाद से इस देश का सफर अच्छा नहीं रहा. तेल के संसाधनों से मालामाल साउथ सूडान गरीबी और सूखे का शिकार है. इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता और गृह युद्ध ने भी इस देश को उबरने नहीं दिया है.

कोसोवो

कोसोवो ने एकतरफा तौर पर 17 फरवरी 2008 को सर्बिया से आजादी की घोषणा की. सर्बिया के साथ साथ रूस ने भी इस कदम का विरोध किया. कोसोवो को अमेरिका और यूरोपीय संघ के बड़े देशों ने मान्यता दे दी है लेकिन अभी तक वह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं है.

मोंटेनेग्रो और सर्बिया

1991 में यूगोस्लाविया के विघटन के बाद सर्बिया और मोंटेनेग्रो के नाम से एक देश की स्थापना हुई. लेकिन 2006 में उसका बंटवारा हो गया. मोंटेनेग्रो और सर्बिया दो अलग अलग देश बन गए. अलग होने की शुरुआत मोंटेनेग्रो ने की और 21 मई 2006 को एक जनमत संग्रह कराया. इसमें 55 प्रतिशत लोगों ने सर्बिया से अलग होने के हक में फैसला दिया.

पूर्वी तिमोर

पूर्वी तिमोर को अब तिमोर लेस्ते के नाम से जाना जाता है. उसे 20 मई 2002 को इंडोनेशिया से आजादी मिली. हालांकि इंडोनेशिया से अलग होने का फैसला पूर्वी तिमोर के लोग एक जनमत संग्रह में कई साल पहले ही कर चुके थे. जनमत संग्रह के बाद इलाके में हिंसा भड़क उठी. इंडोनेशिया समर्थक चरमपंथियों ने लोगों पर हमले किए, जिसके बाद वहां संयुक्त राष्ट्र बलों को तैनात करना पड़ा था.

पालाऊ

पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित पालाऊ 250 द्वीपों में फैला हुआ है, जिसकी आबादी 21 हजार से भी कम है. इसे एक अक्टूबर 1994 को आजादी मिली. हालांकि सांस्कृतिक और भाषाई अंतरों को देखते हुए पालाऊ ने इससे 15 साल पहले ही माइक्रोनेशिया से अलग होने का फैसला कर लिया था. संपन्न पर्यटन उद्योग के कारण उसे प्रशांत क्षेत्र के अमीर देशों में गिना जाता है.

एरिट्रिया

संयुक्त राष्ट्र ने 1952 में एरिट्रिया को इथियोपिया में एक स्वायत्त क्षेत्र के तौर पर स्थापित किया. लेकिन सम्राट हेले सेलासी ने 1962 में इसे पूरी तरह अपने राज्य का हिस्सा बना लिया. इससे वहां गृह युद्ध छिड़ गया जो 30 साल चला. लेकिन 1991 में इरीट्रियन पीपल्स लिबरेशन फ्रंट ने इथियोपिया की सेना को वहां से भगा दिया और दो साल बाद 1993 में आजादी की घोषणा की.

चेक रिपब्लिक और स्लोवाकिया

एक जनवरी 1993 को चेकोस्लोवाकिया को संसद ने भंग कर दिया और नतीजतन में दो अलग अलग देश अस्तित्व में आये. चेक गणराज्य और स्लोवाकिया. एक पार्टी वाले कम्युनिस्ट शासन को खत्म करने वाली "वेलवेट क्रांति" के बाद यह "वेलवेट डायवोर्स" था. दोनों ही देश अब यूरोपीय संघ का हिस्सा है जबकि स्लोवाकिया ने तो यूरो को भी अपना लिया है.

नामीबिया

अफ्रीकी देश नामीबिया 1990 तक दक्षिण अफ्रीका का हिस्सा था. कभी जर्मनी का उपनिवेश रहे नामीबिया पर पहले विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने कब्जा कर लिया था. लेकिन 21 मार्च 1990 को यह दक्षिण अफ्रीका से आजाद हो गया. इसकी आजादी के लिए 20 साल तक साउथ वेस्ट अफ्रीका पीपल्स ऑर्गेनाइजेशन नाम के गुट ने छापामार अभियान चलाया था.

जल्द ही वैज्ञानिक पृथ्वी की सबसे बड़ी दूरबीन की मदद से ब्रह्मांड की गहराई में झांक सकेंगे. लंबी और मुश्किल प्लानिंग के बाद यूरोपियन सदर्न ऑब्जरवेट्री ने दूरबीन निर्माण का काम शुरू किया है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो ईएलटी (एक्सट्रीमली लार्ज टेलिस्कोप) 2024 से काम करने लगेगा.

ईएलटी में 39 मीटर व्यास के पांच विशाल दर्पण लगे हैं. फिलहाल जो सबसे बड़ी दूरबीन है, उसके लेंस का व्यास मात्र 10 मीटर है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नई दूरबीन कितनी ताकतवर होगी.

ईएलटी में दो आधुनिक स्पेक्ट्रोग्राफ लगे हैं. एडेप्टिव ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी से लैस दूरबीन वायुमंडल की हलचल को नजरअंदाज करते हुए ब्रह्मांड का नजारा दिखाएगी. इसके दर्पण एक सेकेंड में सैकड़ों बार पोजिशन बदल सकते हैं.

ईएलटी से मिलने वाली तस्वीरें हब्बल टेलिस्कोप के मुकाबले 15 गुना ज्यादा शार्प होंगी. इंसान की आंख के मुकाबले यह 1,000 गुना ज्यादा रोशनी को खीचेंगी. वैज्ञानिकों का दावा है कि ईएलटी की मदद से 400 साल बाद ब्रह्मांड के क्षेत्र में इंसान को क्रांतिकारी जानकारियां मिलेंगी.

यूरोपियन सदर्न ऑब्जरवेटरी की इस विशाल दूरबीन को बनाने के लिए 16 देश साथ आए हैं. पहले चरण में ही एक अरब यूरो का खर्च आएगा. दूरबीन की क्षमता को बढ़ाने के लिए इन्हें अटाकामा रेगिस्तान के सेरो आर्माजोनास पहाड़ पर बनाया जा रहा है. दूरबीन समुद्र तल से 3,048 मीटर ऊपर होगी.

धरती के अलावा क्या कहीं और जीवन मौजूद है? सदियों से इंसान इस सवाल का जवाब खोजना चाहता है. सुपर टेलिकोस्प इसका जबाव खोजने में मदद करेगा. यह सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रहों के बारे में भी बारीक जानकारी मुहैया कराएगी.

ब्रह्मांड में मौजूद आकाशगंगाएं और उन्हें निगलते ब्लैक होल. ईएलटी के जरिये यह भी पता चलेगा कि आकाशगंगाएं कैसे बनती हैं. ईएलटी की मदद से मिले डाटा को सुपर कंप्यूटर्स पर प्रोसेस करने से ब्लैकहोल और आकाशगंगाओं के भविष्य की गणना भी मुमकिन हो सकेगी.

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम किसानों के लिए शुरू की गयी एक क्रांतिकारी योजना है जिससे किसानों की खेती और उपज पर काफी फर्क पड़ रहा है। इससे फसल की  उत्पादकता में वृद्धि हो रही है और खेती की लागत कम हो रही है। इस स्कीम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़, राजस्थान में किया गया था। सॉयल हेल्थ कार्ड मिट्टी के पोषक तत्वों की स्थिति एवं और मिट्टी की उर्वरकता में सुधार के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की सिफारिश की जानकारी किसानों को प्रदान करता है। इससे किसानों को खेत की मिट्टी की प्रकृति की जानकारी भी मिलती  है।

इसके बाद किसान उसी अनुसार खेत में उर्वरक और अन्य रसायन डालता है। इससे लागत में कमी आती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।  सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम के पहले 2 वर्षीय चक्र (2015-17) में अभी तक 2.53 करोड़ लक्षित नमून एकत्र किए जा चुके  हैं एवं 93% नमूने परीक्षित किए जा चुके हैं। राज्य सरकारों द्वारा लगभग 14 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे हैं जिसमें 31 मई तक 8 करोड़ किसानों को कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। अगले तीन माह में शेष सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे। देश में अब तक सॉयल हेल्थ कार्ड के इस्तेमाल से काफी अच्छे परिणाम आए हैं।

16 राज्यों के 136 जिलों के किसानों से आई प्रतिक्रिया निम्नलिखित तथ्य दर्शाती है:-

1) नाइट्रोजन उर्वरकों के उपयोग में कमी आयी है और फॉस्फोरस पोटाश और सूक्ष्मपोषक तत्वों के उपयोग में बढ़ोतरी हुई  है।

2) धान में 16% से 25%,  दालों और तिलहनों में 10% से 15% खेती की लागत में कमी की सूचना मिली है।

3) धान में 10% से 22%, गेहूं और ज्वार में 10% से 15%, दालों में 10% से 30% और तिलहन में 35% से 66% की उत्पादन वृद्धि दर्ज की गयी है।

केंद्रीय बिजली, कोयला, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा एवं खनन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने 29 मई, 2017 से 1 जून, 2017 के बीच बर्लिन, लिपजिग और म्यूनिख की यात्रा की। मंत्री ने यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय और बिजनेस बैठकें कीं।

यात्रा की शुरुआत जर्मन विकास एजेंसी जीआईजेड (गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनाबेट) के उपाध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफ बेयर के साथ बैठक से हुई।

श्री गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे भारत ने हाइड्रो और परमाणु समेत अपनी हरित ऊर्जा क्षमता को 100 जीडब्ल्यू से अधिक बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत ने अपनी सौर ऊर्जा की क्षमता को वर्ष 2014 से पांच गुना अधिक बढ़ा दिया है। मंत्री महोदय ने जर्मन पक्ष को सूचित किया कि कैसे भारत ने किफायती नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए उसकी नीलामियों में सफलता प्राप्त की और जर्मनी, जो कि फीड इन टैरिफ (एफआईटी) से दूर हो रहा है, भी इसे अपना सकता है।

130 से अधिक देशों में जीआईजेड की वैश्विक उपस्थिति को देखते हुए, श्री गोयल ने ईईएसएल के साथ साझेदारी का प्रस्ताव रखा, जिससे भारत को अपने ऊर्जा दक्षता उत्पादों को दुनिया भर में वितरित करने में मदद मिलेगी। मंत्री महोदय ने दीर्घकालिक धन,  ग्रिड संतुलन, विद्युत वाहनों के विकास, ऑफ ग्रिड प्रणाली, हरित ऊर्जा कॉरिडॉर पर भी बात की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र के विजन 'मेक इन इंडिया मिटेलस्टांड (एमआईआईएम)' के मद्देनजर श्री गोयल ने कुछ जर्मन कंपनियों से भेंट की और उनसे मेक इन इंडिया से जुड़ने व उसमें संभावनाएं तलाशने को लेकर विचार-विमर्श किया। बर्लिन और म्युनिख में आयोजित बैठकों के दौरान मंत्री महोदय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे जर्मन कंपनियां भारत में मेक इन इंडिया के तहत कम लागत पर अपना दुनिया भर के लिए उत्पाद बनाकर इस अवसर का लाभ उठा सकती हैं।

जर्मन और भारतीय कंपनियों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से श्री गोयल ने सिफारिश की कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) सचिवालय सीआईआई, फिक्की आदि के सहयोग से मासिक बैठक करे। इस बैठक में वित्तीय कंपनियों समेत जर्मन और भारतीय कंपनियां शामिल हो सकती हैं।

जर्मन पर्यावरण, प्राकृति संरक्षण, बीएमयूबी संघीय मंत्री डॉ. बारबरा हेंड्रिक्स और उनके अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक में श्री गोयल ने दोहराया कि कैसे भारत ने श्री मोदी के नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा को आस्था का विषय बना लिया है और वह पेरिस प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) दसवीं कक्षा की परीक्षाओं के नतीजे घोषित कर गिए गए हैं। सीबीएसइ की सभी वेबसाइटों पर यह नतीजे अपलोड कर दिये गए हैं।

CBSE बोर्ड से मान्यता प्राप्त करीब 16,000 स्कूलों के 16, 67, 573 विद्यार्थी इस साल 10वीं की परीक्षा में बैठे थे। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपनी सभी वेबसाइटों पर परीक्षा के नतीजों को अपलोड कर दिया है। बोर्ड ने 12वीं कक्षा के नतीजे बीते रविवार को ही घोषित किए थे। उसके बाद से ही 10वीं कक्षा के नतीजों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। CBSE की सभी वेबसाइटों पर यह नतीजे अपलोड कर दिए गए हैं।

CBSE ने 28 मई को 12वीं कक्षा के नतीजे घोषित किये थे। मॉडरेशन यानी नंबर बढ़ाने की पॉलिसी को लेकर चली खींचतान की वजह से इस बार 12वीं का रिजल्ट भी थोड़ा लेट हो गया था। कॉलेज के हाई कट-ऑफ को देखते हुए CBSE ने मॉडरेशन पॉलिसी को खत्म कर दिया था, जिसके अंतर्गत कठिन सवालों पर स्टूडेंट्स को ग्रेस मार्क्स दिये जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, अभिभावकों की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बोर्ड को मॉडरेशन पॉलिसी जारी रखने का निर्देश दिया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि इस वर्ष परीक्षा में स्टूडेंट्स का मूल्यांकन ग्रेस मार्क्स पॉलिसी के आधार पर किया जाये। बोर्ड ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जाने का फैसला किया था। मॉडरेशन पॉलिसी के अंतर्गत कठिन सवालों के लिए स्टूडेंट्स को 15 प्रतिशत अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आपसी व्यापारिक, आर्थिक संबंधों को विस्तार देने की इच्छा प्रकट करते हुए विमान और वाहनों के विनिर्माण के लिए कुछ संयुक्त उपक्रम गठित करने पर सहमति जताई है. प्रधानमंत्री के साथ शिखर बैठक के बाद राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच आर्थिक सहयोग पुन: वृद्धि के रास्ते पर लौट रहा है.

भारत-रूस शिखर बैठक के बाद मोदी और पुतिन की उपस्थिति में दोनों देशों के बीच में बौद्धिक संपदा अधिकार समझौते, कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में दो संयंत्रों के निर्माण वृहद योजना पर समझौता, 2017-19 के लिए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का द्विपक्षीय समझौता, नागपुर-सिंकदराबाद के बीच एक उच्च गति की संपर्क लाइन की व्यवहार्यता पर अध्ययन और संयुक्त स्टॉक कंपनी एएलआरओएसए और भारत की रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के बीच सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

इसके अलावा रूस में डिजाइन किए गए परमाणु बिजली संयंत्रों को भारत में नए जगहों पर स्थापित करने, द्विपक्षीय लीजिंग प्लेटफार्म, द्विपक्षीय निवेश गतिविधियों का विकास और रेल परिवहन वाहनों के विकास के संबंध में भी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए. रूस का भारत में कुल चार अरब डॉलर का निवेश है जबकि भारतीयों ने रूस में आठ अरब डॉलर निवेश किए हैं.

शिखर वार्ता के बाद हुए भारत-रूस सीईओ फोरम की बैठक में दोनों देशों के कंपनी जगत के प्रतिनिधियों को संबांधित करते हुए पुतिन ने कहा कि पिछले सात दशक में पहले सोवियत संघ और बाद में रूस ने भारत में इस्पात कारखानों, बिजली संयंत्र, रसायन संयंत्र, गैस पाइपलाइनें, कृषि कारोबारी सुविधाओं और परिवहन ढांचे का किया.

हाल के वर्षों में उनका द्विपक्षीय व्यापार कम हो रहा था लेकिन इस साल इसमें सुधार आया है. वर्ष 2017 की पहली तिमाही में यह 29 प्रतिशत बढ़ा है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने 19 परियोजनाओं पर सहमति जताई है. इसमें नई तकनीक, दवा, कृषि, विमान, ऑटोमोबाइल विनिर्माण, हीरा उद्योग और परिवहन ढांचे के लिए संयुक्त उपक्रम गठित करने पर सहमति शामिल है.

चीन की महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट वन रोड' (ओबीओआर) योजना ने विश्व का ध्यान तो अपनी ओर खींच ही रखा है, खासकर चीन के पड़ोसी देश इसकी ओर बहुत ललचाई नजरों से देख रहे हैं. उन्हें लगता है कि जब 900 अरब डॉलर की इतनी बड़ी धनराशि खर्च की जाएगी तो उसका कुछ न कुछ हिस्सा तो सभी को मिलेगा.

बीजिंग में सम्पन्न हुए दो-दिवसीय बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) में भूटान को छोड़ कर भारत के सभी पड़ोसी देश इकट्ठा हुए, लेकिन भारत इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अनुपस्थित रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के आलोचक इसे विदेशनीति के मोर्चे पर सरकार की एक और विफलता बता रहे हैं क्योंकि भारत इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ गया है, लेकिन वहीं कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अभी भी इस योजना से लाभ उठा सकता है, बशर्ते वह अपने पत्ते सोच-समझकर खेले.

इस परियोजना का एक हिस्सा चीन और यूरेशिया के बीच सड़क एवं रेल संपर्क स्थापित करना है और दूसरा हिस्सा चीन को सामुद्रिक रास्तों के जरिये दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया एवं अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों से जोड़ना है. यदि वह इस प्रयास में सफल हो जाता है, तो इस परियोजना के अंतर्गत स्थापित व्यापारिक संपर्कों के तहत दुनिया की 65 प्रतिशत आबादी, एक-तिहाई वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद और विश्व अर्थव्यवस्था की समस्त वस्तु एवं सेवाओं का एक-चौथाई हिस्सा आ जाएगा.

दिलचस्प बात यह है कि जहां अमेरिका, विकसित यूरोपीय देश और रूस इस परियोजना में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, वहीं चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के मुद्दे पर विरोध जता कर भारत ने इससे किनारा कर लिया है. यह कॉरिडोर जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्र में से होकर गुजरता है जिस पर भारत का दावा है.

लेकिन सी. राजामोहन जैसे विदेशनीति के जानकार इसमें भी सकारात्मक तत्व देख रहे हैं. उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर विवाद में असल में भारत और पाकिस्तान---ये दो पक्ष ही नहीं हैं. इसमें चीन शुरू से ही एक पक्ष रहा है लेकिन भारत इस तथ्य की अनदेखी करता रहा है. चीन ने आर्थिक कॉरिडोर में भागीदारी के लिए भारत को भी आमंत्रित किया है. भारत को इस पेशकश को स्वीकार करके देखना चाहिए कि चीन और पाकिस्तान इस मामले में कितने ईमानदार हैं. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के सामरिक महत्व को पूरी तरह से इस्तेमाल करके भारत चीन की सामुद्रिक महत्वाकांक्षाओं का सामना कर सकता है. भारत ने हमेशा अपने सीमांत प्रदेशों के महत्व को नजरंदाज किया है और इसका खामियाजा भी भुगता है. चीन की ओबीओआर परियोजना इन सीमांत प्रदेशों में उसकी स्थिति को और भी अधिक कमजोर कर सकती है यदि उसने अभी से वहां के ढांचागत विकास पर ध्यान नहीं दिया.

इस परियोजना ने भारत को नींद से जगाने का काम किया है वरना अचानक मोदी सरकार की ओर से उन परियोजनाओं की शिनाख्त न की जाती जो बरसों से उपमहाद्वीप का पड़ोसी देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी के देशों के साथ कनेक्टिविटी यानी सड़क, रेल, जलमार्ग और वायुमार्ग द्वारा संपर्क बढ़ाने के लिए चल रही हैं. लगता है अब उन्हें समाप्त करने पर सरकार विशेष ध्यान देने वाली है.

मोदी सरकार के आलोचकों का कहना है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडॉर पर उसका आपत्ति करना बिलकुल उचित था लेकिन इस आधार पर उसे दो-दिवसीय सम्मेलन का बहिष्कार नहीं करना चाहिए था और उसमें भाग लेकर वहां अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी. चीन पाकिस्तान के ग्वादर बन्दरगाह और श्रीलंका के हमबंटोटा बन्दरगाह के साथ सीधे जुड़कर अपनी सामुद्रिक शक्ति में कई गुना वृद्धि करने वाला है. ऐसे में भारत को अपनी सक्रियता बढ़ानी होगी. अलग-थलग पड़ जाना उसके हित में नहीं है.

पशु क्रूरता निवारण कानून के तहत भारत सरकार के नये प्रावधानों ने देश के विभिन्न हल्कों में विवाद और चिंताएं बढ़ा दी हैं. खानपान की आजादी छिनने से लेकर डेयरी, चमड़ा और खाद्य उद्योगों पर अस्तित्व का संकट भी मंडराने लगा है.

मवेशी बाजार के नियमन को लेकर जोड़े गए नये नियम के तहत पशु मेलों में मवेशियों की खरीदफरोख्त उन्हें मारने के लिए नहीं की जा सकती. सिर्फ कृषि उद्देश्य के लिए ही पशुओं को बाजार में लाया जा सकता है वो भी लिखित गारंटी के साथ. मवेशियों में गाय, भैंस, बछड़े, सांड और ऊंटों को भी शामिल किया गया है.

सरकार का कहना है कि मवेशियों की खरीद और पशु बाजारों को रेगुलेट करने के नये नियमों का एक विशिष्ट लक्ष्य है. पर्यावरण मंत्रालय के इस नये आदेश से राजनैतिक दलों में खासकर, दक्षिण भारत में कड़ी आलोचना हो रही है. आरोप है कि इस आदेश से करोड़ों लोगों को रोजगार देने वाला सेक्टर तबाह हो जाएगा. एक आकलन के मुताबिक, डेयरी फार्म की 40 फीसदी कमाई अनुत्पादक गायों की खरीद से आती है. अगर इन गायों के लिए बाजार ही नहीं होगा तो डेयरी किसानों का उत्पादन चक्र ठप हो जाएगा.

ऐसे समय में जब यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देश, दूध पाउडर और अन्य दूध उत्पादों को बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में खपा रहे हैं और आगे भी खपाने के लिए तैयार बैठे हैं, भारत के डेयरी किसानों या कोऑपरेटिवों को अपने हाल पर छोड़ देना, समझ नहीं आता है. क्या सरकार विदेशी कंपनियों के लिए जगह बना रही है और क्या इसीलिए पशु कल्याण के नाम पर ये अजीबोगरीब नियम थोपे जा रहे हैं. भारत का सुप्रीम कोर्ट भी समय समय पर इस बारे में फैसले दे चुका है कि उन आर्थिक स्थितियों में पशुओं को मारने पर पूर्ण प्रतिबंध की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जब बेकार सांड या बैल या गाय को रखना समाज पर बोझ हो और इस तरह ये जनहित में ना हो.

पशुधन की 2012 की गणना के मुताबिक देश में 30 करोड़ से कुछ अधिक मवेशी हैं. कृषि सेक्टर में इनका योगदान करीब 26 फीसदी का है. पशुधन उत्पाद का मूल्य खाद्यान्न के मूल्य से ज्यादा है. औसतन गाय-भैंसों से हर साल 1,200 किलो दूध मिलता है, जिसकी कीमत उत्पादन की जगह पर ही करीब 24 हजार ठहरती है. वध किए गए मवेशी से मरे हुए पशुओं की तुलना में बेहतर चमड़ा हासिल होता है. करीब 18 अरब अमेरिकी डॉलर वाले भारत के चमड़ा उद्योग में मवेशी की खाल एक बड़ा आधार है. भारत के जूता चप्पल उद्योग का 95 फीसदी हिस्सा मवेशी के चमड़े से ही आता है. दवा, खेल और निर्माण उद्योगों में चमड़ा अवशेषों का उपयोग भी काफी ज्यादा होता है. इस तरह यह साफ है कि डेयरी उद्योग, बूचड़खाने, बीफ और चमड़ा उद्योग एक दूसरे के पूरक हैं.

सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता वाले भारत में खानपान की संस्कृति भी निराली है. भारत एक मांसाहारी देश है, यहां आज भी 70 फीसदी आबादी किसी न किसी किस्म के मीट उत्पादों का सेवन करती है, जिसमें चिकन से लेकर बीफ तक शामिल है. कई आदिवासी समाजों में तो अन्य जंगली बड़े और छोटे जानवरों का मांस खाया ही जाता है. दूसरी बात ये कि ऐसे देश में जहां महिलाओं और बच्चों की एक बड़ी तादाद एनीमिया और कुपोषण की शिकार हो, वहां बीफ प्रोटीन और फैट का एक सस्ता स्रोत है और गरीबों के आहार का हिस्सा भी रहा है.सन 2012 में भारत ने छत्तीस लाख सत्तर हजार मीट्रिक टन बीफ का उत्पादन किया था. इसमें से 20 लाख मीट्रिक टन बीफ की घरेलू स्तर पर खपत हुई और बाकी वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस, सऊदी अरब, कुवैत और मिस्र जैसे देशों को निर्यात कर दिया गया.

विदेश व्यापार महानिदेशालय भारत में वध किए जाने वाले पशुधन का आंकड़ा भी जारी करता है. ऐसे करीब साढ़े तीन करोड़ मवेशियों से करीब चार करोड़ टन मीट मिलता है. बीफ उत्पादन में भारत का दुनिया में पांचवा नंबर है और घरेलू खपत के मामले में सातवां. भारत से भैंस का मीट ही निर्यात किया जाता है, इसमें वो दुनिया का नंबर एक देश है. ये निर्यात 2007 में साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2016 में साढ़े 26 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का था.नुकसान की प्रकट अप्रकट श्रृंखला का दूसरा सिरा भी देखें. गरीब किसान के पास बेकार जानवर को पालने का न तो संसाधन है न क्षमता.

अगर मवेशियों की संख्या अत्यधिक होती जाएगी तो आवारा पशुओं की एक नयी समस्या उठ खड़ी होगी, खासकर शहरी इलाकों में जो पहले ही तंग यातायात व्यवस्था के शिकार हैं. अधिक संख्या में मवेशियों का अर्थ होगा, ज्यादा घास और चारा, जिससे चरागाहों पर दबाव बढ़ेगा, कृषि जमीनों और घास भरे मैदानों पर दबाव पड़ेगा, उनका क्षरण होगा और कुल मिलाकर पर्यावरण को भी चोट पहुंचेगी.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेषज्ञ जानवरों की संख्या बढ़ने पर चिंता प्रकट कर चुके हैं, क्योंकि इसका अर्थ होगा मीथेन गैस का ज्यादा उत्पादन जो कि इन मवेशियों की शारीरिक संरचना और पाचन क्रिया की एक विशिष्टता है. बीमार, अशक्त जानवरों की देखरेख पर होने वाले खर्च के बोझ और बीमारियों की आशंका और मृत जानवरों को दफनाने से जुड़े स्वास्थ्य नुकसान भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते. रोजगार छिनने और सामाजिक जीवन के भी छिन्न-भिन्न होने और तस्करी के संदेहों, गोकशी आदि को लेकर रक्तपात और हिंसा का खतरा बढ़ेगा.

इस तरह पशु कल्याण की एक अतिवादी और कट्टरपंथी किस्म की ये नैतिकता, राष्ट्रीय विकास को ही अंततः कमजोर करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि स्लॉटर पर प्रतिबंध से देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि पर सीधी चोट पहुंचती है और वो सालाना दो फीसदी की दर से नीचे आ सकती है.

चीन यूरोप में एक बड़ा निवेशक बनकर उभरा है. चीन ने यूरोप में तमाम रणनीतिक और हाई टेक साझेदारियां की हैं. चीन का यूरोप में ये दखल उत्साहवर्धक भी है और चिंता में डालने वाला भी. एक नजर यूरोप में चीन के बड़े निवेश पर..

कूका : चीन के चर्चित निवेशों में से एक है जर्मन रोबोटिक कंपनी कूका का अधिग्रहण. कूका को चीनी कंपनी मिडया ने 4.6 अरब यूरो में खरीदा है. इस सौदे में संवेदशनशील टेक्नोलोजी के आदान-प्रदान पर चिंता जताई गई थी लेकिन जर्मन सरकार ने इस सौदे को मंजूरी देते हुये कहा था कि इससे देशहित प्रभावित नहीं होंगे.

न्यूक्लिर प्रोजेक्ट : ब्रिटेन में भी चीन बड़ा निवेशक है. साल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ब्रिटेन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तकरीबन 54.6 अरब यूरो के सौदों पर हस्ताक्षर हुये थे. इनमें से एक निवेश था ब्रिटेन के विवादित न्यूक्लिर प्रोजेक्ट में चीन की फंडिग. फिलहाल ब्रिटेन के साथ चीन मुक्त व्यापार समझौते पर भी विचार कर रहा है.

तंगी का लाभ : आर्थिक तंगी से गुजर रहे ग्रीस में भी चीनी कंपनियां निवेश के अवसर खंगाल रही हैं. पिछले साल चीन की सरकारी कंपनी कोस्को ने ग्रीस के पायरियोस बंदरगाह को 36.85 करोड़ यूरो में खरीदा था. हालांकि कोस्को ने इसमें 35 करोड़ यूरो के अतिरिक्त निवेश का भी वादा किया है. इस बंदरगाह को एशिया, पूर्वी यूरोप और उत्तर अफ्रीका के प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाता है.

अधिग्रहण : चीन की सरकारी कंपनी कैमचाइना ने 38 अरब यूरो में स्विस कीटनाशक कंपनी सिंगेंटा का अधिग्रहण किया. यह चीन का यूरोप में सबसे बड़ा सौदा है. सिंगेंटा एजी एक स्विस कंपनी है जो एग्रोकेमिकल्स और बीज तैयार करती है. एक बायोटेक्नोलॉजी कंपनी होने के नाते यह जिनोमिक रिसर्च भी करती है.

रद्द समझौते : हालांकि यूरोप और अमेरिका में तमाम नियामकीय बाधाओं के चलते चीन के कई सौदे रद्द भी हुये हैं. कानूनी फर्म बेकर मैकेंजी और रोडियम समूह की एक स्टडी मुताबिक पिछले साल 75 अरब डॉलर के तकरीबन 30 सौदों को नियामक कार्रवाई और विदेशी मुद्रा प्रतिबंधों के कारण छोड़ दिया गया.

चीन के साथ जिन सौदों पर बात नहीं बन पाई और जो सौदे रद्द हो गये वे चीनी निवेश के कारण यूरोप में बढ़ती घबराहट को भी दर्शाते हैं. संवेदनशील तकनीकों से जुड़े विदेशी अधिग्रहण की जांच के लिए यूरोपीय संघ के पास अमेरिका जैसी विदेशी निवेश समिति नहीं है. यहां यूरोपीय पक्ष की हताशा आंशिक तौर पर चीन-ईयू के निवेश असंतुलन से जुड़ी हुई है.

आर्थिक पुनर्रचना : विनिर्माण क्षेत्र में चीन की रणनीति भी यूरोप के लिए चिंता का सबब है. चीन की "मेड इन चाइना 2025" रणनीति का मकसद अर्थव्यवस्था को श्रम-आधारित और निम्न उत्पादन से उच्च विनिर्माण की ओर बढ़ाना है. यूरोप को चिंता है कि चीन के अधिग्रहण सौदे के जरिए लंबी अवधि में सारी प्रमुख औद्योगिक टेक्नोलोजी चीन के हाथों में चली जाएगी.

भारत में पहली बार ज़ीका वायरस के संक्रमण के मामलों की पुष्टि हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि गुजरात के अहमदाबाद में ज़ीका संक्रमण के तीन मामलों का पता चला है. इनमें एक गर्भवती महिला शामिल है.तीनों ही मामले शहर के बापूनगर इलाक़े के हैं. ये सभी मामले पिछले साल के हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 26.05.2017 को बताया कि भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अहमदाबाद में मच्छर से पैदा होने वाली बीमारी ज़ीका के तीन मामलों की पुष्टि की थी. गुजरात के अधिकारियों का कहना है कि ये मामले शहर के एक ही इलाक़े में 2016 के नवंबर और इस साल फ़रवरी के बीच दर्ज किए गए.

इस बीमारी में नवजात को जन्म से जुड़ी दिक्कतें होती हैं, जिसमें माइक्रोसिफैली के लक्षण पाए जाते हैं और नवजात का सिर छोटा और मस्तिष्क कम विकसित होता है. ये बीमारी 30 देशों में दर्ज की गई है. हालांकि यह मुख्य रूप से मच्छरों से फैलती है लेकिन ये सेक्स के मार्फ़त भी फैलती है.

लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई पेशेवर लोगों और जानकार इससे हैरान हैं और वे पूछ रहे हैं कि आख़िर पता चलते ही लोगों को इनकी जानकारी क्यों नहीं दी गई. याद है, जब चीन पर 2003 में सार्स महामारी के प्रभाव पर "पर्दा डालने" का आरोप लगा था?

ई-लाइफ़ पत्रिका में छपे एक लेख के मुताबिक दुनिया के दो अरब से ज्यादा लोग उन इलाकों में रहते हैं जहां ज़ीका वायरस फैल सकता है. एडीज एजिप्टी मच्छरों से फैलने वाले ज़ीका वायरस के कारण इस साल स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई. पिछले हफ्ते अमरीकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने इस बात की पुष्टि की है कि इस वायरस से जन्म के समय बच्चे पर कई तरह के दुष्परिणाम देखे गए. ताज़ा खोज से पता चला है कि ज़ीका मैपिंग काफी जटिल है.

आंकड़ों के मुताबिक 2.2 अरब लोग उन इलाकों में रहते हैं जो ज़ीका के ख़तरे वाले इलाके हैं.

दक्षिण अमरीका के तटीय इलाकों और अमेज़न नदी से सटे शहरों में ज़ीका का ख़तरा ज्यादा है.

यूरोप फिलहाल इस वायरस से अछूता लगता है लेकिन आगे और सबूत मिलने के बाद स्थिति बदल सकती है.

पिछले एक सप्ताह से नंदिनी केआर अपने दोस्तों के मज़ाक के निशाने पर थीं. उन्हें बार-बार चिढ़ाया जा रहा था कि इस बार की सिविल सेवा परीक्षा को वो ही टॉप करेंगी. लेकिन जो बात उनके दोस्त मज़ाक में कह रहे थे वो अब सच साबित हो गई है. जब सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आए तो उन पर यक़ीन करना नंदिनी के लिए मुश्किल था. नंदिनी इस समय फ़रीदाबाद में भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी के तौर पर काम कर रही हैं. जब बीबीसी ने उन्हें फ़ोन किया तो पीछे पत्रकारों का शोर था. उन्होंने बीबीसी से कहा, "जब नतीजे आए तो मैं उन पर यक़ीन ही नहीं कर पाई. "लेकिन बेंगलुरू के एमएस रमैय्या इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी की सिविल इंजीनियरिंग की छात्रा रहीं नंदिनी के आईएएस अधिकारी बनने में ख़ास बात क्या है?

वो कहती हैं, "आईएएस बनना हमेशा से मेरा सपना था. अगर आप समाज का विकास करना चाहते हैं तो आप आईएएस बनकर ये बेहतर तरीके से कर सकते हैं. "कर्नाटक के कोलार ज़िले के एक शिक्षक की बेटी नंदिनी ने शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की है. बारहवीं की पढ़ाई के लिए वो चिकमंगलूर ज़िले के मूदाबिदरी आईं और परीक्षा में 94.83 प्रतिशत अंक प्राप्त किया.

उन्होंने एमएस रमैय्या इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग करने के बाद तुरंत कर्नाटक के पीडब्ल्यूडी विभाग में नौकरी कर ली. पीडब्ल्यूडी में काम करते हुए ही उन्होंने ज़मीनी स्तर पर सरकार का कामकाज देखा. वो कहती हैं, "तब ही मैंने सोचा कि मैं आईएएस अफ़सर बनकर समाज के लिए बेहतर काम कर सकती हूं.

"अपने पहले प्रयास में उन्होंने 642वीं रैंक हासिल की और दिसंबर 2015 में आईआरएस सेवा ज्वाइन कर ली. इसकी ट्रेनिंग के दौरान ही नंदिनी ने दिल्ली में एक कोचिंग संस्थान के साथ जुड़कर तैयारी करने का निर्णय लिया. पीडब्ल्यूडी में दो साल और आईआरएस में एक साल का अनुभव रखने वाली नंदिनी कहती हैं कि हमारा बुनियादी उसूल होना चाहिए, "हम जहां भी हों अपना सर्वश्रेष्ठ दें.

"दो साल राज्य और एक साल केंद्र में नौकरी के बाद क्या उनकी प्रशासकों के बार में राय बदली है? नंदिनी कहती हैं, "काम पर अलग-अलग चुनौतियां होती हैं. लेकिन प्रशासन में बहुत कुछ सकारात्मक होता है. काम करने के बेहतर अवसर होते हैं. हम निश्चित तौर पर विकास में अपनी भूमिका निभा सकते हैं.

"नंदिनी कहती हैं, "एक आदर्श प्रशासक यदि इरादे का पक्का हो, अपने काम के प्रति समर्पित हो और चुनौतियां स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहे तो वो समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है.

"नंदिनी अपने जिस दृढ़ संकल्प से शीर्ष तक पहुंची हैं और अपने दोस्तों की उम्मीदों पर खरी उतरी हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि उनके लिए आदर्श प्रशासक बनना बहुत मुश्किल नहीं होगा.

इंजीनियर होने के बावजूद नंदिनी ने कन्नड़ साहित्य को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था. वो ओबीसी कैटेगरी से आती हैं. साल 2016 की सिविल सेवा परीक्षा में 1099 उम्मीदवार सफल हुए हैं. अनमोल शेरसिंह बेदी दूसरे स्थान पर आए हैं जबकि गोपालकृष्ण रोनांकी को तीसरा स्थान हासिल हुआ है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमरीका पेरिस समझौते से बाहर निकल जाएगा. उन्होंने कहा कि वो नए सिरे से एक नया समझौता करेंगे जिसमें अमरीकी हितों की रक्षा उनका मकसद होगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वो एक ऐसा समझौता करना चाहेंगे जो अमरीका के औद्योगिक हितों की रक्षा करता हो और लोगों की नौकरियां बचाता हो. पिछले साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने मतदाताओं से चुनाव जीतने पर अमरीका को जलवायु परिवर्तन समझौते से बाहर करने का वादा किया था. मैं एक ऐसा समझौता करना चाहूंगा जो अमरीका के औद्योगिक हितों की रक्षा करे और लोगों की नौकरियां बचाता हो.

पेरिस समझौता ऐसा उदाहरण है जब वॉशिंगटन ने दूसरे देशों के फ़ायदे के लिए अमरीका के हितों को नुकसान पहुंचाया. अमरीका आज से ही गैर बाध्यकारी पेरिस समझौते को लागू करना बंद कर देगा. हम नहीं चाहते कि दुनिया के नेता और देश हम पर हंसे. वो अब हम पर नहीं हंसेगे. मैं पीट्सबर्ग के नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया हूं न कि पेरिस का प्रतिनिधित्व करने के लिए. मैंने वादा किया था कि मैं हर उस समझौते को तोड़ दूंगा या फिर से बातचीत करूंगा जो अमरीका के हितों का ध्यान नहीं रखता है.

क्या है पेरिस समझौता?

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का मतलब है उद्योगों और कृषि कार्यों से उत्सर्जित होने वाली गैसों से पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक और नुक़सानदेह असर. पेरिस समझौते का मक़सद गैसों का उत्सर्जन कम कर दुनियाभर में बढ़ रहे तापमान को रोकना था. वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और कोशिश करना कि वो 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़े. मानवीय कार्यों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को इस स्तर पर लाना की पेड़, मिट्टी और समुद्र उसे प्राकृतिक रूप से सोख लें. इसकी शुरुआत 2050 से 2100 के बीच करना.हर पांच साल में गैस उत्सर्जन में कटौती में प्रत्येक देश की भूमिका की प्रगति की समीक्षा करना. विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तीय सहायता के लिए 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष देना और भविष्य में इसे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता.

अमरीकी भूल चीन के लिए मौक़ा

पेरिस जलवायु समझौते के दौरान अमरीका और चीन के बीच अहम सहमति बनी थी. अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसमें बड़ी भूमिका अदा की थी. चीन इस बात को दोहरा रहा है वह पेरिस जलवायु करार के साथ खड़ा है. अमरीका के पीछे हटने और पेरिस जलवायु करार पर प्रतिबद्धता जताने के लिए चीन के साथ यूरोपियन यूनियन शनिवार को बयान जारी करने वाला है. ईयू के क्लाइमेट कमिश्नर मिगल अरिआस ने कहा, ''पेरिस जलवायु करार से किसी को भी पीछे नहीं हटना चाहिए. हमने और चीन ने इसके साथ चलने का संकल्प लिया है. ''बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना करने के लिए कनाडा और मेक्सिको भी अहम भूमिका अदा कर सकते हैं.

कोल ईंधन की होगी वापसी

दूसरे विकसित देशों की तरह अमरीका भी कोयले के ईंधन से दूर हट चुका है. ब्रिटेन साल 2025 तक कोयले से बिजली पैदा करना पूरी तरह से बंद कर देगा. अमरीका के कोयला उद्योग में अब नौकरी सौर ऊर्जा के मुकाबले आधी बची है. दूसरी तरफ़ विकासशील देश अब भी बिजली के मामले में कोयले पर निर्भर हैं. यहां बिजली का प्राथमिक स्रोत कोयला है. ऊर्जा के दूसरे स्रोतों की कीमतों में कमी के कारण उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश उस तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं. भारत में हाल की एक नीलामी में सौर ऊर्जा की कीमत कोयले से उत्पादित होने वाली बिजली के मुकाबले 18 फ़ीसदी कम रही.

अमेरिका का यह रुख मोदी सरकार की नाकामी को जाहिर करता

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से हटते हुए भारत को भी आड़े हाथ लिया और उस पर अरबों खरबों डॉलर मांगने का आरोप लगाया. कुलदीप कुमार का कहना है कि अमेरिका का यह रुख मोदी सरकार की नाकामी को जाहिर करता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का आधे से अधिक कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब उसके पास योजनाओं को पूरा करने के लिए केवल दो साल बचे हैं. विदेश नीति को विदेश मंत्री और उनके मंत्रालय के हाथ से लेकर स्वयं प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय द्वारा चलाये जाने के नतीजे सुखद और सकारात्मक नहीं रहे हैं. अभी तक शायद किसी भी प्रधानमंत्री ने इतने विदेश दौरे नहीं किए, जितने मोदी कर चुके हैं लेकिन केवल वहां रहने वाले भारतीयों या भारतीय मूल के लोगों को प्रभावित करने के अलावा इन दौरों की अन्य कोई विशेष उपलब्धि सामने नहीं आ पायी है.

अब विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजातरीन बयान ने भारतीय विदेश नीति की विफलता को सरेआम उजागर कर दिया है. ट्रंप ने आरोप लगाया है कि पर्यावरण की रक्षा और कार्बन डाइऑक्साइड गैस के उत्सर्जन को कम करने के नाम पर भारत अरबों-खरबों डॉलर की मांग करता है और पेरिस समझौता भारत और चीन के पक्ष में झुका हुआ है. इसलिए अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा.

भारत के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है. हालांकि अब चीन ने कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन अब भी वह 28 यूरोपीय देशों द्वारा कुल मिलाकर किए जाने वाले उत्सर्जन से अधिक गैस छोड़ रहा है. भारत का उत्सर्जन अमेरिका के उत्सर्जन के आधे से भी अधिक कम है जबकि उसकी जनसंख्या अमेरिका के मुकाबले चार गुना अधिक है. लेकिन ट्रंप और उनके सलाहकारों का मानना है कि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का स्तर कम करने से अमेरिका के औद्योगिक विकास पर असर पड़ेगा और उसके यहां रोजगार में कमी आएगी.

यूपीएससी (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन) ने सिविल सेवा परीक्षा 2016 का रिजल्ट घोषित कर दिया है. कर्नाटक की नंदिनी के. आर. ने संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) 2016 की परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया है। नंदिनी के बाद अनमोल शेर सिंह बेदी और गोपालकृष्ण रोननकी दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। आयोग की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, यूपीएससी की लिखित परीक्षा दिसंबर 2016 में हुई थी, और उसके बाद इस वर्ष मार्च और मई के बीच साक्षात्कार व व्यक्तित्व परीक्षण हुए थे। वह ओबीसी कैटेगरी से आती हैं और उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में कन्नड़ साहित्य लिया था। नंदिनी सिविल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं।

पिछले साल ये परीक्षा 3 दिसंबर से 9 दिसंबर के बीच दो सेशन में आयोजित की गई थी. फाइनल रिजल्ट में कुल 1099 छात्रों का चयन किया गया है. जिनमें 500 अभ्यर्थी जनरल कैटेगरी से हैं. जबकि ओबीसी कैटेगरी के 347, एससी कैटेगरी के 163 और एसटी कैटेगरी के 89 अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की है.
आईएएस के लिए 180, आईएफएस के लिए 45 और आईपीएस के लिए 150 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है.इनके अलावा केंद्रीय सेवाओं में ग्रुप-ए के लिए 603 और ग्रुप-बी के लिए 231 का चयन हुआ है.

टॉप 10 के रोल नंबर और लिस्ट

1. 0134810 नंदिनी के आर

2. 0561724 अनमोल शेर सिंह बेदी

3. 0147866 गोपालकृष्ण रोनांकी

4. 0014451 सौम्या पांडेय

5. 0656401 अभिलाष मिश्रा

6. 0032405 कोठामासू दिनेश कुमार

7. 0583119 आनंद वर्धन

8. 0559310 श्वेता चौहान

9. 0384935 सुमन सौरव मोहंती

10. 0000823 बिलाल मोहीउद्दीन बट्ट

हालही में चल रहे साइबर अटैक की घटनाओ के चलते अपने काफी सारी जानकारियां देखी और पढ़ी जा सकती है. आपको बता दे सर्वाधिक इंटरनेट यूजर भारत में भी उपलब्ध है फिर चाहे वो स्मार्टफोन यूजर हो या फिर डेस्कटॉप यूजर हो. वैसे रैंजमवेयर एक प्रकार का मैलवेयर वाइरस है जिसको हैकर्स के द्वारा आपके डेस्कटॉप में किसी ईमेल अटैचमेंट के रूप में भेजा जाता है.

इस वायरस में इतना पॉवर होती है कि यह आपके डेस्कटॉप या लैपटॉप को लॉक कर देता है. आप इसके बाद यूजर चाह कर भी इसे अनलॉक नहीं कर पायेगे. लॉक होने के स्थिति में आप अपने सिस्टम को हैकर्स को पैसे पेय करने के बाद भी अनलॉक कर पायेगे या नहीं इस बात पर संदेह है. इस तरीके का यूज़ कर हैकर लोगो से पैसे निकलवा लेते है.

वैसे रैंजमवेयर वायरस का सबसे ज्यादा अटैक विंडोज xp पर देखा गया है. मास्को की कंपनी के जारी किये गए अपडेट पर ध्यान दे तो यह वायरस 2,18,624 रैंजमवेयर फिलो की पहचान की गयी है.

मोडरेशन पॉलिसी विवाद को लेकर तीन दिन पहले घोषित होने वाले CBSE 12 वीं के नतीजे आज रविवार को आखिर घोषित कर दिए गए. हमेशा की तरह इस साल भी टॉप करने वाले विद्यार्थियों की सूची जारी की गई. जिसके अनुसार एमिटी इंटरनेशनल नोएडा की छात्रा रक्षा गोपाल ने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सर्वोच्च स्थान हासिल किया.

उल्लेखनीय है कि जारी की गई शीर्ष सूची में डीएवी सेक्‍टर 8 की भूमि सावंत दूसरे स्थान पर रही. उन्‍होंने 99.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किये. लेकिन तीसरे स्थान के लिए दो परीक्षार्थी ने समान अंक हासिल किये .भवन विद्या मंदिर के विद्यार्थी आदित्‍य जैन और मन्‍नत लूथरा ने 99.2 प्रतिशत अंक हासिल किए.

गौरतलब है कि CBSE की 12 वीं की इस वर्ष की परीक्षा में 10,98,891 विद्यार्थी शामिल हुए थे.जिनमें 4,60,026 लड़कियां थी और 6,38, 865 लड़के थे. आज जब इस परीक्षा का रिजल्ट खुला तो सफल होने वाले परीक्षार्थियों के चेहरे खिल गए. अपनी मेहनत का प्रतिफल पाकर वे ख़ुशी से उछल पड़े.

इंडियन प्रीमियर लीग 2017 का शानदार समापन हो गया। आईपीएल 10 के फाइनल में मुंबई इंडियंस और राइजिंग पुणे सुपरजाइंट के बीच टक्कर हुई। सांसे रोक देने वाले इस रोमांचक मुकाबले में रोहित शर्मा के नेतृत्व वाली मुंबई इंडियंस ने स्टीव स्मिथ के नेतृत्व वाली राइजिंग पुणे सुपरजाइंट को एक रन से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इसी के साथ मुंबई इंडियंस ने इतिहास रचते हुए तीसरी बार आईपीएल खिताब जीतने का कारनामा किया।

मुंबई इंडियंस के आईपीएल का फाइनल जीतने के बाद अवॉर्ड समारोह का आयोजन किया गया। सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के कप्तान डेविड वार्नर को शानदार बल्लेबाजी के लिए औरेंज कप और उनकी ही टीम के गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को पर्पल कैप का अवॉर्ड मिला। 

आईपीएल के दसवें सीजन के फाइनल में मुंबई इंडियंस की टीम ने राइजिंग पुणे सुपरजाएंट को हराकर खिताब जीत लिया. मुंबई की टीम ने तीसरी बार आईपीएल का खिताब जीतते हुए इतिहास रच दिया. आइए जानें 47 दिन तक चले इस 60 मैच वाले इस टूर्नामेंट में किसे मिला कौन सा इनाम.

1.चैंपियन, मुंबई इंडियंसः आईपीएल 2017 का खिताब जीतने वाली मुंबई इंडियंस की टीम को 15 करोड़ रुपये की इनामी राशि मिली और आईपीएल ट्रॉफी मिली.

2.रनर-अप, पुणे सुपरजाएंटः फाइनल में मुंबई के हाथों हारकर रनर-अप रहने वाली पुणे की टीम को 10 करोड़ रुपये की इनामी राशि मिली.

3.ऑरेंज कैप, डेविड वॉर्नरः सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान डेविड वॉर्नर ने इस सीजन में 14 मैचों में 641 रन बनाकर ऑरेंज कैप का खिताब जीता. सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज को ऑरेंज कैप दी जाती है और इनाम ममें 10 लाख रुपये और एक ट्रॉफी मिलती है.

4.पर्पल कैप, भुवनेश्वर कुमारः सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने 14 मैचों में 26 विकेट लेते हुए पर्पल कैप का खिताब जीता. सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज को 10 लाख रुपये का पुरस्कार और एक ट्रॉफी मिलती है.

5. सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवॉर्डः इस सीजन में सबसे ज्यादा छक्के मारने का रिकॉर्ड बनाया किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान ग्लेन मैक्सवेल ने, उन्होंने 13 पारियों में 26 छक्के लगाए. वॉर्नर ने भी 26 छक्के लगाए थे लेकिन उन्होंने मैक्सवेल से एक पारी ज्यादा खेली. इस पुरस्कार के विजेता को 10 लाख रुपये और एक ट्रॉफी मिलती है.चैंपियन बनने वाली मुंबई की टीम को मिला 15 करोड़ रुपये का पुरस्कारचैंपियन बनने वाली मुंबई की टीम को मिला 15 करोड़ रुपये का पुरस्कार  

6. सबसे तेज अर्धशतक का अवॉर्डः ये पुरस्कार मिला कोलकाता नाइटराइडर्स के सुनील नारायण को जिन्होंने आरसीबी के खिलाफ 15 गेंदों में सबसे तेज अर्धशतक बनाया. ये अवॉर्ड सीजन में सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज को मिलता है.

7.सीजन का सबसे आकर्षक शॉट (ग्लैम शॉट) अवॉर्डः ये अवॉर्ड मिला सनराइजर्स हैदराबाद के युवराज सिंह को. इस पुरस्कार के तहत 10 लाख रुपये और एक ट्रॉफी दी जाती है.

8.स्टाइलिश प्लेयर ऑफ द सीजनः ये अवॉर्ड दिया गया कोलकाता नाइटराइडर्स के कप्तान गौतम गंभीर को.

9. फेयरप्ले अवॉर्डः ये अवॉर्ड मिला सुरेश रैना की कप्तानी में खेली गुजरात लायंस की टीम को. गुजरात की टीम 14 में से 4 मैच जीतकर पॉइंट्स टेबल में सातवें नंबर पर रही लेकिन फेयर प्ले के मामले में वह टॉप पर रही.

10.इमर्जिंग प्लेयर अवॉर्डः ये अवॉर्ड दिया गया गुजरात लायंस के बासिल थंपी को जिन्होंने इस सीजन में 12 मैचों में 11 विकेट लेकर अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित किया.

11.मोस्ट वैल्युऐबल प्लेयरः ये अवॉर्ड दिया गया राइजिंग पुणे सुपरजाएंट के ऑलराउंडर बेन स्टोक्स को, जिन्हें पुणे ने 14.5 करोड़ रुपये में खरीदा था. स्टोक्स ने 11 पारियों में 316 रन बनाने के साथ ही 12 विकेट भी झटके.

केन्‍द्रीय विद्युत, कोयला, नई और नवीकरणीय ऊर्जा तथा खान राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री पियूष गोयल और इंडोनेशिया गणराज्‍य के ऊर्जा और खनिज संसांधन मंत्री महा महीम श्री इग्‍नासियस जोनान ने 20 अप्रैल, 2017 को जकार्ता में  प्रथम ‘भारत इंडोनेशिया ऊर्जा फोरम’ में भाग लिया।

ऊर्जा फोरम से पहले तेल और गैस संबंधी दूसरे संयुक्‍त कार्यदल, कोयला संबंधी चौथे संयुक्‍त कार्यदल और नई और नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी प्रथम संयुक्‍त कार्यदल की बैठकें आयोजित की गईं। ऊर्जा फोरम के दौरान तीनों संयुक्‍त कार्यदलों की रिपोर्ट दोनों मंत्रियों के समक्ष प्रस्‍तुत की गईं। 

तेल और गैस संबंधी दूसरे संयुक्‍त कार्यदल की बैठक में भारत और इंडोनेशिया के नीति फ्रेमवर्क और दोनों देशों में तेल और गैस क्षेत्र में क्षमता निर्माण और व्‍यापार के अवसर बढ़ाने के बारे में विचार विमर्श किया गया। तेल और गैस क्षेत्र की प्रमुख भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्‍सा लिया।
कोयला संबंधी चौथे संयुक्‍त कार्यदल की बैठक के चार सत्र आयोजित किए गए। प्रमुख भारतीय कोयला कंपनियों के प्रतिनिधि भी इन बैठकों में मौजूद थे। इनमें नीति गत फ्रेमवर्क और क्षमता निर्माण के बारे में विचार-विमर्श किया गया। नई और नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी प्रथम संयुक्‍त कार्यदल की प्रथम बैठक का आयोजन वीडियो-कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से किया गया। दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां निवेश के अवसरों पर विचार किया।इस अवसर पर श्री पियूष गोयल ने कहा कि इंडोनेशिया के मत्री श्री इग्‍नासियस जोनान के साथ उनकी वार्ता अत्‍यंत सार्थक रही। इस अवसर पर श्री जोनान ने कहा कि ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश की दृष्टि से इंडोनेशिया एक महत्‍वपूर्ण लक्ष्‍य है।

इस अवसर पर भारत सरकार के पैट्रोलयम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और इंडोनेशिया के ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय के बीच तेल और गैस के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्‍ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत आपसी लाभ के लिए एक सहकारी संस्‍थागत फ्रेमवर्क कायम करने का प्रावधान है। भारत इंडोनेशिया से कोयला आयात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा आयातक है। 2016 में भारत ने इंडोनेशिया से 3.5 अरब अमरीकी डालर मूल्‍य का कोयला आयात किया। कई भारतीय कंपनियों ने इंडोनेशिया में कोयला खदानों में निवेश किया है। 2015-16 के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार 15.90 अरब अमरीकी डालर मूल्‍य का था, जिसमें इंडोनेशिया का निर्यात 13.06 अरब अमरीकी डालर मूल्‍य का था जबकि भारत का निर्यात 2.84 अरब अमरीकी डालर मूल्‍य का था। दोनों देशों के बीच सहमति बनी है कि व्‍यापार संतुलन कायम करने के लिए भारत से इंडोनेशिया का निर्यात बढ़ाया जायेगा। 

चेनानी-नाशरी सुरंग जिसे पत्नीटॉप सुरंग के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 (राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या पुनः निर्धारण से पूर्व नाम राष्ट्रीय राजमार्ग 1ए ) पर स्थित एक सड़क सुरंग है। इसका कार्य वर्ष 2011 में आरम्भ हुआ तथा उद्धघाटन 2 अप्रैल 2017 को किया गया।

यह भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग है जिसकी लंबाई 9.28 कि.मी. (5.8 मील) है। सुरंग बनाने पर मूल अनुमानित लागत ₹ 2,520 करोड़ (यूएस $ 367.92 मिलियन) थी लेकिन परिवर्धित करने में कुल ₹ 3,720 करोड़ (यूएस $ 543.12 मिलियन) खर्च हुये। मुख्य सुरंग का व्यास 13 मीटर है, जबकि समानांतर निकासी सुरंग का व्यास 6 मीटर है। मुख्य और निकासी सुरंगों में 29 स्थानों पर पार मार्ग बनाये गये हैं जो हर 300 मीटर की दूरी पर स्थिति हैं। यह देश की पहली पूर्ण रूप से एकीकृत सुरंग प्रणाली वाली सुरंग है।

सुरंग की सहायता से जम्मू और श्रीनगर के मध्य दूरी 30.11 कि.मी. (18.7 मील) रह गयी और यात्रा समय में दो घण्टे की कटौती हो गयी। पत्नीटॉप पर सर्दियों में बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर बाधा उत्पन्न होती थी तथा प्रत्येक शीतकाल में कई बार वाहनों की लम्बी कतार के कारण भी बाधा उत्पन्न होती थी - कई बार कई दिनों तक कतार में रहना पड़ता था। सुरंग पत्नीटॉप, कुद और बटोत को उपमार्गों से जोड़ती है जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर सर्दियों में ट्रैफ़िक जाम की समस्या को कम किया है।

1. सुरंग निचले हिमालय परास में स्थिति है जिसकी ऊँचाई 1200 मीटर है।

2. चेनानी-नाशरी सुरंग को आस्ट्रिया की नई सुरंग प्रौद्योगिकी से बनाया गया है। इसमें सुरक्षा के कई प्रावधान हैं। सभी का संचालन एक सॉफ्टवेयर से होता है।

3. इस परियोजना को बनाने का टेंडर एनएचआई के साथ आईएल एंड एफएस को मिला था।

4. यह सुरंग जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग को चार लेन का करने की परियोजना का हिस्सा है। जम्मू-श्रीनगर के बीच यात्रा की अवधि घटाने के लिए बारह ऐसी ही और सुरंग परियोजनाओं का निर्माण हो रहा है।

5. यह सुरंग ऊधमपुर जिले के चेनानी और रामबन जिले के नाशरी के बीच की 41 किलोमीटर की दूरी को घटाकर 10.89 किलोमीटर कर देगी और यह फासला महज दस मिनट में पार कर लिया जाएगा। अभी इसमें ढाई घंटे लगते हैं।

6. जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग को राज्य की जीवन रेखा माना जाता है।

7. सभी 12 सुरंगों का निर्माण पूरा होने के बाद जम्मू एवं श्रीनगर के बीच की 293 किलोमीटर की दूरी में से 62 किलोमीटर घट जाएंगे। यह 231 किलोमीटर की दूरी चार-साढ़े चार घंटे में तय कर ली जाएगी।

8. इस सुरंग की बेहद खास बात हर 150 मीटर पर एक आपातकालीन एसओएस कॉल बॉक्स और बाहर निकलने के लिए बचाव के रास्ते का होना है। इस रास्ते से होकर मुसाफिर सुरक्षा सुरंग तक जा सकेंगे जो इस मुख्य सुरंग के समानांतर बनाई गई है।

9. राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने फैसला किया है कि जम्मू एवं कश्मीर में लेह और श्रीनगर के बीच बनने वाली 14 किलोमीटर लंबी जोजी ला सुरंग को इसी तकनीक से बनाया जाएगा।

पुलित्जर पुरस्कार समिति ने 10 अप्रैल 2017 को 101वें पुलित्जर पुरस्कार की घोषणा की। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने सर्वाधिक 3 पुरस्कार झटके।

द न्यूयॉर्क डेली न्यूज और प्रोपब्लिका को संयुक्त रूप से समाजसेवी पत्रकारिता के लिए साल 2017 का पुरस्कार दिया गया है। इस बार ‘द डेली न्यूज’ और ‘प्रोपब्लिका’ को साझा तौर पर समाजसेवी पत्रकारिता के लिए यह पुरस्कार मिला है। दरअसल, इन दोनों समाचार समूहों ने न्यूयॉर्क पुलिस विभाग पर एक साझा सीरीज की थी, जिसमें दशकों पुराने कानून का दुरुपयोग कर आम लोगों को उनके घरों और कारोबार से हटाए जाने की बात थी।

पुलित्जर को अमेरिका का सर्वाधिक सम्मानित पत्रकारिता पुरस्कार माना जाता है। यह पुरस्कार पहली बार साल 1917 में दिया गया था। इसके बाद 1980 से हर साल इसके लिए अंतिम सूची में शामिल प्रविष्टियों की भी घोषणा की जाती है। पुलित्जर पुरस्कार विजेताओं को 15 हजार अमेरिकी डॉलर और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने भारत में आर्थिक सुधारों की दिशा को सराहनीय बताते हुए कुछ ही महीनों में लागू किए जानेवाले जीएसटी (गुड्स ऐंड सर्विसेज़ टैक्स) को एक 'साहसिक क़दम' करार दिया है.

अगले दो-तीन दिनों तक वॉशिंगटन में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं का आकलन होगा, विश्व व्यापार के क़ानूनों पर बहस होगी, विश्व बैंक और आईएमएफ़ एक तरह से दुनिया की आर्थिक दिशा का खाका पेश करेंगे. लेकिन मोदी सरकार और उनके वित्त मंत्री अरूण जेटली को सम्मेलन की शुरुआत में ही आईएमएफ़ ने अव्वल दर्जे का रिपोर्ट कार्ड दिया है. आईएमएफ़ प्रमुख ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार के जीएसटी क़ानून से उन्हें काफ़ी सकारात्मक परिणामों की उम्मीद है. उनका कहना था, "जीएसटी एक बेहद साहसिक सुधार है क्योंकि ये हर भारतीय राज्य के अलग-अलग टैक्सों की जगह एक केंद्रीय टैक्स लगा कर राज्यों को दोबारा से आबंटित करेगा. "उनका कहना था कि वो इस सुधार से बेहद प्रभावित हुई हैं.

जीएसटी के तहत सभी राज्यों और केंद्र के अलग-अलग उत्पाद, बिक्री और उपभोक्ता करों को एक समुचित कर में शामिल कर दिया गया है. माना जा रहा है कि इससे टैक्स वसूली और सामानों की आवाजाही काफ़ी सरल हो जाएगी और इसका सीधा फ़ायदा उपभोक्ताओं को होगा. भारत सरकार की नोटबंदी नीति का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उसकी वजह से भारतीय आर्थिक विकास की दर को आईएमएफ़ ने थोड़ा नीचे किया था. लेकिन ताज़ा आंकड़ों के अनुसार हालात काफ़ी सुधरे हैं. उनका कहना था, "इस बेहतरी की वजह से भारत काफ़ी तेज़ी से बढ़ना जारी रखेगा. हमारा अनुमान है कि विकास की गति 7.2 प्रतिशत की रहेगी."

उन्होंने कहा कि आर्थिक क्षेत्र में और भी सुधार हुए हैं जो सराहनीय हैं. इस बार के सम्मेलन में विश्व व्यापार नियमों की भी ख़ासी चर्चा हो रही है और उसे बेहतर करने के उपायों पर बात हो रही है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपनी अमेरिका फ़र्स्ट नीति के तहत सिर्फ़ अमरीकी सामान खरीदने पर ज़ोर दे रहे हैं.

लैगार्ड ने कहा है कि अमरीका में सिर्फ़ अमरीकी स्टील का इस्तेमाल होगा और यहां सिर्फ़ अमरीकी कामगार काम करेंगे. उनके ये बयान वैश्वीकरण और विश्व व्यापार नियमों के लिए एक चुनौती बन कर उभरे है. उन्होंने खुल कर विश्व व्यापार संगठन के ख़िलाफ़ बयान दिए हैं और कहा है कि वो द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में यकीन रखते हैं क्योंकि अमरीका को डब्लूटीओ की नीतियों का ख़ामियाज़ा उठाना पड़ा है.

लैगार्ड ने कहा है कि उनकी कोशिश होगी ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर काम करने की जिससे मौजूदा नियमों में सुधार लाए जा सकें लेकिन संरक्षणवादी आर्थिक नीति अपनाना सही नहीं होगा.

इस तरह लागू होगा जीएसटी

पहला चरण: फैक्ट्रीआइए हम एक रेडीमेड कपड़े का उदहारण लेते हैं. तैयार करने वाले को कपड़े और सिलाई जैसे कच्चे माल पर सौ रुपए ख़र्च करने पड़ते हैं. इसमें उसने 10 रुपए बतौर टैक्स दिए हैं. फिर उस कपड़े को पूरी तरह तैयार करने पर 30 रुपए और ख़र्च होते हैं. इससे कपड़े की क़ीमत 130 रुपए हो जाती है. दस फ़ीसद की दर से इस कपड़े पर 13 रुपए बतौर टैक्स देने पड़ते हैं. चूँकि उत्पादनकर्ता ने कच्चे माल पर टैक्स पहले ही दे दिया है, इसलिए अब उसे टैक्स के रूप में सिर्फ तीन रुपए ही देने पड़ेंगे.

दूसरा चरण: थोकथोक विक्रेता इस कपड़े को 130 रुपए में ख़रीदता है. उसमें 20 रुपए मुनाफ़ा जोड़कर वह 150 रुपए इसकी क़ीमत लगाता है. इस पर 10 फ़ीसद टैक्स अगर जोड़ा जाए तो 15 रुपए और जुड़ जाएंगे. मगर जीएसटी लागू होने के बाद थोक विक्रेता को केवल दो रुपए ही बतौर टैक्स देने पड़ेंगे, क्योंकि कपड़े पर उत्पादन के समय 13 रुपए का टैक्स दिया जा चुका है.

तीसरा चरण: खुदरा व्यापारी यह रेडीमेड कपड़ा अगर 150 रुपए में खरीदता है. फ़र्ज़ कीजिए वो इसमें और खर्चे जोड़कर क़ीमत 10 रुपए बढ़ा देता है, तो यह कपड़ा 160 रुपए का हो जाएगा. इसपर 10 फ़ीसद की दर से टैक्स 16 रुपए होना चाहिए. लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद अब ख़ुदरा विक्रेता को सिर्फ एक रुपया टैक्स के रूप में देना पडेगा, क्योंकि उत्पादनकर्ता ने 10 रुपए बतौर टैक्स सामान खरीदते वक़्त ही दे दिए थे. कपड़े को जब उसने थोक विक्रेता को बेचा तो तीन रुपए और टैक्स के रूप में दिए. फिर थोक विक्रेता ने इसपर दो रुपए बतौर टैक्स दिए और बाद में खुदरा विक्रेता ने एक रुपया बतौर टैक्स दिया.तो इस तरह कुल टैक्स जमा हुआ 10 + 3 + 2 + 1 = 16

जीएसटी बिल की 7 अहम बातें

1. रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं जैसे कि मोबाइल हैंडसेट, कार, सिगरेट, शराब, आदि गुड्स में शामिल हैं.

2. सर्विसिज़ यानि टेलीकॉम, बुकिंग सेवाएं जिसके लिए 14 फीसद टैक्स देना होता है.

3. फिलहाल भारत में गुड्स और सर्विसिज़ के लिए अदा किए जाने वाले टैक्स की दर अलग अलग हैं.

4. सर्विसिज़ के लिए टैक्स की दर 14 फ़ीसदी है जबकि गुड्स के लिए टैक्स की दर अलग अलग है.

5. जीएसटी का मतलब गुड्स एंड सर्विसिज़ के लिए टैक्स रेट एक होगा.

6. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बिल के पास हो जाने से टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन आसान होगा.

7. भारत में 20 तरह के टैक्स लगते हैं और जब एक टैक्स इन सबकी जगह ले लेगा, और वो होगा जीएसटी.

केंद्र की नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने बुधवार19.04.2017 को वीवीआईपी कल्चर के खिलाफ एक बड़ा फैसले लिया है. आने वाली 1 मई से अब सिर्फ 5 लोग ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर पाएंगे. अब सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश और लोकसभा स्पीकर ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर सकेंगे. केंद्र की नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने बुधवार को वीवीआईपी कल्चर के खिलाफ एक बड़ा फैसले लिया है. आने वाली 1 मई से अब सिर्फ 5 लोग ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर पाएंगे. अब सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश और लोकसभा स्पीकर ही लाल बत्ती का इस्तेमाल कर सकेंगे.

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वीवीआईपी कल्चर को दरकिनार कर सामान्य ट्रैफिक में लोककल्याण मार्ग से लेकर दिल्ली एयरपोर्ट कर का सफर तय किया था. भारत दौरे पर आई बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शुक्रवार (7 अप्रैल) को भारत पहुंची, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ही उनकी अगुवानी करने पहुंच गये थे.

पीएम मोदी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के स्वागत के लिये प्रोटोकॉल के विपरीत आईजीआई हवाईअड्डा पर खुद पहुंचे थे. इस दौरान उनके साथ सिर्फ ड्राइवर और एक एसपीजी कमांडो ही साथ थे.

अमेरिका ने अफगानिस्तान पर अब तक का सबसे बड़ा बम गिराकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. अमेरिका ने जो बम GBU-43 अफगानिस्तान पर गिराया है, वो इतना खतरनाक है कि उसके सवा तीन किलोमीटर के दायरे में सब कुछ खाक हो जाएगा. इस बम को नानगरहार प्रांत के अचिन जिले में एक सुरंगनुमा इमारत पर गिराया गया है. अफगानिस्तान में अमेरिकी सुरक्षा बलों ने एक बयान में यह जानकारी दी. ये हमला वहां के समय के मुताबिक शाम 7:32 बजे हुआ.ये हमला भी जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए हमले की तरह ही अमेरिकी सरकार के द्वारा लिया गया एक बड़ा फैसला है. अगस्त 6 और अगस्त 9, 1945 को हुए इस हमले में 2 लाख 46 के करीब लोग मारे गए थे. अमेरिकी वायु सेना ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम "लिटिल बॉय" गिराया था. उसके तीन दिनों बाद अमरीका ने फिर नागासाकी शहर पर "फ़ैट मैन" परमाणु बम गिराया. हालांकि GBU-43 परमाणु बमों की श्रेणी में नहीं आता है.

अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि उसने पूर्वी अफगानिस्तान में मौजूद इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के ठिकानों पर सबसे बड़ा और खतरनाक GBU-43 बम गिराया है. इस बम को सबसे शक्तिशाली बम बताया जाता है. पेंटागन के प्रवक्ता ने बताया कि पहली बार इस बम का प्रयोग किया गया है और इसे MC-130 एयरक्राफ्ट से गिराया गया.

21600 पौंड वजनी (तकरीबन 10 हजार किलो) इस बम का नाम GBU-43 है. इसे मदर ऑफ आल बम भी कहा जाता है. इस तरह का बम पूरी दुनिया में सिर्फ 15 है. सवा तीन किलोमीटर के दायरे में यह सब कुछ खाक कर देता है. यह बम जीपीएस से संचालित होता है. ऐसे में इसके निशाना चूकने का कोई सवाल ही नहीं. GBU-43 बम से 11 टन TNT के बराबर धमाका होता है. इस बम को बनाने में तकरीबन दो हज़ार करोड़ रुपये का खर्च आता है.

भारत हवाई क्षेत्र में भी अमेरिका, चीन जैसे दिग्गज देशों को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। सैन्य ताकत में पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवा चुका भारत अपना खुद का स्टेल्थ फाइटर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। उधर, अमेरिका में भी भारत की हवाई ताकत को बढ़ाने के लिए मदद देने की आवाज उठी है। दो टॉप सेनेटर ने डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन से भारत को F-16 लड़ाकू विमान बेचने के लिए पत्र लिखा है।

भारत की स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने की योजना फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है। AMCA एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान होगा। इसमें दुश्मनों से निपटने के लिए और हवा में उन्हें मात देने के लिए कई तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह अत्याधुनिक विमान भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा। इस लड़ाकू विमान का डिजायन मल्टी रोल के तहत तैयार किया गया है। इसे मिराज 2000 और जगुआर फाइटर जेट की जगह वायु सेना में शामिल करने का प्रस्ताव है। इस बीच, भारत और रूस संयुक्त रूप से पांचवीं पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट तैयार करने पर चर्चा कर रहे हैं। अभी दोनों देशों के बीच इसे बनाने के तौर-तरीके पर बात चल रही है।

दुनिया के सबसे अमीर लोगों की फोर्ब्स की लिस्ट में इस बार 101 भारतीय जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि सुपर रिच भारतीयों की संख्या 100 से ऊपर पहुंची है। भारतीयों में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चीफ मुकेश अंबानी सबसे आगे हैं। हालांकि, लिस्ट में वह 33वें नंबर पर हैं। अंबानी की संपत्ति 23.2 अरब डॉलर बताई गई है। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स वर्ल्ड में सबसे अमीर हैं। इनकी वेल्थ 86 अरब डॉलर आंकी गई है और वह लगातार चौथे साल लिस्ट में टॉप पर बरकरार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस लिस्ट में 220 रैंक फिसलकर 544वें नंबर पर चले गए हैं। लिस्ट के मुताबिक बिल गेट्स के बाद लिस्ट में दूसरे नंबर पर बर्कशायर हैथवे के चीफ वॉरेन बफेट हैं, जिनकी वेल्थ 75.6 अरब डॉलर बताई गई है।

टॉप 10 में शामिल अरबपतियों की वेल्थ

बिल गेट्स - 86 अरब डॉलर

वारेन बफेट - 75.6 अरब डॉलर

जेफ बेजॉस- 72.8 अरब डॉलर

अमानिको ओर्टेगा- 72.2 अरब डॉलर

मार्क जुकरबर्ग- 70.0 अरब डॉलर

कार्लोस स्लिम - 59.5 अरब डॉलर

लैरी एलिसन- 52.2 अरब डॉलर

चार्ल्स कोच- 48.3 अरब डॉलर

डेविड कोच- 48.3 अरब डॉलर

माइकल ब्लूमबर्ग- 47.5 अरब डॉलर

बर्कशायर हैथवे ग्रुप में अमेरिकी लोगों का दबदबा है, जो ज्यादातर टेक्नोलॉजी सेक्टर में हैं।

मैगजीन की टॉप 10 लिस्ट में अमेजन के फाउंडर जेफ बेजॉस तीसरे, फेसबुक के सीईओ और को-फाउंडर मार्क जुकरबर्ग 5वें और ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन 7वें नंबर पर हैं।

ट्रम्प इस लिस्ट में 544वें नंबर हैं और उनकी वेल्थ 3.5 अरब डॉलर बताई गई है।

लिस्ट में 101 भारतीयों को भी जगह मिली है, हालांकि टॉप 10 में कोई भारतीय नहीं है।

फोर्ब्स ने दुनिया के 2043 अमीरों को अपनी इस लिस्ट में शामिल किया है, जिनकी कुल नेट वर्थ 7.67 ट्रिलियन डॉलर है।

भारतीय अरबपतियों में मुकेश अंबानी टॉप पर

भारतीयों में सबसे आगे रिलायंस इंडस्ट्रीज के चीफ मुकेश अंबानी हैं, वे 33वें नंबर पर हैं। पिछले साल उनका नंबर 36वां था। अंबानी की वेल्थ 23.2 अरब डॉलर बताई गई है।

उनके बाद लक्ष्मी मित्तल को 16.4 अरब डॉलर की वेल्थ के साथ 56वें नंबर पर जगह मिली है। जबकि आईटी दिग्गज अजीम प्रेमजी 72वें नंबर पर हैं, उनकी वेल्थ 12.2 अरब डॉलर है।

भारतीय मूल के करीब 20 अरबपति दुनिया में कई देशों में अपना बिजनेस कर रहे हैं। ब्रिटेन के हिंदुजा ब्रदर्स की लिस्ट में 64वीं रैंक है, उनकी नेट वर्थ 15.4 अरब डॉलर है।

पालोनजी मिस्त्री 77वें नंबर पर हैं, उनकी नेट वर्थ 14.3 अरब डॉलर है।

अनिल अंबानी 745वें नंबर पर हैं, उनकी नेट वर्थ 2.7 अरब डॉलर है।

लिस्ट में सिर्फ 4 भारतीय महिला अरबपतियों को जगह मिली हैं। इनमें सावित्री जिंदल (303 रैंक), स्मिता कृष्णा गोदरेज (814 रैंक), किरण मजूमदार शॉ (973 रैंक) और लीना तिवारी (1030 रैंक) शामिल हैं।

अडाणी ग्रुप के फाउंडर गौतम अडाणी (250), बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज (544), इन्वेस्टर राकेश झुनझुनवाला (939), इन्फोसिस के को-फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति (1161), इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन निलेकणि (1290), महिंद्रा ग्रुप के चीफ आनंद महिंद्रा (1567), यस बैंक के हेड राणा कपूर (1795), पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा (1567)।

फोर्ब्स ने कहा है कि दुनिया में अरबपतियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 13% बढ़कर 2043 हो गई है। मैगजीन 31 सालों से यह लिस्ट पब्लिश कर रही है, इस दौरान यह सालाना सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी है। फोर्ब्स की इस लिस्ट में अमेरिका में सबसे ज्यादा 565 अरबपतियों की संख्या बताई गई है। चीन 319 अरबपतियों के साथ दूसरे नंबर पर, जबकि जर्मनी 114 अरबपतियों के साथ तीसरे नंबर पर है।

यूनाइटेड नेशंस की वर्ल्ड हैप्पिनेस रिपोर्ट 2017 में नॉर्वे को दुनिया का सबसे खुशी देश करार दिया गया है। यह पिछले साल चौथी रैंक पर था। इस बार यह डेनमार्क को पीछे छोड़ नंबर वन बन गया है। वहीं, 155 देशों की लिस्ट में चीन 79वें, पाकिस्तान 80वें और भारत 122वें नंबर पर है। यानी यूएन यह मानता है कि भारतीयों से ज्यादा पाकिस्तानी खुश रहते हैं। बता दें कि पिछली बार भारत इस लिस्ट में 118वें नंबर पर था। इस बार वह रैंक में चार पायदान और पीछे हो गया है।

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2017 तैयार करने वाले सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशन नेटवर्क (SDSN) के डायरेक्टर जैफरी एस. ने कहा कि खुश देश वो हैं जहां खुशहाली, सोसायटी में आपसी भरोसा, लोगों के बीच बराबरी और सरकार पर भरोसा ज्यादा है और इन सभी के बीच अच्छा बैलेंस है।

इस सालाना रिपोर्ट का मकसद सरकारों और सिविल सोसायटी को खुशहाली के बेहतर तरीके बताना हैं।देशों के हैप्पीनेस इंडेक्स को वहां प्रति व्यक्ति जीडीपी, अच्छी लाइफ एक्सपेंटेंसी, फ्रीडम, सोशल सपोर्ट, उदारता और सरकार या बिजनेस में जीरो करप्शन के पैमाने पर आंका गया।

टॉप-10 में ये देश शामिलरैंक देश

1 नॉर्वे

2 डेनमार्क

3 आईसलैंड

4 स्विट्जरलैंड

5 फिनलैंड

6 नीदरलैंड

7 कैनेडा

8 न्यूजीलैंड

9 ऑस्ट्रेलिया

10 स्वीडन

79 चीन

80 पाकिस्तान

122 भारत

2012 से हर साल आ रही इस रिपोर्ट में 2016 में डेनमार्क नंबर वन और नॉर्वे नंबर 4 पर था। इस बार वह नंबर-1 हो गया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्वे ने अपने देश में तेल की कम कीमतों के बावजूद नंबर-1 रैंक हासिल की है। यह देश सिर्फ ऑयल वैल्थ के चलते सबसे ज्यादा हैप्पी नहीं है। वह ऑयल को काफी धीरे-धीरे प्रोड्यूस कर रहा है। मौजूदा दौर की बजाय फ्यूचर की चीजों पर ज्यादा इन्वेस्ट कर रहा है। 

नॉर्वे में लोगों के बीच आपसी भरोसे का भाव है। ज्यादातर लाेग एक ही मकसद के लिए काम करते हैं। वहां के लोगों में उदारता है। देश में गुड गवर्नेंस है

सब-सहारा अफ्रीका में आने वाले देश जैसे सीरिया और यमन 155 देशों की लिस्ट में सबसे कम खुश हैं। हैप्पीनेस के 6 पैमानों पर ये देश सबसे कमजोर हैं।

सीबीएसई ने छठी से नौंवी क्लास तक का असेसमेंट व एग्जामिनेशन सिस्टम बदल दिया है। छठी से आठवीं तक देशभर में सीबीएसई से जुड़े सभी 18,688 स्कूल अब साल में दो बार एग्जाम लेंगे। इनका नाम टर्म-1 और टर्म-2 रहेगा। इनके आधार पर सभी स्कूल रिपोर्ट कार्ड भी एक जैसा ही जारी करेंगे। नौंवी के लिए एग्जाम सिस्टम और रिपोर्ट कार्ड 10वीं जैसे रहेंगे। यह सिस्टम 2017-18 से ही लागू होगी।

21.03.2017 को इसका प्रोफार्मा स्कूलों को जारी कर दिया गया। 

टर्म-1 : 100 मार्क्स की होगी। 20 मार्क्स स्टूडेंट के व्यवहार और एजुकेशनल एक्टिविटीज के होंगे। बाकी 80 मार्क्स लिखित एग्जाम के।- 20 मार्क्स रिटन एग्जाम से पहले ही तय कर लिए जाएंगे। इनमें से 10 मार्क्स पीरियोडिक टेस्ट के रहेंगे। स्कूल की ओर से पीरियोडिक टेस्ट के एलान तक कवर सिलेबस इसमें शामिल किया जाएगा।- बाकी के 10 मार्क्स दो जगह बंटेंगे। 5 नोटबुक सबमिट करने के और 5 मार्क्स सब्जेक्ट्स के प्रति स्टूडेंट की समझ के लिए दिए जाएंगे।- यह 20 मार्क्स बाद में 80 मार्क्स की एग्जाम के साथ जोड़े जाएंगे।

टर्म-2 : 100 मार्क्स की ही रहेगी। इसमें भी 20 मार्क्स स्टूडेंट की एजुकेशनल एक्टिविटीज के और 80 लिखित एग्जाम के होंगे।

80 मार्क्स की लिखित एग्जाम में सिलेबस थोड़ा बदलेगा। छठी की एग्जाम में टर्म 2 का पूरा+टर्म 1 का 10% सिलेबस शामिल होगा।

सातवीं के स्टूडेंट्स के लिए टर्म 2 का पूरा+टर्म 1 का 20% सिलेबस 80 मार्क्स वाली लिखित एग्जाम में शामिल किया जाएगा।

आठवीं के स्टूडेंट्स की टर्म 2 का पूरा+टर्म 1 का 30% सिलेबस 80 मार्क्स की एग्जाम में शामिल रहेगा। ताकि पूरे सिलेबस पर पकड़ बने।

2017-18 से 10वीं क्लास में ग्रेडिंग खत्म कर नंबर सिस्टम लागू किया जा रहा है। पैटर्न बदलने का मकसद छठी से ही 10वीं के लिए तैयार करना है।

रिपोर्ट कार्ड एक जैसा होने के बाद माइग्रेशन पर दूसरे राज्य में जाने वाले स्टूडेंट्स का दाखिला आसानी से हो जाएगा। रिपोर्ट कार्ड ऑनलाइन रहेगा।

अभी असेसमेंट और एग्जाम का पैटर्न एक जैसा नहीं है। कोई 3 तो कोई 4 एग्जाम लेता है। सभी एग्जाम्स का एवरेज निकालकर सालाना रिजल्ट बनता है। रिपोर्ट कार्ड का पैटर्न भी अलग-अलग रहता है।

विश्व आर्थिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की 100 यंग ग्लोबल लीडर्स की सूची में पांच भारतीयों ने जगह बनाई है। इनमें पेटीएम के संस्थापक व सीईओ विजय शेखर शर्मा, द तमारा हॉस्पिटैलिटी की श्रुति शिबूलाल, ब्लिपर के संस्थापक व सीईओ अंबरीश मित्रा, फार्चून इंडिया के संपादक हिंडोल सेनगुप्ता, स्वानिती इनीशिएटिव की रित्विका भट्टाचार्य अग्रवाल शामिल हैं।

पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा ने बताया कि मोबाइल वॉलेट सेवा देने वाली कंपनी पेटीएम मार्च के अंत तक देश में पेमेंट बैंक का परिचालन भी शुरू करने वाली है। उन्होंने बताया कि यह पेमेंट बैंक उन लाखों लोगों को बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगा जो अब तक इससे पूरी तरह या आंशिक रूप से वंचित हैं।

हॉस्पिटैलिटी वेंचर द तमारा की मुखिया श्रुति इंफोसिस के सह-संस्थापक एसडी शिबूलाल की बेटी हैं। अभी तमारा बेंगलुरु और केरल में काम कर रहा है। मित्रा के नेतृत्व वाली ब्लिपर एक मोबाइल फोन एप कंपनी है। इसका कारोबार डेढ़ अरब डॉलर का है।

इस सूची में पब्लिक सेक्टर से अजा ब्राउन को स्थान मिला है। वह कैलिफोर्निया के कांप्टन की सबसे युवा मेयर हैं। दुनियाभर में एप्पल के महात्वाकांक्षी क्लीन एनर्जी प्रोग्राम का नेतृत्व करने वाली केटी हिल को भी सूची में जगह मिली है। इसमें जीनोम एडिटिंग पर काम करने वाले विश्व के दो शीर्ष वैज्ञानिकों ने नाम भी हैं। इनमें ई-जेनेसिस बायोसाइंसेज के प्रमुख वैज्ञानिक लुहान यांग और एमआइटी और हार्वर्ड के बोर्ड के सदस्य फेंग झांग शामिल हैं।

दक्षिण एशिया से इस सूची में नौ लोगों को जगह मिली है। इनमें से पांच भारत के हैं। इस सूची में अमरीका और यूरोप में रह रहे भारतीय मूल के कुछ और लोग भी जगह बनाने में सफल रहे हैं। डब्ल्यूईएफ हर साल दुनिया के 100 यंग ग्लोबल लीडर्स का चयन करता है। इनकी उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं होती है। इनमें ऐसे लोगों को चुना जाता है जो नए नजरिए के साथ दुनिया की सबसे जटिल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस सूची में आधे लोग बिजनेस तो आधे नॉट-फॉर-प्रॉफिट सेक्टर से लिए गए हैं। इन्होंने अच्छा काम करके लोगों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है।

आजादी के करीब 70 साल बाद भारत की पहली मेड इन इंडिया ट्रेन 18.03.2017 से चलनी शुरू. रेलमंत्री सुरेश प्रभु मुंबई में ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. भारत की स्वदेशी ट्रेन का नाम 'मेधा' रखा गया है. अपनी पहली यात्रा में मेधा ट्रेन ने मुंबई के चर्चगेट से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) तक की यात्रा की.

इससे पहले 'मेधा' ट्रेन का कई चरण में सफल ट्रायल किया जा चुका है. इस ट्रेन को कमिश्नर ऑफ रेल सेफ्टी (सीआरएस) की स्वीकृति मिल चुकी है. 

भारत की स्वदेशी ट्रेन में कई ऐसी खूबियां हैं जो उसे दुनिया के कई ट्रेनों से उसे अगल बनाती है. इस ट्रेन में एक साथ 6,050 यात्री यात्रा कर सकते हैं. इसमें 1,168 सीटे हैं. इस ट्रेन की स्पीड 110 किमी प्रति घंटा है.

इस ट्रेन में फ्रेश एयर कूलिंग क्षमता 16,000 प्रति घंटा मीटर क्यूबिक है. रिजेनरेटड ब्रेकिंग सिस्टम युक्त यह रेक 30 से 35 प्रतिशत बिजली परिचालन के दौरान बचा सकती है. रेलवे अधिकारी के मुताबिक मेड-इन-इंडिया ट्रेन 'मेधा' को बनाने में लगभग 43.23 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. जबकि विदेश से खरीदी जाने वाली बॉम्बार्डियर ट्रेन की कीमत 44.36 करोड़ रुपए है.

मेक इन इंडिया के तहत देश की पहली स्वदेशी लोकल 'मेधा' हैदराबाद मेधा सर्वो ड्राइव्स फर्म की ओर से प्रायोजित है और चेन्नई कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है. वर्तमान में मध्य और पश्चिम रेल पर परिचालित होने वाली लोकल चैन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में तैयार होती है. इन लोकल ट्रेनों में इलेक्ट्रिक तकनीकी समेत अन्य तकनीकी संबंधी काम सीमेंस और बॉम्बार्डियर कंपनियों की देख रेख में होता है. ये कंपनियां विदेशी है.

बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम (Benami Transactions Prohibition-Act) भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जो बेनामी लेनदेन का निषेध करता है। यह पहली बार 1988 में पारित हुआ तथा २०१६ में इसमें संशोधन किया गया। संशोधित कानून 01 नवम्बर, 2016 से लागू हो गया। संशोधित बिल में बेनामी संपत्‍तियों को जब्‍त करने और उन्‍हें सील करने का अधिकार है। साथ ही, जुर्माने के साथ कैद का भी प्रावधान है। भारत में काले धन की बढ़ती समस्‍या को खत्‍म करने की दिशा में यह एक और कदम है।

मूल अधिनियम में बेनामी लेनदेन करने पर तीन साल की जेल और जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। संशोधित कानून के तहत सजा की अवधि बढ़ाकर सात साल कर दी गई है। जो लोग जानबूझकर गलत सूचना देते हैं उन पर सम्पत्ति के बाजार मूल्य का 10 प्रतिशत तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है। नया कानून घरेलू ब्लैक मनी खासकर रियल एस्टेट सेक्टर में लगे काले धन की जांच के लिए लाया गया है।

बेनामी संपत्ति वह है जिसकी कीमत किसी और ने चुकाई हो किन्तु नाम किसी दूसरे व्यक्ति का हो। यह संपत्त‍ि पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीदी गई होती है। जिसके नाम पर ऐसी संपत्त‍ि खरीदी गई होती है, उसे 'बेनामदार' कहा जाता है। बेनामी संपत्ति चल या अचल संपत्त‍ि या वित्तीय दस्तावेजों के तौर पर हो सकती है। कुछ लोग अपने काले धन को ऐसी संपत्ति में निवेश करते हैं जो उनके खुद के नाम पर ना होकर किसी और के नाम होती है। ऐसे लोग संपत्ति अपने नौकर, पत्नी-बच्चों, मित्रों या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से खरीदते लेते हैं।

आमतौर पर ऐसे लोग बेनामी संपत्त‍ि रखते हैं जिनकी आमदनी का वर्तमान स्रोत स्वामित्व वाली संपत्त‍ि खरीदने के लिहाज से अपर्याप्त होता है। यह बहनों, भाइयों या रिश्तेदारों के साथ संयुक्त सम्पत्ति भी हो सकती है जिसकी रकम का भुगतान आय के घोषित स्रोतों से किया जाता है। इसमें संपत्त‍ि के एवज में भुगतान करने वाले के नाम से कोई वैध दस्तावेज नहीं होता है। ऐसे मामलों में बेनामी लेनदेन में शामिल दोनों पक्षों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

अगर किसी ने अपने बच्चों या पत्नी के नाम संपत्ति खरीदी है लेकिन उसे अपने आयकर रिटर्न में नहीं दिखाया तो उसे बेनामी संपत्ति माना जायेगा। अगर सरकार को किसी सम्पत्ति पर अंदेशा होता है तो वो उस संपत्ति के मालिक से पूछताछ कर सकती है और उसे नोटिस भेजकर उससे उस प्रॉपर्टी के सभी कागजात मांग सकती है जिसे मालिक को 90 दिनों के अंदर दिखाना होगा। अगर जाँच में कुछ गड़बड़ी पायी गई तो उस पर कड़ी कार्यवाही हो सकती है।

इस नए कानून के अन्तर्गत बेनामी लेनदेन करने वाले को 3 से 7 साल की जेल और उस प्रॉपर्टी की बाजार कीमत पर 25% जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोई बेनामी संपत्ति की गलत सूचना देता है तो उस पर प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का 10% तक जुर्माना और 6 महीने से 5 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है। इनके अलावा अगर कोई ये सिद्ध नहीं कर पाया की ये सम्पत्ति उसकी है तो सरकार द्वारा वह सम्पत्ति जब्त भी की जा सकती है।

किसी जमाने में मणिपुर राज्य से फुटबाल खिलाड़ी के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले नोंगथोम्बम बिरेन सिंह मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में बनने वाली सरकार के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं. राज्यपाल नजमा हेप्तुल्ला ने 15  को राजभवन में दोपहर 1 बजे बिरेन सिंह को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, प्रकाश जावडेकर, जितेंद्र सिंह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे.

इनके बारे में कहा जाता है कि फुटबाल और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका जो प्रदर्शन रहा वही उन्हें आज मुख्यमंत्री की कुर्सी तक ले गया. मैतेई समुदाय से आने वाले बिरेन सिंह ग्रेजुएट होने के साथ ही पत्रकारिता में डिप्लोमा कर रखा हैं.

ईस्ट जिले के लुवांगसांगबाम ममांग लइकै गांव में 1 जनवरी 1961 में जन्में बिरेन सिंह राजनीति में आने से पहले देश से बाहर खेलने वाले मणिपुर के एकमात्र चर्चित फुटबाल खिलाड़ी थे.

लेफ्ट बैक पोजीशन में खेलने वाले बिरेन सिंह का डिफेन्स कमाल का था. यही कारण रहा कि साल 1981 में डूरंड कप जीतने वाली सीमा सुरक्षा बल टीम के वे सदस्य थे.

बाद में उन्होंने बतौर संपादक नाहोरोलगी थुआदंग नामक एक अख़बार में काम करना शुरू किया. उस समय मणिपुर में सरकार और चरमपंथी संगठनों के दबाव के बीच युवाओं की भूमिका पर बतौर पत्रकार काम करना आसान नहीं हुआ करता था.

मणिपुर के लोगों के बीच एक फुटबाल खिलाड़ी और बाद में एक पत्रकार के तौर पर वो काफी चर्चित रहे जिसका फायदा उन्हें राजनीति में प्रवेश करते समय मिला.

ब्रिटेन की संसद ने ‘ब्रेग्जिट विधेयक’ पारित करते हुए प्रधानमंत्री टेरीजा मे के लिए यूरोपीय संघ से ब्रिटेन की निकासी पर बातचीत शुरू करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। हाउस ऑफ कॉमन्स ने 13.03.2017 को हाउस ऑफ लॉर्डस के संशोधनों को 335-287 मतों के अंतर से खारिज कर दिया था। इन संशोधनों में सरकार से कहा गया था कि वह ब्रेग्जिट वार्ताओं की शुरूआत के तीन माह के भीतर यूरोपीय संघ के नागरिकों की स्थिति की सुरक्षा करे। उन्होंने ब्रेग्जिट के समझौते पर संसद में अर्थपूर्ण मतदान कराए जाने के आह्वान को भी 331-286 मतों के अंतर से खारिज कर दिया।

 इसका अर्थ यह हुआ कि यूरोपीय संघ (निकासी की अधिसूचना) विधेयक बिना किसी बदलाव के हाउस ऑफ कॉमन्स में पारित हो गया। इसके बाद यह हाउस ऑफ लॉर्डस में बिना किसी संशोधन के पारित हो गया। वहां इसके पक्ष में 274 और विरोध में 118 मत पड़े। इससे निकासी की शर्तों पर संसद के पास वीटो का अधिकार के मुद्दे पर अब इसे कॉमन्स में दोबारा चुनौती नहीं दी जा सकती। हाउस ऑफ लॉर्डस पहले ही इस बात पर सहमत हो गया था कि यूरोपीय संघ के नागरिकों के दर्जे के मुद्दे गारंटी को विधेयक में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा। इन्हें सांसदों ने खारिज कर दिया था। ऐसी उम्मीद है कि विधेयक को कानून बनाने के लिए अब महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से शाही मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद एलिजाबेथ लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 को इस सप्ताह किसी भी समय सैद्धांतिक तौर पर शुरू कर सकती हैं। हालांकि इस बात के संकेत कम हैं कि वह इस माह के अंत तक बातचीत शुरू कर पाएं। विपक्षी लेबर पार्टी ने पहले मे से अपील की थी कि वह ‘वाकई अहम’ लॉर्डस संशोधनों को बरकरार रखने पर विचार करें।

गूगल ने प्ले स्टोर से कुछ संदिग्ध ऐप्स को ब्लॉक कर दिया। हो सकता है कि भविष्य में भी ऐसे कुछ ऐप आएं, जो आपके स्मार्टफोन और प्रिवेसी के लिए खतरनाक हों। इसलिए बेहतर है कि स्मार्टफोन में कुछ पहले से ही सिक्यॉरिटी ऐप इंस्टॉल कर लिए जाएं। हम लाए हैं टॉप-8 ऐंटीवायरस ऐप, जिन्हें आप जरूरत के हिसाब से गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करके इंस्टॉल कर सकते हैं।

1. CM Security Antivirus AppLock (best)

यह एक शानदार सिक्यॉरिटी ऑप्शन है। ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन्स को यह कई तरह के मैलवेयर्स से बचा सकता है। ऐंड्रॉयड से जुड़ी चीज़ों पर रिपोर्ट्स पेश करने वाली रीसर्च कंपनी चीता मोबाइल का यह ऐप काफी फास्ट भी है।

2. AVAST ​Mobile Security & Antivirus

इसके जरिए आप अपने फोन में इंस्टॉल ऐप्स को स्कैन कर सकते हैं। इसमें एसएमएस और कॉल फिल्टरिंग लगी है। चोरी होने के मामरे में आप इसे लॉक या वाइप कर सकते हैं। यह जीपीएस ट्रैकिंग भी कर सकता है और सायरन भी बजा सकता है।

3. 360 Security

360 सिक्यॉरिटी काफी पॉप्युलर ऐंटीवायरस ऐप है। इसमें एक ऐंटीवायरस इंजन है जो अपने आप आपकी फाइल्स स्कैन करता है और कुछ गड़बड़ पाए जाने पर खुद को अपडेट कर सकता है। यह इंस्टॉल करने से पहले आपके फोन को चेक करता है। यह सिस्टम क्लीनर भी है, जो आपके फोन से जंक फाइल्स हटाकर रैम को फ्री करता है। इसमें पावर सेविंग फीचर्स भी हैं।

4. Kaspersky Internet Security

कैस्परस्की के पीसी ऐंटीवायरस को कई बार बेस्ट ऐंटवायरस चुना जा चुका है। इसका फ्री मोबाइल वर्शन भी स्टैंडर्ड ऐंटी-मैलवेयर प्रॉटेक्शन देता है। आप इसकी प्रीमियम वर्शन लेकर क्लाउड प्रॉडेक्शन, फिशिंग प्रॉटेक्शन और वेब ब्राउज़िंग के वक्त प्रिवेसी प्रॉटेक्शन जैसे फीचर्स भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

5. AVG AntiVirus FREE - Security Scan

एवीजी ऐंटीवायरस एक फ्री ऐप है, जो आपके स्मार्टफोन को वायरस, संदिग्ध ऐप्स और अन्य जासूसी करने वाले बग्स से बचाता है। आप अपने ऐप्स के अलावा फाइल्स और सेटिंग्स वगैरह की भी जांच कर सकते हैं। इसमें एक ऐसा भी ऑप्शन है, जो आपके फोन की बैटरी को ज्यादा खर्च कर रहे ऐप्स को बंद कर सकता है। आप गूगल मैप्स के जरिए न सिर्फ अपने डिवाइस की लोकेशन पता कर सकते हैं, बल्कि इसे ब्लॉक भी कर सकते हैं और इन्फर्मेशन को डिलीट भी कर सकते हैं।

6. ​Norton Security and Antivirus

नॉर्टन सिक्यॉरिटी ऐंड ऐंटीवायरस एक फ्री ऐप है, जो मैलवेयर्स को ब्लॉक करता है और हटाता है। अगर आप इसका प्रीमियम वर्शन खरीदते हैं तो आपको कई सारे फीचर्स मिलेंगे। आप इसे न सिर्फ कहीं दूर से लॉक कर सकते हैं, बल्कि चोरी होने पर यूज कर रहे शख्स की तस्वीरें भी खींच सकते हैं। प्रीमियम वर्शन में ऐप अडवाइज़र जैसा फीचर है, जो प्रिवेसी के खतरों से लेकर ज्यादा बैटरी खर्च करने तक के बारे में आगाह करता है।

7. ​Malwarebytes Anti-Malware

मैलवेयरबाइट्स ऐंटी-मैलवेयर भी अपने शानदार पीसी सॉफ्टवेयर की वजह से जाना जाता है। इसका ऐंड्रॉयड वर्शन कई सारे फीचर्स देता है। यह मैलवेयर से तो बचाता ही है, एक प्रिवेसी मैनेजर के तौर पर भी काम कर सकता है। यह आपके उन ऐप्स को स्कैन करता है, जो संदिग्ध ऐक्टिविटी कर रहे होते हैं। इसे ऐंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर के साथ जोड़ा गया है, जिससे आप रिमोट ट्रैकिंग और ऐंटी थेफ्ट फीचर्स यूज कर सकते हैं।

8. AVL 

एवीएल ऐसा सिक्यॉरिटी ऑप्शन है, जिसका इंटरफेस बड़ा सरल और अच्छा है। इसमें ज्यादा ऐंटी-थेफ्ट फीचर तो नहीं हैं, मगर बेसिक प्रॉटेक्शन के लिए यह ठीक है। यह बहुत हल्का है और आपकी बैटरी भी ज्यादा यूज नहीं करता।

संसद के बजट सत्र के दूसरा चरण चल रहा है. 14.03.2017 को लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह शत्रु संपत्ति संशोधन बिल को पेश करेंगे. इसको लेकर बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में मौजूद रहने को कहा है.

राज्यसभा करीब 50 साल पुराने शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधित बिल को पास कर चुका है. इस बिल में युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन पलायन कर गए लोगों की तरफ से छोड़ी गई संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं. विभाजन या युद्ध के बाद गए लोगों की छूटी प्रॉपर्टी के दावों से निपटने के प्रावधान हैं. इसके मुताबिक पलायन करके वहां की नागरिकता लेने वाले लोगों की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी.

भारत में रह रहे उत्तराधिकारियों का भी उनकी छूटी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रहेगा. संशोधनों से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोगों के प्रभावित होने से ये मामला विवाद में भी है. संसद से पारित होने के बाद यह बिल इस संबंध में सरकार की तरफ से जारी किए गए ऑर्डिनेंस का स्थान लेगा.

48 साल पुराने इस एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट बिल को को राज्यसभा से पास कर दिया गया. हालांकि राज्यसभा में विपक्ष की गैरमौजूदगी में ये बिल पास किया गया था. राज्यसभा में लंबित रहने की वजह से सरकार को इसके लिए पांच बार ऑर्डिनेंस लाना पड़ा था.

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने यह बिल राज्यसभा में धोखे से पास कराया है. विपक्ष की मांग थी कि इस विधेयक पर आज चर्चा नहीं की जाए और अगले सप्ताह इस पर व्यापक चर्चा की जाए जब सदन में ज्यादातर सदस्य मौजूद हो.

सरकार ने कैसे पास किया बिल : उस समय सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या कम थी और कांग्रेस के एक सदस्य ने कोरम का मुद्दा भी उठाया. हालांकि उपसभापति कुरियन ने गणना प्रकिया पूरी किए जाने के बाद कहा कि सदन में कोरम मौजूद है. बाद में सरकार के इस विधेयक के पारित कराने पर जोर दिए जाने पर कांग्रेस, वाम, तृणमूल सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया था.

नरेंद्र मोदी की भारत सरकार द्वारा पिछले लगभग दो साल में कई योजनाओं की शुरुआत की गयी है जिनका लाभ सीधा भारत की जनता को मिल रहा है. सभी 50 से ज्यादा नयी सरकारी योजनाओं की सूची जो भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अभी तक शुरू की हैं या पुरानी बंद योजनाओं को दोबारा से शुरू किया है उनकी सूची नीचे है.

1-प्रधानमंत्री जन धन योजना

2-प्रधानमंत्री आवास योजना

3-प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना

4-प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

5-प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

6-प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

7-अटल पेंशन योजना

8-संसद आदर्श ग्राम योजना

9-प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

10-प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना

11-प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजनाये

12-प्रधानमंत्री जन औषधि योजना

13-मेक इन इंडिया

14-स्वच्छ भारत अभियान

15-किसान विकास पत्र

16-सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम

17-डिजिटल इंडिया

18-स्किल इंडिया

18-बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना

20-मिशन इन्द्रधनुष

21-दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

22-दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण

23-कौशल्या योजना

24-पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते योजना

25-अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड

26-अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत योजना)

27-स्वदेश दर्शन योजना

28-पिल्ग्रिमेज रेजुवेनशन एंड स्पिरिचुअल ऑग्मेंटशन ड्राइव (प्रसाद योजना)

29-नेशनल हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑग्मेंटशन योजना (ह्रदय योजना)

30-उड़ान स्कीम

31-नेशनल बाल स्वछता मिशन

32-वन रैंक वन पेंशन (OROP) स्कीम

33-स्मार्ट सिटी मिशन

34-गोल्ड मोनेटाईजेशन स्कीम

35-स्टार्टअप इंडिया, स्टन्डप इंडिया

36-डिजिलोकर

37-इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम

38-श्यामा प्रसाद मुखेर्जी रुर्बन मिशनसागरमाला प्रोजेक्ट

39-‘प्रकाश पथ’ – ‘वे टू लाइट’

40-उज्वल डिस्कॉम असुरन्स योजनाविकल्प स्कीम

41-नेशनल स्पोर्ट्स टैलेंट सर्च स्कीम

42-राष्ट्रीय गोकुल मिशन

43-पहल – डायरेक्ट बेनिफिट्स ट्रांसफर फॉर LPG (DBTL) कंस्यूमर्स स्कीम

44-नेशनल इंस्टीटूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (नीति आयोग)

45-प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना

46-नमामि गंगे प्रोजेक्ट

47-सेतु भारतं प्रोजेक्ट

48-रियल एस्टेट बिल

49-आधार बिल

50-क्लीन माय कोच

51-राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान – Proposed

52-प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

 नासा अगले साल सूर्य पर अपना पहला रोबोटिक अंतरिक्षयान भेजने की योजना बना रहा है। सूर्य के वातावरण की जांच करने के लिए इस अंतरिक्ष यान को इसमें 60 लाख किलोमीटर तक भेजे जाने की योजना है। इंसान चांद, मंगल और यहां तक कि सुदूर अंतरिक्ष में भी अंतरिक्षयान भेज चुका है। अब नासा की योजना सूर्य पर सोलर प्रोब प्लस मिशन भेजने की है। सूर्य पृथ्वी से लगभग 14.90 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर है।

गोड्डार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में नासा के अनुसंधान वैज्ञानिक एरिक क्रिश्चियन ने कहा, ‘यह सूर्य के लिए भेजा जाने वाला हमारा पहला मिशन होगा।’ क्रिश्चियन ने कहा, ‘हम सूर्य की सतह पर नहीं पहुंच सकते लेकिन यह मिशन उसके इतना करीब तो पहुंच ही जाएगा कि तीन अहम सवालों के जवाब दे सके।’ यह मिशन संभवत: इस बात का जवाब दे पाएगा कि सूर्य की सतह उसके वातावरण जितनी गर्म क्यों नहीं है।

नासा के अनुसार, सूर्य की सतह का ताप महज 5500 डिग्री सेल्सियस है जबकि उसके वातावरण का ताप 20 लाख डिग्री सेल्सियस है। ‘लाइव साइंस’ की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि सौर हवाओं को उनकी गति कैसे मिलती है। इस मिशन से यह भी पता चल सकता है कि सूर्य कई बार इतनी अधिक उर्जा के कण क्यों उत्सर्जित करता है, जो असुरक्षित अंतरिक्षयात्रियों एवं अंतरिक्षयानों के लिए खतरा पैदा करते हैं।

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक कानून है जिसके माध्यम से भारत सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में जनसाधारण को खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।

भारतीय संसद द्वारा पारित होने के उपरांत सरकार द्वारा 10 सितम्‍बर, 2013 को इसे अधिसूचित कर दिया गया।

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्‍य लोगों को सस्‍ती दर पर पर्याप्‍त मात्रा में उत्‍तम खाद्यान्‍न उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मिले और वे सम्‍मान के साथ जीवन जी सकें।

मुख्य प्रावधान

इस कानून के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक तथा शहरी क्षेत्रों की 50 प्रतिशत तक की आबादी को रियायती दरों पर खाद्यान्‍न उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस प्रकार देश की लगभग दो-तिहाई जनसंख्‍या को इसका लाभ मिलने का अनुमान है। पात्र परिवारों को प्रतिमाह पांच कि. ग्रा. चावल, गेहूं व मोटा अनाज क्रमशः 3, 2 व 1 रुपये प्रति कि. ग्रा. की रियायती दर पर मिल सकेगा। अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) मे शामिल परिवारों को प्रति परिवार 35 कि. ग्रा. अनाज का मिलना पूर्ववत जारी रहेगा। इसके लागू होने के 365 दिन के अवधि के लिए, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएम) के अंतर्गत‍ सब्सिडीयुक्‍त खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने हेतु, पात्र परिवारों का चयन किया जाएगा। गर्भव‍ती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान तथा प्रसव के छ: माह के उपरांत भोजन के अलावा कम से कम 6000 रुपये का मातृत्‍व लाभ भी मिलेगा।

14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चे पौष्टिक आहार अथवा निर्धारित पौष्टिक मानदण्‍डानुसार घर राशन ले जा सकें।खाद्यान्‍न अथवा भोजन की आपूर्ति न हो पाने की स्थिति में, लाभार्थी को खाद्य सुरक्षा भत्‍ता दिया जाएगा। इस अधिनियम के जिला एवं राज्‍यस्‍तर पर शिकायत निवारण तंत्र स्‍थापित करने का भी प्रावधान है।

पारदर्शिता एवं उत्‍तरदायित्‍व सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्‍यक प्रावधान किए गए हैं।

नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) अर्थात् राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क ज्ञान, कौशल और अभिरुचि के अनेक स्तरों के अनुसार योग्यताएं निर्धारित करता है. इन स्तरों को सीखने के परिणामों के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है, जो प्रशिक्षार्थी को अवश्य हासिल करने होते हैं, भले ही ये कौशल उसने औपचारिक या अनौपचारिक प्रशिक्षण के जरिए हासिल न किए हों. इस अर्थ में एनएसक्यूएफ एक गुणवत्ता आश्वासन फ्रेमवर्क है. अत: यह एक राष्ट्रीय एकीकृत शिक्षा और योग्यता आधारित कौशल फ्रेमवर्क है, जो व्यावसायिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के रूप में समानांतर और शीर्षवत दोनों ही दिशाओं में अधिसंख्य मार्ग प्रदान करेगा. इस तरह यह फ्रेमवर्क सीखने के एक स्तर को अन्य उच्चतर स्तर के साथ भी जोड़ेगा. इससे कोई व्यक्ति वांछित सक्षमता स्तर हासिल कर सकेगा, व्यवसाय बाजार में प्रवेश कर सकेगा और अवसर पाकर अपनी सक्षमताओं को उन्नत बनाने के लिए अतिरिक्त कौशल हासिल कर सकेगा.

एनएसक्यूएफ के मुख्य तत्व इस प्रकार हैं:-

क)विभिन्न स्तरों पर कौशल प्रवीणता और सक्षमताओं की पहचान के लिए राष्ट्रीय सिद्धांत निर्धारित करना ताकि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष बनाया जा सके.

ख)व्यावसायिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और व्यवसाय बाजार में प्रवेश करने और बाहर आने के अधिसंख्य अवसर प्रदान करना.

ग)कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के भीतर प्रगति मार्ग निर्धारित करना.

घ)जीवन पर्यंत प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसरों को बढ़ावा देना.

ङ)उद्योग/नियोक्ताओं के साथ साझेदारी.

च) विभिन्न क्षेत्रों के बीच कौशल विकास के लिए एक पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद व्यवस्था कायम करना.

छ)पहले सीखी गई चीजों को मान्यता देने की अधिक क्षमता कायम करना.

योग्यता फ्रेमवर्क स्कूलों, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदाताओं, उच्चतर शिक्षा संस्थानों, प्राधिकरणों और उद्योग एवं उसके प्रतिनिधिक निकायों, संघों, व्यावसायिक असोसिएशनों और लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के प्रत्यायन के लिए लाभदायक है. इस फ्रेमवर्क के सबसे बड़े लाभार्थियों में वे प्रशिक्षक शामिल हैं, जो फ्रेमवर्क में किसी विशेष स्तर पर किसी योग्यता के सापेक्षिक मूल्य का परीक्षण कर सकते हैं और उनकी व्यावसायिक प्रगति के मार्गों के बारे में विवेकपूर्ण निर्णय कर सकते हैं.

योग्यता फ्रेमवर्क संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अनुभव

जानकारी पर आधारित शिक्षा से प्रशिक्षण परिणामों पर आधारित शिक्षा की दिशा में एक आदर्श परिवर्तन हो रहा है. परिणाम आधारित प्रशिक्षण का प्रयोग व्यापक अर्थ में किया जा रहा है. परिणाम आधारित प्रशिक्षण की दिशा में बदलाव कई कारणों से महत्वपूर्ण हैं:-

क) यह पद्धति शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदाताओं की बजाय उसके इस्तेमालकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित करती है.

ख) किसी प्रशिक्षण प्र्रिक्रया के अंत में किसी प्रशिक्षार्थी से क्या जानने, समझने अथवा क्या करने की अपेक्षा की जाती है, यह स्पष्टीकरण प्रशिक्षार्थियों को इस बात को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है कि किसी पाठ्यक्रम विशेष में क्या प्रस्तावित किया गया है और इसका संबंध अन्य पाठ्यक्रमों और कार्र्यक्रमों के साथ कैसे जुड़ता है.

ग) यह योग्यताओं में पारदर्शिता बढ़ाता है और जवाबदेही सुदृढ़ करता है, जो अलग-अलग प्रशिक्षार्थियों और नियोक्ताओं के लिए लाभदायक है.

विश्व के औद्योगिक और विकासशील देशों में से अधिकतर अपनी योग्यताओं के फ्रेमवर्क में सुधार कर रहे हैं और साथ ही ऐसा फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं, जिससे इन योग्यताओं को एक-दूसरे के साथ जोड़ा जा सके और समाज तथा श्रम बाजार में नई मांगें आमतौर पर पूरी की जा सकें. इन प्रणालियों के विकास को अक्सर उच्चतर शिक्षा, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) और जीवन पर्यंत शिक्षा में हो रहे परिवर्तनों के साथ जोड़ा जाता है.

विश्वभर में अनेक देश योग्यता फ्रेमवर्क शुरू करने की प्रक्रिया में हैं. हालांकि सभी फ्रेमवर्कों के सैद्धांतिक मानदंड अधिकतर समान हैं, परंतु फ्रेमवर्क शुरू करने के लक्ष्य भिन्न हैं. चाहे शिक्षा और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता और उनका लचीलापन बढ़ाने, पहले से प्राप्त किए गए प्रशिक्षण को आसानी से मान्यता प्रदान करने, जीवन पर्यंत प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, योग्यता प्रणालियों की पारदर्शिता में सुधार लाने, उनकी साख बढ़ाने और उनके हस्तांतरण के लिए संभावनाएं पैदा करने या गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों का विकास करने, जैसे विषयों के लिए सरकारें निरंतर योग्यता फ्रेमवर्कों को सुधार के लिए एक नीतिगत साधन के रूप में अपना रही हैं.

भारत में योग्यता फ्रेमवर्क की आवश्यकता

भारत में सामान्य शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण पृथक दायरों में प्रचालित किए जा रहे हैं और दोनों के बीच परस्पर संबंध बहुत कम हैं. इससे व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण को अपनाने में युवाओं को संकोच होता है, क्योंकि यह समझा जाता है कि यह क्षेत्र सम्बद्ध व्यक्ति को उच्चतर डिग्रियां और योग्यताएं हासिल करने से रोकता है. व्यावसायिक शिक्षा से सामान्य शिक्षा और इसके विपरीत दिशा में गतिशीलता बढ़ाने के लिए, भारत के लिए एक योग्यता फ्रेमवर्क अर्थात् राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) आवश्यक है, जो योग्यताओं को अधिक समझने योग्य और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा. एनएसक्यूएफ की आवश्यकता निम्नांकित अतिरिक्त कारणों से भी है:-

क) अभी तक शिक्षा और प्रशिक्षण का फोकस लगभग पूरी तरह जानकारी पर आधारित रहा है. एनएसक्यूएफ परिणाम आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है और एनएसक्यूएफ में प्रत्येक स्तर सक्षमता के संदर्भ में निर्धारित और वर्णित किया जाता है, जो हासिल किया जाना अपेक्षित होता है. इनमें से प्रत्येक सक्षमता स्तर के समरूप व्यावसायिक भूमिकाओं का निर्धारण उद्योग की भागीदारी से, सम्बद्ध क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़) के जरिए किया जाता है.

ख) सीखने और आगे बढऩे के मार्ग, विशेषकर व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में, सामान्यत: अस्पष्ट या नदारद होते हैं. समानांतर गतिशीलता का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. एनएसक्यूएफ प्रगति के मार्गों को पारदर्शी बनाएगा ताकि संस्थान, विद्यार्थी और कर्मचारी स्पष्ट रूप से यह समझ सकें कि किसी विशेष पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद वे क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते तथा योग्यताओं में असमानता और भेदभाव के मुद्दों का समाधान कैसे किया जा सकता है.

ग) संस्थानों के बीच विभिन्न योग्यताओं से सम्बद्ध परिणामों में एकरूपता का अभाव है. प्रत्येक संस्थान के पाठ्यक्रमों के बारे में पृथक अवधि, पृथक सिलेबस, भर्ती और पाठ्यक्रम के नाम के बारे में अलग-अलग जरूरतें हैं. इससे अक्सर देश के विभिन्न हिस्सों में प्रमाणपत्रों/डिप्लोमा/ डिग्रियों की समकक्षता कायम करने में समस्याएं आती हैं. इसका दुष्प्रभाव विद्यार्थियों की रोजगार सक्षमता और गतिशीलता पर पड़ता है.

घ)योग्यताओं की गुणवत्ता के विकास से व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण से सम्बद्ध नकारात्मक धारणा महत्वपूर्ण ढंग से दूर की जा सकती है, इससे डिग्रियों और डॉक्टोरेट उपाधियों सहित उच्चतर शिक्षा ग्रहण करने की भी अनुमति मिलती है.

ङ) लोगों का एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है, जिन्होंने अनौपचारिक क्षेत्र में कौशल हासिल किया है, परंतु उनके पास अपने कौशल को दर्शाने के लिए आवश्यक औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं हैं. सक्षमता आधारित और परिणाम आधारित योग्यता फ्रेमवर्क के रूप में एनएसक्यूएफ पूर्व प्रशिक्षण को मान्यता (आरपीएल) प्रदान करेगा, जिसका वर्तमान शिक्षा और प्रशिक्षण के परिप्रेक्ष्य में व्यापक अभाव है.

च) अधिसंख्य भारतीय योग्यताएं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अंतर्राष्ट्रीय योग्यताएं राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं हैं. इससे विद्यार्थियों और कार्मिकों के समक्ष समस्या पैदा होती है, क्योंकि उनकी अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता पर दुष्प्रभाव पड़ता है और उन्हें फिर से वह योग्यता प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम करना होता है, जो मेजबान देश में मान्यताप्राप्त हो. एनएसक्यूएफ सम्बद्ध द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय समझौतों के माध्यम से भारतीय योग्यताओं को अंतर्राष्ट्रीय योग्यताओं के अनुरूप बनाने में मदद करेगा. अनेक देश पहले से ही योग्यता फ्रेमवर्कों के जरिए अपनी योग्यताओं को अंतर्राष्ट्रीय योग्यताओं के अनुरूप बनाने की प्र्रिक्रया में हैं.

छ)एनएसक्यूएफ में एकीकृत साख संचय और अंतरण प्रणाली, लोगों को उनके जीवन में विभिन्न स्तरों पर उनकी जरूरतों और सुविधा के अनुसार शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार के बीच गतिशील होने की अनुमति प्रदान करेगी. किसी भी विद्यार्थी के लिए यह संभव हो सकेगा कि वह शिक्षा क्षेत्र को छोड़ सके, उद्योग में कुछ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सके और अपने चुने हुए व्यवसाय में उच्चतर प्रगति करने के लिए वापस आकर योग्यताएं प्राप्त करने के लिए अध्ययन कर सके.

एनएसक्यूएफ के लक्ष्य

एनएसक्यूएफ के उद्देश्यों में एक ऐसा फ्रेमवर्क उपलब्ध कराना शामिल है, जो:-

क)भारतीय शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली की विविधता को समायोजित कर सके.

ख)देशभर में स्वीकृत परिणामों के आधार पर योग्यताओं के प्रत्येक स्तर के लिए एक सेट का विकास कर सके.

ग)प्रगति के मार्गों के विकास और रखरखाव के लिए एक ऐसा ढांचा उपलब्ध करा सके, जो योग्यताओं तक पहुंच प्रदान करे और लोगों को इन क्षेत्रों और श्रम बाजार के बीच  विभिन्न शैक्षिक और प्रशिक्षण क्षेत्रों में शीघ्र एवं सुगम प्रवेश एवं वापसी की सुविधा प्राप्त करने में सहायता कर सके. 

घ)लोगों को यह विकल्प प्रदान कर सके कि वे अपने पूर्व प्रशिक्षण और अनुभवों के लिए मान्यताप्राप्त करते हुए शिक्षा और प्रशिक्षण के जरिए तरक्की कर सके.

ङ)शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय नियामक और गुणवत्ता आश्वासन प्रबंधों को नया आधार प्रदान कर सकें.

च)भारतीय योग्यताओं के महत्व और समतुल्यता को अधिक मान्यता देने के जरिए एनएफक्यूएस-अनुवर्ती योग्यताएं रखने वाले व्यक्तियों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता का समर्थन और संवर्धन करें.

एनएसक्यूएफ एक गुणवत्ता आश्वासन फ्रेमवर्क है

- यह भारतीय शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली के भीतर साख प्रदान करने और उसके स्थानांतरण और संवर्धन मार्गों को प्रोत्साहित करता है. यह शिक्षा और प्रशिक्षण में शामिल प्रत्येक पक्ष को देश में प्रस्तावित योग्यताओं के बीच तुलना करने में शामिल होने में मदद करता है और यह समझाता है कि इनमें प्रत्येक के बीच क्या संबंध है.

यह कैसे काम करता है?

नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क में 10 स्तर शामिल हैं. प्रत्येक स्तर अपने समनुरूप सक्षमता प्रदर्शित करने के लिए जटिलता, ज्ञान और स्वायत्तता का भिन्न स्तर प्रस्तुत करता है. फ्रेमवर्क का स्तर-1 निम्नतम जटिलता प्रस्तुत करता है, जबकि स्तर-10 सर्वाधिक जटिलता प्रस्तुत करता है. स्तरों को प्रशिक्षण के परिणामों के रूप में व्यक्त मानदंड द्वारा परिभाषित किया जाता है. योग्यताएं अर्जित करने के लिए धारणात्मक समय व्यक्त करते हुए प्रशिक्षण की मात्रा कुछ स्तरों और कुछ क्षेत्रों के लिए निर्धारित की जा सकती है, परंतु यह जानना महत्वपूर्ण है कि एनएसक्यूएफ के स्तर अध्ययन के वर्षों के साथ सीधे संबंधित नहीं हैं.उनका निर्धारण प्रशिक्षार्थी द्वारा सक्षमता की व्यापक श्रेणियों में की गई मांगों की सीमा द्वारा किया जाता है, जैसे व्यावसायिक जानकारी, व्यावसायिक कौशल, बुनियादी कौशल और उत्तरदायित्व. जीवन पर्यंत प्रशिक्षण के दौरान व्यक्ति निचले स्तरों से उच्चतर स्तर की ओर अथवा योग्यताओं के विभिन्न स्तरों के बीच आगे बढ़ते हैं, क्योंकि वे नया प्रशिक्षण और नए कौशल प्राप्त करते हैं. प्रत्येक एनएसक्यूएफ स्तर प्रशिक्षण परिणामों के रूप में व्यक्त वर्णनकर्ताओं के एक समूह द्वारा निर्धारित किया जाता है. प्रशिक्षण के परिणामों के बीच व्यापक तुलनाओं के लिए स्तर वर्णनकर्ताओं की परिकल्पना की गई है. परंतुऐसा नहीं है कि प्रत्येक योग्यता में स्तर निरूपकों द्वारा निर्धारित सभी विशेषताएं होंगी या होनी चाहिए.

एनएसक्यूएफ स्तर पर प्रत्येक योग्यता पाठ्यचर्या, धारणात्मक संपर्क घंटों, विषयों, अध्ययन की अवधि, कार्यभार, प्रशिक्षक गुणवत्ता और प्रशिक्षण संस्थान के प्रकार के संदर्भ में और भी परिभाषित की जा सकती है, ताकि यह कहा जा सके कि प्रशिक्षण प्र्रिक्रया के अंत में प्रशिक्षार्थी की कितनी योग्यता अपेक्षित अथवा प्रयोज्य है. समान स्तर पर दो या अधिक योग्यताओं को रखना केवल यह दर्शाता है कि वे परिणाम के सामान्य स्तर के संदर्भ में मोटेतौर पर समान हैं. इससे यह पता नहीं चलता कि उनका प्रयोजन और विषयवस्तु अनिवार्यत: एक समान है. एनएसक्यूएफ से संबंधित कुछ अन्य मुद्दे नीचे दिए गए हैं:-

क)कैरिकुलम पैकेज: सक्षमता आधारित पाठ्यचर्या पैकेज के अंतर्गत सिलेबस, विद्यार्थी नियमावली, प्रशिक्षक गाइड, प्रशिक्षण नियमावली, प्रशिक्षक योग्यताएं, दिशा-निर्देशों का मूल्यांकन और परीक्षण तथा मल्टी-मीडिया पैकेज और ई-सामग्री शामिल है. इन सब चीजों का विकास प्रत्येक एनएसक्यूएफ स्तर के लिए किया जाएगा, और जहां अपेक्षित होगा, क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़) द्वारा पहचान किए गए विशेष योग्यता समूहों के लिए किया जाएगा. यह कार्य मंत्रालयों/विभागों, क्षेत्रगत कौशल परिषदों जैसी एजेंसियों और निर्दिष्ट नियामक निकायों या एनएसक्यूएफ के अनुसार किन्हीं अन्य निकायों द्वारा किया जाएगा. एनएसक्यूएफ पाठ्यचर्या प्रमापीय होनी चाहिए, जिसमें कौशल अर्जित करने और उसमें प्रवेश या बहिर्गमन की सुविधा होनी चाहिए. पाठ्यचर्या का डिजाइन एक साख फ्रेमवर्क के भी अनुरूप होना चाहिए, जो अर्जित साख और अर्जित सक्षमताओं को प्रदर्शित कर सके. प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण भी एनएसक्यूएफ के अनुरूप होना चाहिए.

)उद्योग सम्बद्धता: क्योंकि एनएसक्यूएफ एक परिणाम आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है, उद्योग जगत और नियोक्ताओं की भागीदारी एनएसक्यूएफ की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण शर्त है. इसमें व्यावसायिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सामान्य शिक्षा और कौशल विकास पाठ्यक्रम एनएसक्यूएफ के अनुसार और क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़), उद्योग और नियोक्ताओं के परामर्श से परिकल्पित, विकसित और वितरित किए जाएंगे. इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण संस्थान प्रदान करने में भी उद्योग सहायता कर सकते हैं.

ग)समानांतर और शीर्षवत गतिशीलता: समानांतर और शीर्षगत गतिशीलता को अंजाम देने के लिए निम्नांकित चीजें अनिवार्य हैं:-

-प्रत्येक स्तर ऊपर और नीचे के स्तरों से सम्बद्ध है. यदि ये कदम उद्योग क्षेत्र अथवा शैक्षिक क्षेत्र में गायब होंगे, तो एनएसक्यूएफ इन लापता स्तरों की पहचान करने और उन्हें प्रस्तुत करने में सहायता करेगा.

-इन अंतरालों को भरना होगा और इस प्र्रिक्रया में प्रमुख प्रशासनिक मंत्रालय, उस क्षेत्र में पहले से प्रचालित  नियामक निकायों, क्षेत्रगत कौशल परिषदों (एसएससीज़) और एनएसक्यूसी के हिस्सा होने के नाते अन्य सम्बद्ध पक्षों के साथ सलाह मशविरा करना होगा.

-एनएसक्यूएफ द्वारा वांछित समझी जाने वाली परवर्ती गतिशीलता की मात्रा की पहचान की जाएगी, और साख ग्रहण एवं अंतरण के जरिए उसमें मदद करनी होगी. तदनुरूप, एनएसक्यूएफ को ऐसे नियामक संस्थानों (जैसे यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीवीटी, तकनीकी और स्कूल बोर्ड आदि) की आवश्यकता पड़ेगी, जो एनएसक्यूएफ के प्रत्येक स्तर के लिए प्रवेश और बहिर्गमन के मानदंड हासिल की जाने वाली सक्षमताओं के संदर्भ में निर्धारित कर सकें, ताकि व्यावसायिक शिक्षा में शीर्षगत प्रगति को सुदृढ़ बनाया जा सके. यदि आवश्यक हो तो  इन स्तरों के जरिए प्रगति करने वाले व्यक्तियों की आपत्तियों पर विचार किया जा सकता है और उनका समाधान किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, यह व्यवस्था कक्षा 10-12, आईटीआई और पोलीटेक्निक संस्थानों के पासआउट विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित व्यावसायिक/तकनीकी/सामान्य शिक्षा के उच्चतर शिक्षा पाठ्यक्रमों और साथ ही बैचलर ऑफ वोकेशनल स्टडीज़ (बी.वीओसी) जैसे डिग्री स्तरीय पाठ्यक्रमों में प्रवेश करने में मदद करेगी. अर्जित सक्षमताओं और अर्जित साख पर विचार करते हुए, यदि वांछित हो तो पाठ्यक्रम में परिवर्तन भी संभव हो सकेगा. इसके अतिरिक्त कौशलयुक्त व्यक्तियों को विभिन्न स्तरों पर व्यावसायिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण से सामान्य शिक्षा और उच्चतर शिक्षा तथा इसके विपरीत परिवर्तन का विकल्प भी उपलब्ध होगा. इसके लिए स्कूल बोर्डों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों द्वारा प्रदत्त मार्गों का इस्तेमाल किया जाएगा. यदि किसी उम्मीदवार में ‘‘सक्षमता संबंधी अंतरालों’’ की पहचान की जाएगी, तो संस्थानों द्वारा इन सक्षमताओं को अर्जित करने के लिए आदर्श पाठ्यचर्या पर आधारित ‘‘सेतु पाठ्यक्रम’’ का सहारा लिया जा सकता है.

घ) अंतर्राष्ट्रीय समकक्षता:- एनएसक्यूएफ भारतीय कौशल योग्यता स्तरों को अन्य देशों और क्षेत्रों के स्तरों से तुलना करने और उनके समरूप बनाने के माध्यम उपलब्ध कराएगा. इससे एनएसक्यूएफ-समनुरूप योग्यताधारकों को विश्व के विभिन्न भागों में काम करने और/या बसने में मदद मिलेगी. एनएसक्यूएफ विश्वभर में विकसित हो रहे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रीय फ्रेमवर्कों के साथ परस्पर संपर्क का माध्यम भी होगा.

ङ) स्तर वर्णनकर्ता:- एनएसक्यूएफ के अंतर्गत स्तर-1 से 10 तक 10 स्तर होंगे:-

(द्ब) एनएसक्यूएफ का प्रत्येक स्तर वर्णनकर्ताओं के एक समूह से सम्बद्ध होगा, जो 5 परिणाम वक्तव्यों से युक्त होंगे और यह तय करेंगे कि उक्त स्तर का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए किसी प्रशिक्षार्थी में सामान्यतौर पर न्यूनतम ज्ञान/कौशल और अभिलक्षण कितने अपेक्षित हैं.

(द्बद्ब) एनएसक्यूएफ के प्रत्येक स्तर का वर्णन 5 क्षेत्रों, जिन्हें वर्णनकर्ताओं का स्तर कहा जाएगा, पर आधारित होगा. ये पांच क्षेत्र इस प्रकार हैं:

 (क) प्रक्रिया,

 (ख) व्यावसायिक जानकारी

 (ग) व्यावसायिक कौशल

 (घ) बुनियादी कौशल और

 (ङ) उत्तरदायित्व.

पूर्व प्रशिक्षण की पहचान

पूर्व प्रशिक्षण की पहचान (आरपीएल), विशेषकर भारतीय संदर्भ में, जहां अधिसंख्य कार्मिकों को औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं है, एनएसक्यूएफ से सम्बद्ध एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है.  एनएसक्यूएफ उन व्यक्तियों, जिन्होंने जीवन, कार्य और स्वैच्छिक गतिविधियों के जरिए, अनौपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है, के प्रशिक्षण को मान्यता प्रदान कराने में मदद करेगा. इसमें अर्जित ज्ञान और कौशल दोनों शामिल हैं:-

(क)औपचारिक प्रशिक्षण स्थितियों से बाहर प्राप्त ज्ञान.

(ख)कार्यस्थल, सामुदायिक स्तर और/या स्वयंसेवी क्षेत्र के जरिए अर्जित अनौपचारिक प्रशिक्षण.

(ग)सतत व्यवसाय विकास गतिविधियों से.

(घ)स्वतंत्र प्रशिक्षण से.

हितभागियों के कार्य/दायित्व:- एनएसक्यूएफ अनेक हितधारकों का संयुक्त दायित्व है और इसके विकास, कार्यान्वयन और रख-रखाव में प्रत्येक की अपनी-अपनी भूमिका है. प्रमुख हितधारकों की भूमिकाएं/दायित्व इस प्रकार हैं:-

(क) राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एनएसडीए)

एनएसडीए को एनएसक्यूएफ के संचालन और प्रचालन का दायित्व सौंपा गया है, ताकि गुणवत्ता और मानक विशेष क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा कर सकें. एनएसडीए मौजूदा व्यावसायिक प्रमाणन निकायों के अतिरिक्त ऐसे अन्य निकायों की स्थापना में भी मदद करेगा. उपरोक्त कार्यों का निष्पादन करते हुए एनएसडीए यह सुनिश्चित करेगा कि एनएसक्यूएफ एक गुणवत्ता आश्वासन फ्रेमवर्क के रूप में काम करे और क्षमता निर्माण में मदद करे.

(ख) क्षेत्रगत कौशल परिषदें (एसएससीज़)

क्षेत्रगत परिषदें उद्योग के नेतृत्व में राष्ट्रीय भागीदारी संगठन हैं, जो सभी हितधारकों को अपने-अपने क्षेत्रों में एकजुट करेंगी. सम्बद्ध क्षेत्र में उद्योगों की जरूरतों के आधार पर, एसएससीज द्वारा एनओएस और क्यूपीज़ विकसित किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न कार्यभूमिकाएं निभा सकें और एनएसक्यूएफ के समुचित स्तरों को समनुरूप बना सकें. वे उद्योग क्षेत्र के लिए मौजूदा व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा प्रणाली के पूरक के रूप में काम करेंगी ताकि मात्रा एवं गुणवत्ता की दृष्टि से सभी स्तरों पर सतत एवं विकासशील आधार पर प्रशिक्षित कार्मिकों की जरूरत समुचित मूल्य शृंखला के लिए पूरी की जा सके.

(ग) केंद्रीय मंत्रालय

शीर्ष मुद्दे प्रशासनिक नियंत्रण में होने को देखते हुए केंद्रीय मंत्रालयों को नेतृत्व प्रदान करना पड़ेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्र्यक्रमों से सम्बद्ध सभी हितधारक एनएसक्यूएफ के तत्वावधान के अंतर्गत संस्थानों/निकायों द्वारा प्रस्तावित किए जा रहे कार्यक्रमों के अनुरूप काम करें.

(घ) राज्य सरकारें

सम्बद्ध राज्य सरकारें अपने नियंत्रण के अंतर्गत आने वाले संस्थानों/निकायों को प्रेरित करेंगी, कि वे अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को एनएसक्यूएफ के अनुरूप बनाएं, क्योंकि इससे ऐसी योग्यताएं रखने वाले व्यक्तियों को अधिक गतिशीलता प्राप्त होगी. राज्य सरकारें ऐसे तौर-तरीके निर्धारित करने में भी मदद करेंगी, जो क्षेत्रीय अंतरों के लिए व्यवस्था करते हुए यह सुनिश्चित कर सकें कि एनएसक्यूएफ से सम्बद्ध गुणवत्ता आश्वासन की अनदेखी न हो.

(ङ) नियामक संस्थान

सभी वर्तमान नियामक संस्थान (जैसे यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीवीटी, तकनीकी और स्कूल बोर्ड आदि) एनएसक्यूएफ स्तरों के संदर्भ में सक्षमताओं और योग्यताओं के प्रवेश और बहिर्गमन को परिभाषित करेंगी, ताकि सामान्य और व्यावसायिक शिक्षा दोनों में ही शीर्षवत प्रगति सुदृढ़ की जा सके और व्यावसायिक पासआउट डिग्री स्तरीय पाठ्यक्रमों सहित व्यावसायिक/ तकनीकी/सामान्य शिक्षा में उच्चतर शिक्षा के सम्बद्ध पोर्टलों में प्रवेश पा सकें.

(च) प्रशिक्षण प्रदाता/संस्थाएं/संस्थान

सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को अपने पाठ्यक्रमों/कार्र्यक्रमों का संचालन करना होगा ताकि एनएफक्यूएस स्तरों के साथ समनुरूपता सुनिश्चित की जा सके.

नेपाल के दक्षिणी भाग के मैदानी क्षेत्र को मधेस कहते हैं और यहाँ निवास करने वाले नेपाली लोगों को मधेसी कहते हैं। इस क्षेत्र को 'तराई क्षेत्र' भी कहते हैं और तराई में वास करने वाले इन नेपाली लोगों को तराईबासी भी कहते हैं। मधेश शब्द 'मध्यदेश' का अपभ्रंश है। मैथिली, थारु, अवधी, भोजपुरी और अन्य भाषाएँ (जो भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बोली जाती है) बोलने वाले लोग जो बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों जैसे दिखते हैं और जिनकी संस्कृति और रीति-रिवाज बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगो जैसी है लेकिन जो नेपाली हैं, वो लोग मधेसी कहलाते हैं।

मधेसी मुल के नेपाली और भारत के बिहारी या उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लोगों में कुछ भी असमानता नहीं है, अन्तर केवल यह है कि मधेसी नेपाली हें जो सीमा के उस पार रहते हैं।

प्राचीन समय में मिथिला और अवध स्वतंत्र राज्यl थें। 17वीं सदी में जब गोर्खा के राजा नेपाल एकीकरण कर रहें थें तब मिथिला और अवध के छोटे से भू-भाग पर नेपाल का कब्ज़ा हो गया बाद में अंग्रेजों ने मिथिला और अवध के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया और भारत मे गाभा।

भू-विवाद के कारण 1814-16 में नेपाल और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच नेपाल-अंग्रेज युद्ध हुआ और युद्ध दो वर्षों तक चला अन्त में नेपाल और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच एक संधी हुई जिसे सुगौली संधि के नाम से जाना जाता है। सुगौली संधि के अनुसार नेपाल ने मेची नदी से पुर्व का सारा भू-भाग, घाघरा नदी से पश्चिम का सारा भू-भाग और लगभग सम्पूर्ण तराई भू-भाग अंग्रेजों को सौपना पड़ा। बाद में 1857 में लखनऊ विद्रोह में अंग्रेजों कि मदद करने के एवज में अंग्रेजों ने दक्षिण का सम्पूर्ण तराई भू-भाग नेपाल को वापस लौटा दिया। वापस किये गये इस भू-भाग में मिथिला और अवध के लोग रह रहे थें। यह भू-भाग जब नेपाल में सम्मिलित किया गया तो नेपाल के लोग इस भू-भाग को नया देश या मध्य-देश कहने लगें क्योकि यह भू-भाग नेपाल और भारत के मध्य में था। मध्य-देश का अपभ्रंश मधेश हो गया और मध्य-देशी से मधेशी हो गया।

नेपाल के नए संविधान में मधेसी दोयम दर्जे के नागरिक

संविधान तैयार करना किसी भी देश का अपना अधिकार है और नेपाल ने भी यही किया है। लेकिन क्या नेपाल ने अपने देश की लगभग आधी आबादी यानी मधेसियों को संविधान में पूरा प्रश्रय दिया है? अगर नेपाल के संविधान के कुछ हिस्सों को देखें तो यह साफ हो जाता है कि इसके कई प्रावधान मधेसियों को वहां दोयम दर्जे का नागरिक बना देंगे। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से तराई के मधेसी बहुल हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस वजह से जो हिंंसा फैली है उसमें काफी लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।

जानकारों के मुताबिक नेपाल के पांच विवादित जिलों कांचीपुर, कैइलाली, सुनसरी, झापा और मोरांग को इसके पड़ोसी जिलों में मिलाने का रास्ता तैयार किया गया है। इन पांच जिलों में पहाड़ी लोगों की संख्या ज्यादा है और इन्हें पड़ोस के उन जिलों में मिलाने की तैयारी है जहां मधेसियों की संख्या ज्यादा है। लेकिन एकीकरण के बाद इन जिलों में पहाडिय़ों का जनसंख्या अनुपात ज्यादा हो जाएगा। मधेसियों को इस बात का भी गुस्सा है कि किस तरह से संविधान बनाने के लिए गठित अंतरिम समिति की अहम सिफारिशों को खारिज कर दिया गया है। जैसे अंतरिम समिति ने धारा 63 (3) में मधेसियों को उनकी आबादी के हिसाब से संसद में 50 फीसद हिस्सा देने का प्रस्ताव किया गया था। अब उसे हटा दिया गया है। इसी तरह से मधेशियों को सही प्रतिनिधित्व देने संबंधी धारा (21) में भी काफी बदलाव किया गया है।संविधान की धारा 283 में इस बात का साफ तौर पर प्रावधान है कि देश के शीर्ष पदों मसलन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, संसद के अध्यक्ष, राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्य विधानसभा के अध्यक्ष आदि के पद पर सिर्फ नेपालवंशी ही स्थापित हो सकते हैं।

इसका साफ मतलब हुआ कि जन्म से नेपाल की नागरिकता लेने वाला या प्राकृतिक तौर पर नागरिक बनने वाले मधेसी इन पदों पर कभी नहीं पहुंच पाएंगे। अंतरिम संविधान में हर दस वर्ष पर संसदीय क्षेत्रों का सीमांकन करने की भी भी बात थी जिसे बढ़ा कर 20 ïवर्ष कर दिया गया है। मधेसियों की मांग है कि इसे 10 वर्ष ही रहने दिया जाए।विदेशी महिलाओं से शादी के बाद उन्हें नागरिकता देने के मामले पर किए गए प्रावधान भी मधेसियों के हितों के खिलाफ है। चूंकि बड़ी संख्या में मधेसियों की शादी अभी भी भारत में होती है और संविधान में नागरिकता के लिए अलग से आवेदन करने का प्रावधान किया गया है। मधेसियों का कहना है कि शादी होने पर प्राकृतिक तौर पर नेपाल की नागरिकता देने का प्रावधान होना चाहिए।

चीन ने 8 मार्च 2017 को कहा कि इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ाने तथा इस समूह को विकासशील देशों के लिए ‘सबसे प्रभावशाली मंच’ बनाने के मकसद से इसको विस्तार देने का प्रयास किया जाएगा। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन सितम्बर महीने में चीन के शियामेन शहर में होगा।

ब्रिक्स में चीन के अलावा ब्राजील, रूस, भारत और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इसके घटक राष्ट्र ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। इन्हीम देशों के अंग्रेज़ी में नाम के प्रथमाक्षरों B, R, I, C व S से मिलकर इस समूह का यह नामकरण हुआ है। मूलतः, 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल किए जाने से पहले इसे "ब्रिक" के नाम से जाना जाता था। रूस को छोडकर, ब्रिक्स के सभी सदस्य विकासशील या नव औद्योगीकृत देश हैं।

बनारस साधुओं के अपमान एवं हिंदुओं को नरभक्षी बताने पर अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन के खिलाफ विरोध और तेज हो गया है। अमेरिकी कांग्रेस की एकमात्र हिंदू सदस्य तुलसी गबार्ड ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि सीएनएन अपनी शक्ति और प्रभाव का इस्तेमाल हिंदुओं के खिलाफ लोगों में गलतफहमी बढ़ाने के लिए कर रहा है।

न्होंने कहा कि सीएनएन ऐसे समय पर यह कार्य कर रहा है जब पूरे अमेरिका में लोगों में एक दूसरे के प्रति समझ बढ़ाने और विभिन्न धर्म के बीच आपसी सद्भाव बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कहा कि वह इससे काफी व्यथित हैं।उन्होंने कहा कि सीएनएन के नए शो बिलिवर्स के लिए सही तरीके से शोध नहीं किया गया और इसे सनसनीखेज बनाने का प्रयास किया गया।

सनसनीखेज बनाने के लिए रेजा असलान ने जाति, कर्म आदि के बारे में गलतबयानी की। कहा कि सीएनएन ने अपने प्रचार सामग्री में भी हिंदुओं को नरभक्षी बताया।बता दें कि शो में दिखाया गया है कि अघोरी साधू इंसान की खोपड़ी में असलान को शराब पिलाते हैं। वहीं एक जगह अघोरी साधू कहता है कि ज्यादा बोलोगे तो तुम्हारा गला काट देंगे। इस पर असलान कहते हैं कि हमने यहां आकर गलती की।इस शो के बाद इस्लाम में आस्था रखने वाले रेजा असलान की पूरे अमेरिका और भारत में हिंदू कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि रेजा हिंदूफोबिया से ग्रसित हैं और हिंदुओं की नकारात्मक छवि पेश कर रहे हैं।

वहीं कुछ लोगों कहा कहना है कि असलान ने अपने शो में अघोरी साधू के इंसान के मांस को खाने पर ज्यादा फोकस किया।

अमेरिका में रह रहे अरनब रॉय ने ट्वीट कर लिखा कि असलान ने हिंदुओं के लिए बेहद पवित्र गंगा मां को विशाल शौचालय बताया।अरनब ने कहा कि दुनिया के सबसे प्राचीन शहर वाराणसी को असलान ने ‘सिटी ऑफ डेड ‘ बताया । यह सरासर गलत है और हिंदुओं की आस्‍था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि इस शो को बनाने से पहले असलान ने अघोरी साधुओं के बारे में रिसर्च नहीं किया।

नासा का सौर-उर्जा से संचालित अंतरिक्षयान जूनो पृथ्वी से प्रक्षेपण के पांच साल बाद मंगलवार पांच जुलाई 2016 को बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश कर गया। इस उपलब्धि को ग्रहों के राजा और हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति की उत्पत्ति और विकास को समझने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

जूनो के बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश कर जाने की सूचना मिलने पर नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में इस अभियान के नियंत्रक खुशी से झूम उठे। नासा के प्रमुख जांचकर्ता स्कॉट बोल्टन ने बेहद उल्लास के साथ चिल्लाते हुए कहा, 'हम उसमें पहुंच गए।' उन्होंने मिशन कंट्रोल में लगे अपने सहकर्मियों से कहा, 'आप लोग अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम हैं।' बोल्टन ने कहा, 'आपने नासा की अब तक की सबसे मुश्किल चीज को अंजाम दिया है।'

जूनो से रेडियो संदेश मिलते ही नासा के कैलिफोर्निया के पसडीना स्थित मिशन कंट्रोल रूम में जश्न का माहौल है। जूनो के मिशन कंट्रोल ने घोषणा की, 'रोगर जूनो, जूपिटर पर आपका स्वागत है।' 35 मिनट तक ईंजन के प्रज्वलन के बाद यह यान ग्रह के चारों ओर बनी तय कक्षा में प्रवेश कर गया। इस अभियान की लागत 1.1 अरब डॉलर है। इस यान ने रात 11 बजकर 53 मिनट पर (अंतरराष्ट्रीय समयानुसार तड़के तीन बजकर 53 मिनट पर) बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश किया। पांच साल पहले फ्लोरिडा के केप केनवेराल से प्रक्षेपित इस यान ने यहां पहुंचने से पहले 2.7 अरब किलोमीटर का सफर तय किया है।

जूनो अपने साथ नौ वैज्ञानिक उपकरण लेकर गया है। जूनो बृहस्पति की ठोस सतह के अस्तित्व का अध्ययन करेगा, ग्रह के बेहद शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र को मापेगा, गहरे वातावरण में मौजूद जल और अमोनिया की मात्रा नापेगा। जूनो लगभग 18 महीने तक बृहस्पति का चक्कर लगाएगा। इस दौरान जूनो यह पता लगाएगा कि बृहस्पति बना कैसे था। अपना मिशन पूरा करने के बाद जूनो बृहस्पति के वातावरण में दाखिल होकर नष्ट हो जाएगा। नासा ने जूनो मिशन को 2011 में रवाना किया था।

बृहस्पति तक जूनो का पहुंचना नाटकीय रहा है। जूनो जब लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा था तब रॉकेट के इंजन में आग लग गई थी। इस वजह से यह स्लो हो गया था। यह कक्षा से हल्का फिसल गया था। स्पेसक्राफ्ट में कैमरा और अन्य उपकरण जूपिटर पर आने के बाद ऑफ हो गए हैं। ऐसे में यहां पहुंचने के बाद कोई तस्वीर नहीं आई है। पिछले हफ्ते नासा ने संपर्क साध कई तस्वीरें जारी की थीं। तस्वीर में जूपिटर पीले रंग में चमकीला दिख रहा था।नासा ने कहा कि यह अभियान बड़े ग्रहों के निर्माण और सौरमंडल के बाकी ग्रहों को एकसाथ रखने में इनकी भूमिका को समझने में बड़ा कदम उठाने में हमारी मदद करेगा। बृहस्पति बड़े ग्रह के रूप में हमारे सामने एक प्रमुख उदाहरण है। वह अन्य नक्षत्रों के आसपास खोजे जा रहे अन्य ग्रह तंत्रों को समझने के लिए भी अहम जानकारी उपलब्ध करवा सकता है।

सबसे प्रेस्टिजियस फिल्म अवॉर्ड 89th ऑस्कर में 'मूनलाइट' को बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड मिला। हालांकि, फंक्शन में तब ड्रामा क्रिएट हो गया, जब बेस्ट फिल्म के लिए गलती से 'ला ला लैंड' का नाम अनाउंस कर दिया गया। बाद में 'मूनलाइट' को बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड दिया गया।

14 कैटेगरी में नॉमिनेट हुई फिल्म 'ला ला लैंड' ने सबसे ज्यादा 6 अवॉर्ड अपने नाम किए। हालांकि, उसे बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड नहीं मिला। प्रेजेंटर वॉरेन बीटी के हाथ में गलत कैटेगरी वाला एनवेलप आ गया, जिससे वो कुछ देर के लिए चुप हो गए। इसी दौरान उनके साथ खड़ी लेडी प्रेजेंटर ने बेस्ट फिल्म के लिए 'ला ला लैंड' का नाम अनाउंस कर दिया। हालांकि, तभी वहां मौजूद एक प्रोड्यूसर ने इसे गलत बताते हुए सही लिफाफा निकाला और 'मूनलाइट' को बेस्ट फिल्म डिक्लेयर किया। बाद में अवॉर्ड के होस्ट जिमी किमेल ने इस पूरे मामले में अपनी गलती मानी। 

बेस्ट एक्टर केसी एफ्लेक, बेस्ट एक्ट्रेस एमा स्टोन

लॉस एंजिलिस के डॉल्बी थिएटर में हुए इस अवॉर्ड फंक्शन में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड फिल्म 'मैनचेस्टर बाय द सी' के लिए केसी एफ्लेक, जबकि बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड 'ला ला लैंड' की एक्ट्रेस एमा स्टोन को मिला।- वहीं, बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड 'ला ला लैंड' के ही डेमियन शैजेल को मिला।

ब्रिघम टेलर की फिल्म 'द जंगल बुक' ने बेस्ट विजुअल इफेक्ट्स का अवॉर्ड अपने नाम किया।

भारतीय मूल के ब्रिटिश कलाकार देव पटेल ऑस्कर से चूक गए। उन्हें फिल्म 'लॉयन' के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था। उनकी जगह महर्शेला अली को फिल्म 'मूनलाइट' के लिए यह अवॉर्ड दिया गया।

बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड फिल्म 'फेंसेस' के लिए विओला डेविस को मिला।

बेस्ट फॉरेन फिल्म का अवॉर्ड ईरानी डायरेक्टर असगर फरहदी की 'द सेल्समैन' को मिला।

वहीं, 14 कैटेगरी में नॉमिनेट हुई 'ला ला लैंड' ने बेस्ट प्रोडक्शन डिजाइन में पहला ऑस्कर अवॉर्ड जीता।

फिल्म 'ला ला लैंड' के गाने 'सिटी ऑफ स्टार्स' को मिला ऑरिजिनल सॉन्ग अवॉर्ड।

बेस्ट एनिमेटेड फीचर फिल्म का अवॉर्ड 'जूटोपिया' को मिला।

'व्हाइट हेल्मेट्स' को शॉर्ट सब्जेक्ट डॉक्युमेंट्री का ऑस्कर अवॉर्ड मिला।

बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का अवॉर्ड 'ला ला लैंड' को मिला।

बेस्ट एनिमेटेड शॉर्ट फिल्म का अवॉर्ड 'पाइपर' को दिया गया है।

ऑरिजिनल स्क्रीनप्ले के लिए फिल्म 'मैनचेस्टर बाई द सी' के कीनथ लोनार्गन ने जीता अवॉर्ड।

हॉलीवुड फिल्‍म 'लॉयन' में देव पटेल के बचपन का रोल निभाने वाले सनी पवार भी ऑस्कर में पहुंचे। सनी की उम्र महज 8 साल है।स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस और म्यूजिशियन के प्यार की कहानी है 'ला ला लैंड'ला ला लैंड की कहानी एक स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस और म्यूजिशियन पर बेस्ड है। दोनों एक-दूसरे से मिलते हैं और फिर धीरे-धीरे उन्हें प्यार हो जाता है। फिल्म में एमा स्टोन स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस मिया के किरदार में हैं, जो एक कॉफी शॉप में काम करती हैं। वहीं एक्टर रेयान गॉसलिंग म्यूजिशियन सेबस्टियन के रोल में हैं।

गरीब और अश्वेत बच्चे की कहानी है 'मूनलाइट''मूनलाइट' फिल्म के डायरेक्टर बेरी जेनकिंस हैं। यह एक गरीब और अश्वेत बच्चे के बड़े होने की स्टोरी है। उसे बचपन में कई बार और कई जगहों पर अवॉइड किया जाता है। उसकी मां नशा करती है। बच्चा समलैंगिक यौन-संबंधों को लेकर चल रहे भेदभाव और गरीबी से जूझते हुए बड़ा होता है।ऑस्कर में ओम पुरी को किया गया याद- ऑस्कर सेरेमनी के दौरान दिवंगत बॉलीवुड एक्टर ओम पुरी को ट्रिब्यूट दिया गया।

दरअसल, सेरेमनी के दौरान एक स्पेशल परफॉर्मेंस के तहत उन स्टार्स को श्रद्धांजलि दी गई, जिनकी हाल ही में डेथ हुई है। चूंकि, ओम पुरी बॉलीवुड ही नहीं, हॉलीवुड के भी स्टार रहे हैं। इसलिए इस लिस्ट में उनका नाम भी शामिल हुआ। ओम पुरी ने हॉलीवुड की 'ईस्ट इज ईस्ट', 'गांधी', 'सिटी ऑफ़ जॉय' और 'वुल्फ' जैसी फिल्मों में काम किया है। ओम पुरी के अलावा, हॉलीवुड के कैरी फिशर, प्रिंस, जेने वाइल्डर, माइकल किमिनो, पैटी ड्यूक, गैरी मार्शल, एंटन येल्चिन, मैरी टैलर मूर, कर्टिस हैनसन और जॉन हर्ट को श्रद्धांजलि दी गई।

ऑस्कर अवॉर्ड में लोग जितना विनर्स को लेकर जानना चाहते थे, उससे कहीं ज्यादा नजरें सेलिब्रिटीज की ड्रेसेस पर भी थीं। ऑस्कर के रेड कारपेट पर प्रियंका चोपड़ा जहां डिजाइनर राल्फ एंड रूसो के सिल्वर गाउन में नजर आईं, तो वहीं 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के एक्टर देव पटेल मां अनीता पटेल के साथ व्हाइट कोट और ब्लैक ट्राउजर में दिखे। उनके अलावा रुथ नेगा, सोफिया कार्सन, ताराजी पी हेनसन, जेसिका बील और जस्टिन टिम्बरलेक और एमा स्टोन जैसे स्टार्स भी नजर आए।

22 फरवरी 2017 को उच्चतम न्यायालय ने यह साफ कर दिया कि सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण की इजाजत देने वाले उसके फैसले को क्रियान्वित करना है। साथ ही, अंतरराज्यीय जल विवाद को लेकर 23 फरवरी को एक राजनीतिक पार्टी के प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर हरियाणा और पंजाब से ‘किसी भी कीमत पर’ कानून व्यवस्था कायम रखने को कहा है। हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) ने अपने कार्यकर्ताओं को गुरुवार को अंबाला में जमा होने और एसवाईएल नहर की खुदाई शुरू करने के लिए पंजाब के अंदर मार्च करने को कहा है।

न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की सदस्यता वाली एक पीठ ने कहा, ‘हरियाणा और पंजाब को किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था कायम रखनी चाहिए। पंजाब और हरियाणा कानून के तहत कार्रवाई करेंगे. कानून व्यवस्था का किसी भी तरीके से उल्लंघन नहीं होना चाहिए।’ हरियाणा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलील पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि नहर की इजाजत देने वाला शीर्ष न्यायालय का फैसला और आदेश को क्रियान्वित करना है और नहर का निर्माण करना है।

हालांकि, पीठ ने पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी की दलीलों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ओर के अच्छे लोगों को साथ बैठना चाहिए और मुद्दे का एक सौहार्द्रपूर्ण हल निकालना चाहिए। साथ ही कहा कि यह मौजूदा संभावनाओं में एक है। इसने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल रंजीत कुमार से कहा कि यदि दोनों पक्ष मामला सुलझाने को इच्छुक हैं तो केंद्र सरकार एक मध्यस्थ के तौर पर काम कर सकती है। अदालत ने कहा कि अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का इसके पहले का अंतरिम आदेश कायम रहेगा। बहरहाल, मामले की अगली सुनवाई की तारीख दो मार्च तय की है। साथ ही, पंजाब की यह दलील फिर से खारिज कर दी कि मामला चुनाव नतीजों के बाद के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण आवास योजना ‘ग्रामीण’ के क्रियान्वयन को अनुमति प्रदान कर दी है। इस योजना के तहत सभी बेघर और जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले लोगों को पक्का मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में 81975 रुपये खर्च होंगे।

यह प्रस्तावित किया गया है कि परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2018-19 के कालखंड में एक करोड़ घरों को पक्का बनाने के लिए मदद प्रदान की जाएगी। दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़ कर यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे भारत में क्रियान्वित की जाएगी। मकानों की क़ीमत केंद्र और राज्यों के बीच बांटी जाएगी।

क) प्रधानमंत्री आवास योजना की ग्रामीण आवास योजना- ग्रामीण का क्रियान्वयन। 

ख) ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ आवासों के निर्माण के लिए 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में मदद प्रदान की जाएगी। 

ग) समतल क्षेत्रों में प्रति एकक 1,20,000 तक एवं पहाड़ी क्षेत्रों में 1,30,000 तक सहायता में बढ़ोतरी। 

घ) 21,975 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से की जाएगी।

ड.) लाभान्वितों की पहचान के लिए सामाजिक-आर्थिक-जातीय जनगणना- 2011 का उपयोग। 

च) परियोजना के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहायता हेतु नेशनल टेकनिकल सपोर्ट एजेंसी का गठन।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ को मंजूरी दी जो किसानों के कल्याण के लिए लीक से हटकर एक अहम योजना है। किसान हितैषी सरकार का नया तोहफा:- 

(1). लोहिड़ी, पोंगल एवं बीहू जैसे त्यौहारों के शुभ अवसर पर किसान हितैषी सरकार ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया। यह योजना खरीफ 2016 से लागू  है।

(2). किसानों के लिए बीमा योजनाएं समय-समय पर बनती रहीं हैं, किंतु इसके बावजूद अब तक कुल कवरेज 23 प्रतिशत हो सका है। 

(3). सभी योजनाओं की समीक्षा कर अच्छे फीचर शामिल कर किसान हित में और नए फीचर्स जोड़कर फसल बीमा योजना बनाई गई है। इस प्रकार यह योजना पुरानी किसी भी योजना से किसान हित में बेहतर है। (4). प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल के अनुसार किसान द्वारा देय प्रीमियम राशि बहुत कम कर दी गई है जो निम्नानुसार हैः-

क्र. सं.             फसल किसान द्वारा देय अधिकतम बीमा प्रभार                     (बीमित राशि का प्रतिशत) 

1.                खरीफ                                                                               2.0% 

2.                रबी                                                                                   1.5% 

3.                वार्षिक वाणिज्‍यिक एवं बागवानी फसलें                                      5%

(5). वर्ष 2010 से प्रभावी Modified NAIS में प्रीमियम अधिक हो जाने की दशा में एक कैप निर्धारित रहती थी जिससे कि सरकार के द्वारा वहन की जाने वाली प्रीमियम राशि कम हो जाती थी, परिणामतः किसान को मिलने वाली दावा राशि भी अनुपातिक रूप से कम हो जाती थी। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में धान की फसल के लिए 22 प्रतिशत Actuarial Premium था। किसान को 30 हजार रुपए के Sum Insured पर कैप के कारण मात्र 900 रुपए और सरकार को 2400 रुपए प्रीमियम देना पड़ता था। किंतु शतप्रतिशत नुकसान की दशा में भी किसान को मात्र 15 हजार रुपए की दावा राशि प्राप्त होती। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 30 हजार Sum Insured पर 22 प्रतिशत Actuarial Premium आने पर किसान मात्र 600 रुपए प्रीमियम देगा और सरकार 6000 हजार रुपए का प्रीमियम देगी। शतप्रतिशत नुकसान की दशा में किसान को 30 हजार रुपए की पूरी दावा राशि प्राप्त होगी अर्थात उदाहरण के प्रकरण में किसान के लिए प्रीमियम 900 रुपए से कम होकर 600 रुपए। दावा राशि 15000 रुपए के स्थान पर 30 हजार रुपए। 

(6). बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पाता तो यह जोखिम भी शामिल है उसे दावा राशि मिल सकेगी।

(7). ओला, जलभराव और लैण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा माना जाएगा। पुरानी योजनाओं के अंतर्गत यदि किसान के खेत में जल भराव (पानी में डूब) हो जाता तो किसान को मिलने वाली दावा राशि इस पर निर्भर करती कि यूनिट आफ इंश्योरेंस (गांव या गांवों के समूह) में कुल नुक्सानी कितनी है। इस कारण कई बार नदी नाले के किनारे या निचले स्थल में स्थित खेतों में नुकसान के बावजूद किसानों को दावा राशि प्राप्त नहीं होती थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इसे स्थानीय हानि मानकर केवल प्रभावित किसानों का सर्वे कर उन्हें दावा राशि प्रदान की जाएगी।

(8). पोस्ट हार्वेस्ट नुकसान भी शामिल किया गया है। फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल ख्रेत में है और उस दौरान कोई आपदा आ जाती है तो किसानों को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी। 

(9). योजना में टैक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा जिससे की फसल कटाई/नुकसान का आकलन शीघ्र और सही हो सके और किसानों को दावा राशि त्वरित रूप से मिल सके। रिमोट सेंसिंग के माध्यम से फसल कटाई प्रयोगों की संख्या कम की जाएगी। फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े तत्कल स्मार्टफोन के माध्यम से अप-लोड कराए जाएंगे।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने घोषणा करते हुए कहा है कि गहरे खोज में खोज करने वाले वैज्ञानिकों को एक नए सौरमंडल के अस्तित्‍व का पता चला है. नासा ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए कहा कि हमारे सौरमंडल के बाहर आवासीय जोन में एक तारे के इर्द-गिर्द धरती के आकार के सात नए ग्रह मिले हैं.

नासा ने इसको नया रिकॉर्ड बताया. इस अंतरिक्ष एजेंसी ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा कि स्पिट्जर स्‍पेस टेलीस्‍कोप ने पाया कि ये ग्रह आकार में पृथ्‍वी जितने बड़े हैं और 'आवासीय जोन' के दायरे में आते हैं.

दशकों से अंतरिक्ष में जीवन की तलाश में लगे वैज्ञानिक एलियन किस्‍म के जीवन के कयास लगाते रहे हैं. दशकों से अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए अंतरिक्ष में जीवन की उत्‍पत्ति सबसे बड़ा सवाल रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इनमें से तीन ग्रह एक स्‍टार के इर्द-गिर्द हैं. इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यहां पानी हो सकता है और इस वजह से जीवन की संभावनाओं को बल मिला है. नासा के मुताबिक ये तीन ग्रह रहने लायक हो सकते हैं. जिस तारे के इर्द-गिर्द ये हैं, उस स्‍टार का नाम TRAPPIST-1 है. यह स्‍टार पृथ्‍वी से 40 प्रकाश वर्ष दूर है.

इस संबंध में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अंतरिक्ष वैज्ञानिक एमुरी ट्रायड ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा,''वहां पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाने की दिशा में यह हमारा एक निर्णायक कदम हो सकता है.'' नासा की खोज संबंधी यह नया शोध प्रतिष्ठित जर्नल नेचर में प्रकाशित हुआ है. इससे पहले भी इससे संबंधित रिसर्च प्रकाशित हुए हैं.

यह नई खोज इससे संबंधित पुरानी स्‍थापनाओं को मान्‍यता देती है. अभी तक सौरमंडल के बाहर 3,500 ग्रहों की खोज हुई है. ये नए खोजे गए ग्रह भी उन्‍हीं में से एक हैं. वास्‍तव में शोधकर्ता पृथ्‍वी की तरह के ऐसे चट्टानी ग्रहों की खोज कर रहे हैं, जहां तापमान की अनुकूल दशाएं हों. ऐसा इसलिए क्‍योंकि इन्‍हीं दशाओं में ही तरल अवस्‍था में पानी पाया जा सकता है जोकि जीवन के लिए अनिवार्य बुनियादी शर्त है.

जलवायु परिवर्तन के कारणों, दुष्प्रभावों तथा इससे निपटने के उपायों के बारे में जागरुकता संदेश के साथ साइंस एक्सप्रेस 17 Feb. को नयी दिल्ली से अपनी 19 हजार किलोमीटर की लंबी यात्रा पर रवाना हो गई। केन्द्रीय पर्यावरण और वन मंत्री अनिल माधव दवे,तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्द्धन ने सफदरजंग रेलवे स्टेशन से इस गाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए शिरकत की।

सोलह वातानुकूलित रेल डिब्बों वाली इस रेलगाड़ी में पर्यावरण और वन मंत्रालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से जलवायु परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती एक प्रदर्शनी लगाई गई है। श्री दवे ने इस अवसर पर कहा कि जलवायु परिवर्तन मौजूदा समय के साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बड़ा खतरा है।

यह ट्रेन आठ सिंतबर, 2017 तक देश मेंं जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता फैलाती हुई पूर्वोत्तर के अगरतला सहित कुल 34 शहरों की यात्रा करेगी।

4 नवंबर, 2016 से प्रभावी हुए, पेरिस समझौते का मुख्य लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के खतरे पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाना और उससे प्रभावी तरीके से निपटना है।

विग्यान एक्सप्रेस 2007 से चल रही है। अभी तक इसने देश के 455 स्थानों की यात्रा करते हुए 1,42,000 किलोमीटर की दूरी तय की है।

आर्थिक स्वतंत्रता के एक वार्षिक सूचकांक में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है और यह 143 के स्थान पर रहा है। एक अमेरिकी शोध संस्थान ‘द हेरिटेज फाउंडेशन’ की ‘इंडेक्स ऑफ इकनॉमिक फ्रीडम’ में भारत की रैकिंग उसके पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान समेत कई दक्षिण एशियाई देशों से पीछे है। इसका प्रमु़ख कारण भारत में बाजार को ध्यान में रखकर किए गए आर्थिक सुधारों से होने वाली प्रगति का ‘असमान’ होना बताया गया है।

इस रपट में कहा गया है कि भारत में पिछले पांच साल में औसतन सात प्रतिशत की दर से सतत वृद्धि हुई है लेकिन यह वृद्धि नीतियों में गहरे तक नहीं समाई है जिससे कि आर्थिक स्वतंत्रता का संरक्षण किया जा सके। इस कंजरवेटिव राजनीतिक विचारधारा के शोध समूह की रपट में भारत को ‘अधिकांशतया गैर-खुली’ अर्थव्यवस्था की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि भारत में बाजार आधारित सुधारों से हुई प्रगति ‘असमान’ रही है।इसमें कहा गया है कि राज्य ने लोक उपक्रमों के माध्यम से कई क्षेत्रों में ‘अपनी एक व्यापक उपस्थिति बनाए रखी है’। इसके अलावा प्रतिबंधात्मक और भारी-भरकम नियामकीय वातावरण से उद्यमिता हतोत्साहित होती है। यदि यह ना हो तो निजी क्षेत्र का व्यापक प्रसार किया जा सकता है। इस सूचकांक में भारत ने कुल 52.6 अंक हासिल किए जो पिछले साल के मुकाबले 3.6 अंक कम है।

पिछले साल इस सूचकांक में भारत की रैंकिंग 123 थी।इस सूचकांक में हांगकांग, सिंगापुर और न्यूजीलैंड शीर्ष पर रहे हैं। दक्षिण एशियाई देशों में भारत से नीचे अफगानिस्तान 163 और मालदीव 157वें स्थान पर हैं, जबकि इस सूचकांक में नेपाल का स्थान 125, श्रीलंका का 112, पाकिस्तान का 141, भूटान का 107 और बांग्लादेश का 128 है। चीन ने इस सूचकांक में 57.4 अंक हासिल किए जो पिछले साल के मुकाबले 5.4 अंक ज्यादा है। इस साल उसका स्थान 111 वां रहा है। अमेरिका 75.1 अंक हासिल कर 17वें स्थान पर रहा है। इस सूचकांक में वैश्विक औसत 60.9 अंक रहा जो पिछले 23 साल में रिकॉर्ड उच्चस्तर है।

15 Feb. 2017 को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक ही रॉकेट के माध्यम से रिकॉर्ड 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण करके इतिहास रच दिया है। इन उपग्रहों में भारत का पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह भी शामिल है। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया गया है। किसी एकल मिशन के तहत प्रक्षेपित किए गए उपग्रहों की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। ध्रुवीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी37 ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर उड़ान भरी।

इसने सबसे पहले काटरेसैट-2 श्रेणी के उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराया और इसके बाद शेष 103 नैनो उपग्रहों को 30 मिनट में प्रवेश कराया गया। इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के थे। अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने पर मिशन कंट्रोल सेंटर के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने घोषणा की, ‘‘सभी 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश कराया गया। इसरो के पूरे दल को उनके द्वारा किए गए इस अद्भुत काम के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।’’ एक बार में सबसे ज्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने का श्रेय अब तक रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के पास था। उसने एक बार में 37 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया था। इसरो ने जून 2015 में एक मिशन में 23 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण पर इसरो दल को बधाई दी। आज के इस जटिल मिशन में 28 घंटे की उल्टी गिनती पूरी होने के बाद पीएसएलवी-सी37 ने 714 किलोग्राम के काटरेसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराया। इसके बाद उसने इसरो के नैनो उपग्रहों- आईएनएस-1ए और आईएनएस-1बी को 505 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित ध्रुवीय सौर स्थतिक कक्षा में प्रवेश कराया।

आने वाले समय में भारत सैटेलाइट्स मेकिंग की एक बड़ी मार्केट बन सकता है। सैटेलाइट वेंचर वनवेब की इंडियन फर्म भारती के साथ साझेदारी है। यह लगभग 648 छोटे सैटेलाइट्स बनाएगा जिससे दुनियाभर में तेज इंटरनेट स्पीड पहुंचा सके। वहीं यह दूसरा मौका है जब प्लैनेट लैब्स ने पीएसएलवी रॉकेट का इस्तेमाल अपनी 88 छोटी सैटेलाइट्स स्पेस में भेजने के लिए इस्तेमाल की हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसरो का यह लॉन्च ऐसे समय में आया है जब छोटी सैटेलाइट्स लॉन्च करने वालों की दुनियाभर में कमी हो रही है और दूसरी तरफ यूरोप और अमेरिका में प्राइवेट सैटेलाइट इंडस्ट्री में तेजी है। दरअसल इन सैटेलाइट्स का इस्तेमाल मौसम की जानकारी, जीपीएस सिस्टम और इंटरनेट को तेज करने के लिए किया जाएगा। वहीं गौर करने वाली बात यह भी है कि पीएसएलवी रॉकेट का इस्तेमाल लगभग 225 सैटेलाइट लॉन्च में किया गया है जिनमें से 179 विदेशी ग्राहकों की सैटेलाइट हैं।

भारत का अंतरिक्ष का सफर

- इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च (इन्कोस्पार) ने भारत के स्पेस प्रोग्राम की शुरुआत 1962 में की थी।

- इन्कोस्पार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के तहत काम करती थी। 

- यह बाद में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) में बदल गई। इसरो की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी।

54 साल पहले लॉन्चिंग

- भारत ने अपना पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को लॉन्च किया था। 

- यह एक नाइक अपाचे रॉकेट था, जिसे अमेरिका से लिया गया था।

- इसे सिर्फ लॉन्चिंग की ताकत परखने के लिए छोड़ा गया था।58 साल पहले पहला रॉकेट

- भारत में बना पहला रॉकेट रोहिणी

- 75 था, इसे 20 नवंबर 1967 को लॉन्च किया गया था। यह रॉकेट टेक्नोलॉजी बनाने की ताकत परखने के लिए था।

42 साल पहले पहला सैटेलाइट

- आर्यभट्ट भारत का पहला सैटेलाइट था। इसे 19 अप्रैल 1975 को लॉन्च किया गया था। 

- 360 किलोग्राम वजनी इस सैटेलाइट का नाम प्राचीन भारत के एस्ट्रोनॉमर आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था।

- आर्यभट्ट को मैसेज भेजने के लिए बहुत बड़े एंटेना का इस्तेमाल किया जाता था।

38 साल पहले पहला रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट

- 7 जून 1979 को इसरो ने अपना दूसरा सैटेलाइट भास्कर- 1 लॉन्च किया था।

- यह भारत का पहला रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट था।

- भास्कर-1 की भेजी फोटो का इस्तेमाल जंगल, पानी और समुद्र के बारे में जानकारी जुटाई जाती थी।

24 साल पहले लॉन्च हुआ PSLV

- पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) इसरो का पहला ऑपरेशनल लॉन्च व्हीकल है।

- इसने पहले उड़ान 20 सितंबर 1993 को भरी थी। हालांकि, यह लॉन्चिंग नाकाम रही थी।

- यह इसरो का अभी तक का सबसे कामयाब लॉन्च व्हीकल है। 

- PSLV ने अब तक 39 उड़ान भरी हैं, जिनमें से 37 पूरी तरह कामयाब रही हैं।

ये तीन कामयाबी जिन्होंने दुनिया को चौंकाया

चंद्रयान-1

- इसरो ने इसे 22 अक्टूबर 2008 को लॉन्च किया था। इसने 30 अगस्त 2009 तक काम किया।

- इसके साथ ही भारत चंद्रमा पर मौजूदगी दर्ज कराने वाला छठा देश बन गया।

- इससे पहले अमेरिका, रूस, जापान, चीन और यूरोप अपने स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा पर भेज चुके हैं।

मंगलयान-1

- 5 नवंबर 2013 को इसे लॉन्च किया गया।

- इस ग्रह पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाला अमेरिका और रूस के बाद भारत तीसरा देश बना।

- इस मिशन की सबसे खास बात ये रही कि इसरो ने यह कामयाबी पहली ही कोशिश में हासिल की।

- इसके अलावा अमेरिका और रूस के मिशन की तुलना में इसकी लागत बेहद कम थी। इसे सिर्फ 400 करोड़ रुपए में पूरा किया गया।

104 सैटेलाइट्स एकसाथ लॉन्च किए

- 15 फरवरी 2017 को भारत ने एकसाथ 104 सैटेलाइट्स स्पेस में भेजकर रूस का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

- रूस के नाम एक बार में 37 सैटेलाइट्स भेजने का रिकॉर्ड था।

- इससे पहले भारत एक बार में 23 सैटेलाइट्स तक भेज चुका था।

आगे क्या है इसरो की प्लानिंग?

- इसरो आने वाले वक्त में सन, वीनस, जूपिटर पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है।

- भारत मून और मार्स पर दोबारा अपना स्पेसक्राफ्ट भेजने वाला है।

59वें वार्षिक ग्रैमी अवॉर्ड की घोषणा हो चुकी है. बेयोंसे को उनकी एल्बम ‘लेमोनेड’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अर्बन कंटेंपररी एल्बम का पुरस्कार मिला. वहीं सॉन्‍ग ऑफ द ईयर का अवॉर्ड हैलो, एडेल को मिला. आइए जानते हैं किस सितारे ने जीता कौन-सा अवॉर्ड. 

यो यो मा के साथ संदीप दास की जुगलबंदी को ग्रैमी पुरस्कार मिला है। दास सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाले यो यो मा के सिल्क रोड एनसेम्बल के एल्बम ‘सिंग मी होम’ का हिस्सा थे। इस श्रेणी में भारतीय सितारवादक अनुष्का शंकर का एल्बम ‘लैंड ऑफ गोल्ड’ भी नामित था लेकिन वह पुरस्कार से चूक गयीं। अनुष्का शंकर छठी बार अपने विश्व संगीत नामांकन को ग्रैमी पुरस्कार में तब्दील करने में नाकामयाब रहीं। बीते वर्षों में कई नामांकनों के बावजूद उनकी झोली में ग्रैमी नहीं आया।

यो यो मा के ‘सिंग मी होम’ की धुनें विश्वभर के विभिन्न कलाकारों ने तैयार की हैं। यह एल्बम मा के ‘दी म्युजिक ऑफ स्ट्रेंजर्स’ यो यो मा ऐंड ‘दी सिल्क रोड एनसेंबल’ नाम के प्रोजेक्ट पर बनी डॉक्युमेंटरी का हिस्सा है। मा और दास के अलावा इस एल्बम में शामिल अन्य संगीतकार हैं- न्यूयॉर्क के रहने वाले सीरियाई शहनाई वादक किनान अजमेह। अजमेह अमेरिकी राष्ट्रपति के यात्रा प्रतिबंध के आदेश के बाद विदेश में ही रहने को मजबूर थे। जब एक अदालत ने इस आदेश पर रोक लगाई तब जाकर अजमेह देश लौट सके।

विजेता के नाम

सॉन्‍ग ऑफ द ईयर: हैलो, एडेल

बेस्‍ट रैप एल्बम: चांस द रैपर, कलरिंग बुक

बेस्‍ट न्‍यू आर्टिस्‍ट: चांस द रैपर

बेस्‍ट अर्बन कंटेम्पररी एल्‍बम: बेयोंसे, लेमोनेड

बेस्‍ट कंट्री सोलो परफॉर्मेंस: मारेन मॉरिस, माय चर्च

बेस्‍ट रॉक बेस्‍ट रॉक परफॉर्मेंस: डेविड बोवी - ब्लैकस्टार

बेस्‍ट रॉक सॉन्‍ग: ब्लैकस्टार -डेविड बोवी, सॉन्‍गराइटर (डेविड बोवी)

बेस्‍ट अल्टरनेटिव म्‍यूजिक एल्बम: डेविड बोवी - ब्लैकस्टार

बेस्‍ट मेटल परफॉर्मेंस: मेगाडेथ- डिस्‍टोपिआ

बेस्‍ट पॉप वोकल एल्बम: एडेल - 25

बेस्‍ट पॉप सोलो परफॉर्मेंस: एडेल – हैलो 

बेस्ट रैप परफ़ॉर्मेंस : चांस द रैपर फ़ीचरिंग लिल वेन और 2 चेंज (नो प्रॉब्लम)

बेस्‍ट रैप/संग परफॉर्मेंस: ड्रेक - हॉटलाइन ब्लिंग

पॉप डूओ/ग्रुप परफॉर्मेंस: स्‍ट्रेस्‍ड आउट – ट्वेन्टी वन पायलट्स

बेस्‍ट कंट्रीएल्बम: स्‍ट्रुगिल सिम्पसन – अ सेलर्स गाइडऑफ अर्थ

बेस्ट कंट्री ड्यू/ग्रुप परफ़ॉर्मेंस: पेंटाटोनिक्स फीचरिंग डॉली पर्टोन (ज़ोलेन)

बेस्‍ट कंट्रीसॉन्‍ग: लोरी मैककेन, सॉन्‍गराइटर (टिम मैकग्रॉ) – हम्‍बल एंड काइंड

बेस्‍ट रॉक एल्बम: केज द एलिफेंट – टेल मी ए एम प्रिटी

बेस्‍ट रैप सॉन्‍ग: ऑब्रे ग्राहम और पॉल जैफरीज, गीतकार (ड्रेक) – हॉटलाइन ब्लिंग

बेस्‍ट आर एंड बी एल्बम: हैथअवे (लालाह हैथअवे लाइव)

बेस्‍ट आर एंड बी सॉन्‍ग: हाड डेविड एंड म्‍यूज़, सॉन्‍गराइटर्स (मैक्सवेल) – लेक बाए द ओशन

बेस्‍ट आर एंड बी परफॉर्मेंस: सोलंग – क्रेन्‍स एन द स्‍काय

बेस्‍ट ट्रेडिशन आर एंड बी परफॉर्मेंस: - लालाह हैथवे– एंजल

वर्ल्‍ड म्‍यूजिक एल्बम: सिंग मी होम – यो – यो मा एंड ल सिल्‍क रोड़ आन्साम्बल

बेस्‍ट कॉमेडी एल्बम:

फॉक एल्बम: सारा जारोस – अंदरकरंट

बेस्‍ट अमेरिकन एल्बम: विलियम बेल – दिस इज वेयर आई लिव

बेस्‍ट अमेरिकन रुट्स सॉन्‍ग: विन्स गिल, सॉन्‍गराइटर (द टाइम जम्‍पर्स) – किड सिस्‍टर

बेस्‍ट अमेरिकन रुट्स परफॉर्मेंस: सारा जारोस - हाऊस ऑफ मर्सी

रीजनल रुट्स म्‍यूजिक एल्बम: कलानी – ई वालेए

बेस्‍ट ब्लूग्रास एल्बम: मार्क ओ'कॉनर विद ओ'कॉनर बैंड – कमिंग होम

रेग एल्बम: जिग्‍गी मार्ले- जिग्‍गी मार्ले

बेस्‍ट ट्रेडिशनल ब्‍लूज एल्बम: बॉबी रश – पॉर्क्यपाइन मीट

बेस्‍ट कंटेम्पररी ब्‍लूज एल्बम: फैंटास्टिक नगरिटो – द लास्‍ट डेज ऑफ ओकलैंड

कंटेम्पररी इन्स्ट्रमेंटल एल्बम: सनकी पप्‍पी- कुलुचा वुलचा

बेस्‍ट डांस रिकॉड्रिंग: द चैनस्‍मोकर्स डॉन्‍ट लेट मी डाऊन

बेस्‍ट डांस / इलेक्ट्रॉनिक एल्बम: फ्लूम – स्किन

बेस्‍ट न्‍यू ऐज एल्बम: व्‍हाइट सन - व्‍हाइट सन II

बेस्‍ट इम्‍प्रोवाइज्‍़ड जैज सोलो: जॉन स्‍कोफिल्‍ड, सोलोइस्ट  - आई एम सो लोन्सम आई कुड क्राय

बेस्‍ट जैज वोकल एल्बम: ग्रेगरी पोर्टर – टेक मी टू द ऐली

जैज इंस्ट्रुमेंटल एल्बम: जॉन स्‍कोफिल्‍ड - कंट्री फॉर ऑल्‍ड मैन

बेस्‍ट लार्ज जैज आन्साम्बल एल्बम: टेड नैश बिग बैंड – प्रेजिडेंशल सूट: एट वेरीऐशन ऑन फ्रीडम

बेस्‍ट लैटिन जैज एल्बम: चूचो वाल्डेस – ट्रिब्यूट टू इराकेरे: लाइव इन मरसीसअ

गॉस्पल परफॉर्मेंस/सॉन्‍ग: टमेला मन; किर्क फ्रैंकलिन, सॉन्‍गराइटर – गोड प्रोवाड

गॉस्पल एल्बम: किर्क फ्रैंकलिन – लोसिंग माई रिलिजन

कंटेम्पररी क्रिश्‍चन म्‍यूजिक एल्बम: हिलेरी स्कॉट और स्कॉट फैमिली – लव रिमैन्‍स

बेस्‍ट रुट्स गॉस्पल एल्बम: जॉय रोरी- हिम

बेस्‍ट लैटिन पॉप एल्बम: जेसी और जोय - अन बेसिटो मास 

बेस्‍ट लैटिन रॉक, अर्बन ऑर अल्टरनेटिव एल्बम: इले – इलेविटेबल

बेस्‍ट रीजनल मेक्सिकन म्‍यूजिक एल्बम: विसेंट फर्नांडीज – उन अजटेका एन एल अजटेका, बॉल्‍युम. 1 (एन विवो)

बेस्‍ट ट्रोपिकल लैटिन एल्बम: जोस लूगो और गुआसाबारा कॉम्बो - दोंदे एस्‍टन?

बेस्‍ट वर्ल्‍ड म्‍यूजिक एल्बम: यो –यो मा एंड द सिल्‍क रोड़ आन्साम्बल – सिंग मी होम

बेस्‍ट चिल्‍ड्रनर्स एल्बम: सीक्रेट एजेंट 23 स्की डू - इन्फिनिटी प्‍लस वन

बेस्‍ट इंस्ट्रूमेंट्स कॉम्पज़िशन: टेड नैश, कम्‍पोसर (टेड नैश बिग बैंड) – स्‍पोकन एट मिडनाइट

बेस्‍ट अरेंज्मेंट, इंस्ट्रूमेंट्स और अ कप्‍पेला : जाकोब कोलियर, अरैन्जर (जाकोब कोलियर) – यू एंड आई

बेस्‍ट अरेंज्मेंट, इंस्ट्रूमेंट्स एंड वोकल्‍स: जाकोब कोलियर, अरैन्जर (जाकोब कोलियर) - फ्लिन्टस्टोन

रिकॉर्डिंग पैकेज: जोनाथन बार्नब्रुक, आर्ट डायरेक्‍टर (डेविड बोवी) –ब्‍लैकस्‍टार

बेस्‍ट रिमिक्स्ड रिकॉर्डिंग : आंद्रे एलन एनजोस, रिमिर्क्‍स (बॉब मोस) - टिरिंग मी अप (आरएसी रिमिक्‍स)

प्रोडयूसर ऑफ द ईयर, नॉन- क्‍लासिक: ग्रेग कुरस्‍टीन

प्रोडयूसर ऑफ द ईयर, क्‍लासिक: डेविड फ्रॉस्ट

चैंबर म्‍यूजिक /स्‍मॉल एन्सेम्बल परफॉर्मेंस: स्टीव रैह

म्‍यूजिक वीडियो: बियोंस – फॉरमेशन

बेस्‍ट म्‍यूजिक फिल्‍म: द बीटल्ज़ – द बीटल्ज़: एट डेज अ वीक द टुरिंग ईयर

बेस्‍ट स्‍कोर साऊडट्रेक ऑफ विजुअल मीडिया: जॉन विलियम्स, संगीतकार – स्टार वार्स:द फोर्स अवेकन्स

भारत ने पाकिस्तान को नौ विकेट से हराकर नेत्रहीन टी-20 विश्व कप का खिताब जीत लिया है.भारत ने 2012 में पहला नेत्रहीन विश्व कप टी20 मैच जीता था. तब भी भारत ने फ़ाइनल में पाकिस्तान को 29 रन से हराकर जीत हासिल की थी.बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में 12 Feb. को पाकिस्तान ने भारत के सामने जीत के लिए 198 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे भारत ने एक विकेट गंवाकर आसानी से हासिल कर लिया.पाकिस्तान ने निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट पर 197 रन बनाए थे. जवाब में भारत ने 17.4 ओवरों में एक विकेट के नुक़सान पर 200 रन बनाकर मैच जीत लिया.

इससे पहले, पाकिस्तान की ओर से मुहम्मद जमील और बदर मुनीर ने ओपनिंग की. जमील 24 रनों पर पैवेलियन लौटे. बदर मुनीर ने 57 रन बनाए और ग्यारहवें ओवर में केतन पटेल की गेंद पर गणेश बाबूभाई मुंदाकर को कैच दे बैठे.

इस साल के बाफ़्टा पुरस्कारों में म्यूजिकल रोमांटिक फ़िल्म 'ला ला लैंड' की धूम रही. इसे बेस्ट फ़िल्म समेत कुल पांच पुरस्कार मिले. इसी फ़िल्म के लिए एमा स्टोन को बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला. फ़िल्म 'मैनचेस्टर बाई दी सी' में अभिनय के लिए कैसी एफ़लक को बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला. फ़िल्म फ़ेंसेज में अभिनय के लिए अभिनेत्री वियोला डेविस को सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेत्री का पुरस्कार मिला.

भारतीय मूल के ब्रितानी अभिनेता देव पटेल को फ़िल्म 'लायन' के लिए ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फ़िल्म एंड टेलीविज़न अवार्ड्स यानी बाफ़्टा में सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेता का पुरस्कार मिला है.

असल ज़िंदगी पर आधारित निर्देशक गार्थ डेविस की फ़िल्म 'लायन' में देव पटेल ने अपने परिवार से बिछड़े एक युवक की भूमिका निभाई है, जो गूगल अर्थ के सहारे भारत में स्थित अपना घर खोजने और वापस लौटने की कोशिश करता है.

बाफ़्टा में 'लायन' को आउटस्टैंडिंग ब्रिटिश फ़िल्म का पुरस्कार मिला.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने 15 फरवरी 2017 को एक ही रॉकेट के माध्यम से रिकॉर्ड 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण करके इतिहास रच दिया है। इन उपग्रहों में भारत का पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह भी शामिल है। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया गया है।

किसी एकल मिशन के तहत प्रक्षेपित किए गए उपग्रहों की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

ध्रुवीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी37 ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर उड़ान भरी। इसने सबसे पहले कार्टोसैट-2 श्रेणी के उपग्रह को कक्षा में प्रवेश कराया यऔर इसके बाद शेष 103 नैनो उपग्रहों को 30 मिनट में प्रवेश कराया गया। इनमें 96 उपग्रह अमेरिका के थे।

1. बेल्जियम : फिलहाल बेल्जियम दुनिया का सबसे ज्यादा कैशलेस देश है जहां कुल कंज्यूमर पेमेंट का 93 फीसदी कैशलेस होता है. देश की 86 फीसदी आबादी के पास डेबिट कार्ड है. वहां अगर तीन हजार यूरो से ज्यादा कैश का लेन-देन किया तो सवा दो लाख यूरो तक का जुर्माना हो सकता है.

2. फ्रांस : फ्रांस में 69 प्रतिशत लोगों के पास डेबिट कार्ड है, हालांकि कुल कंज्यूमर पेमेंट का 92 फीसदी हिस्सा कैशलेस होता है. फ्रांस में तीन हजार यूरो से ज्यादा कैश के लेन-देन की अनुमति नहीं है.

3. कनाडा : कनाडा में कुल कंज्यूमर पेमेंट का 90 फीसदी कैशलेस होता है जबकि देश के 88 फीसदी लोगों के पास डेबिट कार्ड है. वैसे, कनाडा ने 2013 से सेंट के सिक्के बनाना बंद कर दिया है. यानी वहां भी कैशलेस होने पर ज्यादा से ज्यादा जोर है.

4. ब्रिटेन : लंदन की मशहूर डबल डेकर बस में चढ़ने से पहले सुनिश्चित कर लें कि आपके पास या तो 'ओइस्टर कार्ड' हो या प्रिपेड टिकट, क्योंकि इसमें कैश नहीं चलता. वैसे पूरे ब्रिटेन में कैश का चलन घट रहा है. कुल कंज्यूमर पेमेंट का 89 कैशलेस ही होता है और 88 फीसदी लोगों के पास डेबिट कार्ड हैं.

5. स्वीडन : स्वीडन में 2008 में जहां 110 बैंक डकैतियां हुईं, वहीं 2011 में इतनी संख्या घटकर 16 रह गई. वजह है बैंकों में कम से कम कैश होना. कैशलेस देशों की सूची में स्वीडन पांचवें नंबर पर है जहां कंज्यूमर पेमेंट का 89 फीसदी हिस्सा कैशलेस है. देश के 96 प्रतिशत लोगों के पास डेबिट कार्ड है.

6. ऑस्ट्रेलिया : ऑस्ट्रेलिया में 79 प्रतिशत लोगों के पास डेबिट कार्ड है जबकि कंज्यूमर पेमेंट का 86 प्रतिशत कैशलेस होता है. वहां कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कई आयोजन होते हैं.

7. नीदरलैंड्स : नीदरलैंड्स ने कैशलेस होने के मामले में खासी प्रगति की है जहां कुल कंज्यूमर पेमेंट का 85 फीसदी पेमेंट कैशलेस हो रहा है. देश के 98 प्रतिशत लोगों के पास डेबिट कार्ड है. राजधानी एम्सटरडैम में पार्किंग वाले तक कैश नहीं लेते, सिर्फ कार्ड से ही पेमेंट होता है.

8. अमेरिका : अमेरिका में 72 प्रतिशत लोगों के पास डेबिट कार्ड है जबकि कुल कंज्यूमर पेमेंट का 80 फीसदी पेमेंट कैशलेस होता है. हालत यह है कि वहां एटीएम मशीनों की प्रासंगिकता पर सवाल उठने लगे हैं.

9. जर्मनी : सबसे कैशलेस देशों की फेहरिस्त में नौवें नंबर पर यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी है. यहां कुल कंज्यूमर पेमेंट का 76 प्रतिशत भुगतान कार्ड या अन्य कैशलेस तरीकों से होता है. 88 फीसदी आबादी के पास डेबिट कार्ड है.

10. दक्षिण कोरिया : मास्टर कार्ड कैशलेस जर्नी नाम की एक रिपोर्ट में दुनिया की सबसे ज्यादा कैशलेस अर्थव्यवस्थाओं का ब्यौरा दिया गया है. इस लिस्ट में 10वें पायदान पर दक्षिण कोरिया है जहां समूचे कंज्यूमर पेमेंट का 70 फीसदी पेमेंट कैशलेस होता है. देश की 58 फीसदी आबादी के पास डेबिट कार्ड है.

अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक में भारत लगातार पिछड़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स के वैश्विक बौद्धिक संपदा केंद्र जीआईपीसी की बौद्धिक संपदा वातावरण पर तैयार 45 देशों की सूची में भारत को 43वें स्थान पर रखा गया है। जीआईपीसी ने इस बात का भी जिक्र किया है कि सरकार को उल्लेखनीय विधायी सुधारों के जरिए अपनी आईपीआर नीति को सकारात्मक रख देना चाहिए। नवोन्मेषकों को इसकी जरूरत है। यह लगातार पांचवां साल है जबकि भारत इस सूची में निचले पायदान पर रहा है। हालांकि, 2017 की सूची इस लिहाज से कुछ सुधार दिखाती है कि पिछले चार साल के दौरान भारत आखिरी से एक पायदान ही उपर रहा था।

जीआईपीसी के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड हिरश्मैन ने कहा कि भारत में नवप्रवर्तन को लेकर पुरानी चुनौतियां कायम हैं। हालांकि इसने इस दिशा में थोड़ी प्रगति की है, लेकिन सरकार को विधायी सुधारों के जरिए आईपीआर नीति को सकारात्मक रख देना चाहिए।

महिला एकल वर्ग : महिला टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने अपनी बहन वीनस विलियम्स को हराकर ऑस्ट्रेलियन ओपर 2017 का महिला एकल का खिताब जीत लिया। सेरेना ने वीनस को लगातार दो सेटों में 6-4, 6-4 से हराया। सेरेना का ये 23 ग्रैंड स्लैम खिताब है। इसके साथ ही सेरेना ने पूर्व टेनिस खिलाड़ी स्टेफी ग्राफ का 22 बार ग्रैंड स्लैम जीतने का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस जीत के साथ ही एक बार फिर से सेरेना दुनिया की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी बन गईं हैं। अब सेरेना सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीतने वाली ऑस्ट्रेलिया की मारग्रेट कोर्ट से सिर्फ एक टाइटल दूर हैं।

ग्रैंड स्लैम फाइनल में दोनों बहनें 9 बार भिड़ीं हैं और सेरेना ने 7 बार जीत हासिल की है। ये सेरेना के करियर का 23वां ग्रैंड स्लेम सिंगल्स टाइटल है।

1. सेरेना विलियम्स के नाम पर अब 23 ग्रैंड स्लैम सिंगल्स टाइटल हो गए हैं।

2. उन्होंने ग्रैंड स्लैम जीतने के मामले में जर्मनी की पूर्व टेनिस प्लेयर स्टेफी ग्राफ (22 टाइटल) को पीछे छोड़ दिया है।

3. जिसके बाद सेरेना अब इस ओपन एरा की सबसे सक्सेसफुल टेनिस प्लेयर बन गई हैं।

4. वहीं, सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लेम जीतन के मामले में अब वे दूसरे नंबर पर आ गई हैं।

5. ऑस्ट्रेलिया की मार्गारेट कोर्ट से अब भी वे एक टाइटल पीछे हैं, जिनके नाम पर सबसे ज्यादा (24) टाइटल जीतने का रिकॉर्ड है।

6. सेरेना ने अपने करियर में सातवीं बार ऑस्ट्रेलियन ओपन का टाइटल जीता है।

7. इस मैच के दौरान दोनों बहनें करीब 8 साल बाद किसी ग्रैंड स्लैम के फाइनल में आमने-सामने थीं।

8. दोनों बहनों के बीच ग्रैंड स्लैम के फाइनल में 9 बार मुकाबला हुआ, जिसमें सेरेना ने 7 मैच जीते हैं।

9. ओवरऑल रिजल्ट में भी सेरेना 17-11 से आगे हैं।

10. इस मैच को जीतने के बाद विलियम्स बहनों के नाम पर कुल 30 ग्रैंड स्लैम हो गए हैं।

11. इनमें से सेरेना ने जहां अपने करियर में 23 ग्रैंड स्लैम तो वहीं वीनस ने 7 ग्रैंड स्लेम सिंगल्स खिताब जीते हैं।

12. इससे पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में दोनों बहनों के बीच मुकाबला साल 2003 में हुआ था। उसमें भी सेरेना ने बाजी मारी थी।

इस मैच से पहले दोनों के बीच ग्रैंड स्लैम के फाइनल में आखिरी मुकाबला साल 2009 में विम्बलडन में हुआ था, जिसमें सेरेना की जीत हुई थी। ऑस्ट्रेलियन ओपन का टाइटल जीतने के बाद अब सेरेना पिछली बार की चैम्पियन एंजेलिक कर्बर को पीछे छोड़ फिर से वर्ल्ड नंबर वन टेनिस प्लेयर बन जाएंगी।

पुरुष एकल वर्ग : साल के पहले ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नमेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन के पुरुष एकल वर्ग में स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी स्पेन के राफेल नडाल को हराकर अपने 18वें ग्रैंड स्लैम खिताब पर कब्जा कर लिया। फेडरर ने इस फाइनल मुकाबले को 6-4, 3-6, 6-1, 3-6 और 6-3 से अपने नाम किया।

मिश्रित युगल : भारत की सानिया मिर्जा और क्रोएशिया के इवान डोडिग की जोड़ी को ऑस्‍ट्रेलियन ओपन के मिश्रित युगल के फाइनल में हार झेलनी पड़ी है। उन्‍हें अमेरिका की एबिगेल स्पियर्स और कोलंबिया के जुआन सेबेस्टियन कबाल की जोड़ी ने सीधे सैटों में 6-2,6-4 से हराया। सानिया मिर्जा ने तीन मिश्रित युगल खिताब (2009 ऑस्‍ट्रेलियन ओपन, 2012 फ्रैंच ओपन और 2014 यूएस ओपन) जीते हैं। इनमें से पहले दो खिताब महेश भूपति और फिर ब्रूनो सोआरेस के साथ जीता था। इसके साथ ही तीन बार महिला युगल खिताब (2015 में विंबलडन और यूएस ओपन व 2016 में ऑस्‍ट्रेलियन ओपन) जीते थे। ये तीनों खिताब उन्‍होंने मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर हासिल किए थे।

भारतीय सर्वेक्षण विभाग के महा सर्वेक्षक स्वर्ण सुब्बा राव ने कहा, हम एक अभियान दल को माउंट एवरेस्ट के लिए रवाना कर रहे हैं। एवरेस्ट की उंचाई की घोषणा, अगर मैं गलत नहीं हूं तो 1855 में की गई थी।कइयों के द्वारा इसकी उंचाई नापी गई लेकिन भारतीय सर्वेक्षण विभाग की माप को आज भी सही उंचाईं माना जाता है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अनुसार एवरेस्ट की उंचाई 29,028 फुट है, हम इसे दोबारा नापने जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नेपाल में दो साल पहले भीषण भूकंप आया था, इसके बाद से ही वैज्ञानिक समुदाय को शक है कि एवरेस्ट सिकुड़ रहा है, दोबारा नाप कराने का यह एक कारण है। इसके अलावा दूसरा कारण यह है कि यह वैज्ञानिक अध्ययन और प्लेट की गति को समझने में सहायता करता है। राव ने एक कार्यक्रम से इतर कहा कि इसके लिए आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है और यह अभियान एक माह में शुरू हो जाएगा। इस काम में एक महीना लग जाएगा और डाटा जारी करने में 15 दिन और लगेंगे। 

करप्‍शन एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर देश में कई सालों से बहस हो रही है। ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में भारत इस मामल में अब भी दुनिया के डेवलप देशों से काफी पीछे नजर आता है। हालांकि हाल के दिनों में भारत में इसे लेकर जागरूकता बढ़ी है। देश में लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा इमानदार हों, इसके लिए सरकार ने राज्‍यों और शहरों के बीच कॉम्पिटीशन भी भावना पैदा करने का निर्णय लिया है। इसका सबसे बेहतरीन तरीका सबसे इमानदार शहरों की लिस्‍ट तैयार करना है। मोदी सरकार ने स्‍वच्‍छता के मोर्चे पर भी ऐसा ही किया है। हाल में संसद में पेश आर्थिक सर्वे 2016-17 में सरकार ने देश के टॉप 20 शहरों कल लिस्‍ट जारी की है। 

यह लिस्‍ट शहरों की लोकल बॉडीज (ULBs) में ट्रांसपैरेंसी के आधार पर तैयार की गई है।- इसके साथ ही इन ULBs की जवाबदेही और सहायोग को भी आधार बनाया गया है।- लिस्‍ट में देश की आर्थिक राजनधानी मुंबई पहले नंबर पर है। लिस्‍ट में कई शहर ऐसे हैं, जिन्‍हें एक समान नंबर दिए गए हैं, हालांंक‍ि कुछ अन्‍य मानकों के आधार पर उन्‍हें अलग-अलग रैंकिंग दी गई है। लिस्‍ट में इन शहरों को 8  से 2 के बीच नंबर मिले हैं। सबसे ज्‍यादा नंबर मुंबई-हैदराबाद को तो सबसे कम नंबर चंडीगढ़ और देहरादून हैं।

•  लिस्ट में हैदराबाद को भी 8 नंबर मिले हैं। ईमानदार शहरों में उसका नंबर मुंबई के बाद है।

 तीसरे नंबर पर पंजाब का आर्थिक शहर लुधियाना है। उसका स्कोेर 7.5 है।

 चौथे नंबर पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल है। लिस्ट में उसका स्कोर भी 7.5 है।

 पांचवें नंबर पर केरल की राजधानी तिरुवनन्तपुरम है। लिस्ट में उसका स्कोर 7 है।

 यूपी की राजधानी लखनऊ का नंबर छठां है। लिस्‍ट में उसका स्कोर भी 7 है।

 लिस्ट में यूपी के कानपुर शहर को भी जगह मिली है। सातवीं पोजीशन के साथ लिस्ट में उसका स्कोर 7 है।

 बेंगलुरू को आठवीं पोजीशन मिली है। लिस्ट में उसका स्कोर 6.5 है।

 वहीं नौवें नंबर पर झारखंड का रांची शहर है। लिस्ट में उसका स्कोर 6 है।

 10वें नंबर पर महाराष्ट्र का पुणे शहर है। लिस्ट में उसका स्कोर भी 6 है।

 पटना शहर 11वें नंबर पर है। लिस्ट में उसका स्कोर भी 6 है।

 लिस्ट में चेन्न्ई को 12वीं पोजीशन मिली है। उसका स्कोर 5 बताया गया है।

 लिस्ट में भुवनेश्वर 13वें नंबर पर है। उसका स्कोर भी 5 है।

 छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को 14वां नंबर मिला है। लिस्ट में उसका स्कोर 4 है।

 ईमानदारी के मामले में अन्‍य बड़े शहरों के मुकाबले कोलकाता काफी पीछे रह गया है। उसे 15वीं पोजीशन मिली है, जबकि उसका स्कोर भी 4 है।

 दिल्ली को 16वीं पोजीशन मिली है। उसका स्कोर भी 4 है।

 सूरत शहर को लिस्‍ट में 17वें नंबर पर रखा गया है। उसे सिर्फ 2.5 नंबर मिले हैं।

 सूरत के बाद गुजरात की राजधानी अहमदाबाद का नंबर है।

•  18वीं पोजीशन के साथ उसे भी 2.5 नंबर मिले हैं।

 19वें नंबर पर राजस्थान का जयपुर शहर है। उसका स्कोर 2 है।

 20वें नंबर पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून है। उसका स्कोर भी 2 है।

 21वें नंबर पर चंडीगढ़ शहर है। उसका स्कोर भी 2 है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 का बजट पेश किया. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 Feb 2017 को संसद में बजट पेश करते हुए कहा कि उत्पाद एवं सीमा शुल्क पर उनके प्रस्तावों से सरकारी खजाने को कोई खास लाभ या हानि नहीं होगी. जेटली ने बजट पेश करते हुए कहा, केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के जरिये केंद्र सहकारी संघवाद की भावना से समझौता किए बिना वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने के लक्ष्य को हासिल करना जारी रखेगा.  जीएसटी लागू होने से केंद्र और राज्य सरकारों को अधिक कर मिल सकता है क्योंकि इससे कर का दायर बढ़ेगा. मैंने उत्पाद एवं सेवा कर के मौजूदा ढांचे में अधिक बदलाव नहीं करना पसंद किया क्योंकि इनके बदले जल्द ही जीएसटी लागू होने वाला है. हर बार की तरह इस बार भी बजट के बाद कुछ चीजें महंगी हुई और कुछ चीजें सस्ती हुईं है. आइए जानें कि इस बार बजट में सरकार ने कौन सी चीजें सस्ती की और कौन सी चीजें महंगी. 

ये सामान हुये सस्ते : पवन चक्की, आरओ, पीओएस, पार्सल, लेदर का सामान, सोलर पैनल,प्राकृतिक गैस, निकेल, बायोगैस, नायलॉन, रेल टिकट खरीदना, सस्ता घर देने का प्रयास, टैक्स में मध्यम वर्ग को राहत देने का प्रयास, भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा टैक्स मुक्त होगा. सौर उर्जा बैटरी और पैनल के विनिर्माण में काम आने वाले सोलर टैम्पर्ड ग्लास को सीमा शुल्क से छूट.

ये सामान हुये महंगा : मोबाइल फोन, पान मसाला, सिगरेट, एलईडी बल्ब, चांदी का सामान, तंबाकू, हार्डवेयर, सिल्वर फॉयल, स्टील का सामान,  चांदी के गहने, स्मार्टफोन. पान मसाला पर उत्पाद शुल्क 6% से बढ़ाकर 9%, गैर-प्रसंस्कृत तंबाकू पर 4.2 से बढ़ाकर लगभग दोगुना 8.3% कर दिया गया है. तंबाकू (गुटखा) वाले पान मसाला पर उत्पाद शुल्क 10% से बढ़ाकर 12%किया गया. 65 मिलीमीटर तक लंबाई वाली सिगरेट पर उत्पाद शुल्क 215 रुपये प्रति एक हजार से बढ़ाकर 311 रुपये प्रति हजार किया गया. एल्यूमीनियम महंगा, इसके अयस्क और कंसंट्रेट पर आयात शुल्क शून्य से बढ़ाकर 30% किया गया.

मोबाइल फोन विनिर्माण में काम आने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पर सीमा शुल्क शून्य से बढ़ाकर 2% किया गया. एलईडी बल्ब विनिर्माण में उपयोग होने वाले कलपुजों पर पांच प्रतिशत की दर से मूल सीमा शुल्क और 6% प्रतिपूर्ति शुल्क लगेगा. सिगार, सुल्फी (चुरट) पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 12.5% अथवा प्रति हजार 4006 रुपये जो भी अधिक होगा, किया गया. पहले यह दर 12.5% और 3,755 रुपये प्रति हजार थी.

घटाया गया इनकम टैक्स

- 5 लाख तक की आमदनी वाले को 5 फीसदी टैक्स देना होगा।

- 3 से 5 लाख तक की आय वालों के लिए आधा टैक्स

- 3 लाख तक की आय में कोई टैक्स नहीं

- इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाई गई

- 1 करोड़ से ज्यादा आय पर 15 फीसदी सरचार्ज जारी रहेगा

- 50 लाख से 1 करोड़ की इनकम पर 10 फीसदी सरचार्ज

कैश में 2 हजार तक ही चंदा ले सकेंगी राजनीतिक पार्टियां

- राजनीतिक पार्टियां एक शख्स से 2 हजार रुपये ही चंदा ले सकेंगी। 2 हजार से ज्यादा की रकम चेक से चंदा ले सकेंगी।

- 3 लाख से ज्यादा कैश लेने देने डिजिटल होगा।

- 2017-18 में एलएनजी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 4 फीसदी से 2.5 फीसदी की गई

- 50 करोड़ तक सालाना टर्न ओवर वाले को 25 फीसदी टैक्स देना होगा। घाटा 5 फीसदी घटा।

- टैक्स में मध्यम वर्ग को राहत देने का फैसला।

- भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा कर मुक्त होगा।

- विमुद्रीकरण के बाद व्यक्तिगत इनकम पर लगने वाले एंडवास टैक्स में 34.8 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है।

- देश में टैक्स बचाने वालों की संख्या ज्यादा है।

- सस्ते घरों के लिए प्रस्ताव में लाएंगे बदलाव।

- कर चोरी करने वालों का भार ईमानदार लोगों पर पड़ता है। विमुद्रीकरण से लोगों को ज्यादा टैक्स दिखाना पड़ा।

- 24 लाख लोग ही 10 लाख से ज्यादा इनकम बताते हैं।

- 99 लाख लोगों ने 2.50 लाख से कम आय दिखाई।

- 1.72 लाख लोगों ने 50 लाख से ज्यादा आय दिखाई

- 2017-18 में विज्ञान मंत्रालय के लिए 37,435 करोड़ रुपये आवंटित

- अगले 3 साल में 3 फीसदी कम किया जाएगा राजकोषीय घाटा

- रक्षा बजट 2.74 लाख करोड़ रुपये आवंटित

- 2017-18 के लिए 21.47 लाख करोड़ का बजट खर्च करेगी सरकार।

- डिफोल्टरों की संपत्तिया कुर्क करने के लिए नए नियम बनाए जाएंगे।

- महात्मा गांधी की 150 वीं जयंति मनाने के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव

- फौजियों के लिए क्रेंदिय यात्रा प्रणाली लाने का प्रस्ताव

- डिजिटल योजना में पोस्ट ऑफिस की भागीदारी ली जाएगी।

- डाकघरों में बन सकेंगे पासपोर्ट

- डेविड और क्रेडिट कार्ड नहीं होने पर आधार कार्ड से होगा भुगतान

- 2017-18 के लिए 2500 करोड़ डिजिटल लेने-देन का लक्ष्य।

- व्यापारियों के लिए कैश-बैक योजना का ऐलान।

- रेलवे से जुड़ी 3 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होगी।

- 125 लाख लोगों ने भीम एप को अपनाया है। एप को बढ़ावा देने के लिए दो नई स्कीम शुरू की जाएगी।

- बुनियादी ढाचे के लिए 3.96 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया जाएगा

- शेयर बाजार में आईआरटीसी बतौर कंपनी लिस्ट होगी।

- डिजिटल अर्थवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।

- विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड को खत्म किया जाएगा।

- 90 फीसदी से ज्यादा एफडीआई ऑटो रूट के जरिए-विदेशी निवेश के लिए ऑन लाइन अर्जी दर्ज कर सकेंगी कंपनियांई

- टिकट पर नहीं लगेगा सर्विस चार्ज

- आईआरसीटीसी से ई टिकट पर नहीं लगेगा सर्विस चार्ज

- 7 हजार स्टेशनों पर सोलर लाइट लगेंगी।

- 500 किलोमीटर नई रेल पटरी बनाने का लक्ष्य।

- 5 साल के लिए रेल संरक्षण कोष के लिए 1 लाख करोड़ रुपये

- धार्मिक रूटों पर विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।

- रेलवे में विकास और स्वच्छता पर जोर दियाजाएगा।

- मानव रहित क्रॉसिंग को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।

- ग्रामीण कृषि के लिए 2017-18 में 1.87 करोड़ रुपये आवंटित।

- वरिष्ठ नागरिकों के लिए एलआईसी योजना।

- मेडीकल में पीजी कोर्स के लिए 5 हजार सीटें बढ़ाई जाएगी।

- दीनदयाल अंत्योदी के लिए 4500 करोड़

- 2025 तक टीवी की बीमारी खत्म की जाएगी।

- 2017 तक कालाबाजार खत्म करने का ब्लूप्रिंट बनाया गया है।

- आईआईटी और मेडिकल की परिक्षाओं के लिए अगल बॉडी बनेगी।

- झारखंड और गुजरात में दो नए एम्स बनेंगे।

- मनरेगा के लिए 48,000 करोड़ रुपये निर्धारित

- 350 ऑन लाइन पाठ्यक्रम शुरू करेगी सरकार।

- 3.50 करोड़ युवाओं को बाजार के हिसाब से कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी।

- गांवों में पाइपलाइन से जल सप्लाई का प्रस्ताव

- प्रधानमंत्री आवास योजना पर 2019 तक 4 लाख करोड़ रुपये खर्च

- 2017-18 में प्रतिदिन 133 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी।

- विज्ञान की शिक्षा और पाठ्यक्रम में लचीलेपन को बल दिया जाएगा।

- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए 27 हजार करोड़ रुपये

- मनरेगा के लिए 2017-18 के लिए बजट बढ़ाकर 48,000 करोड़ रुपये किया गया है, 2016 में 37,000 करोड़ थामनरेगा में 5 लाख तालाबों का लक्ष्य

- मनरेगा में 5 लाख तालाबों का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

- प्रधानमंत्री ग्राम विकास योजना पर 4 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी।

- वामपंथी उग्रवाद वाले इलाकों को सड़कों से जोड़ने का काम 2019 तक पूरा कर लिया जाएगा।

- जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के किसानों को कर्ज देने में प्रमुखता दिखाई जाएगी।

- 8 हजार करोड़ रुपये का डेयरी कोष दिया जाएगा।-सिचाई फंड के लिए 5 हजार करोड़ रुपये देगी सरकार।

- फसल बीमा 30 फीसदी की बजाय 40 फीसदी होगी। किसानों को 10 लाख करोड़ का कर्ज देगी सरकार

- फसलों की बीमा के लिए किसानों को 9 हजार करोड़ रुपये देंगे।

- किसानों को 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज देंगे।

- मॉनसून के अच्छे रहने की वजह से इस साल कृषि विकास दर के 4.1 फीसदी रहने का अनुमान है।

- जम्मू-कश्मीर में रहने वाले किसानों को ऋण देने के लिए विशिष्ट कोशिश की गई है।

- किसानों की आय 5 सालों में दोगुना करने की कोशिश की गई है।

- युवा शिक्षा, कौशल और रोजगार मुहैया करना।

- रेल बजट का आम बजट के साथ विलय करना ऐतिहासिक है। हमने 1924 से चली आ रही औपनिवैशिक नियम को बदला है।

- नोटबंदी से भ्रष्टाचार खत्म होगा।

- 2017 में आर्थिक विकास तेज होने की संभावना।

- बजट को ग्रामीण क्षेत्रों को ध्यान रखकर बनाया गया है।

- 2016-17 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 0.3 फीसदी हुआ है।

- अमरिका मेें व्याज दरों में बढ़ोतरी का भारत पर असर पड़ेगा।

- नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। अर्थव्यवस्था पर मामूली असर पड़ेगा। बैंकों में काफी धन जमा हो गया है।

कालेधन पर कार्रवाई सरकार की बड़ी कामयाबी

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने महंगाई काबू करने की कोशिश की है। भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में चमकता सितारा है। भारत ने अपनी नीतियों में उल्लेखनिय सुधार किया है। वर्ल्ड इकॉनोमी फोरेम की रिकॉर्ड में इस बात का पता चलता है कि भारत को वैश्विक प्रेरक के रूप में देखा जाने लगा है। कच्चे तेल और पेट्रोल की कीमत में कमी आई है। कालेधन पर कार्रवाई सरकार की बड़ी कामयाबी है।

फ्रांस की 24 साल की आइरिस मितेनेयर ने 65वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता का ताज अपने नाम कर लिया है. हैती की राक्वेल पेलिशियर दूसरे स्थान पर रहीं. मूल रूप से पेरिस की आइरिस दंत शल्य चिकित्सा में स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं. मिस यूनिवर्स बनने के बाद अब उनका लक्ष्य दांतों और मुख की स्वच्छता संबंधी जागरूकता फैलाने का है.  आइरिस को खाना पकाना, घूमना और स्पोर्ट्स बहुत पसंद है. वह नॉर्दन फ्रांस के लिली की रहने वाली हैं. भारत की रोशमिता हरिमूर्ति अंतिम 13 में भी जगह बनाने में नाकामयाब रही.

आइरिस ने इवनिंग गाउन, स्विम सूट और सवाल-जवाब के कई दौर पार करते हुए 86 प्रतियोगियों को पीछे छोड़ अंतिम दौर में जीत हासिल कर मिस यूनिवर्स का ताज अपने नाम किया. आइरिस को यह खिताब पूर्व मिस यूनिवर्स पिया वर्जबैच ने दिया जो फिलिपीन की हैं. कोलंबिया के एंड्रिया तोवर दूसरी रनरअप रहीं.

प्रतियोगिता में भारत से रोशमिता अकेली नहीं थीं. पूर्व मिस यूनिवर्स एवं भारतीय अभिनेत्री सुष्मिता सेन प्रतियोगिता में जज की भूमिका में थी. सुष्मिता ने वर्ष 1994 में यह खिताब जीता था. समारोह में उन्हें ‘ बॉलीवुड सुपरस्टार, पूर्व मिस यूनिवर्स और महिला अधिकारों की हिमायती’ कहकर संबोधित किया गया था. वहीं, भारतीय मूल की सिख गर्ल किरन जस्साल ने मलेशिया को रिप्रेजेंट किया था. प्रतियोगिता की अंतिम 13 प्रतिभागी केन्या, इंडोनेशिया, मैक्सिको, पेरू, पनामा, फिलिपीन, कनाडा, ब्राजील, थाईलैंड और अमेरिका से थीं.

मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता का 65वां संस्‍करण खास रहा क्योंकि इस बार यह फिलिपिंस के मनीला शहर में आयोजित हुआ. इस प्रतियोगिता में सुष्मिता जजों के पैनल में शामिल रही और यह उनके लिए बेहद खास है. दरअसल 1994 में जब वह खुद मिस यूनिवर्स बनी थीं तो वह मनीला में ही उन्‍होंने यह ताज जीता था.

सरकार ने भीम एप के साथ आधार को जोड़ दिया है। इसके साथ ही इसी महीने बायोमेट्रिक आधारित आधार पे भुगतान मॉड्यूल को लॉन्च करने जा रही है। सरकार देश में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए इसे जल्द से जल्द लागू करने की रणनीति बना रही है। इस बायोमेट्रिक आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए पेमेंट करने के साथ पेमेंट रिसीव भी कर सकेंगे। 'आधार पे' के जरिये लोग अपने स्मार्टफोन से सिर्फ फिंगरप्रिंट्स का इस्तेमाल कर ट्रांजैक्शन्स कर सकते हैं। बता दें कि आधार पे पहले से चल रहे पेमेंट सिस्टम AEPS का मर्चेंट वर्जन है। 

सूत्रों के अनुसार, इस सेवा को नए वित्त वर्ष यानी अप्रैल से चालू किया जा सकता है। करीब 14 बैंकों ने इस सेवा को चालू करने पर सहमति जता दी है। सरकार का मानना है कि इससे देश में कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा।

आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सरकार आधार पे शुरू करने जा रही है। इसके लिए किसी को भी पेमेंट करने के लिए आपको मोबाइल की भी जरूरत नहीं होगी। आपको दुकान पर जाकर सिर्फ अपना आधार नंबर बताना होगा और अंगूठे से आधार नंबर वेरीफाई करके आप पेमेंट कर सकेंगे। प्रसाद ने बताया कि आधार पे से अब तक 14 बैंक जुड़ चुके हैं। सरकार दूसरे बैंकों को भी इससे जोड़ने की कोशिश कर रही है।

आधार के जरिए देश के 1.11 बिलियन लोगों के पास यूनिक नंबर मौजूद हैं। वहीं देश के 390 मिलियन बैंक अकाउंट आधार कार्ड से जुड़े हुए हैं।  स सेवा का लाभ पाने के लिए आपके बैंक अकाउंट नंबर का आधार से लिंक होना जरूरी है। अगर आपका अकाउंट नंबर आधार नंबर से लिंक नहीं है तो आप आधार पे के जरिए पेमेंट नहीं कर पाएंगे।

दुनिया के सबसे तेज़ एथलीट जमैका के यूसेन बोल्ट को अपने एक ओलंपिक गोल्ड मेडल से हाथ धोना पड़ा है. बोल्ट के नाम ओलंपिक के नौ गोल्ड मेडल हैं. अब ये संख्या घटकर आठ रह जाएगी. और ऐसा बोल्ट की ग़लती से नहीं बल्कि एक उनके एक साथी एथलीट की ग़लती से हुआ है जिसे प्रतिबंधित दवा लेने का दोषी पाया गया है.

2008 के बीजिंग ओलंपिक में रिले रेस में बोल्ट के साथ हिस्सा लेनेवाले चार एथलीटों में से एक नेस्टा कार्टर को एक टेस्ट में पॉज़िटिव पाया गया. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने कहा कि कार्टर के शरीर में मिथाइलहेक्सैनियामाइन नाम की ताक़त बढ़ानेवाली दवा पाई गई जिस पर प्रतिबंध है.

आईओसी ने इसके साथ ही जमैका का स्वर्ण पदक वापस लिए जाने का भी एलान किया. इसके साथ ही बीजिंग में तीन गोल्ड मेडल जीतनेवाले बोल्ट का एक गोल्ड मेडल भी उनसे छिन गया. फ़ैसले के बाद बोल्ट लगातार तीन ओलंपिक खेलों में तीन-तीन गोल्ड मेडल जीतनेवाले पहले एथलीट भी नहीं रहे.

30 वर्षीय बोल्ट ने पिछले साल रियो में 2008 और 2012 के बाद लगातार तीसरी बार 100 मीटर, 200 मीटर और 4x100 रिले रेस में गोल्ड जीता था. 31 वर्षीय नेस्टा कार्टर 2012 के लंदन ओलंपिक में भी रिले रेस का स्वर्ण जीतनेवाली जमैका की टीम में शामिल थे. उन्होंने 2011, 2013 और 2015 के वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी जमैका को जीत दिलाई थी.आईओसी के फ़ैसले के बाद बीजिंग ओलंपिक का रिले रेस का स्वर्ण अब त्रिनिडाड एंड टोबैगो को दे दिया गया है.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के भ्रष्टाचार सूचकांक 2016 में भारत की रैंकिंग में थोड़ी सुधार हुई है। विश्व के सबसे कम भ्रष्ट देशों में न्यूजीलैंड और डेनमार्क को संयुक्त रूप से शीर्ष पर रखा गया है। सूचकांक में भारत, चीन और ब्राजील को 40-40 अंक मिले हैं। 2015 में भारत को 38 अंक मिले थे। न्यूजीलैंड और डेनमार्क को 90-90 अंक दिए गए हैं। इसके बाद फिनलैंड, नार्वे, सिंगापुर, नीदरलैंड और कनाडा का स्थान है। सबसे भ्रष्ट को शून्य और सबसे साफ-सुथरे देश को 100 अंक दिए जाते हैं।

सूचकांक में सोमालिया को सबसे भ्रष्ट देश बताया गया है। सीरिया, दक्षिण सूडान, उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान और इराक कम अंक पाने वाले अन्य देश हैं। इसमें 176 देशों को शामिल किया गया था। सूची तैयार करने के लिए ट्रांसपेरेंसी ने विश्व बैंक, विश्व आर्थिक मंच और अन्य वैश्विक संस्थानों के डाटा का इस्तेमाल किया। 

भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से बुधवार को यूएई से ऑइल रिजर्व तैयार करने को लेकर अहम करार किया। इसके तहत भारत की कुल पेट्रोलियम जरूरत का छठा हिस्सा ऑइल रिजर्व में उपलब्ध रहेगा। जानें, यूएई की साझेदारी में कैसा होगा यह ऑइल रिजर्व.

1. भारत सरकार ने यूएई के साथ डील में उसे कर्नाटक के मंगलुरु की अंडरग्राउंड क्रूड ऑइल स्टोरेज फैसिलिटी के आधे हिस्से को भरने की अनुमति दी गई है।

2. यह डील भारत सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सिस्टम का हिस्सा है। इस सिस्टम के तहत 36.87 मिलियन बैरल कच्चे तेल को स्टोर किया जा सकेगा। इससे आपातकालीन स्थिति में 10 दिन तक देश की औसत तेल जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।

3. यूएई की अबु धाबी नैशनल ऑइल कंपनी मंगलुरु में 6 मिलियन बैरल ऑइल स्टोर करेगी। इस साइट पर कुल स्टोरेज क्षमता का यह आधा हिस्सा होगा।

4. अबु धाबी नैशनल ऑइल कंपनी और इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड के बीच भारत में ऑइल स्टोरेज और मैनेजमेंट को लेकर यह दूसरा करार है। 2017 की आखिरी तिमाही से आबु धाबी की कंपनी की ओर से भारत को कच्चे तेल की सप्लाइ शुरू कर दी जाएगी।

5. तीन साल पहले भारत सरकार ने अपनी रणनीतिक तेल स्टोरेज क्षमता का एक हिस्सा दुबई की इस कंपनी को लीज पर देने के लिए बातचीत की शुरुआत की थी।

6. देश की इकॉनमी को सुरक्षा प्रदान करने और आपात स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिहाज से यह डील बेहद महत्वपूर्ण है। इन क्रूड ऑइल इन्वेंट्रीज को किसी देश की सरकार या फिर प्राइवेट इंडस्ट्री के द्वारा भी संचालित किया जा सकता है।

7. मंगलुरु की ऑइल स्टोरेज फैसिलिटी के आधे हिस्से में भारत ने 6 मिलियन बैरल क्रू़ड ऑइल रिजर्व किया है। यह रिजर्व ईरान की मदद से किया गया है। इसके अलावा भारत ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भी 7.55 मिलियन बैरल कच्चा तेल स्टोर किया है। ऐसी ही तीसरी यूनिट कर्नाटक के पाडुरण में है, यहां 18.3 मिलियन बैरल क्रूड ऑइल स्टोर किए जाने की क्षमता है।

8. अमेरिका के ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक दुनिया भर में देशों ने स्ट्रैटेजिक ऑइल रिजर्व में 4.1 बिलियन बैरल क्रूड ऑइल रिजर्व कर रखा है। इनमें से 1.4 बिलियन बैरल पर सरकार का नियंत्रण है, जबकि बाकी हिस्से का प्राइवेट इंडस्ट्री संचालन करती है।

9. अमेरिका के पास दुनिया में सबसे अधिक 727 मिलियन बैरल का ऑइल रिजर्व है। यदि अमेरिका अपने रिजर्व को पूरी तरह भरकर रखता है तो आपात स्थिति में 60 दिनों तक देश की तेल की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।

10. चीन ने सरकार के नियंत्रण में स्ट्रैटेजिक ऑइल रिजर्व तैयार किया है। चीन की योजना 2020 तक 90 दिनों तक का ऑइल रिजर्व स्थापित करने की है।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का ओहदा हासिल करने वाला समूचा हिंदुस्तान आज अपना 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आज के आयोजन में सुबह 10 बजे राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा फहराने के बाद परेड शुरू हुई। यह परेड राजपथ से शुरू होकर तिलक मार्ग, दिल्ली गेट होती हुई लाल किले पर जाकर संपन्न होगी। इस दौरान सेना और अर्धसैनिक बलों के मार्चिंग दस्ते मार्च पास्ट कर रहे हैं और राष्ट्रपति को सलामी दे रहे हैं।

वहीं, इस खास मौके पर राजपथ से हिंदुस्तानी शौर्य और संस्कृति की झांकी भी निकाली जा रही है। सेना के साथ 17 राज्यों और 6 मंत्रालयों की झांकियां भी परेड में नजर आईं। इस बार अबु धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायेद ने गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया है।

1950 में आज ही के दिन भारत सरकार अधिनियम (1935) के स्थान पर हमारा संविधान लागू हुआ था। इस खुशी में राजपथ पर सेना के शक्ति प्रदर्शन और सुंदर झांकियों की प्रस्तुति के द्वारा यह दिन मनाया जाता है।

यूएई का सैन्य दस्ता भी हुआ शामिल

संयुक्त अरब अमीरात की मिलिट्री का एक दल भी परेड में शामिल हुआ और 35 म्यूजिशियन के दल ने मार्च किया। राजपथ पर परेड में 17 राज्यों की झांकियों के साथ कैशलेस ट्रांजेक्शन और भीम एप की झांकी भी सजी। पहली बार परेड में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के कमांडर भी शामिल हुए।

तेजस-धनुष की पहली परेड

गणतंत्र दिवस पर हल्के स्वदेशी फाइटर प्लेन तेजस, हेलिकॉप्टर ध्रुव और रूद्र भी करतब दिखा रहे हैं। देसी बोफोर्स के नाम से मशहूर धनुष तोप परेड में पहली बार शामिल हुआ। इस परेड में एक दर्जन से ज्यादा शस्त्र-अस्त्र स्वदेशी होंगे, जिसमें रडार से लेकर मिसाइलें और तोप खाने से लेकर रेकी वाहन शामिल हैं।

68वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नोटबंदी, डिजिटल पेमेंट, लोकतंत्र, चुनाव सुधार सहित कई मसलों पर अपनी बात रखी। नोटबंदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे फौरी तौर पर कुछ समय के लिए मंदी आ सकती है। मगर इससे कैशलेस लेनदेन बढ़ेगा और इससे पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि यह कोलाहल नहीं बहस का लोकतंत्र बनाने का वक्त है। राष्ट्रपति ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने पर जोर दिया।

हमारी अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक गतिविधियों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन कर रही है। काले धन और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए लागू की गई नोटबंदी का अच्छा असर होगा। डिजिटल पेमेंट से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।राष्ट्रपति ने संसद और विधानसभाओं में हंगामे की बढ़ती परिपाटी पर चिंता जताते हुए कहा है कि हमारा लोकतंत्र कोलाहलपूर्ण" हो गया है।इसलिए अब समय है कि हमारे कानून निर्माता कानून बनाने से लेकर विधायिका में बहस और परिचर्चा का सामूहिक प्रयास करें।पिछले लोकसभा चुनाव में 66 फीसद से ज्यादा वोटरों ने मतदान किया और लोकतंत्र में यह सहभागिता पंचायती चुनावों में भी झलकती है।इसलिए कानून निर्माताओं को यह समझना होगा कि हंगामे और व्यवधान से सत्र का नुकसान होता है। जबकि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस, परिचर्चा कर कानून बनाने चाहिए और इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।चुनाव सुधारों को लेकर राष्ट्रपति ने राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग को विचार-विमर्श कर लोकसभा और विधानसभा चुनाव के एक साथ कराने की संभावनाओं पर गौर करने की नसीहत दी। उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि आत्मसंतोष करने के बजाय हम अपनी व्यवस्था में खामियों की पहचान कर इसे दूर करने का रास्ता निकालें।मुखर्जी ने साफ कहा कि स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशकों की उन परंपराओं की ओर लौटने का समय आ गया है जब लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे।

राष्ट्रपति ने इस दौरान सरकार की स्वच्छ भारत, मनरेगा, आधार, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया आदि से हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे देश में व्यापक परिवर्तन हो रहा।मगर यह भी हकीकत है कि अभी भी हमारी आबादी का पांचवां हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे है जिसे खत्म करना बड़ी चुनौती है।राष्ट्रपति ने इस दौरान आर्थिक, सैन्य, उद्योग, परमाणु क्लब से लेकर तमाम क्षेत्रों में दुनिया में भारत के अहम राष्ट्रों की पंक्ति में आने को लोकतंत्र की देन बताया। उन्होंने इस मौके पर सेनाओं के योगदान की भरपूर सराहना भी की।मुखर्जी ने देश की अनेकता में एकता और बहुलवादी संस्कृति को लोकतंत्र की ताकत बताते हुए विचारों को थोपने की सोच को लेकर सचेत भी किया।राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी परंपरा ने हमेशा "असहिष्णु" भारतीय नहीं बल्कि "तर्कवादी" भारतीय की सराहना भी की है।मुखर्जी ने कहा कि लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिए एक बुद्धिमान और विवेकपूर्ण मानसिकता की जरूरत है।इस संदर्भ में राष्ट्रपति ने सदियों से देश में विविध विचारों और दर्शन के एक दूसरे से शांतिपूर्वक स्पर्धा का उल्लेख करते हुए अनेकता में एकता को हमारी सबसे बड़ी ताकत बताया।उन्होंने इस पर खास सतर्कता की सलाह देते हुए कहा कि इस समय निहित स्वार्थों द्वारा हमारी बहुलवादी संस्कृति और सहिष्णुता की परीक्षा ली जा रही है।

भारत अपना 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। वहीं तीन दिन पहले यानि 23 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को भी 13 साल पूरे हो गए, जिसकी वजह से देश के हर आम आदमी को तिरंगा फहराने का अधिकार प्राप्त हुआ था।- इस अधिकार की लड़ाई पूर्व सांसद व इंडस्ट्रलिस्ट नवनीन जिंदल ने लड़ी।- राष्ट्रीय ध्वज के लिए नवीन जिंदल का जुनून संयुक्त राज्य अमेरिका में टेक्सास विश्वविद्यालय में अपने छात्र जीवन के दौरान शुरू हुआ।

1. नवीन जिंदल को यह बात अखर गई। उन्होंने खुद और भारत के नागरिकों को अपने राष्ट्र ध्वज को निजी तौर पर फहराने के अधिकार को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

2. सात साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2004 को फैसला सुनाया कि राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराना हर व्यक्ति का अधिकार है।फिर फ्लैग कोड में हुआ संशोधन

3. इस फैसले के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फ्लैग कोड में संशोधन किया था। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को आदेश दिया की वह इस विषय को गंभीरता से ले और “फ्लैग कोड” में संशोधन भी करे। 

4. इससे पूर्व स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस के अलावा किसी भी दिन भारत के नागरिकों को अपना राष्ट्रध्वज फहराने का अधिकार नहीं था, खासकर अपने घरों या कार्यालयों में। 

5. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भारत सरकार ने फ्लैग कोड में संशोधन कर भारत के सभी नागरिकों को किसी भी दिन राष्ट्र ध्वज को फहराने का अधिकार दिया। बशर्ते, इस राष्ट्र ध्वज को फहराने के क्रम में “राष्ट्र ध्वज की प्रतिष्ठा,गरिमा बरक़रार रहे और किसी भी स्थिति में इसका अपमान ना होने पाए।फिर स्थापित की फ्लैग फाउंडेशन

6. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रेरणा पाते हुए नवीन जिंदल ने ‘फ्लैग फाउंडेशन आफ इंडिया’ की स्थापना की जिसके माध्यम से वह देश के प्रत्येक नागरिक को तिरंगे के साथ जोड़ना और भारतीयों के बीच तिरंगे के प्रदर्शन को लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया।

7. जिंदल ने अपने सपने को पूरा करते हुए देश का सबसे उंचा तिरंगा फहराने की भी हसरत पूरी की और हिसार व कुरुक्षेत्र में देश के सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज को फहराया है।

8. 1992 में भारत वापस आने के बाद, नवीन ने अपने कारखाने में हर दिन तिरंगा फहराना शुरू कर दिया। उन्हें जिला प्रशासन ने ऐसा करने मना किया और दण्डित करने की चेतावनी भी दी गई।

जब हमारा देश 15 अगस्त 1947 के पहले अंग्रेजो के अधीन था, तो देश के लाखों लोग भारत को आजाद कराने के लिए कुर्बान हो गए, लाखों लोग अंग्रेजो की क्रूरता का शिकार हुए और फिर एक वक्त आया जहां समाज का हर तबका अपने देश की आजादी के लिए सक्रीय हो गया और आखिरकार अंग्रेजों को हमारा देश छोड़ना ही पड़ा. आजादी के बाद देश को चलाने के लिए डॉ भीमराव अम्बेडकर के नेतृत्व में हमारे देश का संविधान लिखा गया, जिसे लिखने में पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे.

हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को हमारे देश पर लागू हुआ, फिर इसी उपलक्ष्य में हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने लगे. आज हम 68वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं. गणतंत्र दिवस हर भारतवासियों के लिए बहुत मायने रखता है, इसलिए हम इसे बेहद उत्साह के साथ मनाते हैं.

आइए, गणतंत्र दिवस के अवसर पर जानते हैं कुछ महत्वपूर्ण बातें-

1. 26 जनवरी 1950 को सुबह 10.18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया.
2. गणतंत्र दिवस की पहली परेड 1955 को दिल्ली के राजपथ पर हुई थी.
3. भारतीय संविधान की दो प्रत्तियां जो हिन्दी और अंग्रेजी में हाथ से लिखी गई.
4. पूर्ण स्वराज दिवस (26 जनवरी 1930) को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान 26 जनवरी को लागू किया गया था.
5. भारतीय संविधान की हाथ से लिखी मूल प्रतियां संसद भवन के पुस्तकालय में सुरक्षित रखी हुई हैं.
6. भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाऊस में 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी.
7. गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और हर साल 21 तोपों की सलामी दी जाती है.
8. 29 जनवरी को विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन किया जाता है जिसमें भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बैंड हिस्सा लेते हैं. यह दिन गणतंत्र दिवस के समारोह के समापन के रूप में मनाया जाता.
9. गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री अमर ज्योति पर शहीदों को श्रद्धाजंलि देते हैं, जिन्होंने देश के आजादी में बलिदान दिया.
10. परेड में विभिन्न राज्यों की प्रदर्शनी भी होती हैं, प्रदर्शनी में हर राज्य के लोगों की विशेषता, उनके लोक गीत व कला का दृश्यचित्र प्रस्तुत किया जाता है. हर प्रदर्शिनी भारत की विविधता व सांस्कृतिक समृद्धि प्रदर्शित करती है.

सरकार ने बुधवार (25 जनवरी) को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए इस साल 89 हस्तियों को पद्म पुरस्कार के लिए चुना गया है. जिसमें पद्मश्री हासिल करने वाले प्रमुख लोगों में कप्तान विराट कोहली, साक्षी मलिक, दीपा कर्माकर, विकास गोवाड, बॉलीवुड से अनुराधा पौडवाल, कैलाश खेर और संजीव कपूर जैसी हस्तियां शामिल है। इनके साथ नेपाल की अनुराधा कोइराला को सामाजिक कार्यों के लिए पद्मश्री और डॉ. नपुसकर को सफाई के लिए पद्मश्री से नवाजा गया।

थंगावेलु, अशोक कुमार भट्टाचार्य और प्रोफेसर हरिकृष्ण सिंह को भी पद्मश्री दिया गया है। इसके साथ पद्म पुरस्कार हासिल करने वाली अन्य हस्तियों में मणिपुर के वारेप्पा नबा नेइल, लेखक नरेंद्र कोहली, एलि अहमद, सिक्क‍िम के वेरका बहादुर, पत्रकार भावना सोमैया, कश्मीर के काशीनाथ पंडित, साधु महार, टीके मूर्ति, मधुबनी पेंटिंग की बाओ देवी और सिब्बल कंवल को भी पुरस्कार मिला।

पद्म विभूषण

मुरली मनोहर जोशी (सार्वजनिक सेवा); शरद पवार (सार्वजनिक सेवा) महाराष्ट्र; येसुदास (संगीत) केरल; पीए संगमा (सार्वजनिक सेवा) मरोणपरांत, मेघालय; सुदंरलाल पटवा (सार्वजनिक सेवा) मध्य प्रदेश; सद्गुरु जग्गी वासुदेव (अध्यात्म) तमिलनाडु; उड्डपी रामचंद्र राव (विज्ञान और इंजीनियरिंग) कनार्टक

पद्म भूषण

विश्व मोहन भट्ट (संगीत) राजस्थान; प्रोफेसर देवी प्रसाद द्विवेदी (साहित्या शिक्षा) उत्तर प्रदेश; राजकुमार महाचकरी सिरिनघोर्ण (साहित्य शिक्षा) थाईलैंड; स्वामी निरंजन नंदा सरस्वती (योग) बिहार; तेहमटम उडवाडिया (चिकित्सा) महाराष्ट्र; चो रामास्वामि (चिकित्सा) तमिलनाडु

पद्मश्री

बसंती बिष्ट (कला संगीत) उत्तराखंड,चेमनचेरी कुनहीरामन नायर (कला नृत्य) केरल; अरुणा मोहंती (नृत्य) ओडिशा; भारथी विष्णुवर्द्धन (सिनेमा) कनार्टक; साधु मेहर (सिनेमा) ओडिशा; टीके मूर्ति ( संगीत) तमिलनाडु; लैशराम विरेन्द्र कुमार सिंह (संगीत) मणिपुर; कृष्णा राम चैाधरी (संगीत) उत्तर प्रदेश; बाओ देवी (पेंटिंग)तिलक गतई (पेंटिंग) राजस्थान; प्रोफेसर एक्का यादागिरी राव (शिल्प) तेलंगाना; जितेन्द्र हरिपाल (संगीत) ओडिशा; कैलाश खेर (संगीत) महराष्ट्र; श्रीमती प्रसाला बी पोन्नमाल (संगीत) केरल; सुकरी बोम्मागोवडा (कला) कनार्टक; मुकंद नायक (संगीत) झारखंड; पुरुषोत्तम उपाध्याय (संगीत) गुजरात; अनुराधा पौडवाल (संगीत) महाराष्ट्र; वारेप्पना नाबा नील (रंगमंच) मणिपुर; तिरुपुरानेनी हनुमान चौधरी (लेाक सेवा) तेलंगाना; टीके स्वामिनाथन (लोक सेवा) हरियाणा; कंवल सिब्बल (लोकसेवा) दिल्ली; बरखा बहादुर लिंबो मुरिंगला (साहित्या और शिक्षा) सिक्किम; इली अहमद (साहित्य और शिक्षा) असम; डॉक्टर नरेन्द्र कोहली (साहित्या और शिक्षा) दिल्ली; प्रोफेसर जी वेंकेटेश सुब्बैया (साहित्य और शिक्षा) कनार्टक; अक्किथम अच्युतनाथ नंबूदरी (साहित्य और शिक्षा) केरल; काशीनाथ पंडित (साहित्य और शिक्षा) जम्मू कश्मीर; चामू कृष्णा शास्त्री (साहित्य और शिक्षा) दिल्ली; हरिकृपालु त्रिपाठी (साहित्य और शिक्षा) उत्तरप्रदेश; माइकल डानिनो (साहित्य और शिक्षा) तमिलनाडु; पूनम सूरी (साहित्य और शिक्षा) दिल्ली; वीजी पटेल (साहित्य और शिक्षा) गुजरात; वी कोटेश्वरम्मा (साहित्य और शिक्षा) आंध्र प्रदेश; बलबीर दत्त (साहित्य, शिक्षा और पत्रकारिता) झारखंड; भावना सोमैया (साहित्य शिक्षा और पत्रकारिता (महाराष्ट्र); विष्णु पांड्या (साहित्य शिक्षा और पत्रकारिता) गुजरात; सुब्रतो दास (मेडिसीन) गुजरात; डॉ भक्ती यादव (मेडिसीन) मध्य प्रदेश; डॉक्टर मोहम्मद अब्दुल वाहिद (मेडिसीन) तेलंगाना; डाक्टर मदन माधव गोडबले (मेडिसीन) उत्तर प्रदेश; डाक्टर देवेन्द्र दयाभाई पटेल (मेडिसीन) गुजरात; प्रोफेसर हरिकिशन सिंह (मेडिसीन) चंडीगढ़; डॉ़ मुकुट मिन्ज (मेडिसीन) चंडीगढ़; अरुण कुमार शर्मा (पुरातत्व) छत्तीसगढ़; संजीव कपूर (खान पान) महराष्ट्र; मीनाक्षी अम्मा (मार्शल आर्ट) केरल; मीनाक्षी दरगाभाई पटेल (कृषि) गुजरात; चंद्रकांत पीठवा (विज्ञान और प्रौद्योगिकी) तेलंगाना.

ग्रामीण इलाकों में गरीब और निरक्षर जनता के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के केन्द्र सरकार आधार पे का सहारा ले रही है. आधार पे से सिर्फ फिंगरप्रिंट के जरिए फाइनेनशियल ट्रांजैक्शन को पूरा किया जा सकता है.आधार पे पहले से इस्तेमाल हो रहे आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम का मर्चेंट वर्जन है. इसका इस्तेमाल पहले से प्रचलित ऑनलाइन और कार्ड ट्रांजैक्शन का विकल्प हो सकता है जहां पासवर्ड और पिन की जरूरत पड़ती है.

इस ऐप के जरिए कैशलेस पेमेंट करने के लिए ग्राहकों को सिर्फ अपना आधार नंबर, उस बैंक का नाम जिससे पेमेंट किया जाना है और अपना फिंगरप्रिंट देने की जरूरत है. इस ऐप के जरिए पेमेंट करने के लिए सिर्फ एक सामान्य एंड्रॉएड फोन की जरूरत पड़ेगी और मर्चेंट को बायोमैट्रिंक डिवाइस लगाना होगा.

इस ऐप से बिना किसी कार्ड और पिन नंबर के डिजिटल ट्रांजैक्शन करना संभव होगा. आधार पे ऐप को पॉपुलर करने के लिए सरकार ने बैंको से प्रति ब्रांच 30-40 मर्चेंट को एनरोल करने के लिए कहा है जिससे वह अपने ग्राहकों को कैशलेस पेमेंट की सुविधा दे सकें.

सरकार की योजना है कि आधार पे को पॉपुलर करने के लिए वह मर्चेंट को लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने पर इंसेंटिव देने की है. आधार पे से ट्रांजैक्शन करने के लिए मर्चेंट को एक बायोमैट्रिक डिवाइस की जरूरत पड़ेगी जिसकी बाजार में कीमत लगभग 2000 रुपये के आस-पास है. सरकार की योजना के मुताबिक मर्चेंट की इस लागत को जल्द से जल्द इंसेटिव के जरिए अदा करने की है जिससे वह लंबे समय तक इस माध्यम का इस्तेमाल करते हुए अपने ग्राहकों को कैशलेस पेमेंट की सुविधा मुहैया करा सकें.

गौरतलब है कि आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम की अपेक्षा आधार पे बाकी डिजिटल पेमेंट माध्यमों से ज्यादा सुरक्षित और सरल है. इस माध्यम का इस्तेमाल करने वाले सभी मर्चेंट बैंक में रजिस्टर्ड होंगे और ग्राहकों का बैंक खाता उनके आधार कार्ड से जुड़े रहने के कारण इसके गलत इस्तेमाल की गुंजाइश नहीं रहेगी.

अपनी बहादुरी से दूसरों के लिए मिसाल बने 25 बच्चों को पीएम 23 जनवरी को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार देंगे। इसके बाद ये बच्चे गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लैंगे। इनमें 12 लड़कियां और 13 लड़के हैं। चार बच्चों को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया जा रहा है।

-सम्मानित होने वालों बच्चों में केरल से 4, दिल्ली से 3, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से 2-2 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा।

-यूपी, महाराष्ट्र, मणिपुर, असम, हिमाचल, नागालैंड, उत्तराखंड, राजस्थान, उड़ीसा और कर्नाटक से 1-1 बच्चे को सम्मानित किया जाएगा।

-मरणोपरांत सम्मानित होने वाले बच्चों में मिजोरम से दो और अरुणाचल, जम्मू से 1-1 बच्चा शामिल है।

इन्हें मिलेगा नेशनल अवार्ड

-पश्चिम बंगाल की शिवानी गोद (16) और तेजस्विता प्रधान (17) ने इनकी मदद से इंटरनेशनल सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ इन्हें गीता चोपड़ा अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

-उत्तराखंड के सुमित ममगाई (15) ने अपने चचेरे भाई पर हमला कर रहे तेंदुए पर पूंछ पकड़कर दरांती से वार किया। इससे तेंदुआ भाग गया। इन्हें अदम्य साहस के लिए संजय चोपड़ा अवार्ड दिया जाएगा।

-छत्तीसगढ़ से आए तुषार (15) को बापू गेढा़नी अवार्ड दिया जाएगा।

-छत्तीसगढ की नीलम (8), राजस्थान के सोनू माली (9) और ओडिशा के मोहन सेठी (11), कर्नाटक की सिया वामनसा खोडे (10), नागालैंड के थंगिलमंग लंकिम (10) , हिमाचल प्रदेश के प्रफुल्ल शर्मा (11) , असम के टंकेस्वर पीगू (16), मणिपुर के मोइरंगथम सदानंदा सिंह (14), केरल के आदित्यन एमपी पिल्लई (14), उत्तर प्रदेश की अंशिका पांडेय (14), केरल की बिनिल मंजली (15), अखिल के शिबु (16), महाराष्ट्र की निशा दिलीप पाटिल (16) और केरल की बदरूनिसा केपी (15) को पीएम सम्मानित करेंगे।

-दिल्ली के भाई-बहन अक्षित अक्षिता ने स्कूल से घर आने के बाद चोर को पकड़ा था और पुलिस के हवाले कराया था। दोनों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

-दिल्ली के ही नमन ने यमुना नदी में डूब रहे बच्चे को बचाया था। अमन को भी वीरता पुरस्कार मिलेगा।

बेटियों की वीरगाथाएं – याद रखेगा इन्हें देश

-जम्मू और कश्मीर में तीन स्टूडेंट स्कूल से घर लौट रहे थे। बादल फटने के कारण नदी-नाले उफान पर थे। राकेश (14) और शैफाली (5) चकवा नाले पर बाढ़ में फंस गए। 12 साल की पायल उन्हें बचाने के लिए करीब 20 फुट गहरे पानी में कूद गई। लेकिन वह उन्हें बचाने में कामयाब नहीं हो सकी। सभी पानी के तेज बहाव में बह गए।
-मिजोरम की 13 साल की एच लालरियातपुई ने कार में बैठे अपने दो साल के चचेरे भाई को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी थी। कार ढलान से नीचे जा रही थी। उसने छोटे बच्चे को कार से बाहर निकालने के लिए दरवाजा खोला और जमीन पर गिर गई, इस दौरान वह कार की चपेट में आकर गंभीर घायल हो गई। अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। दोनों को मरणोपरांत बापू गेढानी अवार्ड दिया जाएगा।

-मिजोरम की 13 वर्षीय रोलुआपुई स्कूल पिकनिक के दौरान नदी में अपनी एक सहपाठी को भंवर में फंसे हुए मदद की गुहार लगाते हुए देखा, तो 18 फुट गहरी नदी में छलांग लगा दी। वह सहपाठी को सहारा देकर भंवर से नदी के किनारे तक ले आई लेकिन खुद नदी के तेज बहाव के कारण भंवर में जा फंसी।

-अरुणाचल की 8 साल की तारपीजू हमारे बीच नहीं है। लेकिन उसने जो किया, उस पर हमें गर्व है। पीजू दो सहेलियों के साथ नदी पार कर रही थी, तभी उसकी सहेलियां नदी के तेज बहाव में बहने लगी। यह देख वह 5 फुट गहरी नदी में कूद गई और दोनों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। लेकिन वह डूब गई। सीएम ने उस नदी पर पीजू के नाम से पुल बनाने को कहा है। पीजू को भारत अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

अरबपति कारोबारी डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बन गए हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर देश के सबसे बड़े पद तक का उनका सफर काफी नाटकीय रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में जब ट्रम्प ने रिपब्लिकन पार्टी के दर्जनों दिग्गज उम्मीदवारों के साथ प्राइमरी के लिए अपना नाम दिया था तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया था। लेकिन उनके आक्रमक आव्रजन-विरोध एवं मुस्लिम विरोध ने बड़ी संख्या में अमेरिकी लोगों को उनकी तरफ खींचा था। आखिरकार अमेरिकी श्रमिक वर्गों ने बेहद विवादित चुनाव प्रचार अभियान में उन्हें अमेरिका का सर्वाधिक गैर-परंपरागत राष्ट्रपति बना दिया। 

रियल स्टेट क्षेत्र के बड़े उद्योगपति और रियलिटी स्टार ट्रम्प ने 1987 से ही अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। ज्यादातर लोगों का मानना है कि 2011 में व्हाइट हाउस कॉरेसपॉंडेंट्स डिनर के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा को लेकर उनके मजाकों ने इसे ठोस फैसले में बदल दिया। डिनर के दौरान ट्रम्प ने ओबामा का मजाक बनाया था। उन दिनों ट्रम्प ओबामा की अमेरिकी नागरिकता पर सवाल खड़े करके अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहे थे। 

राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने का मन बनाने के बाद ट्रम्प 16 रिपब्लिकन उम्मीदवारों की भीड़ में शामिल हुए और सबको पीछे छोड़ते हुए वह पार्टी के उम्मीदवार बने। जिन 16 लोगों को ट्रम्प ने पछाड़ा वे सभी लोकप्रिय और अनुभवी नेता थे। रिपब्लिकन पार्टी ने डोनाल्ड ट्रम्प को 19 जुलाई, 2016 को अपना औपचारिक उम्मीदवार घोषित किया था। 

सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक एक्शन प्लान पर काम कर रहा है। इसके तहत बीएड के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एंट्रेंस एग्जाम, कॉलेजों का सर्टिफिकेशन और सभी बीएड ग्रेजुएट्स के लिए एग्जिट टेस्ट कराया जाएगा। साथ ही सभी सरकारी स्कूलों के टीचरों के लिए इंडक्शन प्रोग्राम भी अनिवार्य किया जाएगा। मंत्रालय के सूत्रों के बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को इस काम का जिम्मा सौंपा गया है।

नाम न बताने कि शर्त पर एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, स्कूली शिक्षा तब तक नहीं सुधर सकती, जब तक टीचर्स अच्छे न हों। हम इसके लिए कई चरणों पर काम कर रहे हैं और चाहते हैं कि बीएड प्रोग्राम में अच्छे उम्मीदवार आएं। बीएड एेसे युवाओं के लिए अंतिम विकल्प नहीं रहेगा जिनका बाकी कोर्स में एडमिशन नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि एंट्रेंस टेस्ट यह सुनिश्चित करेगा कि जिनकी टीचिंग में दिलचस्पी है वही इसके लिए तैयारी करेंगे।

अधिकारी ने यह भी कहा कि देश में टीचर्स की क्वॉलिटी सुनिश्चित करने के लिए सभी कॉलेजों का सर्टिफाइड होना जरूरी है। इसके अलावा ग्रेजुएट्स का एक एग्जिट टेस्ट भी होगा, जिससे पता चल सकेगा कि उन्होंने इस दौरान क्या सीखा। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में नए रिक्रूट्स के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम में जाना भी अनिवार्य होगा, ताकि उन्हें बताया जा सके कि उनसे क्या उम्मीदें हैं।

इसके अलावा मंत्रालय एक पायलट प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है जो सुनिश्चित करेगा कि टीचर्स रोजाना स्कूल आएं। इसके लिए मंत्रालय हर सरकारी स्कूल को एक कंप्यूटर टैबलेट देने पर विचार कर रहा है, ताकि टीचर्स अपनी अटेंडेंस लगा सकें। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक एक टैबलेट 4 से 5 हजार का पड़ेगा और इसकी पूरी लागत 7 से 10 करोड़ के बीच आएगी। इस पहल को छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल से शुरू किया जाएगा।

भारत ने कहा है कि दक्षिण एशिया अपनी मजबूत आर्थिक वृद्धि और खरीद की बढ़ती ताकत की बदौलत वैश्विक मांग को नरमी से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस क्षेत्र की उपेक्षा नहीं कर सकती है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के वार्षिक सम्मेलन में यहां दक्षिण एशिया पर एक सत्र को संबोधित करते हुए निर्मला ने कहा कि दक्षिण एशिया में वृद्धि की संभावनाओं का फायदा उठाने के लिए साझा बुनियादी और सामाजिक ढांचे का विकास बहुत जरूरी है।

इस परिचर्चा में भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के नेताओं और उद्योग व्यापार क्षेत्र की बड़ी हस्तियों ने भाग लिया। कुल मिलाकर 1.8 अरब की आबादी वाला दक्षिण एशिया क्षेत्र विश्व अर्थव्यवस्था में सात प्रतिशत योगदान करता है। दुनिया की एक चौथाई मध्यम वर्गीय आबादी इसी क्षेत्र में रहती है। राजनीतिक और व्यवसाय क्षेत्र के इन नेताओं ने साथ में यह स्वीकार किया कि इनकी सरकारों को गरीबी खत्म करने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है और क्षेत्र के सभी देश गरीबी से अभिशप्त हैं। वाणिज्य मंत्री निर्मला ने कहा कि विशाल श्रम शक्ति, मजबूत आर्थिक वृद्धि और बढ़ती क्रयशक्ति की बदौलत दक्षिण एशिया विश्व अर्थव्यवस्था में मांग उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ‘दुनिया इसकी उपेक्षा नहीं कर सकती।’ पिछले साल आतंकवाद की घटनाओं के चलते पाकिस्तान में होने वाली दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ) शिखर बैठक के रद्द होने के बावजूद उन्होंने कहा कि साफ्टा (दक्षेस मुक्त व्यापार समझौता) लगातार मजबूत हो रहा है और पिछले एक दशक में क्षेत्रीय व्यापार में काफी उपलब्धियां हासिल हुई हैं।

दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग के इसी सत्र में श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि जब तक भारत और श्रीलंका के बीच क्रिकेट खेला जा रहा है तब तक दोनों देशों के बीच कोई समस्या नहीं है। दोनों देशों में क्रिकेट को धर्म के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका अपने सबसे बड़े पड़ोसी व्यापारिक भागीदार के साथ-साथ दक्षिण एशिया के अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय स्तर पर बातचीत को प्राथमिकता देता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में विभिन्न प्रकार के क्षेत्रीय संबंध बरकरार हैं। ब्रिटेन की कंपनी क्लाइटन, ड्यूबिलियर एंड राइस के परिचालक भागीदार एम एस बंगा ने कहा कि वैश्वीकरण के खिलाफ प्रतिरोध से क्षेत्रीय व्यापार के लिए अवसर बढ़ेंगे।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि भारत, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के बीच दो साल पहले हुआ मोटर वाहन समझौता दक्षिण एशिया के बीच मजबूत संबंधों का एक और संकेत देता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बेहतर संपर्क का होना देशों और लोगों को एक साथ लाने की रणनीति का अहम हिस्सा होता आया है। ‘अलिफ ऐलान’ के सह संस्थापक व प्रचार निदेशक मुशर्रफ जैदी ने क्षेत्र में बेहतर शिक्षा पर विशेष बल दिए जाने की जरूरत बताते हुए कहा कि क्षेत्र में 25 वर्ष से कम के युवाओं की विशाल आबादी इस क्षेत्र को जनसंख्या के मामले में अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक स्थिति में रखती है। उनका संगठन ‘पाकिस्तान में शिक्षा का आपातकाल खत्म करने का समय’ अभियान चला रहा है।

जलीकट्टू मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि क्या परंपरा के नाम पर बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को इजाजत देनी चाहिए? न्यायधीश दीपक मिश्र और आर.एफ नरीमन की बेंच ने कहा कि यदि मामले की पार्टियां कोर्ट को विश्वास दिला सकें कि इससे पहले का फैसला गलत था तो यह मामला बड़ी बेंच को रेफर कर दिया जाएगा।

बेंच ने कहा कि 'सिर्फ इसलिए कि खेल (जलीकट्टू) सदियों पुरानी प्रथा है इसका मतलब यह नहीं कि यह वैध है अथवा का कानून के अंतर्गत यह स्वीकार्य भी होगा। सदियों पहले जो बच्चे 12 साल से कम की आयु के थे उनकी शादी भी कर दी जाती थी। तो क्या इसका मतलब यह हुआ कि बाल विवाह वैध है?'

क्या है जलीकट्टू?

जल्लीकट्टू (Jallikattu) तमिलनाडु का चार सौ वर्ष से भी पुराना पारंपरिक खेल है, जो फसलों की कटाई के अवसर पर पोंगल के समय आयोजित किया जाता है। इसमें 300-400 किलो के सांड़ों की सींगों में सिक्के या नोट फंसाकर रखे जाते हैं और फिर उन्हें भड़काकर भीड़ में छोड़ दिया जाता है, ताकि लोग सींगों से पकड़कर उन्हें काबू में करें। ​कथित तौर पर पराक्रम से जुड़े इस खेल में विजेताओं को नकद इनाम वगैरह भी देने की परंपरा है। सांड़ों को भड़काने के लिए उन्हें शराब पिलाने से लेकर उनकी आंखों में मिर्च डाला जाता है और उनकी पूंछों को मरोड़ा तक जाता है, ताकि वे तेज दौड़ सकें। यह जानलेवा खेल मेला तमिलनाडु के मदुरै में लगता है।

जलीकट्टू त्योहार से पहले गांव के लोग अपने-अपने बैलों की प्रैक्टिस तक करवाते हैं। जहां मिट्टी के ढेर पर बैल अपनी सींगो को रगड़ कर जलीकट्टू की तैयारी करता है। बैल को खूंटे से बांधकर उसे उकसाने की प्रैक्टिस करवाई जाती है ताकि उसे गुस्सा आए और वो अपनी सींगो से वार करे। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जानवरों के साथ हिंसक बर्ताव को देखते हुए इस खेल को बैन कर दिया था।

कितनी पुरानी है जलीकट्टू परंपरा

तमिलनाडु में जलीकट्टू 400 साल पुरानी परंपरा है। जो योद्धाओं के बीच लोकप्रिय थी। प्राचीन काल में महिलाएं अपने वर को चुनने के लिए जलीकट्टू खेल का सहारा लेती थी। जलीकट्टू खेल का आयोजन स्वंयवर की तरह होता था जो कोई भी योद्धा बैल पर काबू पाने में कामयाब होता था महिलाएं उसे अपने वर के रूप में चुनती थी।

जलीकट्टू खेल का ये नाम सल्ली कासू से बना है। सल्ली का मतलब सिक्का और कासू का मतलब सींगों में बंधा हुआ। सींगों में बंधे सिक्कों को हासिल करना इस खेल का मकसद होता है। धीरे-धीरे सल्लीकासू का ये नाम जलीकट्टू हो गया।

जलीकट्टू और बुलफाइटिंग में अंतर

कई बार जलीकट्टू के इस खेल की तुलना स्पेन की बुलफाइटिंग से भी की जाती है लेकिन ये खेल स्पेन के खेल से काफी अलग है इसमें बैलों को मारा नहीं जाता और ना ही बैल को काबू करने वाले युवक किसी तरह के हथियार का इस्तेमाल करते हैं।

रायसीना डायलॉग 2017 के एक सत्र को संबोधित करते हुए विदेश सचिव जयशंकर ने जिस अंदाज में चीन व भारत के रिश्तों को परिभाषित किया है वह भारतीय कूटनीति के लिए नया है। जयशंकर ने कहा कि, ''भारत की प्रगति चीन के उदय के लिए कोई खतरा नहीं है लेकिन चीन को भारत की भौगोलिक संप्रभुता का सम्मान करना होगा।''

इसी सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले चीन को यह संकेत दिया था कि दूसरे देशों को जोड़ने की उसकी कोशिश में अन्य देशों की संवेदनाओं का सम्मान करना चाहिए। आज मोदी के बात को जयशंकर ने और स्पष्ट कर दिया। उन्होंने सीधे तौर पर कश्मीर होते हुए पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को जोड़ने वाली चीन की सड़क परियोजना सीपीईसी का जिक्र करते हुए कहा कि, ''चीन एक ऐसा देश है जो अपनी संप्रभुता को लेकर काफी संवेदनशील रहता है। ऐसे में उम्मीद की जाना चाहिए कि वे दूसरे देशों की संवेदनाओं का भी ख्याल रखेंगे। यह परियोजना भारत के एक संवदेनशील हिस्से से गुजरती है।''

हालांकि विदेश सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की संवेदनशीलता को लेकर चीन की तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक रूख नहीं दिखाया गया है। भारतीय विदेश सचिव का बयान ऐसे आयोजन में आया है जिसमें पांच दर्जन से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। यहां से चीन को संदेश देने का अपना एक महत्व है।

कूटनीतिक सर्किल में माना जा रहा है कि भारत की नई सरकार ने जिस तरह से साहसिक कूटनीति को अख्तियार किया है यह उसी का नतीजा है। सनद रहे कि चीन व भारत के रिश्ते पिछले एक वर्ष से लगातार खराब हो रहे हैं। पहले एनएसजी के मुद्दे और उसके बाद पाक परस्त आतंकी मसूद अजहर के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी तनाव गहरा रहा है।

जयशंकर ने कहा कि हम चीन को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारी प्रगति उसके उदय के खिलाफ नहीं है। यह बात उसी तरह से है जिस तरह से हम यह समझते हैं कि चीन की प्रगति भी हमारे लिए कोई अवरोध नहीं है। वैसे आर्थिक व दोनों देशों के अवामों के बीच रिश्तों को सुधारने में काफी प्रगति हुई है लेकिन कुछ मूल मुद्दे हैं जहां रुकावटें हैं।

प्रवासी भारतीय समारोह विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन है. पीएम मोदी ने कहा कि प्रवासी भारतीयों ने देश की अर्थव्यवस्था में अमूल्य योगदान दिया है. हम प्रतिभा पलायन को प्रतिभा वापसी में बदलना चाहते हैं.

मोदी ने आगे कहा कि प्रवासियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 69 अरब डॉलर का योगदान दिया है. ये सर्वश्रेष्ठ भारतीय प्रकृति, संस्कृति और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने कहा कि हम जल्द ‘प्रवासी कौशल विकास योजना’ शुरू करेंगे. यह योजना उन भारतीय युवाओं के लिए होगी जो विदेशों में काम करना चाहते हैं.

विदेशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा पर बोलते हुए पीएम मोदी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की तारीफ भी की. उन्होंने कहा, ‘’विदेशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, सुषमा स्वराज सक्रिय रही हैं और विदेशों में बसे भारतीयों के संकटों को दूर करने में उन्होंने तत्परता दिखाई है.’’

मोदी ने नोटबंदी पर बोलते हुए कहा, ‘’भ्रष्टाचार, कालाधन हमारे समाज और राजनीति को खोखला कर रहे हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीति में कालेधन के कुछ उपासक हैं.’’ उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई ‘राजनीतिक पुजारियों’  की तरफ से जनविरोधी बताई जा रही है.’’

आपको बता दें कि 14वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन के मुख्य अतिथि पुर्तगाल के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री एंतोनियो कोस्ता हैं. आज इस समारोह का दूसरा दिन था. बेंगलुरू इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर में हो रहे इस आयोजन में दुनिया भर से 6000 से अधिक प्रवासी भारतीयों ने हिस्सा लिया.  ये आयोजन विदेशों में रह रहे भारतीयों को दुनिया के विभिन्न भागों में रह रहे भारतीय समुदाय से मिलने जुलने और संपर्क बनाने का मौका देता है. प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत 2003 में वाजपेयी सरकार ने की थी.

भारत की प्रति व्यक्ति आय 2016-17 में एक लाख रुपए को पार कर जाएगी। ऐसा पहली बार होगा। शुक्रवार को जारी केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष प्रति व्यक्ति आय 1,03,007 रुपए रहने का अनुमान है। यह 2015-16 के 93,292 रुपए से 10.4% अधिक होगी। पिछले साल इसमें 7.4% वृद्धि हुई थी। 

सीएसओ ने जीडीपी के आंकड़े जारी करते वक्त कहा कि इसमें नोटबंदी के असर को शामिल नहीं किया गया है। प्रति व्यक्ति आय में इसे शामिल किया गया है या नहीं, यह साफ नहीं है। एक और गौर करने वाली बात यह है कि ये आंकड़े मौजूदा मूल्यों पर आधारित हैं। तुलना के लिए स्थिर मूल्यों पर आधारित आंकड़े अधिक वास्तविक होते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रति व्यक्ति आय 77,435 रु. से बढ़कर 81,805 रु. होने का अनुमान है। यानी इसमें 5.6% वृद्धि होगी। पिछले साल इसमें 6.2% वृद्धि हुई थी।

सीएसओ ने जीडीपी के भी आंकड़े जारी किए। 2011-12 के स्थिर मूल्यों के आधार पर इसके 7.6% से घटकर 7.1% रहने का अंदेशा व्यक्त किया गया है। लेकिन मौजूदा मूल्यों के आधार पर जीडीपी 135.76 लाख करोड़ से बढ़कर 151.93 लाख करोड़ रु. हो जाएगी। यानी यह 11.9% बढ़ जाएगी। 

विश्व औसत तक पहुंचने में लगेंगे 25 साल 

विश्वबैंक के अनुसार मौजूदा मूल्यों पर भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,582 डॉलर है। इस लिहाज से हम गरीब देशों की श्रेणी में आते हैं। मध्य आय वाले देशों की प्रति व्यक्ति जीडीपी 6,000-7,000 डॉलर सालाना है। विश्व औसत 10,058 डॉलर का है। चीन का आंकड़ा 8,028 डॉलर है। अगर हम सालाना 8-9 फीसदी बढ़ें तो 9 साल में आमदनी दोगुनी होगी। यानी विश्व औसत तक पहुंचने में 25 साल लगेंगे।